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NAFED और NCCF सीधे किसानों से खरीदेंगी प्याज! बिचौलियों का खेल खत्म
महाराष्ट्र के बदहाल प्याज किसानों के लिए राहत की बड़ी खबर! 🧅 राहत
देश के प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में पिछले कुछ समय से मंडियों में प्याज की कीमतें गिरने से किसानों का हाल बेहद बेहाल था। संभाजीनगर, नासिक, बीड और पुणे सहित कई प्रमुख उत्पादक जिलों में हालत इतनी गंभीर हो गई थी कि किसानों को उनकी फसल का दाम ₹1 प्रति किलो से भी कम मिल रहा था। कई मंडियों में तो सारी कटौतियों के बाद किसानों के हाथ में करीब 50 पैसे प्रति किलो का भाव आ रहा था, जबकि प्याज उगाने की वास्तविक लागत ही कम से कम ₹20 प्रति किलो बैठती है। लागत न निकलने से टूट चुके किसानों ने राज्य भर में भारी नाराजगी और विरोध प्रदर्शन जताया था।
🤝 दिल्ली में हुई हाई-लेवल बैठक और बड़ा फैसला:
किसानों के इस गंभीर संकट को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार को दिल्ली में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और अन्य केंद्रीय मंत्रियों के साथ एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक की। मुख्यमंत्री ने महाराष्ट्र के चीनी सहकारी क्षेत्र और प्याज किसानों को प्रभावित करने वाले मुद्दों को गंभीरता से उठाया और मूल्य निर्धारण, इथेनॉल आवंटन व खरीद सुधारों पर केंद्र सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
📢 बैठक के बाद मिली ये बड़ी राहत:
सीधी सरकारी खरीद: अमित शाह से मुलाकात के बाद अब NAFED (नेफेड) और NCCF (एनसीसीएफ) जैसी केंद्रीय एजेंसियां बिचौलियों को हटाकर सीधे किसानों से प्याज की खरीद शुरू करेंगी ताकि उन्हें सही मूल्य मिल सके।
लागत की भरपाई: इस फैसले से उन संकटग्रस्त किसानों को तुरंत राहत मिलेगी जो औने-पौने दामों पर अपनी उपज बेचने को मजबूर थे।
सहकारी क्षेत्र को मजबूती: प्याज के साथ-साथ गन्ने और चीनी सहकारी क्षेत्र की समस्याओं पर भी केंद्र की तरफ से सकारात्मक कदम उठाने का भरोसा दिया गया है।
इस बड़े फैसले से उम्मीद है कि मंडियों में प्याज के दामों में तुरंत सुधार आएगा और महाराष्ट्र के संकटग्रस्त अन्नदाताओं को उनकी कड़ी मेहनत का सही हक मिल सकेगा।
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1 month ago | [YT] | 4
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किसानों से सस्ता गेहूं खरीद कर भी आसमान क्यों छू रही हैं आटे की कीमतें
आज देश के सामने एक ऐसा बड़ा आर्थिक विरोधाभास खड़ा हो गया है, जो सीधे तौर पर हमारे किसानों की जेब और आम जनता की थाली पर असर डाल रहा है। कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में गेहूं की कीमतों में भारी गिरावट देखी गई है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान की कई थोक मंडियों में अप्रैल के महीने में गेहूं के दाम 23 रुपये से 25 रुपये प्रति किलोग्राम के बीच उतार-चढ़ाव भरे रहे, जो कि सरकारी न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से भी कम हैं।
गौरतलब है कि नरेंद्र मोदी सरकार ने साल 2025 में गेहूं पर एमएसपी को बढ़ाकर 2585 रुपये प्रति क्विंटल (यानी 25.85 रुपये प्रति किलो) कर दिया था। नियम और तर्क के हिसाब से अगर मंडियों में गेहूं सस्ता बिक रहा है, तो बाजार में आटा और रोटी भी सस्ती होनी चाहिए। लेकिन भारत के खुदरा बाजार में ऐसा बिल्कुल नहीं हो रहा है!
