☝🏻 *सूरत आश्रम तो मेरा हृदय है ये पूज्यश्री के श्रीवचन है ऐसे सूरत आश्रम का ये नजारा आपने कभी नही देखा होगा | youtu.be/Wof-fltzyBo?si=L1QGd0RWseFeUuQd 🕉️


Surat Ashram

🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹⤵️
https://youtu.be/30P0KN2DjIM?si=O00x1...

🌷 *इलायची* 🌷

➡ *इलायची औषधीय रूप से अति महत्त्वपूर्ण है | यह दो प्रकार की होती है – छोटी व बड़ी |*

➡ *छोटी इलायची : यह सुंगधित, जठराग्निवर्धक, शीतल, मूत्रल, वातहर, उत्तेजक व पाचक होती है | इसका प्रयोग खाँसी, अजीर्ण, अतिसार, बवासीर, पेटदर्द, श्वास ( दमा ) तथा दाहयुक्त तकलीफों में किया जाता है |*

💊 *औषधीय प्रयोग* 💊

👉🏻 *- अधिक केले खाने से हुई बदहजमी एक इलायची खाने से दूर हो जाती है |*

👉🏻 *- धूप में जाते समय तथा यात्रा में जी मिचलाने पर एक इलायची मुँह में डाल दें |*

👉🏻 *- १ कप पानी में १ ग्राम इलायची चूर्ण डाल के ५ मिनट तक उबालें | इसे छानकर एक चम्मच शक्कर मिलायें | २ – २ चम्मच यह पानी २ – २ घंटे के अंतर से लेने से जी – मिचलाना, उबकाई आना, उलटी आदि में लाभ होता है |*

👉🏻 *- छिलके सहित छोटी इलायची तथा मिश्री समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बना लें | चुटकीभर चूर्ण को १ -१ घंटे के अंतर से चूसने से सूखी खाँसी में लाभ होता है | कफ पिघलकर निकल जाता है |*

👉🏻 *- रात को भिगोये २ बादाम सुबह छिलके उतारकर घिस लें | इसमें १ ग्राम इलायची चूर्ण, आधा ग्राम जावित्री चूर्ण, १ चम्मच मक्खन तथा आधा चम्मच मिश्री मिलाकर खाली पेट खाने से वीर्य पुष्ट व गाढ़ा होता है |*

👉🏻 *- आधा से १ ग्राम इलायची चूर्ण का आँवले के रस या चूर्ण के साथ सेवन करने से दाह, पेशाब और हाथ-पैरों की जलन दूर होती है |*
👉🏻 *- आधा ग्राम इलायची दाने का चूर्ण और १-२ ग्राम पीपरामूल चूर्ण को घी के साथ रोज सुबह चाटने से ह्रदयरोग में लाभ होता है |*
👉🏻 *- छिलके सहित १ इलायची को आग में जलाकर राख कर लें | इस राख को शहद मिलाकर चाटने से उलटी में लाभ होता है |*

👉🏻 *- १ ग्राम इलायची दाने का चूर्ण दूध के साथ लेने से पेशाब खुलकर आती है एवं मूत्रमार्ग की जलन शांत होती है |*

💥 *सावधानी : रात को इलायची न खायें, इससे खट्टी उकारें आती है | इसके अधिक सेवन से गर्भपात होने की भी सम्भावना रहती है |*


🙏🏻 *ऋषि प्रसाद - जून 2013*

8 hours ago | [YT] | 342

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😱 *कैसी भयंकर दुर्गति*⤵️
https://youtu.be/YP8aIUTq9bY?si=B02q6...

🌹 *श्री रामचरितमानस के उत्तरकांड में गरुड़ जी काकभुशुंडिजी से पूछते हैं- ‘कौन सा दुःख सबसे बड़ा है ? आप संत और असंत के मर्म (भेद) को जानते हैं, उनके सहज स्वभाव का वर्णन कीजिये। श्रुतियों में प्रसिद्ध सबसे महान पुण्य कौन-सा है और सबसे भयंकर पाप कौन सा है ?*

🌹 *काकभुशुंडिजी कहते हैं- “हे तात ! बड़े आदर के साथ और प्रेम से सुनो।*

🌷 *दरिद्रता (अज्ञान) से बढ़कर दुःख संसार में कोई नहीं है।संसार में जो आसक्ति है, यही सभी दुःखों का कारण है और संत-मिलन के समान जगत में कोई दूसरा सुख नहीं है।*

