Jain Dharm Activity.(RJ)

It is a platform, where we try to provide references for all Jain religious activities that are performing in our home town. So that anybody can take ideas from these activities.. they can perform like so beautifully.. :-) This Channel is managed by Roopal Jain from Bhilwara Rajasthan..:-)


Jain Dharm Activity.(RJ)

प्रश्नोत्तरी
.....
🍎 1-प्रश्न- प्रतिक्रमण का क्या लक्षण है ?
🍎उत्तर - "मेरा दोष मिथ्या हो" गुरु से ऐसा निवेदन करके अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करना अथवा दिवस और पाक्षिक संबंधी प्रतिक्रमण करना प्रतिक्रमण कहलाता है।
🍎2-प्रश्न- तदुभय प्रायश्चित किसे कहते हैं ?
🍎उत्तर - आलोचना और प्रतिक्रमण दोनों करना तदुभय प्रायश्चित है।
🍎3-प्रश्न-विवेक से क्या अभिप्राय है ?
🍎उत्तर - संसक्त हुए अन्न पान और उपकरण आदि का विभाग करना विवेक प्रायश्चित है।
🍎4-प्रश्न-व्युतसर्ग किसे कहते हैं ?
🍎उत्तर - कायोत्सर्ग आदि करना व्युत्सर्ग है।
🍎5-प्रश्न- तप प्रायश्चित किसे कहते हैं ?
🍎उत्तर- अनशन, अवमौदर्य आदि करना तप प्रायश्चित है।
🍎6- प्रश्न-छेद प्रायश्चित किसे कहते हैं ?
🍎उत्तर - दिन, पक्ष, महीना आदि की दीक्षा का छेद करना छेद प्रायश्चित है।
🍎7-प्रश्न-परिहार प्रायश्चित से क्या आशय है ?
🍎उत्तर - दिन, पक्ष, महीना आदिनियत समय के लिये संघ से पृथक कर देना परिहार कहलाता है।
🍎8-प्रश्न-उपस्थापना प्रायश्चित क्या है ?
🍎उत्तर - संपूर्ण दीक्षा छेदकर फिर से नवीन दीक्षा देना उपस्थापना प्रायश्चित है।
🍎10-प्रश्न-विनय तप के ४ भेद कौन से हैं?
🍎उत्तर - "ज्ञानदर्शनचारित्रोपचाराः" (१) ज्ञान विनय (२) दर्शन विनय (३) चारित्र विनय और (४) उपचार विनय ये विनय के ४ भेद हैं।
🍎11-प्रश्न- ज्ञान विनय किसे कहते हैं ?
🍎उत्तर - बहुत आदर से मोक्ष के लिये ज्ञान का ग्रहण करना, अभ्यास करना और स्मरण करना आदि ज्ञान विनय तप है।

3 weeks ago | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

मंगल shringar

मस्तक का भूषण गुरु आज्ञा, चूड़ामणि तो रागी माने।।
सत्-शास्त्र श्रवण है कर्णों का, कुण्डल तो अज्ञानी जाने ॥१॥

हीरों का हार तो व्यर्थ कण्ठ में, सुगुणों की माला भूषण।
कर पात्र-दान से शोभित हो, कंगन हथफूल तो है दूषण।।२।।

जो घड़ी हाथ में बंधी हुई, वह घड़ी यहीं रह जायेगी।
जो घड़ी आत्म-हित में लागी, वह कर्म बंध विनशायेगी ॥३॥

जो नाक में नथुनी पड़ी हुई, वह अन्तर राग बताती है।
श्वास-श्वास में प्रभु सुमिरन से, नासिका शोभा पाती है।।४।।

होठों की यह कृत्रिम लाली, पापों की लाली लायेगी।
जिसमें बँधकर तेरी आत्मा, भव-भव के दुःख उठायेगी ।।५।।

होठों पर हँसी शुभ्र होवे, गुणियों को लखते ही भाई।
ये होठ तभी होते शोभित, तत्त्वों की चर्चा मुख आई॥६॥

क्रीम और पाउडर मुख को, उज्ज्वल नहिं मलिन बनाता है।
हो साम्यभाव जिस चेहरे पर, वह चेहरा शोभा पाता है॥७॥

आँखों में काजल शील का हो, अरु लज्जा पाप कर्म से हो।।
स्वामी का रूप बसा होवे, अरु नाता केवल धर्म से हो ।।८।