📊 कीमतों का चौंकाने वाला अंतर:
मंडियों में गेहूं के दाम: ₹23 से ₹25 प्रति किलोग्राम (एमएसपी ₹25.85 से भी कम)
देश भर में खुले आटे के खुदरा दाम: ₹36 से ₹40 प्रति किलोग्राम
ब्रांडेड पैकेट वाले आटे के दाम: ₹40 से ₹50 प्रति किलोग्राम या उससे भी अधिक
आखिर मंडियों में गेहूं की मंदी का फायदा आम उपभोक्ताओं तक क्यों नहीं पहुँच पा रहा है? यहाँ बड़ा सवाल यह है कि क्या यह किसान का नुकसान है या उपभोक्ता का फायदा? या फिर उपभोक्ताओं के नाम पर कोई तीसरा ही अपनी जेबें गर्म कर रहा है? कड़वी सच्चाई यह है कि हमारा बिचौलियों का सिस्टम (Middlemen's System) फल-फूल रहा है और वही इस पूरे मुनाफे को हड़प रहा है।
एक तरफ देश का अन्नदाता अपनी फसल को एमएसपी से भी कम दामों पर बेचने को मजबूर है, तो दूसरी तरफ आम जनता को रिकॉर्ड तोड़ कीमतों पर आटा खरीदना पड़ रहा है। इस बीच का मोटा मुनाफा बिचौलिए और बड़ी कंपनियां डकार रही हैं।
इस गंभीर मुद्दे और मंडियों के खेल पर आपकी क्या राय है? क्या सरकार को इस मूल्य अंतर को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए? कमेंट बॉक्स में अपने विचार हमारे साथ ज़रूर साझा करें!
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1 month ago | [YT] | 3
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दुनिया में धान उत्पादन का सिरमौर बना भारत, खाद्यान्न, गेहूं, मक्का और तिलहन में बनाए नए रिकॉर्ड!
भारत के अन्नदाताओं की बड़ी कामयाबी! 🌾🚜
नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय खरीफ अभियान 2026 में कृषि मंत्रालय ने देश के कृषि उत्पादन को लेकर बेहद शानदार आंकड़े जारी किए हैं। भारत अब दुनिया में धान उत्पादन का शीर्ष वैश्विक लीडर (World Leader) बनकर उभरा है। इसके साथ ही देश ने गेहूं, मक्का और तिलहन के उत्पादन में भी इतिहास के सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं。
इस राष्ट्रीय अभियान में केंद्रीय कृषि मंत्री, वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया, ताकि आगामी खरीफ सीजन के लिए किसानों को बेहतर योजना, अत्याधुनिक तकनीक और बेहतरीन सहायता प्रदान की जा सके।
📊 उत्पादन के नए रिकॉर्ड आंकड़े:
कुल खाद्यान्न उत्पादन (Foodgrain Production): वर्ष 2025-26 में देश का कुल खाद्यान्न उत्पादन रिकॉर्ड 376.563 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 18.8 मिलियन टन अधिक है।
धान उत्पादन (Rice Production): भारत 154.024 मिलियन टन के नए रिकॉर्ड स्तर के साथ दुनिया का नंबर-1 धान उत्पादक देश बन गया है।
गेहूं और मक्का (Wheat & Maize): गेहूं का उत्पादन 120.657 मिलियन टन और मक्के का उत्पादन 55.092 मिलियन टन के सर्वकालिक रिकॉर्ड स्तर पर दर्ज किया गया है।
तिलहन उत्पादन (Oilseed Production): इस वर्ष कुल तिलहन उत्पादन 43.059 मिलियन टन होने का अनुमान है। इसमें मूंगफली का उत्पादन 13.074 मिलियन टन और तोरिया-सरसों का उत्पादन 13.768 मिलियन टन रहा है, जो कि दोनों ही नए रिकॉर्ड स्तर हैं।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सरकार ने खरीफ फसलों के लिए अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित होगी, किसानों की आजीविका में सुधार होगा और नागरिकों को पौष्टिक आहार मिलेगा।
उन्होंने 'टीम एग्रीकल्चर' की सराहना करते हुए कहा, "कृषि राज्यों का विषय है, इसलिए सबसे बेहतरीन परिणाम राज्यों से ही निकलकर आते हैं, जबकि केंद्र सरकार इसमें एक सहयोगी की भूमिका निभाती है।"
देश के किसान भाइयों की इस अभूतपूर्व मेहनत और कृषि क्षेत्र की हर बड़ी व तकनीकी जानकारी के लिए गाँव प्रभात को अभी सब्सक्राइब करें!
