.सोने-चांदी की गिरावट: 1980-2011 का सबक और निवेश का समय?साथियों, सोने में 2013 के बाद सबसे बड़ी गिरावट, चांदी में 2021 के बाद की सबसे भारी गिरावट! बाजार डर रहा है कि कहीं 1980-2011 जैसा धमाका न हो जाए। आज डिकोड करते हैं।पहले कारण: अमेरिका-चाइना सुलह से ग्लोबल अनसर्टेन्टी कम हुई। ट्रंप इफेक्ट ने अनिश्चितता बढ़ाई थी—टैरिफ, धमकियां—लोग गोल्ड-सिल्वर में भागे। अब डॉलर मजबूत, स्टॉक ऊपर, प्रॉफिट बुकिंग हुई। सिल्वर ने 1 लाख पर 2 लाख दिए, गोल्ड ने 63 हजार—लोगों ने सोचा, 'बहुत चढ़ गया, निकल लो!'अब इतिहास: 1980 में हंट ब्रदर्स ने $6 से $48/औंस चांदी पहुंचाई। दुनिया का 1/3 स्टॉक अपने पास कर FOMO बनाया। COMEX ने मार्जिन रूल बदला, बाजार क्रैश—सिल्वर थर्सडे! 2011 में भी $52 तक गया, फिर गिरा। लेकिन आज रेगुलेशन सख्त, कोई हंट ब्रदर्स नहीं। चांदी का इंडस्ट्रियल यूज (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स) 75%+, फोटोग्राफी अब 3%। डिमांड रियल है, सप्लाई कम—क्रैश का डर कम!फिलहाल गिरावट प्रॉफिट बुकिंग से। निवेश? बुलिश: इंडस्ट्रियल डिमांड ऊपर ले जाएगा। बेयरिश: हाई वोलेटिलिटी, रिस्क अपना चेक करो। स्टॉक गिरे तो गोल्ड-सिल्वर में शिफ्ट, स्टॉक चढ़े तो प्रॉफिट बुक। ETF जैसे ICICI, Axis सिल्वर में अच्छा रिटर्न। लेकिन रिसर्च करो, पेशेंस रखो—सारा पैसा न लगाओ!
......UGC मुद्दे पर जो हो रहा है....उसको विरोध नहीं कहते...इसको हल्ला मचाना कहते है...अगर विरोध करना है तो सड़क पर उतरो...आंदोलन करो...कोर्ट जाओ...लेकिन ये सब नहीं करना...सिर्फ हल्ला मचाना है...कुतर्क करना है...गाली गलोच करनी है.....और वो भी बिना कुछ जाने...बिना कुछ समझे....
* 13 तारीख को कोर्ट के आदेश के बाद ये Regulation आए....और ये Regulation स्टूडेंट्स के लिए नहीं थे...Institutions के लिए थे.
* ये Regulations जातिगत भेदभाव की शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए Equity Committee बनाने की बात करता है...ताकि स्टूडेंट्स को जल्द से जल्द न्याय मिले और उन्हें मानसिक तनाव से गुजरना ना पड़े.
* इस Regulation मे ये कहीं नहीं लिखा कि...Equity Committee मे सवर्ण समाज का व्यक्ति नहीं होगा...जो लिखा है...वो है...sc/st/obc/woman/PwD का सदस्य होना ही चाहिए...क्यूंकि इन्हीं के खिलाफ भेदभाव की शिकायतें आती हैं.....अब ये institutions को तय करना है...कि वो इनके साथ और किसको मेंबर बनाता है.
* इस Regulation मे कहीं नहीं लिखा कि जनरल केटेगरी के छात्र शिकायत नहीं कर सकते...कोई भी शिकायत कर सकता है...और उसकी शिकायत पर कार्रवाई होगी.
* इस Regulation मे एक बात का विशेष विरोध हो रहा है...कि इसमे झूठी शिकायत के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान नहीं है......सही है...नहीं है....लेकिन Equity Committee मे शिकायत का प्रावधान नहीं है...झूठी शिकायत करके किसी को बदनाम करना अपने आप मे एक आपराधिक केस है....आप पुलिस मे इसकी शिकायत कर सकते हैं..........लेकिन झूठी शिकायत कोई नहीं करता.....कॉलेज मे सबको साथ रहना है....सबको साथ पढना है....कोई ऐसा नहीं करता....इक्का दुक्का कोई ऐसा कर्ता है तो वो खुद स्टूडेंट्स की नजरों मे गिर जाता है.