जो कमर करधनी से सुन्दर, माने उस सम है मूढ़ नहीं।
जो कमर ध्यान में कसी गई, उससे सुन्दर है नहीं कहीं।।९।।

पैरों में पायल ध्वनि करतीं, वे अन्तर द्वन्द्व बताती हैं।
जो चरण चरण की ओर बढ़े, उनके सन्मुख शरमाती हैं॥१०॥

जड़ वस्त्रों से तो तन सुन्दर, रागी लोगों को दिखता है।
पर सच पूछो उनके अन्दर, आतम का रूप सिसकता है ।।११।।

जब बाह्य मुमुक्षु रूप धार, ज्ञानाम्बर को धारण करता।
अत्यन्त मलिन रागाम्बर तज, सुन्दर शिवरूप प्रकट करता ॥१२॥

एकत्व ज्ञानमय ध्रुव स्वभाव ही, एक मात्र सुन्दर जग में।
जिसकी परिणति उसमें ठहरे, वह स्वयं विचरती शिवमग में ।।१३।।

वह समवसरण में सिंहासन पर, गगन मध्य शोभित होता/ गगन मध्य ही तिष्ठाता
रत्नत्रय के भूषण पहने, अपनी प्रभुता को प्रगटाता ।।१४।।

पर नहीं यहाँ भी इतिश्री, योगों को तज स्थिर होता।
अरु एक समय में सिद्ध हुआ, लोकाग्र जाय अविचल होता ॥१५॥

Artist - ब्र. श्री रवीन्द्र जी ‘आत्मन्’

1 month ago | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

प्रश्नोत्तरी
✍️संकलनकर्ता पंडित जी भरत उपाध्याय ...
🔆1-प्रश्न- परिग्रह सुख का कारण हो सकता है क्या?
🔆उत्तर-नहीं, यदि अग्नि ठंडी हो जाये, विष अमृत हो जाये और आकाश में बिजली स्थिर हो जाये तो परिग्रही जीव भी सुखी हो सकता है।
🔆2-प्रश्न- जघन्य श्रावक का लक्षण बतलाओ।
🔆उत्तर- जो अपने धन के दो भाग परिवार के लिये, तीन भाग संचय के लिये और दसवाँ भाग दान के लिये रखता है, वह जघन्य श्रावक माना गया है।
🔆 3-प्रश्न-मध्यम श्रावक का लक्षण बतलाओ।
🔆उत्तर - जो अपनी आय के तीन भाग कुटुम्ब के लिये, दो भाग खजाने के लिये और छठवाँ भाग दान के लिये रखता है, वह मध्यम श्रावक माना गया है।
🔆4-प्रश्न-उत्तम श्रावक का लक्षण बतलाओ।
🔆उत्तर- जो अपने धन के दो भाग कुटुम्ब के लिये, तीसरा भाग खजाने के लिये और चौथा भाग दान धर्म के लिये रखता है, वह उत्तम श्रावक है।
🔆 5-प्रश्न-श्रावक का लक्षण बतलाओ।
🔆उत्तर -देवशास्त्रगुरुवांच भक्तो दानदयान्वितः ।
मदाष्ठ व्यसनैहींनः श्रावकः कथितो जिनैः ।।
अर्थ- जो देव, शास्त्र और गुरु का भक्त हो, दान और दया से सहित, आठ मद व सप्त व्यसनों से रहित हो, उसे श्रावक कहा है।
🔆6-प्रश्न- धरोहर किसके पास रखी जाती है?
🔆उत्तर - धर्म के ज्ञाता, कुलीन, सत्य व्यवहारी, न्यायवान, व्रतों से सुशोभित, सदाचार में तत्पर, क्रोध रहित, शुद्ध और बहुकुटुम्बी मनुष्य के पास ही धन, आभूषणादि चाँदी, सोना, घोड़ा तथा हाथी आदि वस्तुएँ धरोहर रूप में रखी जाती है। अन्यथा वे निःसंदेह नष्ट हो जाती है।

