Innovative Ashutosh

Ashutosh Kumar.
Trained Graduate Science Teacher,Bokaro,Jharkhand.[Member Of State Author Panel And KRP-JCERT,Ranchi(Jharkhand)] Teacher Educator,Master Trainer,Educator,Singer,Motivator,Entertainer,Teacher,Human Being.
✳️ नाज़ न कर,सब ख़ाक है।
✳️ चैनल पर आप सभी का हार्दिक स्वागत है। Feedback देने और प्रश्न करने के लिए आप सभी का हार्दिक धन्यवाद ! 😊❤️🙏
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Innovative Ashutosh

जब सत्ता पर भ्रष्ट लोग बैठे हों और सत्ता पर पकड़ भ्रष्ट लोगों का हो तो वे पेपर लीक से लेकर पेमेंट लेट तक करते हैं । वह कुछ बोल नहीं पाते इसलिए नहीं कि वह गूँगे हैं बल्कि इसलिए कि उनके मुँह में लड्डू भरा होता है और लालच घेरा रहता है।

#StandWithFutureOfYouth

1 week ago | [YT] | 2

Innovative Ashutosh

#I_Stand_With_Students
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System की खामी के कारण Suicide कर लिए छात्रों की आत्मा को ईश्वर शांति दे और उनके परिवार को दुःख सहने की शक्ति दे ! 🇮🇳🌺🙏 पिछले दिनों से हमलोग देख रहे हैं कि जो लोग क्रिकेट मैच जीतने पर भी पोस्ट किया करते थे। छात्रों के दर्द और आंदोलन पर उनकी जुबान सिली हुई है,अँगुलियों में रस्सी फँस गयी है और हाथ घायल हो गए हैं।😥🤔🤭

1 week ago (edited) | [YT] | 4

Innovative Ashutosh

आख़िर कब तक पीड़ित ही कटघरे में खड़ी की जाएगी?

​आए दिन समाज में ऐसे 'ज्ञान' बाँटने वाले लोग मिल जाते हैं, जिनका पहला काम अपराधी को बचाना और पीड़ित पर सवाल उठाना होता है।

​"लड़की के कपड़े ठीक नहीं थे..."

​"लड़की की सोच ही ख़राब थी..."

​"वह इतनी रात को बाहर क्यों घूम रही थी?"

​हर बार, हर घिनौनी घटना के बाद, ये तथाकथित समाज के ठेकेदार लड़कियों के पहनावे, उनके चरित्र और उनके उठने-बैठने में कोई न कोई बहाना ढूँढकर सारा दोष पीड़ित के सिर मढ़ देते हैं।

​लेकिन संस्कृति और सभ्यता का ढोंग करने वाले इन रक्षकों से आज एक सीधा सवाल है—आज अपराधियों की इस घिनौनी, क्रूर और बीमार सोच पर आप लोग चुप क्यों हैं? इन दरिंदों की हैवानियत को छिपाने के लिए अब आप कौन सा नया बहाना ढूँढकर लाएँगे?

​मोमबत्तियों का वक़्त ख़त्म, अब न्याय की ज़रूरत है

​"जब तक इन नरपिशाचों के मन में मौत का खौफ़ नहीं बैठेगा, तब तक ऐसी दरिंदगी पर लगाम लगाना नामुमकिन है।"


​सिर्फ़ क़ानून की किताबें भर देने से समाज सुरक्षित नहीं होगा। जब तक ऐसे बलात्कारियों और हैवानों को बीच चौराहे पर कड़ी से कड़ी और ऐसी सज़ा नहीं दी जाएगी जो मिसाल बने, तब तक अपराधियों के मन में क़ानून का कोई डर व्याप्त नहीं होगा।

​आज हमें यह समझने की ज़रूरत है:

​यह किसी और की लड़ाई नहीं है: आज यह भयानक हादसा किसी और की बेटी, किसी और के परिवार के साथ हुआ है।

​कल आपकी बारी हो सकती है: अगर आज भी हम चुप रहे और हमारी व्यवस्था गहरी नींद में सोती रही, तो कल यह किसी के भी परिवार के साथ हो सकता है।