* UGC किसी के खिलाफ केस नहीं कर सकता...FIR नहीं कर सकता...सजा नहीं दे सकता...जो भी लो स्टूडेंट्स को जेल भेजने की बातें कर रहे हैं....वो सिर्फ अफवाह फैला रहे हैं....एजेंडा चला रहे हैं.
* इसका विरोध सिर्फ भाजपा से जुड़े लोग कर रहे हैं....भाजपा से जुड़े हैंडल ने इसका विरोध शुरू किया...भाजपा से जुड़े लोग इसके खिलाफ कोर्ट गए....विपक्ष के एक नेता...एक मीडिया पर्सन ने इसका विरोध नहीं किया.
* इसके विरोध के नाम पर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है...वो ये बताने के लिए काफी है...कि इसके पीछे क्या एजेंडा चलाया जा रहा है.
...........अब भी किसी को विरोध करना है...तो शौक से करे...लेकिन विरोध सिर्फ सोशल मीडिया पर क्यूँ....!!...जमीन पर उतरो...कोर्ट जाओ...स्टे लगवाओ इसपर......
....हल्ला मचाने मे और विरोध करने मे फर्क होता है...आपके हल्ला मचाने से कुछ नहीं होने वाला. ...समस्या ये है कि विरोध करने वालों मे ज्यादातर लोगों ने Regulation को पढ़ाई ही नहीं है....बस भेड़चाल मे शामिल हैं.....
...इससे ज्यादातर इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा जा सकता.
ईरान में भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ के लौटने के लिए कहा है।
लेकिन मैं स्टाम्प पेपर पे लिख के दे सकता कि अभी ईरान में रह रहे ज्यादातर भारतीय लोगों के कान पे जूं तक नहीं रेंगेगी। ये वही जमे रहेंगे।
फिर अगर हालात बिगड़े, ये रोते, चिल्लाते, गिड़गिड़ाते या गुस्से में तमतमाते, मोदी की छाती नापने निकल पड़ेंगे।
ये और इनके रिश्तेदार सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया भर देंगे आंसूओं से, भारत सरकार और मोदी को जी भर भर के कोसते हुए कि हमें निकालो, हम मर रहे हैं।
हमारी सरकार फिर भी इन्हें निकालेगी। फिर जब युद्ध में से इन्हें सुरक्षित बचा के निकाल लिया जाएगा तो ये फिर छाती कूटेंगे... हमें बिना घी की रोटी दे दी, बोनलेस चिकन मांगा लेकिन हड्डी वाला दिया, चाय में चीनी कम थी, बिजनेस क्लास का इंतजाम नहीं किया, हमको भारत में घर की चौखट के अंदर तक छोड़ के आओ ,ब्ला ब्ला.....
यहां विपक्षी पार्टियां कहेंगी बस यही मोदी की डिप्लोमेसी है।
लेकिन अभी, जब सरकार चेता रही, रिक्वेस्ट कर रही, अनुरोध कर रही कि निकल लो भाई, तब ये किसी प्रोटेस्ट में खड़े मजे लेने में लगे होंगे।
एक रिलीजन को हम लोग अपने जीवन-काल में अपनी आंखों के सामने नष्ट होते देखेंगे और ये होगा उसी रिलीजन की महिलाओं के हाथों.
रोकने का कोई फायदा नहीं है. ढकने का कोई फायदा नहीं है. उस रिलीजन की आखिरी हिचकियां नजर आने लगी हैं.
मर्दों के ब्रदरहुड का विचार काम नहीं आएगा. सिस्टर और मदर के बिना ये लंबा चल गया. लेकिन इसका संकट काल आ गया है.
ये रिलीजन आखिर में दुनिया के सबसे गरीब, जाहिल तथा अविकसित लोगों के बीच सीमित होगा और फिर चला जाएगा.
जो भी बदलने में असमर्थ है, वह नष्ट होगा. परिवर्तन ही सनातन है.
कार्य कारण और निर्भर उत्पति का परिवर्तनीय सिद्धांत ही स्थायी है. यही प्रतीत्यसमुत्पाद है. इस बात को कई रिलीजन ने समझा है. उनकी धरती गोल है. वहां महिलाओं को लगातार आजादी दी गई है. ये सजीव धर्म हैं.
मुर्दा विचारों वाले रिलीजन के अस्त होने का स्वागत कीजिए.
........अमेरिका ने भारत को पहले कभी इतना मजबूत नहीं देखा....ये अनुभव उसे पहली बार हो रहा है....ऐसा पहली बार है कि भारत....अमेरिका की सुन ही नहीं रहा....और ट्रम्प की झुंझलाहट की असली वजह यही है...