1 month ago | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

प्रश्नोत्तरी
✍️संकलनकर्ता पंडित जी भरत उपाध्याय .......
🔆1-प्रश्न -अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ, सहित जीवों की उत्पत्ति के स्थान बताओ?
🔆उत्तर - अनंतानुबंधी क्रोध, मान, माया, लोभ, सहित जीवों की उत्पत्ति नरकायु में होती है।
🔆2-प्रश्न-अप्रत्याख्यान क्रोध, मान, माया, लोभ, किसके समान है ?
🔆उत्तर - अप्रत्याख्यान क्रोध- पृथ्वी रेखा के समान अप्रत्याख्यान मान- हड्डी समान भाव अप्रत्याख्यान माया- मेढ़े के सींग समान भाव अप्रत्याख्यान लोभ - गाड़ी के ओंगण के समान
🔆3-प्रश्न-अप्रत्याख्यान क्रोध, मान, माया, और लोभ सहित जीवों की उत्पत्ति के स्थान बताओ।
🔆उत्तर - अप्रत्याख्यान क्रोध, मान, माया, और लोभ सहित जीवों की उत्पत्ति तिर्यंचायु में होती है।
🔆4-प्रश्न- प्रत्याख्यान क्रोध, मान, माया, लोभ, किसके समान है ?
🔆उत्तर - प्रत्याख्यान क्रोध - धूलि रेखा के समान प्रत्याख्यान मान- काष्ठ समान भाव प्रत्याख्यान माया- गोमूत्र समान भाव प्रत्याख्यान लोभ शरीर के मैल समान
🔆 5-प्रश्न-प्रत्याख्यान क्रोध, मान, माया, लोभ, सहित जीवों की उत्पत्ति के स्थान बताओ?
🔆उत्तर - प्रत्याख्यान क्रोध, मान, माया, लोभ, सहित जीवों की उत्पत्ति मनुष्यायु में होती है।
🔆6-प्रश्न-संज्वलन क्रोध, मान, माया, लोभ, किसके समान है ?
🔆उत्तर- संज्वलन क्रोध- जल रेखा के समान संज्वलन मान- बेंत के समान भाव संज्वलन माया- खुरपे के समान भाव संज्वलन लोभ हल्दी के रंग समान
🔆7-प्रश्न- संज्वलन प्रत्याख्यान, अप्रत्याख्यान और अनंतानुबंधी कषायों का वासनाकाल कितना है ?
🔆उत्तर - संज्वलन कषाय का वासनाकाल अंतर्मुहूर्त है, प्रत्याख्यान कषाय का एक पक्ष अप्रत्याख्यान कषाय का छह महीना तथा अनंतानुबंधी का संख्यात, असंख्यात और अनन्तभव है।

1 month ago | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

प्रश्नोत्तरी
✍️संकलनकर्ता पंडित जी भरत उपाध्याय सांगली
.......
📚1-प्रश्न-द्रव्यमोक्ष किसको कहते हैं ?
📝उतर-ज्ञानावरणादि आठों कर्मों से आत्मा का पृथक् हो जाना द्रव्यमोक्ष है।
📚2-प्रश्न-भावमोक्ष किसे कहते हैं ?
📝उत्तर-कर्म आगमन के कारणभूत राग-द्वेषादि भावों का नाश हो जाना भावमोक्ष है।
📚3-प्रश्न-पुण्य किसको कहते हैं ?
📝उत्तर-जो आत्मा को पवित्र करता है अथवा पवित्रता की ओर ले जाता है, वह पुण्य कहलाता है।
📚 4-प्रश्न-पुण्य के कितने भेद हैं ?
📝उत्तर-पुण्य के दो भेद हैं-भाव पुण्य और द्रव्य पुण्य।
📚5-प्रश्न-द्रव्य पुण्य किसे कहते हैं ?
📝उत्तर-कर्मजन्य पुण्य प्रकृतियों को द्रव्य पुण्य कहते हैं।
📚6-प्रश्न-भाव पुण्य किसे कहते हैं ?
📝उत्तर-जीव के जिन परिणामों से शुभ कर्म प्रकृतियों का आगमन होता है, वह परिणाम भाव पुण्य है।
📚7-प्रश्न-पाप किसे कहते हैं ?
📝उत्तर-जो आत्मा को शुभ क्रियाओं में नहीं जाने देता, जो आत्मा का पतन करता है, वह पाप कहलाता है।
📚8-प्रश्न-पाप के कितने भेद है ?
📝उत्तर-पाप के दो भेद हैं-भाव पाप और द्रव्य पाप।
📚9-प्रश्न-भाव पाप किसे कहते हैं ?
📝उत्तर-मिथ्यात्व आदि जीव के परिणामों को भाव पाप कहते हैं ?
📚10-प्रश्न-द्रव्य पाप किसे कहते हैं ?
📝उत्तर-मिथ्यात्वादि अशुभ कर्म प्रकृतियों को द्रव्य पाप कहते हैं।

