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भारतीय न्यायिक व्यवस्था में अपील का अधिकार न्याय का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसी क्रम में लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) एक विशिष्ट और प्रभावशाली intra-court remedy के रूप में उभरती है, जो उच्च न्यायालय के भीतर ही न्यायिक पुनर्विचार का अवसर प्रदान करती है।
हालांकि LPA का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है, किन्तु इसकी सीमा—विशेषकर आपराधिक रिट याचिकाओं के संदर्भ में—अक्सर विवाद और भ्रम का विषय बनती है। प्रस्तुत लेख में LPA की अवधारणा, उसका ऐतिहासिक एवं विधिक आधार, तथा उसकी सीमाओं का सम्यक् विश्लेषण किया गया है।
Letters Patent क्या है?—LPA का मूल आधार
LPA को समझने के लिए “Letters Patent” की अवधारणा को समझना आवश्यक है।
Letters Patent ब्रिटिश शासनकाल में जारी एक Royal Charter था, जिसके माध्यम से भारत में उच्च न्यायालयों की स्थापना की गई तथा उनके अधिकार क्षेत्र, शक्तियाँ और अपील की प्रक्रिया निर्धारित की गई।
Establishment of High Courts in India under Letters Patent 1865 के अंतर्गत Calcutta High Court, Bombay High Court और Madras High Court की स्थापना की गई।
Letters Patent मूलतः एक संवैधानिक चार्टर की भांति कार्य करता है, जिसमें निम्नलिखित का निर्धारण होता है—
• न्यायालय की संरचना
• सिविल एवं आपराधिक अधिकार क्षेत्र
• Single Judge एवं Division Bench की शक्तियाँ
• अपील का प्रावधान (Clause 10 / Clause 15)
उदाहरणार्थ, Patna High Court के Letters Patent के Clause 10 के आधार पर LPA का अधिकार विकसित हुआ, जो आगे चलकर Jharkhand High Court में भी लागू हुआ।
लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) क्या है?
लेटर्स पेटेंट अपील वह अपील है, जो उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश (Single Judge) द्वारा पारित निर्णय के विरुद्ध उसी न्यायालय की द्वैध पीठ (Division Bench) के समक्ष दायर की जाती है।
सरल शब्दों में:
Single Judge का निर्णय → Division Bench के समक्ष अपील = LPA
LPA कब maintainable नहीं होती?
विधिक प्रावधानों एवं न्यायिक व्याख्याओं के अनुसार निम्न स्थितियों में LPA maintainable नहीं होती—
• Article 227 of the Constitution of India के अंतर्गत पारित आदेश
• आपराधिक मामलों से संबंधित आदेश
• जहाँ विशेष अधिनियम अपील पर रोक लगाता हो
• Section 100A CPC के अंतर्गत आने वाले मामले
इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है—क्या आपराधिक रिट के विरुद्ध LPA दायर की जा सकती है?
इसी कारण इसे intra-court appeal कहा जाता है।
LPA कब maintainable होती है?
सामान्यतः LPA निम्न परिस्थितियों में maintainable होती है—
• सिविल मामलों में Single Judge के निर्णय के विरुद्ध
• Article 226 of the Constitution of India के अंतर्गत दायर याचिकाओं में
• जहाँ Letters Patent इसकी अनुमति देता हो
किन्तु यह अधिकार पूर्ण नहीं है और विधि द्वारा नियंत्रित एवं सीमित है।
KanooniSahayta
भारतीय न्यायिक व्यवस्था में अपील का अधिकार न्याय का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। इसी क्रम में लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) एक विशिष्ट और प्रभावशाली intra-court remedy के रूप में उभरती है, जो उच्च न्यायालय के भीतर ही न्यायिक पुनर्विचार का अवसर प्रदान करती है।
हालांकि LPA का प्रयोग व्यापक रूप से किया जाता है, किन्तु इसकी सीमा—विशेषकर आपराधिक रिट याचिकाओं के संदर्भ में—अक्सर विवाद और भ्रम का विषय बनती है। प्रस्तुत लेख में LPA की अवधारणा, उसका ऐतिहासिक एवं विधिक आधार, तथा उसकी सीमाओं का सम्यक् विश्लेषण किया गया है।
Letters Patent क्या है?—LPA का मूल आधार
LPA को समझने के लिए “Letters Patent” की अवधारणा को समझना आवश्यक है।
Letters Patent ब्रिटिश शासनकाल में जारी एक Royal Charter था, जिसके माध्यम से भारत में उच्च न्यायालयों की स्थापना की गई तथा उनके अधिकार क्षेत्र, शक्तियाँ और अपील की प्रक्रिया निर्धारित की गई।
Establishment of High Courts in India under Letters Patent 1865 के अंतर्गत Calcutta High Court, Bombay High Court और Madras High Court की स्थापना की गई।
Letters Patent मूलतः एक संवैधानिक चार्टर की भांति कार्य करता है, जिसमें निम्नलिखित का निर्धारण होता है—
• न्यायालय की संरचना
• सिविल एवं आपराधिक अधिकार क्षेत्र
• Single Judge एवं Division Bench की शक्तियाँ
• अपील का प्रावधान (Clause 10 / Clause 15)
उदाहरणार्थ, Patna High Court के Letters Patent के Clause 10 के आधार पर LPA का अधिकार विकसित हुआ, जो आगे चलकर Jharkhand High Court में भी लागू हुआ।
लेटर्स पेटेंट अपील (LPA) क्या है?
लेटर्स पेटेंट अपील वह अपील है, जो उच्च न्यायालय के एकल न्यायाधीश (Single Judge) द्वारा पारित निर्णय के विरुद्ध उसी न्यायालय की द्वैध पीठ (Division Bench) के समक्ष दायर की जाती है।
सरल शब्दों में:
Single Judge का निर्णय → Division Bench के समक्ष अपील = LPA
LPA कब maintainable नहीं होती?
विधिक प्रावधानों एवं न्यायिक व्याख्याओं के अनुसार निम्न स्थितियों में LPA maintainable नहीं होती—
• Article 227 of the Constitution of India के अंतर्गत पारित आदेश
• आपराधिक मामलों से संबंधित आदेश
• जहाँ विशेष अधिनियम अपील पर रोक लगाता हो
• Section 100A CPC के अंतर्गत आने वाले मामले
इनमें सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न है—क्या आपराधिक रिट के विरुद्ध LPA दायर की जा सकती है?
इसी कारण इसे intra-court appeal कहा जाता है।
LPA कब maintainable होती है?
सामान्यतः LPA निम्न परिस्थितियों में maintainable होती है—
• सिविल मामलों में Single Judge के निर्णय के विरुद्ध
• Article 226 of the Constitution of India के अंतर्गत दायर याचिकाओं में
• जहाँ Letters Patent इसकी अनुमति देता हो
किन्तु यह अधिकार पूर्ण नहीं है और विधि द्वारा नियंत्रित एवं सीमित है।
2 months ago | [YT] | 0
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