* भारत अमेरिका से हथियार नहीं खरीद रहा...बल्कि रूस से खरीद रहा है.
* भारत अमेरिका के मना करने....धमकाने....50% tariff लगाने के बावजूद...रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है.
* भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार ऊपर उठ रही है...और दुनिया मे सबसे तेज गति से बढ़ रही है.
* भारत अमेरिका के लिए अपना agriculture और dairy सेक्टर नहीं खोल रहा है.
* भारत के "Make In India" की वजह से दुनिया पर भारत की निर्भरता कम हो रही है.
* भारत का प्रधानमन्त्री...अमेरिका के राष्ट्रपति के बुलावे को साफ़ मना कर दे रहा है.
* भारत अमेरिका की ट्रेड डील सिर्फ इसलिए नहीं हो रही...क्युकी मोदी ट्रम्प को फोन नहीं कर रहे.
* भारत अपने फैसले बिना अमेरिका या यूरोपीय देशों के दबाव मे आए....अपने नागरिको के हित मे ले रहा है. ..............अमेरिका ने इस "नए भारत" के बारे मे कभी सोचा ही नहीं था....ये बिल्कुल नया अनुभव है उसके लिए....और वो समझ नहीं पा रहा....कि इस "नए भारत" को....."मोदी के भारत" को....हैंडल कैसे करे....!!
......ट्रम्प ने कमाल कर दिया....आज भारत मे मोदी विरोधियों को जनवरी की ठंढ मे पसीने आ गए होंगे....और मोदी मन ही मन अपने विरोधियों को कह रहे होंगे...."तुम यहां बवाल करने की सोच रहे थे...हमने वहां बवाल कर दिया..."...
* ट्रम्प ने आज जॉर्ज सोरोस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया....ट्रम्प ने दावा किया कि जॉर्ज सोरोस और रीड हाफमैन....अमेरिका मे वामपंथी संगठन Antifa को फंडिंग कर रहे हैं....और ICE (Immigration Enforcement) के खिलाफ हिंसा को बढावा दे रहे हैं.
* पिछले दिनों ट्रम्प ने Immigration कानून को सख्त कर के.....अमेरिका से अवैध प्रवासियों...खासकर कट्टरपंथी मुसलमानों को निकालने की और कई मुस्लिम देशों के नागरिको को अमेरिका मे ना घुसने देने की शुरुआत की थी ...जिसके बाद वामपंथी संगठन Antifa ने Immigration Enforcement के खिलाफ हिंसात्मक आंदोलन छेड़ रखा है........जैसे हमारे यहां अवैध बांग्लादेशियों को निकालने का विरोध हो रहा है....वैसे ही.
* ट्रम्प ने Antifa को अमेरिका के लिए बड़ा खतरा मानते हुए एक हिंसक वामपंथी संगठन माना...और इसकी फंडिंग के खिलाफ जांच बिठा दी.
* जॉर्ज सोरोस का नाम पहले से दुनिया भर के वामपंथी संगठनों को फंडिंग के मामले मे सामने आ चुका है....ट्रम्प ने उसके खिलाफ RICO ( Racketeer Influenced And Corrupt Organization Act) के तहत जांच की बात कही है.
* अब आने वाले दिनों मे अमेरिका की राजनीति मे भारी उथल पुथल मचने वाली है...बड़े खुलासे होंगे...जिसका असर भारत मे भी देखने को मिलेगा.....मोदी विरोधियों के लिए आने वाला समय ठीक नहीं है.
.........अगर tariff को छोड़ दें. ...तो ट्रम्प ने भारत का कोई नुकसान नहीं किया....उसके tariff ने भी भारत को फायदा ही पहुंचाया है.........ट्रम्प ने सोरोस के खिलाफ जो मोर्चा खोला है...अगर वो इसे अंजाम तक पहुंचा दें....तो भारत की एक बड़ी...या सबसे बड़ी समस्या ....Urban naxal खत्म हो जाएगी. ....