1 month ago | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

*💢A. B. C. D तो सभी को आती होगी पर ऐसे नही आती होगी...🤔*
👌👌👌👌👌👌👌👌👌
*(1)🙏A-अरिहंत का ध्यान करो*

*(2)🙏B-बारह भावना ध्याओ*

*(3)🙏C-चोरी मत करो*

*(4)🙏D-दया करो*

*(5)🙏E-एहसान करो*

*(6)🙏F-फालतू ना बोलो*

*(7)🙏G-गुरुवर की वाणी सुनो*

*(8)🙏H-हिंसा छोडो*

*(9)🙏I-ईमानदार बनो*

*(10)🙏J-जैनिज़्म को जानो*

*(11)🙏K- कर्म अच्छे करो*

*(12)🙏L-लोभ मत करो*

*(13)🙏M-महावीर बनो*

*(14)🙏N-नमस्कार करो*

*(15)🙏O-औरतों की कदर करो*

*(16)🙏P- पाप छोड़ो*

*(17)🙏Q-क्यु दुसरो की निंदा करें*

*(18)🙏R-राग द्वेष ना करो*

*(19)🙏S-शास्त्र पढो*

*(20)🙏T-तीर्थंकर प्रभु को नमस्कार करो*

*(21)🙏U-उम्मीद रखो*

*(22)🙏V-विषय कषाय त्यागो*

*(23)🙏W-वक्त की कदर करो*

*(24)🙏X-एक्ट्रा टाईम निकालकर किसी गरीब की मदद करो*

*(25)🙏Y-यात्रा तीर्थ की करो*

*(26)🙏Z-जरा इस मैसेज को सबको करो…!!!*
*🙏जय जिनेंद्र🙏*

*👉सभी जैन समाज ग्रुप में भेजे👈*

🙏🌻🌻🌹🌳🌹🌻🌻🙏

1 month ago | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

प्रश्नोत्तरी
✍️संकलनकर्ता पंडित जी भरत उपाध्याय सांगली
.....
🔆1-प्रश्न-हिंसादि पांच पापों में प्रसिद्ध होने वाले व्यक्तियों के नाम बताइये ।
🔆उत्तर - हिंसा पाप में धनश्री असत्य पाप में सत्यघोष चोरी पाप में तापस चोर अब्रह्म या कुशील पाप में यमदण्ड कोतवाल परिग्रह पाप में श्मश्रुनवनीत
🔆2-प्रश्न- अहिंसा आदि पांच व्त्रतों में प्रसिद्ध महापुरुषों के नाम बताओ ?
🔆उत्तर - अहिंसा अणुव्रत में यमपाल चाण्डाल, सत्यव्रत में धनदेव सेठ, अचौर्याणुव्रत में वणिक पुत्री नीली, परिग्रहपरिमाणव्रत में राजा जय प्रसिद्ध हुए।
🔆3-प्रश्न-व्रती का लक्षण क्या है ?
🔆उत्तर- "निःशल्योव्रती" जो शल्य रहित होता है वह व्रती होता है।
🔆4-प्रश्न-शल्य किसे कहते हैं ?
🔆उत्तर - पीड़ा देने वाली वस्तु अथवा शरीर और मन संबंधी कष्ट का जो कारण है वह शल्य है।
🔆5- प्रश्न-शल्य के कितने भेद हैं ?
🔆उत्तर - शल्य के ३ भेद हैं:- १. माया शल्य, २. मिथ्या शल्य, ३. निदान शल्य।
🔆6- प्रश्न-माया शल्य क्या है ?
🔆उत्तर - ठगने या छल कपट करने की प्रवृत्ति का नाम माया शल्य है।
🔆7-प्रश्न-मिथ्या शल्य क्या है ?
🔆उत्तर - तत्वों का विपरीत श्रद्धान मिथ्या शल्य है।
🔆8-प्रश्न-निदान शल्य क्या है ?
🔆उत्तर - भोगों की लालसा बनी रहना निदान शल्य है।
🔆9-प्रश्न-अहिंसादि व्रतों के पालन का फल विशेष रूप से क्या है ?
🔆उत्तर - एकदेश अहिंसादि व्रतों को पालन करने वाला क्रमशः स्वर्गसुखों को प्राप्त कर परंपरा से मुक्ति को प्राप्त करता है। पूर्ण अहिंसादिव्रतों के पालन का फल है रागादि भावों का अभाव करके आत्म स्वरूप में लीन होकर मोक्ष पद की प्राप्ति होना।