👉🏻 *हे गरुड़ ! मन, वचन, शरीर से दूसरे पर उपकार करना संत का सहज स्वभाव है। संत दूसरे के हित के लिए दुःख सहते हैं और असंत, अभागी दूसरे को दुःख देने के लिए सब कुछ करते हैं।”दुष्ट बिना स्वार्थ के भी दूसरे को हानि पहुँचाता है। जैसे साँप डंक मारता है तो उसको कुछ खाने-पीने को मिलता है ? बस, दूसरे के अंदर जहर डालता है।*

🐭 *चूहा भी दूसरों का कपड़ा काट देता है तो क्या उसका पेट भरता है ? नहीं, वह निरर्थक दूसरों को हानि पहुँचाता है। ओले बरसकर गेहूँ चने को नष्ट करके स्वयं धरती में मिट्टी में मिल गये, दुष्ट का भी जन्म जगत के अनर्थ के लिए है।*

🌹 *संत उदय संतत सुखकारी ‘संत का उदय, जन्म, अभ्युदय हमेशा वैसे ही सुखकारी होता है जैसे चन्द्रमा और सूर्य का उदय लोगों के लिए हितकारी है।‘परम धर्म श्रुति बिदित अहिंसा’– श्रुति विदित परम धर्म है दूसरे को कष्ट नहीं पहुँचाना, जानबूझकर किसी को तकलीफ न देना।*

👉🏻 *दूसरे की निंदा करने से बढ़कर दूसरा कोई पाप नहीं है। जो भगवान और गुरु की निंदा करता है, वह मेंढक होता है। टर्र… टर्र…..तो बहुत करे लेकिन ऐसी जीभ का क्या होना और क्या न होना ! जीभ निंदा करने के लिए नहीं मिली है, यह तो भगवद्-गुणानुवाद के लिए मिली है।*

🌹 *ब्राह्मण (ब्रह्म में रमण करने वाले संत-महापुरुषों)का निंदक बहुत नरक-भोग के बाद कौए का शरीर धारण करके संसार में पैदा होता है और व्यर्थ काँव-काँव करता है क्योंकि पहले जो बोलने की शक्ति मिली थी, वह तो निंदा करने में खर्च कर दी।*

🌹 *सुर श्रुति निंदक जे अभिमानी।रौरव नरक परहिं ते प्रानी।।*

🌹 *होहिं उलूक संत निंदा रत।मोह निसा प्रिय ग्यान भानु गत।।‘*

🌹 *जो अभिमानी जीव देवताओं और वेदों की निंदा करते हैं, वे रौरव नरक में पड़ते हैं। संतों की निंदा में लगे हुए लोग उल्लू होते हैं, जिन्हें मोहरूपी रात्रि प्रिय होती है और ज्ञानरूपी सूर्य जिनके लिए बीत गया (अस्त हो गया) रहता है।*

👉🏻 *जो मूर्ख मनुष्य सबकी निंदा करते हैं वे चमगादड़ होकर जन्म लेते हैं। कैसी भयंकर दुर्गति होती है निंदा करने वालों की !*


🌹 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, अक्तूबर 2015, पृष्ठ संख्या 8, अंक 274* 🕉

8 hours ago | [YT] | 221

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🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹⤵️
https://youtu.be/iNmd_Q9YNLs?si=pw7YO...

🌷 *सास -बहू के बीच अनबन होती हो तो* 🌷

👩🏻 *घर में सास -बहू के बीच अनबन होती हो तो सास -बहू दोनों मिलकर एक बढ़िया फोटो खिंचवा लें ....एक दूसरे को फूल देते हुए .... मुस्कुराते हुए। वो फोटो घर में दक्षिण और पश्चिम के बीच के कोने पर लगा दें ..... भगवान का नाम ले कर । फिर देखो सास -बहू के बीच कैसा प्रेम होगा ।*

🙏🏻 *श्री सुरेशानंदजी - वडोदरा 9/11/2011* 🌹

1 day ago | [YT] | 1,206

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💪🏻 *केवल तभी तुम वास्तव में हिन्दू कहलाने योग्य हो…. स्वामी विवेकानंद जी* 🌷⤵️
https://youtu.be/DuetvSMlT2I?si=vLwYG...