नियम हर कंपनी के लिए थे, लेकिन इंडिगो ने अपनी मोनोपोली चलाई और सरकार ने घुटने टेक दिए। ऐसा नहीं था कि नियम अचानक से आ गए — काफी पहले से बता दिए गए थे। बाकी कंपनियों ने उसी हिसाब से अपने बदलाव मैनेज किए, लेकिन जिस कंपनी ने सोचा कि पूरा एविएशन सिस्टम उसी का बाप का है, उसने कहा — अब नियम हमारे हिसाब से चलेंगे।
शेम ऑन गवर्नमेंट कि उन्हें एक प्राइवेट प्लेयर के आगे उन नियमों को छोड़ना / कुछ समय के लिए टालना पड़ा जो पायलट्स और क्रू की भलाई के लिए थे।
और दूसरी तरफ लोग कह रहे हैं — इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल हो गईं और उसका फायदा दूसरी कंपनियां उठा रही हैं दाम बढ़ाकर। लोग भूल गए कि आपदा में अवसर इस देश की नस–नस में घुसा हुआ है।
कोरोना के समय मेडिकल वालों ने दवाइयाँ और इंजेक्शन अनाप-शनाप दामों पर बेचे, आम लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर जमा कर लिए और ज़रूरतमंद को महंगे में बेचे, राशन वालों ने राशन के दाम बढ़ा दिए, और सब छोड़ो एक गांव में गुटके की पुड़ियाँ 50 से 100 रुपए तक बिकीं, गुमटी चलाने वाले ने लाखों कमा लिए।
यहाँ हर इंसान दूसरे के लिए बस एक वस्तु है… जितना निचोड़ सको निचोड़ लो।
सरकार इंडिगो को दोष देगी, इंडिगो नए लागू हुए नियमों को, इंडिगो के पायलट ओवर टाइमिंग को, और आम आदमी… वो उसी पर गुस्सा निकाल देगा जिस पर चल पाए।
जब मार्केट में सिर्फ एक प्लेयर बचता है, मनमानी उसी की चलती है — बस बात यही समझ लीजिए।
इंडिगो को नियम पहले से पता थे, लेकिन उसे लगा — "हम भगवान हैं, कुछ भी नहीं मानेंगे" और आज उसने लोगों को बेहाल करके सरकार पर ठीकरा फोड़ दिया।
दूसरी तरफ देश का एविएशन सिस्टम — दशकों तक प्राइवेट प्लेयर्स को इतना पुश किया कि एक अच्छी-भली सरकारी कंपनी बैकफुट पर आ गई। और जब किसी दूसरे प्राइवेट प्लेयर से उसी बड़ी कंपनी को फिर से चलाने की कोशिश की, तो हम सब उसका हाल देख ही रहे हैं।
इधर लोग बेचारे इतना चिल्लाने के बाद भी — कोई अपनी परीक्षा में नहीं पहुँच पा रहा, कोई अपने रिसेप्शन में नहीं पहुँच पा रहा, कोई मृत्यु में शामिल होने के लिए नहीं पहुँच पा रहा।
और इन सबको अंत में एक "सॉरी" के अलावा क्या मिलेगा? जो समय इनके हाथ से निकल गया — कोई लौटा पाएगा?
और ये स्क्रिप्ट भी किसी से लड़ाई या बहसबाजी के लिए नहीं, बस हालात देखकर मन खराब है और दिमाग में यही सब चल रहा है।
"ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं" जिस देश में आंगनबाड़ी में नौकरी लेने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती हो, और बड़े ओहदों पर पहुंचने के लिए भी, वहाँ हर कोई अपनी-अपनी ताकत के हिसाब से ठग है।
गज़ब क्यूटियापा है... चाइनीज टिकटॉक से लेकर अमेरिकन फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्स ऐप को सारा एक्सेस देने वाले लोगों को लग रहा संचार साथी ऐप से मोदी जी इनकी जासूसी कर लेंगे। 🤣🤣
True Story Point
.सोने-चांदी की गिरावट: 1980-2011 का सबक और निवेश का समय?साथियों, सोने में 2013 के बाद सबसे बड़ी गिरावट, चांदी में 2021 के बाद की सबसे भारी गिरावट! बाजार डर रहा है कि कहीं 1980-2011 जैसा धमाका न हो जाए। आज डिकोड करते हैं।पहले कारण: अमेरिका-चाइना सुलह से ग्लोबल अनसर्टेन्टी कम हुई। ट्रंप इफेक्ट ने अनिश्चितता बढ़ाई थी—टैरिफ, धमकियां—लोग गोल्ड-सिल्वर में भागे। अब डॉलर मजबूत, स्टॉक ऊपर, प्रॉफिट बुकिंग हुई। सिल्वर ने 1 लाख पर 2 लाख दिए, गोल्ड ने 63 हजार—लोगों ने सोचा, 'बहुत चढ़ गया, निकल लो!'अब इतिहास: 1980 में हंट ब्रदर्स ने $6 से $48/औंस चांदी पहुंचाई। दुनिया का 1/3 स्टॉक अपने पास कर FOMO बनाया। COMEX ने मार्जिन रूल बदला, बाजार क्रैश—सिल्वर थर्सडे! 2011 में भी $52 तक गया, फिर गिरा। लेकिन आज रेगुलेशन सख्त, कोई हंट ब्रदर्स नहीं। चांदी का इंडस्ट्रियल यूज (सोलर, इलेक्ट्रॉनिक्स) 75%+, फोटोग्राफी अब 3%। डिमांड रियल है, सप्लाई कम—क्रैश का डर कम!फिलहाल गिरावट प्रॉफिट बुकिंग से। निवेश? बुलिश: इंडस्ट्रियल डिमांड ऊपर ले जाएगा। बेयरिश: हाई वोलेटिलिटी, रिस्क अपना चेक करो। स्टॉक गिरे तो गोल्ड-सिल्वर में शिफ्ट, स्टॉक चढ़े तो प्रॉफिट बुक। ETF जैसे ICICI, Axis सिल्वर में अच्छा रिटर्न। लेकिन रिसर्च करो, पेशेंस रखो—सारा पैसा न लगाओ!
