हर धड़कते पत्थर को लोग दिल समझते हैं उम्रें बीत जाती है दिल को दिल बनाने में |यादों में बशीर बद्र

Watch on YouTube (Embed)

Switch Invidious Instance

Show annotations

398

17

Genre: People & Blogs

License: Standard YouTube license

Family friendly? Yes

Shared June 1, 2026

उम्रें बीत जाती हैं दिल को दिल बनाने में ***** #bashirbadar #bashirbadrshayari #baatbebat बशीर बद्र साहब के इंतकाल के बाद सोशल मीडिया पर जिस शिद्दत से उन्हें याद किया गया और श्रद्धांजलि दी गई; उनके शेर कोट किए गए, इसके वे हकदार भी थे, बल्कि कहें तो इससे ज्यादा के हकदार थे. कम से कम तीन पीढ़ियों को जिस शख्स के शेरों ने इज़हार ए मोहब्बत का शऊर दिया, मोहब्बत और ज़िंदगी के मानी समझाए, जिनके अनगिनत शेर मुहावरों में ढल गए, उन्हें जितना भी याद करें कम है. लेकिन इसी सोशल मीडिया पर उनके जनाजे में सिर्फ 20 लोगों के शामिल होने की खबर भी चली. हालांकि बाद में पता चल गया कि ये झूठ है, लेकिन इस बहाने शायरों, अदीबों और साहित्यकारों की समाज में हैसियत और सम्मान को लेकर भी खूब चर्चा चली. यहां यह भी कि बशीर बद्र साहब के स्टैंड और उनकी राजनैतिक वैचारिक-पक्षधरता को लेकर भी सोशल मीडिया दो खेमों में बंटा दिखाई दिया. इसमें कौन सही और कौन गलत है, मैं इसमें नहीं जाना चाहता और अब जब बशीर बद्र साहब हमारे बीच नहीं हैं तो जाने की जरूरत भी नहीं है. मेरे लिए तो उनकी शायरी मायने रखती है और शायद उनपर उठने वाले सवालों का जवाब भी. उनकी एक ही ग़ज़ल के दो शेरों में कई सारे सवालों के जवाब हैं भी- लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में तुम तरस नहीं खाते बस्तियाँ जलाने में फ़ाख़्ता की मजबूरी ये भी कह नहीं सकती कौन साँप रखता है उस के आशियाने में हिंदुस्तान और हिंदुस्तान के बाहर कई सारे मुशायरों में उन्होंने यह ग़ज़ल पढ़ी और उन्हें खूब दाद भी मिली. ऐसे ही एक मुशायरे का ये ऑडियो है. सुनिए, गुनिए और समझिए बशीर बद्र साहब को #hashtag #bashirbadr #urdushayari