🌷 *यदि कोई हिन्दू धार्मिक नहीं है तो मैं उसे हिन्दू ही नहीं कहूँगा। दूसरे देशों में भले ही मनुष्य पहले राजनैतिक हो और फिर धर्म से थोड़ा सा लगाव रखे पर यहाँ भारत में तो हमारे जीवन का सबसे बड़ा एवं प्रथम कर्तव्य धर्म का अनुष्ठान है और फिर उसके बाद यदि अवकाश मिले तो दूसरे विषय भले ही आ जायें। इस तथ्य को ध्यान में रखने से हम यह बात अधिक अच्छी तरह समझ सकेंगे कि अपने जातीय हित के लिए हमें आज क्यों सबसे पहले अपनी जाति की समस्त आध्यात्मिक शक्तियों को ढूँढ निकालना होगा, जैसा की अतीत काल में किया गया था और चिरकाल तक किया जायेगा। अपनी बिखरी हुई आध्यात्मिक शक्तियों को एकत्र करना ही भारत में हिन्दुत्व की एकता स्थापित करने का एकमात्र उपाय है।*

🌷 *जिनके हृदय एक ही आध्यात्मिक स्वर में बँधे हैं, उन सबके सम्मिलन से ही भारत में हिन्दुओं का संगठन होगा।मेरी बात पर ध्यान दो, केवल तभी तुम वास्तव में हिन्दू कहलाने योग्य होगे जब ‘हिन्दू’ शब्द सुनते ही तुम्हारे अंदर बिजली दौड़ने लग जायेगी। केवल तभी तुम सच्चा हिन्दू कहला सकोगे, जब तुम किसी भी प्रान्त के, कोई भी भाषा बोलने वाले प्रत्येक हिंदू-संज्ञक व्यक्ति को एकदम अपना सगा समझने लगोगे। केवल तभी तुम सच्चे हिन्दू माने जाओगे, जब किसी भी हिन्दू कहलाने वाले का दुःख तुम्हारे हृदय में तीर की तरह आकर चुभेगा, मानो तुम्हारा अपना लड़का ही विपत्ति में पड़ गया हो।तब तक भारत का उद्धार असम्भव है…लोग भारतोद्धार के लिए जो जी में आये कहें, मैं जीवनभर काम करता रहा हूँ, कम से कम, काम करने का प्रयत्न करता रहा हूँ। मैं अपने अनुभव के बल पर तुमसे कहता हूँ कि जब तक तुम सच्चे अर्थों में धार्मिक नहीं होते तब तक भारत का उद्धार होना असम्भव है। केवल भारत ही क्यों, सारे संसार का कल्याण इसी पर निर्भर है। कारण, मैं तुम्हें स्पष्टतया बताये देता हूँ कि इस समय पाश्चात्य सभ्यता अपनी नींव तक हिल चुकी है।*

🌷 *भौतिकवाद की कच्ची रेतीली नींव पर खड़ी होने वाली बड़ी-से-बड़ी इमारतें भी एक-न-एक दिन अवश्य ढह जायेंगी। इस विषय में संसार का इतिहास ही सबसे बड़ा साक्षी है। जाति पर जातियाँ उठी हैं और भौतिकवाद की नींव पर उन्होंने अपने गौरव का प्रसाद (महल) खड़ा किया है। उन्होंने एक दूसरे की अपेक्षा अपना सिर ऊपर उठाया है तथा संसार के समक्ष यह घोषणा की है कि जड़ के सिवाय मनुष्य और कुछ नहीं है।*

🌷 *ध्यान दो, पाश्चात्य भाषा में मृत्यु के लिए कहते हैं- “मनुष्य आत्मा छोड़ता है। (A man gives up the ghost.)” पर हमारी भाषा में- “मनुष्य शरीर छोड़ता है।”पाश्चात्य देशवासी अपने संबंध में कहते समय पहले देह को ही लक्ष्य करता है, उसके बाद उसका एक आत्मा है इस प्रकार वह उल्लेख करता है। पर हम लोग सबसे पहले अपने को आत्मा समझते हैं, उसके बाद हमारी एक देह है ऐसा कहा करते हैं। इन दो विभिन्न वाक्यों की छान-बीन करने पर तुम देखोगे कि प्राच्य (पूर्व) और पाश्चात्य विचार प्रणाली में कितना अन्तर है। इसीलिए जितनी सभ्यताएँ भौतिक सुख-सुविधा की रेतीली नींव पर कायम हुई थीं, वे सभी थोड़े ही समय के लिए जीवित रहकर एकर-एक करके लुप्त हो गयीं परंतु भारत की सभ्यता, यही क्यों, भारत के चरणों के पास बैठकर शिक्षा ग्रहण करने वाले चीन और जापान की सभ्यता आज भी जीवित है, और इतना ही नहीं बल्कि उनमें पुनरुत्थान के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं।*