2 months ago | [YT] | 1
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True Story Point
......UGC मुद्दे पर जो हो रहा है....उसको विरोध नहीं कहते...इसको हल्ला मचाना कहते है...अगर विरोध करना है तो सड़क पर उतरो...आंदोलन करो...कोर्ट जाओ...लेकिन ये सब नहीं करना...सिर्फ हल्ला मचाना है...कुतर्क करना है...गाली गलोच करनी है.....और वो भी बिना कुछ जाने...बिना कुछ समझे....
* 13 तारीख को कोर्ट के आदेश के बाद ये Regulation आए....और ये Regulation स्टूडेंट्स के लिए नहीं थे...Institutions के लिए थे.
* ये Regulations जातिगत भेदभाव की शिकायतों के जल्द निपटारे के लिए Equity Committee बनाने की बात करता है...ताकि स्टूडेंट्स को जल्द से जल्द न्याय मिले और उन्हें मानसिक तनाव से गुजरना ना पड़े.
* इस Regulation मे ये कहीं नहीं लिखा कि...Equity Committee मे सवर्ण समाज का व्यक्ति नहीं होगा...जो लिखा है...वो है...sc/st/obc/woman/PwD का सदस्य होना ही चाहिए...क्यूंकि इन्हीं के खिलाफ भेदभाव की शिकायतें आती हैं.....अब ये institutions को तय करना है...कि वो इनके साथ और किसको मेंबर बनाता है.
* इस Regulation मे कहीं नहीं लिखा कि जनरल केटेगरी के छात्र शिकायत नहीं कर सकते...कोई भी शिकायत कर सकता है...और उसकी शिकायत पर कार्रवाई होगी.
* इस Regulation मे एक बात का विशेष विरोध हो रहा है...कि इसमे झूठी शिकायत के खिलाफ कार्रवाई का प्रावधान नहीं है......सही है...नहीं है....लेकिन Equity Committee मे शिकायत का प्रावधान नहीं है...झूठी शिकायत करके किसी को बदनाम करना अपने आप मे एक आपराधिक केस है....आप पुलिस मे इसकी शिकायत कर सकते हैं..........लेकिन झूठी शिकायत कोई नहीं करता.....कॉलेज मे सबको साथ रहना है....सबको साथ पढना है....कोई ऐसा नहीं करता....इक्का दुक्का कोई ऐसा कर्ता है तो वो खुद स्टूडेंट्स की नजरों मे गिर जाता है.
* UGC किसी के खिलाफ केस नहीं कर सकता...FIR नहीं कर सकता...सजा नहीं दे सकता...जो भी लो स्टूडेंट्स को जेल भेजने की बातें कर रहे हैं....वो सिर्फ अफवाह फैला रहे हैं....एजेंडा चला रहे हैं.
* इसका विरोध सिर्फ भाजपा से जुड़े लोग कर रहे हैं....भाजपा से जुड़े हैंडल ने इसका विरोध शुरू किया...भाजपा से जुड़े लोग इसके खिलाफ कोर्ट गए....विपक्ष के एक नेता...एक मीडिया पर्सन ने इसका विरोध नहीं किया.
* इसके विरोध के नाम पर जिस तरह की भाषा का इस्तेमाल हो रहा है...वो ये बताने के लिए काफी है...कि इसके पीछे क्या एजेंडा चलाया जा रहा है.