1 month ago | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

📚आज के प्रश्न

(१) नारायण कितने होते हे
उत्तर- 9

(२) प्रतिनारायण कितने होते हे
उत्तर- 9

(३) चक्रवर्ती कितने होते हे
उत्तर- 12

(४) नारद कितने प्रकार के होते हे
उत्तर-9

(५)बलभद्र प्रकार के होते हे
उत्तर-9

(६) कुलकर पुरुष कितने होते हे
उत्तर- 14

(७) रुद्र कितने होते हे
उत्तर- 11

(८) अभक्ष्य के कितने भेद हे
उत्तर- 22

(९) मिथ्या ज्ञान कितने होते हे
उत्तर- 5

1 month ago (edited) | [YT] | 0

Jain Dharm Activity.(RJ)

`ॐ नमः सिद्धेभ्यः। श्री वीतरागाय नमः`
*अर्थ:* सभी सिद्ध भगवान को नमस्कार। जो राग-द्वेष से दूर हो चुके हैं उन वीतराग भगवान को नमस्कार।

`ॐ नमो अर्हते भगवते, श्रीमते पार्श्वतीर्थंकराय...`
*अर्थ:* भगवान पार्श्वनाथ को नमस्कार जो 12 सभाओं से घिरे हैं, शुक्ल ध्यान से पवित्र हैं, सब कुछ जानने वाले हैं, स्वयं प्रकट हुए हैं, बुद्ध हैं, परमात्मा हैं, तीनों लोक में महिमा वाले हैं।

*2. "छिंद - छिंद भिंद - भिंद" का मतलब क्या है*
ये सबसे अहम हिस्सा है। यहां भगवान से प्रार्थना है कि हमारे सभी दुख *काट दो, तोड़ दो, नष्ट कर दो*।

*किन चीजों को काटने को बोल रहे हैं:*
- *मृत्यु छिंद* = मौत का डर खत्म कर दो
- *अतिकामं छिंद* = हद से ज्यादा वासना नष्ट कर दो
- *रतिकामं छिंद* = गलत इच्छाएं खत्म कर दो
- *क्रोध छिंद* = गुस्सा नष्ट कर दो
- *अग्निभयं छिंद* = आग का डर खत्म करो
- *सर्वशत्रु भयं छिंद* = सभी दुश्मनों का डर खत्म करो
- *सर्वोपसर्गं छिंद* = सभी उपद्रव/संकट खत्म करो
- *सर्वविघ्नं छिंद* = सारे काम में रुकावटें खत्म करो
- *सर्वभयं छिंद* = हर तरह का डर खत्म करो
- *सर्वराजभयं छिंद* = राजा/सरकार का डर खत्म करो
- *सर्वचौरभयं छिंद* = चोर का डर खत्म करो
- *सर्वदुष्टभयं छिंद* = दुष्ट लोगों का डर खत्म करो

*रोग वाले पार्ट में:*
- *सर्वशूलरोगं छिंद* = पेट दर्द, सिर दर्द जैसे सभी दर्द खत्म करो
- *सर्वक्षयरोगं छिंद* = टीबी जैसे रोग खत्म करो
- *सर्वकुष्ठरोगं छिंद* = कुष्ठ रोग खत्म करो

*महामारी वाले पार्ट में:*
- *सर्वजन्मारीं छिंद* = महामारी खत्म करो
- *सर्वराष्ट्रमारीं छिंद* = देश में फैली बीमारी खत्म करो
- *सर्ववेतालशाकिनीभयं छिंद* = भूत-प्रेत का डर खत्म करो

*3. सुदर्शन चक्र वाले पार्ट का अर्थ*
`ॐ सुदर्शन महाराज चक्रविक्रम... शांति कुरुकुरु`
*अर्थ:* हे सुदर्शन चक्र, अपनी ताकत से सबके लिए शांति करो। सभी लोगों को, बच्चों को, गायों को, गांव-शहर को, देश को आनंद दो। सभी दुखों को *हन हन, दह दह, पच पच* यानी जला दो, खत्म कर दो।

*4. आखिर में मंगल कामना*
`यत्सुखं त्रिषु लोकेषु व्याधि-व्यसन वर्जितं`
*अर्थ:* तीनों लोक में जो भी सुख है वो बिना बीमारी और बिना बुरे कामों के सबको मिले। सबको निर्भयता, शांति, सेहत मिले।