​अब वक़्त सिर्फ़ मोमबत्तियाँ जलाकर शोक मनाने या मार्च निकालने का नहीं है। अब वक़्त इन अपराधियों के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद करने, व्यवस्था को जगाने और उन्हें उनके अंजाम तक पहुँचाने का है। ऐसे घिनौने अपराधियों के लिए समाज में कोई जगह नहीं होनी चाहिए—इन्हें जल्द से जल्द, बिना किसी ढिलाई के कड़ी से कड़ी सज़ा मिलनी ही चाहिए।

#innovativeashutosh

2 weeks ago | [YT] | 7

Innovative Ashutosh

शहादत, अधिकार और अधूरी मानवता: एक कड़वा सच

​एक माता-पिता के लिए अपने जीवनकाल में अपने जवान बेटे के शव को देखना दुनिया का सबसे असहनीय और बड़ा दुख है। बिहार के जहानाबाद के रहने वाले फ्लाइट लेफ्टिनेंट शुभम कुमार जी देश की रक्षा करते हुए विमान हादसे में 13 जून 2026 को शहीद हो गए। आज पूरा देश उनकी शहादत को नमन कर रहा है, लेकिन उनके पीछे रोते-बिलखते बूढ़े माता-पिता के आंसू सिर्फ बेटे को खोने के गम के नहीं हैं। वे आंसू उस गहरे धोखे और विश्वासघात के हैं, जो उन्हें अपनों से ही मिला है।

​इस पूरी त्रासदी ने हमारे समाज और व्यवस्था के सामने कुछ ऐसे तीखे और कड़वे सवाल खड़े कर दिए हैं, जिन्हें सुनकर किसी का भी दिल बैठ जाए।

​जब अधिकारों की बात आई, तो कर्तव्यों से मुंह क्यों मोड़ा?

​कानून ने केवल कागजों को देखा। महज चार महीने पहले हुई एक कोर्ट मैरिज के दस्तावेज के आधार पर शहीद की पत्नी को 21 लाख रुपये की अनुग्रह राशि (चेक) सौंप दी गई। कानून के चश्मे से शायद यह फैसला सही हो, लेकिन इंसानियत और नैतिकता के तराजू पर क्या इसे सही ठहराया जा सकता है?

​शहीद शुभम जी के पिता अमरेंद्र शर्मा जी का दर्द सीधे कलेजे को चीरता है। उनका यह सवाल पूरी तरह जायज है:

​"अगर वह बहू है और पैसों पर उसका पूरा अधिकार है, तो दुख की इस घड़ी में उसने बहू का धर्म क्यों नहीं निभाया? पति का अंतिम संस्कार और श्राद्धकर्म जैसी अंतिम रस्मों को बीच में ही छोड़कर, सिर्फ पैसों का चेक लेकर मायके भाग जाना कहाँ का न्याय है?"


​जब आप पत्नी बनकर सारे कानूनी और आर्थिक अधिकार लेने को तत्पर हैं, तो उसी पत्नी के रूप में मिलने वाले दुख, मान-मर्यादा और पारिवारिक जिम्मेदारियों से मुंह कैसे मोड़ सकती हैं? यदि बहू का धर्म नहीं निभाया, तो बहू होने के नाते पैसों पर हक कैसा?

​कागजी दस्तावेज बनाम मां-बाप का जीवनभर का त्याग

​यह दुनिया का एक बेहद कड़वा और व्यावहारिक सच है कि वह लड़की आज नहीं तो कल अपनी नई जिंदगी शुरू कर लेगी। उसकी दूसरी शादी हो जाएगी, उसे नया जीवनसाथी मिल जाएगा। लेकिन उन बुजुर्ग माता-पिता का क्या, जिनका बुढ़ापे का इकलौता सहारा हमेशा के लिए छिन गया? उन्हें उनका बेटा कभी वापस नहीं मिलेगा।

​क्या महज कुछ महीनों का एक कानूनी कागज, उस मां की ममता से बड़ा हो गया?

​क्या वह दस्तावेज पिता के जीवनभर के उस त्याग और संघर्ष से ऊंचा हो गया, जिसने अपने लाडले को पाल-पोसकर देश का वीर सिपाही बनाया?