...........अब भी किसी को विरोध करना है...तो शौक से करे...लेकिन विरोध सिर्फ सोशल मीडिया पर क्यूँ....!!...जमीन पर उतरो...कोर्ट जाओ...स्टे लगवाओ इसपर......
....हल्ला मचाने मे और विरोध करने मे फर्क होता है...आपके हल्ला मचाने से कुछ नहीं होने वाला. ...समस्या ये है कि विरोध करने वालों मे ज्यादातर लोगों ने Regulation को पढ़ाई ही नहीं है....बस भेड़चाल मे शामिल हैं.....
...इससे ज्यादातर इस मुद्दे पर कुछ नहीं कहा जा सकता.
जय श्रीराम 🙏🚩
4 months ago | [YT] | 1
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ईरान , नागरिक संकट और मोदी की परीक्षा :-
ईरान में भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों को तुरंत ईरान छोड़ के लौटने के लिए कहा है।
लेकिन मैं स्टाम्प पेपर पे लिख के दे सकता कि अभी ईरान में रह रहे ज्यादातर भारतीय लोगों के कान पे जूं तक नहीं रेंगेगी। ये वही जमे रहेंगे।
फिर अगर हालात बिगड़े, ये रोते, चिल्लाते, गिड़गिड़ाते या गुस्से में तमतमाते, मोदी की छाती नापने निकल पड़ेंगे।
ये और इनके रिश्तेदार सोशल मीडिया से लेकर मेन स्ट्रीम मीडिया भर देंगे आंसूओं से, भारत सरकार और मोदी को जी भर भर के कोसते हुए कि हमें निकालो, हम मर रहे हैं।
हमारी सरकार फिर भी इन्हें निकालेगी। फिर जब युद्ध में से इन्हें सुरक्षित बचा के निकाल लिया जाएगा तो ये फिर छाती कूटेंगे... हमें बिना घी की रोटी दे दी, बोनलेस चिकन मांगा लेकिन हड्डी वाला दिया, चाय में चीनी कम थी, बिजनेस क्लास का इंतजाम नहीं किया, हमको भारत में घर की चौखट के अंदर तक छोड़ के आओ ,ब्ला ब्ला.....
यहां विपक्षी पार्टियां कहेंगी बस यही मोदी की डिप्लोमेसी है।
लेकिन अभी, जब सरकार चेता रही, रिक्वेस्ट कर रही, अनुरोध कर रही कि निकल लो भाई, तब ये किसी प्रोटेस्ट में खड़े मजे लेने में लगे होंगे।
4 months ago | [YT] | 1
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True Story Point
एक रिलीजन को हम लोग अपने जीवन-काल में अपनी आंखों के सामने नष्ट होते देखेंगे और ये होगा उसी रिलीजन की महिलाओं के हाथों.
रोकने का कोई फायदा नहीं है. ढकने का कोई फायदा नहीं है. उस रिलीजन की आखिरी हिचकियां नजर आने लगी हैं.
मर्दों के ब्रदरहुड का विचार काम नहीं आएगा. सिस्टर और मदर के बिना ये लंबा चल गया. लेकिन इसका संकट काल आ गया है.
ये रिलीजन आखिर में दुनिया के सबसे गरीब, जाहिल तथा अविकसित लोगों के बीच सीमित होगा और फिर चला जाएगा.
जो भी बदलने में असमर्थ है, वह नष्ट होगा. परिवर्तन ही सनातन है.
कार्य कारण और निर्भर उत्पति का परिवर्तनीय सिद्धांत ही स्थायी है. यही प्रतीत्यसमुत्पाद है. इस बात को कई रिलीजन ने समझा है. उनकी धरती गोल है. वहां महिलाओं को लगातार आजादी दी गई है. ये सजीव धर्म हैं.
मुर्दा विचारों वाले रिलीजन के अस्त होने का स्वागत कीजिए.
4 months ago | [YT] | 1
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........अमेरिका ने भारत को पहले कभी इतना मजबूत नहीं देखा....ये अनुभव उसे पहली बार हो रहा है....ऐसा पहली बार है कि भारत....अमेरिका की सुन ही नहीं रहा....और ट्रम्प की झुंझलाहट की असली वजह यही है...
* भारत अमेरिका से हथियार नहीं खरीद रहा...बल्कि रूस से खरीद रहा है.
* भारत अमेरिका के मना करने....धमकाने....50% tariff लगाने के बावजूद...रूस से सस्ता तेल खरीद रहा है.
* भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार ऊपर उठ रही है...और दुनिया मे सबसे तेज गति से बढ़ रही है.