`शिवमस्तु सदास्तु। शांतिरस्तु सदास्तु`
*अर्थ:* सबका कल्याण हो, हमेशा शांति रहे। परिवार, धन, धान्य हमेशा बना रहे।

`पद्मप्रभु चन्द्रप्रभु... इत्येभ्यो नमः`
*अर्थ:* 24 तीर्थंकर भगवान पद्मप्रभु से लेकर पार्श्वनाथ तक, सभी को नमस्कार।

*5. आखिरी लाइन*
`देशस्य राष्ट्रस्य पुरस्य राज्ञः, करोतु शांति भगवान् जिनेन्द्रः`
*अर्थ:* भगवान जिनेन्द्र देश में, राज्य में, शहर में, राजा के लिए शांति करें।

`सर्व पाप प्रणाशनाय... सर्व शांतिं कुरु-कुरु`
*अर्थ:* सभी पाप, विघ्न, रोग, मृत्यु को नष्ट करने के लिए, हे भगवान सब जगह शांति कर दो।

1 month ago | [YT] | 1

Jain Dharm Activity.(RJ)

*_विषय~ तीर्थंकर शांतिनाथ बनने के पूर्व के तीसरे भव से लेकर गृहस्थ अवस्था तक का परिचय..._*


*(1) तीर्थंकर नाम~* _श्री शांतिनाथ जी।_
*(2) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के द्वीप का नाम~* _जम्बूद्वीप।_
*(3) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के क्षेत्र का नाम~* _पूर्व विदेह क्षेत्र।_
*(4) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के देश या प्रांत का नाम~* _पुष्कलावति देश।_
*(5) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर का नाम~* _पुण्डरीकिनी नगर।_
*(6) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव के नगर की सीमा~* _सीता नदी के दक्षिण तट पर।_
*(7) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव का नाम~* _मेघरथ।_
*(8) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट पद पर आसीन थे ~* _मांडलीक राजा।_
*(9) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में वहाँ के गुरु का नाम~* _विमल वाहन (धनरथ) मुनिराज।_
*(10) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे में शरीर का रंग~* _सुवर्ण रंग।_
*(11) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में कौन से विशिष्ट ज्ञान के वेत्ता थे ~*
_11अंग के वेत्ता थे।_
*(12) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में किस प्रकार के व्रत का आचरण किया था~*
_सिंहनिष्क्रीड़ित व्रत को किया था।_
*(13) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में किस प्रकार के मरण को धारण किया हुआ था~*
_प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(14) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में कितने समय तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया हुआ था~*
_एक मास पर्यन्त तक प्रायोपगमन सन्यास को धारण किया था।_
*(15) तीर्थंकर बनने के पूर्व के तीसरे भव में जीवन के अंत में प्रायोपगमन सन्यास को धारणकर मरण करके किस गति को प्राप्त करते हैं~*
_देवगति को।_
*(16) किस स्वर्ग से चयकर तीर्थंकर हुए~*
_सर्वार्थ सिद्धि विमान से।_
*(17) स्वर्ग में वहाँ किस पद पर आसीन थे~*
_अहमिन्द्र पद पर आसीन थे।_
*(18) तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मभूमि/ देश का नाम~* _कुरुजांगल देश।_
*(19) तीर्थंकर की वर्तमान भव में जन्मपुरी (नगर या पट्टन) का नाम~* _हस्तिनापुर।_
*(20) तीर्थंकर के वर्तमान भव में वंश का नाम~* _इक्ष्वाकुवंश।_
*(21) तीर्थंकर के वर्तमान भव में जनक (पिता)~*