​कानून और सरकार के लिए आत्मचिंतन का समय

​यह घटना इस बात का जीता-जागता सबूत है कि हमारे कानून कभी-कभी भावनाओं, संवेदनाओं और जमीनी हकीकत से कितने दूर हो जाते हैं। इस विषय पर सरकार और नीति-निर्माताओं को बेहद गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।

​नियमों में संशोधन: ऐसे मामलों में जहाँ शादी को कुछ ही दिन या महीने हुए हों, वहाँ शहीद के माता-पिता की सुरक्षा और भविष्य को पूरी तरह अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।

​अनिवार्य हिस्सेदारी: सरकारी नियमों में ऐसा सुधार होना चाहिए जिससे सहायता राशि का एक निश्चित और सम्मानजनक हिस्सा अनिवार्य रूप से बुजुर्ग माता-पिता को मिले, ताकि उन्हें बुढ़ापे में किसी के आगे हाथ न फैलाना पड़े।

​निष्कर्ष

कानून का काम सिर्फ सूखी फाइलें और कागज देखना नहीं, बल्कि वास्तविक न्याय करना है। और न्याय तब तक अधूरा है, जब तक वह उन माता-पिता के आंसू न पोंछ सके जिन्होंने देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। सरकार को इस दिशा में तुरंत कड़े और संवेदनशील कदम उठाने होंगे, ताकि भविष्य में किसी और शहीद के पिता को इस तरह लाचार, ठगा हुआ और आहत न होना पड़े।

यद्यपि अमर उजाला के हवाले से पता चला कि शहीद शुभम कुमार जी के माता-पिता ने अब बातचीत करके भावनात्मक रूप से यह विवाद समाप्त कर लिया है।

#innovativeashutosh

2 weeks ago (edited) | [YT] | 4

Innovative Ashutosh

#JCERT राँची में हम सबकी प्रेरणास्रोत,कर्मठ,ओज से भरी हुईं Anupama Gupta Mam ने अपनी पुस्तक "फर्श से अर्श तक" मुझे उपहार में दिया। इसके लिए उनका हार्दिक धन्यवाद ! 🙏यह पुस्तक जो भी पढ़ेंगे वे खुद सरकारी School से Connect हो जाते हैं। उनकी पुस्तक Amazon पर भी उपलब्ध है।पुस्तक प्रकाशन के लिए उन्हें ढेर सारी हार्दिक शुभकामनाएँ !🌺 कई मौकों पर उनके साथ कार्य करने का सौभाग्य मिला है। हँसमुख प्रकृति की Mam के नाम कई तरह के Medals,प्रशस्ति पत्र हैं।आगे भी वे निरंतर कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते रहें और सफलता की नई सीढ़ियाँ चढ़ते रहें ! 😊🌺🙏

"पुस्तकें मित्र होती है जो राह दिखाती हैं,
पुस्तकें इत्र होती हैं जो महकाती हैं,
किसी व्यक्ति से मिलना तो क्षणिक या घंटे भर का हो सकता है,
पर उनकी पुस्तकें उनके सालों या जीवनभर का अनुभव होती हैं।"

2 weeks ago (edited) | [YT] | 11

Innovative Ashutosh

Census 2027 के First Phase "Houselisting And Housing Census Operation" के Successful निष्पादन हेतु प्रगणकों(Enumerators) को ट्रेनिंग देते हुए एक और राष्ट्रीय कार्य Field Trainer की भूमिका में।
भारत के इतिहास में पहली बार घर-घर जाकर डिजिटल जनगणना 2027 का पहला फेज मकान सूचीकरण। #HLO_App को लेकर..औसतन 20 लोगों के कॉल आ रहे हैं । सबकी एक ही समस्या कि नया लाइन नंबर, मकान नंबर Generate हो जा रहा है।Mismatch हो जा रहा है। मुझे लगता है,ये समस्या 30 से 40% लोगों को हो रही होगी। क्योंकि HLO App को चलाने का Demo कई Training Centers में नहीं मिला था,कारण Charge Office के कर्मी का आलस्य, प्रमाद और कार्य से बचना।इसलिए Testing के लिए User ID और Password Generate ही नहीं किया गया। इस कार्य के लिए दो-तीन शिक्षक ही डेपुट कर लेते। टीचर तो रेगिस्तान में भी तालाब खोद देता है। Direct Field में Login हुआ ये App....
😊