* भारत अमेरिका के लिए अपना agriculture और dairy सेक्टर नहीं खोल रहा है.
* भारत के "Make In India" की वजह से दुनिया पर भारत की निर्भरता कम हो रही है.
* भारत का प्रधानमन्त्री...अमेरिका के राष्ट्रपति के बुलावे को साफ़ मना कर दे रहा है.
* भारत अमेरिका की ट्रेड डील सिर्फ इसलिए नहीं हो रही...क्युकी मोदी ट्रम्प को फोन नहीं कर रहे.
* भारत अपने फैसले बिना अमेरिका या यूरोपीय देशों के दबाव मे आए....अपने नागरिको के हित मे ले रहा है.
..............अमेरिका ने इस "नए भारत" के बारे मे कभी सोचा ही नहीं था....ये बिल्कुल नया अनुभव है उसके लिए....और वो समझ नहीं पा रहा....कि इस "नए भारत" को....."मोदी के भारत" को....हैंडल कैसे करे....!!
जय श्रीराम 🙏🚩
वन्देमातरम 🚩
4 months ago | [YT] | 1
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......ट्रम्प ने कमाल कर दिया....आज भारत मे मोदी विरोधियों को जनवरी की ठंढ मे पसीने आ गए होंगे....और मोदी मन ही मन अपने विरोधियों को कह रहे होंगे...."तुम यहां बवाल करने की सोच रहे थे...हमने वहां बवाल कर दिया..."...
* ट्रम्प ने आज जॉर्ज सोरोस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया....ट्रम्प ने दावा किया कि जॉर्ज सोरोस और रीड हाफमैन....अमेरिका मे वामपंथी संगठन Antifa को फंडिंग कर रहे हैं....और ICE (Immigration Enforcement) के खिलाफ हिंसा को बढावा दे रहे हैं.
* पिछले दिनों ट्रम्प ने Immigration कानून को सख्त कर के.....अमेरिका से अवैध प्रवासियों...खासकर कट्टरपंथी मुसलमानों को निकालने की और कई मुस्लिम देशों के नागरिको को अमेरिका मे ना घुसने देने की शुरुआत की थी ...जिसके बाद वामपंथी संगठन Antifa ने Immigration Enforcement के खिलाफ हिंसात्मक आंदोलन छेड़ रखा है........जैसे हमारे यहां अवैध बांग्लादेशियों को निकालने का विरोध हो रहा है....वैसे ही.
* ट्रम्प ने Antifa को अमेरिका के लिए बड़ा खतरा मानते हुए एक हिंसक वामपंथी संगठन माना...और इसकी फंडिंग के खिलाफ जांच बिठा दी.
* जॉर्ज सोरोस का नाम पहले से दुनिया भर के वामपंथी संगठनों को फंडिंग के मामले मे सामने आ चुका है....ट्रम्प ने उसके खिलाफ RICO ( Racketeer Influenced And Corrupt Organization Act) के तहत जांच की बात कही है.
* अब आने वाले दिनों मे अमेरिका की राजनीति मे भारी उथल पुथल मचने वाली है...बड़े खुलासे होंगे...जिसका असर भारत मे भी देखने को मिलेगा.....मोदी विरोधियों के लिए आने वाला समय ठीक नहीं है.
.........अगर tariff को छोड़ दें. ...तो ट्रम्प ने भारत का कोई नुकसान नहीं किया....उसके tariff ने भी भारत को फायदा ही पहुंचाया है.........ट्रम्प ने सोरोस के खिलाफ जो मोर्चा खोला है...अगर वो इसे अंजाम तक पहुंचा दें....तो भारत की एक बड़ी...या सबसे बड़ी समस्या ....Urban naxal खत्म हो जाएगी. ....