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1 month ago | [YT] | 2
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हरियाणा में जमीन की लॉटरी नीति पर भड़के किसान! 🚜 #Kisan
हरियाणा में कृषि और आवासीय जमीनों की मार्केट वैल्यू (बाजार मूल्य) तय करने तथा लैंड एक्विजिशन (भूमि अधिग्रहण) की प्रक्रियाओं को लेकर सरकार और किसानों के बीच विवाद लगातार गहराता जा रहा है। हाल ही में सरकार द्वारा पेश किए गए नए कड़े प्रावधानों, भूमि अधिग्रहण नीतियों और डिजिटल लैंड पूलिंग मैकेनिज्म (जिसे किसान सांकेतिक रूप से 'लॉटरी नीति' या मनमाना सिस्टम कह रहे हैं) के खिलाफ प्रदेश भर के किसान लामबंद होने लगे हैं।
किसानों के इस कड़े विरोध, उनकी प्रमुख मांगों और इस पूरी नीति के विवादित पहलुओं का विस्तृत विश्लेषण नीचे दिया गया है:
🚨 विवाद का मुख्य कारण: क्यों भड़के हैं किसान?
सर्कल रेट बनाम मार्केट रेट का बड़ा अंतर: किसानों का सबसे बड़ा आरोप है कि सरकार उनकी बहुमूल्य उपजाऊ जमीनों की कीमत 'सर्कल रेट' (प्रशासनिक मूल्य) के आधार पर आंकना चाहती है। जमीनी हकीकत यह है कि कई इलाकों में जमीन का वास्तविक बाजार मूल्य (Market Value) सरकार के तय सर्कल रेट से तीन से चार गुना तक अधिक है।
छोटे किसानों का कथित नुकसान (लैंड पूलिंग विवाद): हालिया लैंड पूलिंग नीति के तहत विपक्ष और किसान संगठनों का दावा है कि 10 एकड़ से कम जमीन वाले छोटे किसानों (जो कि कुल संख्या का लगभग 90% से अधिक हैं) को सीधे तौर पर इस प्रणाली में सही प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के बीच अपनी भूमि खोने और उचित मुआवजा न मिलने का डर बैठ गया है।
दलालों/एजेंटों के हावी होने की आशंका: किसान नेताओं का आरोप है कि इस मनमानी मूल्यांकन प्रणाली के कारण सीधे संवाद के बजाय बिचौलियों और कॉरपोरेट एजेंटों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे किसानों को औने-पौने दामों (कौड़ियों के भाव) पर अपनी जमीन बेचने के लिए मजबूर होना पड़ सकता है।
मुआवजे की असमानता: राज्य के कई औद्योगिक क्षेत्रों (जैसे मानेसर, झज्जर, और गुरुग्राम के आस-पास के गांवों) में पूर्व में अधिग्रहित की गई जमीनों के मुआवजे को लेकर किसान पहले से ही अदालतों और सड़कों पर लंबा संघर्ष लड़ रहे हैं। ऐसे में बिना किसी ठोस सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (Social Impact Assessment) के नई नीतियां लाना आग में घी का काम कर रहा है।
🚜 प्रदेश भर में लामबंदी और आंदोलन की रणनीति
संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की कमान: हरियाणा के विभिन्न जिलों जैसे रोहतक, जींद, हिसार, झज्जर, सोनीपत और कुरुक्षेत्र में किसान संगठनों ने इस नीति के खिलाफ महापंचायतें और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए हैं।
चेतावनी और आगामी रणनीति: किसान नेताओं का स्पष्ट कहना है कि वर्तमान में चल रहे प्रदर्शन तो केवल एक 'रिहर्सल' या चेतावनी हैं। यदि सरकार ने जमीन का मूल्यांकन पूरी तरह पारदर्शी बाजार मूल्य के आधार पर करने और भूमि अधिग्रहण कानूनों में किए गए किसान-विरोधी संशोधनों को वापस लेने का फैसला नहीं किया, तो आने वाले दिनों में पूरे हरियाणा में एक बड़ा और निर्णायक आंदोलन (Decisive Movement) छेड़ा जाएगा।
⚖️ क्या हैं किसानों की मुख्य मांगें?
बाजार मूल्य के आधार पर हो मूल्यांकन: किसी भी जमीन को अधिग्रहित करने या विकास कार्यों में शामिल करने से पहले उसकी कीमत मौजूदा कमर्शियल मार्केट वैल्यू (Commercial Market Value) के हिसाब से तय की जाए।
छोटे किसानों का संरक्षण: लैंड पूलिंग या एक्विजिशन की किसी भी योजना में छोटे और भूमिहीन किसानों की आजीविका और उनके अधिकारों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित हो।
मुकदमों की वापसी और पारदर्शी संवाद: पुराने भूमि विवादों का निपटारा किसानों को हिस्सेदार (Shareholder) मानकर किया जाए, न कि उन पर प्रशासनिक दबाव डालकर।
सरकार का दावा है कि ये नीतियां मुकदमेबाजी को कम करने और पारदर्शिता लाने के लिए हैं, लेकिन किसानों का मानना है कि उनकी सहमति के बिना थोपी जा रही यह व्यवस्था उन्हें उनकी पैतृक संपत्तियों से बेदखल कर देगी।
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1 month ago | [YT] | 3
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₹6000 सालाना कमाने वाला किसान... और करोड़पति यूनियन प्रधान? हरियाणा में किसान यूनियनों पर लगा है सनसनीखेज़ आरोप—संघर्ष के नाम पर वसूली और ब्लैकमेलिंग का गैंग चलाने का! क्या किसान आंदोलन की आड़ में नेताओं ने अपनी तिजोरियाँ भरी हैं? पढ़िए, क्यों जरनैल सिंह मलवाला ने जाँच की मांग की और अभिमन्यु कोहर ने कहा, "सबसे पहले मेरी संपत्ति की जाँच हो!"