1 month ago | [YT] | 4

Innovative Ashutosh

आर्थिक तंगी के कारण बगैर चिकित्सा के वेल्लोर से वापस लौट रहे हैं खोरठा के चर्चित साहित्यकार, लेखक व लोक कलाकार सुकुमार

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मांदर बाजे रे, बांसी बाजे रे जैसे खोरठा के कालजयी गीत के रचयिता एवं झारखंड की मिट्टी की महक को अपनी सुरीली आवाज और लेखनी से देशभर में पहचान दिलाने वाले खोरठा साहित्यकार, लोक कलाकार और स्वर कोकिल सुरेश कुमार विश्वकर्मा उर्फ सुकुमार आज जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रहे हैं। सुकुमार दा एक गंभीर बीमारी से पीड़ित हैं। दर्दनाक स्थिति यह है कि आर्थिक तंगी के कारण उन्हें तमिलनाडु स्थित सीएमसी वेल्लोर से बिना इलाज कराए ही वापस झारखंड लौटना पड़ रहा है। बोकारो जिले के नावाडीह प्रखंड अंतर्गत भेंडरा गांव निवासी सुकुमार खोरठा भाषा आंदोलन के अग्रदूतों में रहे हैं। उन्होंने अपनी लेखनी और गायिकी से झारखंड की संस्कृति, लोकभाषा और लोक परंपरा को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया। रेडियो, दूरदर्शन और देश के विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर अपनी प्रस्तुति से उन्होंने लाखों लोगों का दिल जीता। उनकी लिखी 12 पुस्तकें वर्तमान में झारखंड के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई जाती हैं, लेकिन विडंबना है कि वही साहित्यकार आज इलाज के लिए पैसों का मोहताज हो गया है। सुकुमार के पुत्र कुणाल भारती ने बताया कि सीएमसी वेल्लोर में इलाज के लिए भारी खर्च बताया गया, जिसे उठाना परिवार के बस की बात नहीं थी। सरकारी सहायता और सामाजिक सहयोग के अभाव में उन्हें मजबूर होकर एम्बुलेंस से अपने पिता को वापस झारखंड लाना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि चंद साथियों से मिले सहयोग और उनके पास बचे हुए पैसों से किसी तरह एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई। दर्जनों सम्मान और पुरस्कारों से सम्मानित सुकुमार की हालत आज समाज और सिस्टम दोनों के लिए बड़ा सवाल बन गई है। जो सरकारें माय-माटी और संस्कृति संरक्षण की बातें करती हैं, उन्हीं के दौर में राज्य का एक अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर इलाज के अभाव में तड़प रहा है। यह केवल एक कलाकार की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरे झारखंड की सांस्कृतिक असंवेदनशीलता की दर्दनाक तस्वीर है। आज जरूरत है कि सरकार, सामाजिक संगठन और सुकुमार के प्रशंसक आगे आएं, ताकि झारखंड की इस अमूल्य आवाज को बचाया जा सके।

साभार-पत्रकार,कलाकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता श्री शेखर शरदेंदु के फेसबुक वॉल से


दुःखद खबर ! 😥अब वे हमारे बीच नहीं रहे । ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे ! 🙏हरि 🕉️🌺