_राजा विश्वसेन।_
*(22) तीर्थंकर के वर्तमान भव में जननी (माता)~*
_रानी ऐरादेवी।_
*(23) तीर्थंकर के वर्तमान भव की गर्भ तिथि~*
_भाद्रपद कृष्ण सप्तमी।_
*(24) तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ समय~*
_अष्टमासिया।_
*(25) तीर्थंकर के वर्तमान भव का गर्भ नक्षत्र~*
_भरणी नक्षत्र।_
*(26) तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म तिथि~*
_ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी तिथि।_
*(27) तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म समय~*
_प्रातः याम्य योग।_
*(28) तीर्थंकर के वर्तमान भव का जन्म नक्षत्र~*
_भरणी नक्षत्र।_
*(29) तीर्थंकर के वर्तमान भव की जन्म राशि~*
_मेष राशि।_
*(30) तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर का वर्ण (रंग)~* _तपे हुए सोने के समान वर्ण।_
*(31) तीर्थंकर के वर्तमान भव में शरीर की ऊँचाई का माप धनुष में ~* _40 धनुष।_
*(32) तीर्थंकर के वर्तमान भव में लांछन (चिह्न)~*
_मृग (हिरण)।_
*(33) तीर्थंकर के वर्तमान भव में कुमार काल प्रमाण~*
_25000 वर्ष।_
*(34) तीर्थंकर के वर्तमान भव में राज्यावस्था का काल प्रमाण~* _50,000 वर्ष।_
*(35) दीक्षाकाल में छद्मस्थ अवस्था का काल प्रमाण~* _16 वर्ष।_
*(36) दीक्षाकाल में केवली अवस्था का काल प्रमाण~* _24984 वर्ष।_
*(37) पूर्ण आयु काल प्रमाण वर्ष~* _1 लाख वर्ष।_
*(38) दीक्षा तिथि~* _ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी।_
*(39) दीक्षा समय~* _अपराह्न काल।_
*(40) दीक्षा नक्षत्र~* _भरणी नक्षत्र।_
*(41) दीक्षा पालकी का नाम~* _सिद्धार्था पालकी।_
*(42) दीक्षा नगर का नाम~* _हस्तिनापुर नगर।_
*(43) दीक्षा वन (उद्यान) का नाम~* _आम्र_ _वन।_
*(44) दीक्षा वृक्ष का नाम~* _नन्दतरु वृक्ष।_
*(45) दीक्षा वृक्ष की ऊँचाई धनुष में~* _480_ _धनुष।_
*(46) वैराग्य का निमित्त कारण~* _पूर्वभव का स्मरण।_
*(47) दीक्षा कितने उपवास का नियम लेकर ग्रहण की(उत्तर पुराण/ हरिवंश पुराण)~* _तेला (बेला)।_
*(48) दीक्षा के समय कितने राजाओं ने साथ में दीक्षा ली थी?~* _1000 राजाओं ने।_
*(49) दीक्षा के बाद कितने दिनों बाद आहार लिया था~* _तीन दिन के बाद।_
*(50) दीक्षा के बाद पारणा में कौन सा आहार लिया था~* _खीर।_
*(51) दीक्षा के बाद पारणा कराने वाले दाता का नाम~* _राजा सुमित्र (प्रिय मित्र)।_
*(52) दीक्षा के बाद पारणा किस नगर में हुई थी~*
_मन्दरपुर (सोमनसपुर) नगर।_
*(53) मुनि अवस्था से अयोगकेवली तक के तप काल का प्रमाण~* _25 हजार वर्ष।_
*(54) केवलज्ञान के पहले उपवास अर्थात् धारणा का नियम~* _षष्टोपवास (3)।_
*(55) केवलज्ञान तिथि~* _पौष्य शुक्ल ग्यारहवीं।_
*(56) केवलज्ञान समय~* _अपराह्न काल।_
*(57) केवलज्ञान नक्षत्र~* _भरणी नक्षत्र।_
*(58) मानस्तम्भ की ऊँचाई (धनुष में)~* _480_ _धनुष।_
*(59) सिद्धार्थ वृक्ष की ऊँचाई (धनुष में)~* _480_ _धनुष।_
*(60) कोट की ऊँचाई (धनुष में)~* _480 धनुष।_
*(61) चैत्यवृक्षों की ऊँचाई (धनुष मे)~* _480_ _धनुष।_
*(62) वनों की ऊँचाई (धनुष में)~* _480 धनुष।_
*(63) स्तूपों की ऊँचाई (धनुष में )~* _480 धनुष।_
*(64) ध्वजाओं की ऊँचाई (धनुष में)~* _480_ _धनुष।_
*(65) वन वृक्षों की ऊँचाई (धनुष में)~* _480_ _धनुष।_