7 months ago | [YT] | 2
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🚨 एक्शन: करनाल अनाज मंडियों में फर्जीवाड़ा, 6 पर केस दर्ज!
करनाल | हरियाणा के करनाल जिले की पाँच प्रमुख अनाज मंडियों में धान की खरीद में बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। करनाल, घरौंडा, जुंडला, निसिंग और तरावड़ी मंडियों से जुड़े छह लोगों पर सरकारी धान को खुर्द-बुर्द करने के आरोप में केस दर्ज किया गया है।
राइस मिल बतान फूड्स, सलारू में हुई जांच के दौरान 12,659.62 क्विंटल धान कम मिला, जिससे इस बड़े घोटाले की पोल खुली। #KarnalNews, #AnajMandiScam, #HaryanaCorruption, #RiceMillFraud, #PaddyScam, #FarmersWelfare, #MandiNews, #kisanvani, #gaonprabhat, #haryana
8 months ago | [YT] | 1
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कल्लू के #Malana पर लगे चरस के व्यापार का दाग धोने के लिए हिमाचल सरकार अब खुद #चरस के पौधे यानी भांग की उन्नत किस्म तैयार करेगी जिसमें नशा कम होगा और औषधीय गुण ज्यादा। ज्यादा जानकारी के लिए लिंक पर क्लिक करें
shorturl.at/JqGIJ
8 months ago | [YT] | 0
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🌾 किसान पाठशाला: अब सीखें, कमाएँ, आगे बढ़ें!
गाँव प्रभात गर्व से प्रस्तुत करता है किसान पाठशाला - किसानों और कृषि प्रेमियों के लिए ज्ञान का एक नया मंच! हमारा उद्देश्य भारत के हर किसान को सशक्त बनाना है ताकि वे अपनी आमदनी कई गुना बढ़ा सकें। इस विशेष वीडियो श्रृंखला में आपको खेती की नवीनतम फसल तकनीक (latest crop technology) और विशेषज्ञ सलाह (expert advice) मिलेगी।
सीखिए कैसे नई फसलें (new crops) उगाएँ, आधुनिक कृषि मशीनरी (farm machinery) का उपयोग करें, और वैज्ञानिक तरीके अपनाकर अधिक पैसा कमाएँ (earning more money)। हम आपको फसलों के विविधीकरण (crop diversification) और लागत कम करने के सर्वोत्तम तरीके भी सिखाएँगे। किसान पाठशाला गाँव के मेहनती सितारों को समर्पित है—जो कम समय और लागत में ज़्यादा लाभ कमाना चाहते हैं। अपनी खेती को उन्नत बनाने के लिए आज ही हमारे वीडियो देखना शुरू करें!
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8 months ago | [YT] | 0
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दोस्तों, कल्पना कीजिए: एक व्यक्ति कॉलेज से निकलता है और नौकरी ढूंढने के बजाय सब्ज़ियों का बोझा अपनी पीठ पर लादकर खेतों से बाज़ार जाता है। आज वही व्यक्ति हिमाचल के 'मशरूम सिटी ऑफ इंडिया' सोलन में दो बड़े होटलों का मालिक है! 75 साल के बुध राम ठाकुर की यह कहानी सिर्फ एक व्यक्ति के अमीर बनने की नहीं है, बल्कि कठिन परिश्रम और शॉर्टकट को नकारने के जुनून की दास्तान है।
8 months ago | [YT] | 1
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इस वीडियो में जानिए US से 54 हरियाणवी युवाओं के डिपोर्ट होने का पूरा सच, और बेरोज़गारी के वे 5 कारण जो हरियाणा के युवाओं को 'डोंकी रूट' लेने पर मजबूर कर रहे हैं:
8 months ago | [YT] | 0
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