1 month ago (edited) | [YT] | 9

Innovative Ashutosh

#HLO_APP सावधानी:-

1.प्रगणक के द्वारा यदि कोई Entry गलत दे दी गई है तो उस Entry को Delete ना करें, Edit करें। भले ही आप Smart और Mobile Expert हैं लेकिन कई बार Mobile Screen Off होने पर गलत Entry हो जाती है। इससे आपकी Smartness का कोई लेना-देना नहीं है।
2.Delete की गई एंट्री का Line Number और Census House Number किसी और मकान को नहीं दिया जा सकता। वो Skip हो जाएगा।
3. Line Number, Building Number, Census house Number किसी भी स्थिति में बदला नहीं जा सकता तो कृपया ध्यान से एंट्री करें।
4.Line Number ऐप पर series में Auto Generate होता है, भवन संख्या मैनुअली भरा जाता है, Census House Number Series में Auto Generate होता है।
5.Entry करते वक्त यदि किसी वजह से Back हो जरा है तो वो Entry Automatically Data Updation में पहुँच जाती है,वहाँ उसे अपूर्ण दिखाया जाएगा। इसके लिए नई Entry शुरू करने से पहले data Updation में जाकर पहली वाली अपूर्ण एंट्री को एडिट कर पूर्ण करें। फिर अगली एंट्री करें।
6.नजरी नक्शा, ऐप तथा मकान पर भवन संख्या Same होनी चाहिए। तथा ऐप पर डाली गई भवन संख्या एवं ऐप द्वारा Generate जनगणना मकान सँख्या ही मकान पर लिखनी है।
7.Data sync होने के बाद Delete नहीं किया जा सकता।
8.यदि डाटा सिंक हो गया है , और प्रगणक कुछ बदलाव नहीं कर पा रहे है तो सुपरवाइजर उस Entry पर रिमार्क कर के प्रगणक को वापस भेज सकते है फिर प्रगणक Entry में सुधार कर सकते हैं।
9.सुपरवाइजर को प्रगणक द्वारा सिंक किए डाटा की प्रत्येक Entry को Ok या Remark करना है। फिर Sync करना है।
#Census
#नजरी_नक्शा
#Census_2027

1 month ago (edited) | [YT] | 5

Innovative Ashutosh

सभी शिक्षक संघ के प्रतिनिधिमंडल मिले DDC, बोकारो से। हुई सकारात्मक वार्ता। दिया गया ज्ञापन। मिला आश्वासन। बिना किसी अनावश्यक बाधा के मार्च-अप्रैल माह का वेतन निर्गत करने पर हुईं सहमत।
#शिक्षक
#एकता
#जिंदाबाद

1 month ago (edited) | [YT] | 21

Innovative Ashutosh

पूरी मीडिया में ट्रेज़री घोटाले के शोर में बोकारो जिले के सभी कर्मचारियों के दर्द की आवाज कहीं दब सी गई है।ढाई माह से नियमित वेतन नहीं मिलने और प्रशासन की उदासीनता के कारण लाचार होकर AJPTA के प्रदेश महासचिव आदरणीय राममूर्ति ठाकुर की अगुवाई में आज दिनाँक 10 मई 2026 को SBS CHAS में प्राथमिक,उच्च प्राथमिक,माध्यमिक,उच्च माध्यमिक शिक्षक संघों के पदाधिकारियों और सैकड़ों शिक्षकों की उपस्थिति में आपात बैठक आहूत हुई। जो काफी करुण और रोषपूर्ण रही। निर्णय हुआ कि सभी को मिलकर कल उपायुक्त महोदय को ज्ञापन सौंपने के बाद आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की जाएगी। प्रस्ताव के मुख्य बिंदु थे-(1).वेतन जल्द से जल्द निर्गत करवाना। (2).वार्ता से रास्ता न निकलने पर उपायुक्त कार्यालय के बाहर धरना-प्रदर्शन। (3).जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण और मकान गणना का पूर्ण बहिष्कार। (4).सहायक आचार्यों के भी वेतन शुरू कराना। आज की इस बैठक में अखिल झारखंड प्राथमिक शिक्षक संघ के प्रदेश महासचिव राम मूर्ति ठाकुर, जिला अध्यक्ष राजू साहू, उच्च प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष रूपेश कुमार गुप्ता, झारखंड राज्य माध्यमिक शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष वासुदेव सिंह चौधरी, जिला सचिव मुफीद आलम, झारखंड प्लस टू शिक्षक संघ के जिला अध्यक्ष पंकज कुमार सिंह, जिला महासचिव अवनीश कुमार झा आदि उपस्थित थे।
#शिक्षक
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1 month ago (edited) | [YT] | 8