*(66) प्रासादों की ऊँचाई (धनुष में)~* _480_ _धनुष।_
*(67) तोरणद्वार की ऊँचाई (धनुष में)~* _480_ _धनुष।_
*(68) पर्वतों की ऊँचाई (धनुष में)~* _480 धनुष।_
*(69) वेदिका की ऊँचाई (धनुष में)~* _480 धनुष।_
*(70) पर्वतों की चौड़ाई (धनुष में)~* _320 धनुष।_
*(71) स्तूपों की चौड़ाई (धनुष में)~* _40 धनुष से कुछ अधिक।_
*(72) कोट की चौड़ाई (धनुष में)~* _120 धनुष।_
*(73) वेदिका की चौड़ाई (धनुष में)~* _120 धनुष।_
*(74) विशेष पद~* _चक्रवर्ती राजा।_
*(75) केवलज्ञान वन का नाम~* _सहसाम्र वन।_
*(76) केवलज्ञान वृक्ष का नाम~* _नन्दी वृक्ष।_
*(77) समवशरण का विस्तार (योजन प्रमाण)~* _4.5 योजन।_
*(78) समवशरण का विस्तार (कोस प्रमाण)~* _18 कोस।_
*(79) समवशरण में तीर्थंकर भगवान का आसन~* _पद्मासन।_
*(80) समवशरण में रहने वाले सामान्य केवलियों की संख्या~* _4000 केवली।_
*(81) समवशरण में रहने वाले पूर्व धारी मुनिराजों की संख्या~* _800 पूर्व धारी मुनिराज।_
*(82) समवशरण में रहने वाले शिक्षक मुनिराजों की संख्या~* _41,800 शिक्षक मुनिराज।_
*(83) समवशरण में रहने वाले विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _4000 विपुलमती मन:पर्यय ज्ञानी मुनिराज।_
*(84) समवशरण में रहने वाले विक्रिया ऋद्धिधारी योगियों की संख्या~* _6000 विक्रिया ऋद्धिधारी योगी।_
*(85) समवशरण में रहने वाले अवधिज्ञानी मुनिराजों की संख्या~* _3000 अवधिज्ञानी मुनिराज।_
*(86) समवशरण में रहने वाले वादी मुनिराजों की संख्या~*
_2400 वादी मुनिराज।_
*(87) समवशरण में स्थित मुनि संघ की कुल संख्या~* _62000 मुनि संघ।_
*(88) मुख्य गणधर का नाम~* _चक्रायुध।_
*(89) सब गणधर की संख्या~* _36_
*(90) गणिनी आर्यिकाओं की संख्या~* _60300 आर्यिकाएं।_
*(91) मुख्य गणिनी आर्यिका का नाम~*
_हरिषेणा आर्यिका।_
*(92) मुख्य श्रोता का नाम~* _राजा कुनाल।_
*(93) श्रावकों की संख्या~* _श्रावक 2 लाख।_
*(94) श्राविकाओं की संख्या~* _श्राविकाएं 4 लाख।_
*(95) तीर्थंकरों का निर्वाण अंतर~* _1/2 पल्य 1 खरब वर्ष।_
*(96) आयु के अंत में योग निरोध या विहार कब बंद किया था~* _एक मास पहले।_
*(97) निर्वाण की तिथि~* _ज्येष्ठ कृष्ण चतुर्दशी।_
*(98) निर्वाण का समय (हरिवंश पुराण अध्याय 60 से)~* _अपराह्न।_
*(99) निर्वाण का नक्षत्र~* _भरणी नक्षत्र।_
*(100) निर्वाण भूमि~* _सम्मेद शिखर जी।_
*(101) निर्वाण क्षेत्र का विशिष्ट स्थान (चूलिका)~* _कुन्दप्रभ (प्रभास-शांतिप्रभ)।_
*(102) किस आसन से मोक्ष गए~* _कायोत्सर्गासन।_
*(103) सौधर्म स्वर्ग से लेकर ऊर्ध्व ग्रैवेयक तक जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _3600 मुनिराज।_
*(104) अनुत्तर विमान में जाने वाले मुनिराजों की संख्या~* _10,000 मुनिराज।_
*(105) तीर्थंकर के साथ सिद्ध होने वाले मुनिराजों की संख्या~* _1000 मुनिराज।_
*(106) अनुबद्ध केवलियों की संख्या प्रथम मत के अनुसार~* _24 अनुबद्ध केवली।_
*(107) अनुबद्ध केवलियों की संख्या द्वितीय मत के अनुसार~* _24 अनुबद्ध केवली।_
*(108) धर्म का विच्छेद काल~* _शांतिनाथ भगवान के समय धर्मतीर्थ का विच्छेद नहीं हुआ।_
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1 month ago | [YT] | 1