Path Of Shabad

क्या आपने कभी पूरी वाणी पढ़ी है, या सिर्फ़ एक लाइन सुनकर निष्कर्ष बना लिया? 🤔

कुछ डोंगी गुरु केवल एक पंक्ति...

"पाँचौ नाम काल के जानौ"

...दिखाकर लोगों को यह विश्वास दिलाते हैं कि पाँच रूहानी मंडलों के पाँच शब्द काल के हैं।

लेकिन क्या आपने इसके नीचे लिखी पूरी वाणी पढ़ी?

तुलसी साहब स्पष्ट रूप से पाँच नाम बताते हैं:

1. निर्गुन
2. निराकार
3. निरबाना
4. निरंजन
5. धर्मराई

वाणी में साफ़ लिखा है:

"निरगुन निराकार निरबानी ।
धर्मराय यों पाँच बखानी ॥"

और दूसरी वाणी में भी यही पाँच नाम दोबारा बताए गए हैं:

"पाँच नाम निर्गुन के जाना।
निर्गुन निराकार निरबाना ॥
और निरंजन है धर्मराई।
ऐसे पाँच नाम गति गाई ॥"

जब प्रमाण स्वयं वाणी में मौजूद है, तो फिर आधी बात बताकर लोगों को भ्रमित क्यों किया जाता है?

सत्य को जानने का सबसे अच्छा तरीका है कि पूरी वाणी पढ़ी जाए, न कि किसी के कहे हुए निष्कर्ष पर विश्वास किया जाए।

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