जय श्रीराम 🙏🚩
4 months ago | [YT] | 4
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नियम हर कंपनी के लिए थे, लेकिन इंडिगो ने अपनी मोनोपोली चलाई और सरकार ने घुटने टेक दिए। ऐसा नहीं था कि नियम अचानक से आ गए — काफी पहले से बता दिए गए थे। बाकी कंपनियों ने उसी हिसाब से अपने बदलाव मैनेज किए, लेकिन जिस कंपनी ने सोचा कि पूरा एविएशन सिस्टम उसी का बाप का है, उसने कहा — अब नियम हमारे हिसाब से चलेंगे।
शेम ऑन गवर्नमेंट कि उन्हें एक प्राइवेट प्लेयर के आगे उन नियमों को छोड़ना / कुछ समय के लिए टालना पड़ा जो पायलट्स और क्रू की भलाई के लिए थे।
और दूसरी तरफ लोग कह रहे हैं —
इंडिगो की फ्लाइट कैंसिल हो गईं और उसका फायदा दूसरी कंपनियां उठा रही हैं दाम बढ़ाकर।
लोग भूल गए कि आपदा में अवसर इस देश की नस–नस में घुसा हुआ है।
कोरोना के समय मेडिकल वालों ने दवाइयाँ और इंजेक्शन अनाप-शनाप दामों पर बेचे,
आम लोगों ने ऑक्सीजन सिलेंडर जमा कर लिए और ज़रूरतमंद को महंगे में बेचे,
राशन वालों ने राशन के दाम बढ़ा दिए,
और सब छोड़ो एक गांव में गुटके की पुड़ियाँ 50 से 100 रुपए तक बिकीं, गुमटी चलाने वाले ने लाखों कमा लिए।
यहाँ हर इंसान दूसरे के लिए बस एक वस्तु है… जितना निचोड़ सको निचोड़ लो।
सरकार इंडिगो को दोष देगी,
इंडिगो नए लागू हुए नियमों को,
इंडिगो के पायलट ओवर टाइमिंग को,
और आम आदमी… वो उसी पर गुस्सा निकाल देगा जिस पर चल पाए।
जब मार्केट में सिर्फ एक प्लेयर बचता है, मनमानी उसी की चलती है — बस बात यही समझ लीजिए।
इंडिगो को नियम पहले से पता थे, लेकिन उसे लगा —
"हम भगवान हैं, कुछ भी नहीं मानेंगे"
और आज उसने लोगों को बेहाल करके सरकार पर ठीकरा फोड़ दिया।
दूसरी तरफ देश का एविएशन सिस्टम —
दशकों तक प्राइवेट प्लेयर्स को इतना पुश किया कि एक अच्छी-भली सरकारी कंपनी बैकफुट पर आ गई।
और जब किसी दूसरे प्राइवेट प्लेयर से उसी बड़ी कंपनी को फिर से चलाने की कोशिश की,
तो हम सब उसका हाल देख ही रहे हैं।
इधर लोग बेचारे इतना चिल्लाने के बाद भी —
कोई अपनी परीक्षा में नहीं पहुँच पा रहा,
कोई अपने रिसेप्शन में नहीं पहुँच पा रहा,
कोई मृत्यु में शामिल होने के लिए नहीं पहुँच पा रहा।
और इन सबको अंत में एक "सॉरी" के अलावा क्या मिलेगा?
जो समय इनके हाथ से निकल गया — कोई लौटा पाएगा?
और ये स्क्रिप्ट भी किसी से लड़ाई या बहसबाजी के लिए नहीं,
बस हालात देखकर मन खराब है और दिमाग में यही सब चल रहा है।
"ऐसा कोई सगा नहीं जिसको हमने ठगा नहीं"
जिस देश में आंगनबाड़ी में नौकरी लेने के लिए भी रिश्वत देनी पड़ती हो,
और बड़े ओहदों पर पहुंचने के लिए भी,
वहाँ हर कोई अपनी-अपनी ताकत के हिसाब से ठग है।
5 months ago | [YT] | 7
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True Story Point
गज़ब क्यूटियापा है... चाइनीज टिकटॉक से लेकर अमेरिकन फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्स ऐप को सारा एक्सेस देने वाले लोगों को लग रहा संचार साथी ऐप से मोदी जी इनकी जासूसी कर लेंगे। 🤣🤣
5 months ago | [YT] | 2
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True Story Point
इस फोटो मे कितने कुत्ते है??? मुझे तो दो दिख रहे है
6 months ago | [YT] | 7
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True Story Point
👏आभार देश के खुफिया विभाग का आप लोग के सूझ बुझ से इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला 99% नाकाम किया गया , 3 हजार RDX पकड़ाया गया
कल रात से यही सोच रहा था मै अगर देश के खुफिया एजेंसी को भनक नहीं लगता तो कल्पना से परे भयावह नुकसान होता
कल जो बम ब्लास्ट हुवा वो आतंकियों ने हड़बड़ी में डर से किया बिना प्लानिंग का इसलिए 1% आतंकी लोग कामयाब रहे और 99% हमारे खुफिया विभाग सफल रहे
वक्त आ गया है पाकिस्तान आतंक के आका,भारत के गद्दारों पे आखिरी किल ठोका जाए आतंक का समूचा विनाश किया जाए इस बार
6 months ago | [YT] | 0
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