🌷 *फिनिक्स (ग्रीक दंतकथाओं के अनुसार फिनिक्य एक ऐसी चिड़िया है जो 500 वर्ष तक जीकर एक चिता पर स्वयं को जला देती है और पुनः अपने भस्म से जी उठती है) के समान हजारों बार नष्ट होने पर भी वे पुनः अधिक तेजस्वी होकर प्रस्फुरित होने को तैयार है। पर भौतिकवाद के आधार पर जो सभ्यताएँ स्थापित हैं, वे यदि एक बार नष्ट हो गयीं तो फिर उठ नहीं सकतीं। एक बार यदि महल ढह गया तो बस,सदा के लिए धूल में मिल गया। अतएव धैर्य के साथ राह देखते रहो, हम लोगों का भविष्य उज्जवल है।‘*

🌷 *अपने को हिन्दू बताते हुए मुझे गर्व होता है’उतावले मत बनो, किसी दूसरे का अनुकरण करने की चेष्टा मत करो। दूसरे का अनुकरण करना सभ्यता की निशानी नहीं है। यह एक बड़ा पाठ है, जो हमें याद रखना है। मैं यदि आप ही राजा की सी पोशाक पहन लूँ तो क्या इतने से ही मैं राजा बन जाऊँगा ? शेर की खाल ओढ़कर गधा कभी शेर नहीं बन सकता। अनुकरण करना – हीन और डरपोक की तरह अनुकरण करना कभी उन्नति के पथ पर आगे नहीं बढ़ा सकता। वह तो मनुष्य के अधःपतन का लक्षण है। जब मनुष्य अपने-आपसे घृणा करने लग जाता है, तब समझना चाहिए कि उस पर अंतिम चोट बैठ चुकी है। जब वह अपने पूर्वजों को मानने में लज्जित होता है तो समझ लो कि उसका विनाश निकट है। यद्यपि मैं हिन्दू जाति में एक नगण्य व्यक्ति हूँ तथा अपनी जाति और अपने पूर्वजों के गौरव से मैं अपना गौरव मानता हूँ। अपने को हिन्दू बताते और हिन्दू कहकर अपना परिचय देते हुए मुझे एक प्रकार का गर्व होता है।*

🌹 *स्रोतः ऋषि प्रसाद, नवम्बर 2017, पृष्ठ संख्या 28,29 अंक 299 ॐॐ* 🌹

1 day ago | [YT] | 921

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https://youtu.be/iNmd_Q9YNLs?si=pw7YO...
👵🏻 *सास बहू की अनबन को झटपट सुलझाने का सुगम साधन* ⤴️

1 day ago | [YT] | 253

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https://youtu.be/iNmd_Q9YNLs?si=pw7YO...
👵🏻 *सास बहू की अनबन को झटपट सुलझाने का सुगम साधन* ⤴️

1 day ago | [YT] | 2

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https://youtu.be/iNmd_Q9YNLs?si=pw7YO...
👵🏻 *सास बहू की अनबन को झटपट सुलझाने का सुगम साधन* ⤴️

1 day ago | [YT] | 789

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🌹 *ॐ आज की टिप्स ॐ* 🌹⤵️
https://youtu.be/564pGup6sbU?si=xk_y8...

*दरिद्रतानाशक सरल शास्त्रीय प्रयोग - पूज्य बापूजी*

*पद्म पुराण के पाताल खंड में लिखा है कि 'पीपल को जल देनेवाला व्यक्ति दरिद्रता से छूट जाता है। उसके दुःस्वप्न (बुरे स्वप्न), दुश्चिता, सम्पूर्ण दुःख और कालकर्णी (एक तरह का रोग) नष्ट हो जाते हैं। जो बुद्धिमान पीपल देव की पूजा करते हैं उनके पितर तृप्त हो जाते हैं, भगवान विष्णु की आराधना हो जाती है और उनके घर की सभी पूजाएँ सफल हो जाती हैं। अष्टांग योग का साधन करने, स्नान करके पीपल के वृक्ष को सींचने और गोविंद भगवान का पूजन करने से मनुष्य की दुर्गति कभी भी नहीं होती ।'*

*खाली पीपल को सींचते रहने से दरिद्रता दूर हो जाती है। मैंने दरिद्रता दूर करने के लिए जल नहीं सींचा लेकिन जल सींचता था तो मैंने कई बार सब कुछ फेंका (त्याग दिया) फिर भी कभी भी दरिद्रता का दिन नहीं आया। यह बिल्कुल सत्य बात है। इसमें जरा भी झूठ-कपट, छल नहीं है।*



📖 *ऋषि प्रसाद - जुलाई 2026 से संकलित*

2 days ago | [YT] | 1,491