This is the official YouTube channel of the thoughts of Param Pujya Gurudev Pandit Shriram Sharma Acharya Ji.
शांतिकुंज हरिद्वार के Youtube Channel Shantikunj Rishi Chintan के द्वारा युग ऋषि वेदमूर्ति तपोनिष्ठ परम पूज्य गुरुदेव पं श्रीराम शर्मा आचार्य जी के विचारों को जन जन तक पहुँचाने का एक छोटा सा प्रयास है।
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
शताब्दी वर्ष विशेष: नॉर्थ अमेरिका प्रवास | ब्रैम्पटन, ओंटारियो, कनाडा
परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी को ओंटारियो राज्य ने सम्मानित किया।
कनाडा के प्रमुख प्रोविंस ओंटारियो की संसद ने परम डॉ. चिन्मय पंड्या जी को विशेष सम्मान से नवाज़ा।
सरकार के प्रतिनिधि, एमपी शरेफ़ सबावे ने आदरणीय डॉ. पंड्या जी से भेंट कर उन्हें आधिकारिक सर्टिफिकेट प्रदान कर सम्मानित किया।
इस दौरान एमपी सबावे ने कहा:
“डॉ. पंड्या जी के समाज हेतु असाधारण समर्पण, अनुकरणीय सेवा और उत्कृष्टता के लिए हम उन्हें हृदय से धन्यवाद देते हैं। उनके नेतृत्व और मार्गदर्शन ने अनगिनत लोगों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाया है।”
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1 hour ago (edited) | [YT] | 72
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
युगऋषि परम पूज्य गुरुदेव पं. श्रीराम शर्मा आचार्य जी को कोटिशः श्रद्धांजलि। 🙏🌹
परम पूज्य गुरुदेव का महाप्रयाण कोई अंत नहीं, बल्कि युगचेतना के विराट विस्तार का शुभारंभ था। उनका तप, त्याग, चिंतन और युग निर्माण का संदेश आज भी करोड़ों लोगों के जीवन को नई दिशा प्रदान कर रहा है।
उनकी पुण्यतिथि पर हम श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए संकल्प लें कि उनके आदर्शों को अपने जीवन में उतारेंगे और श्रेष्ठ समाज निर्माण के पावन अभियान में अपना योगदान देंगे।
🙏🌹 भावपूर्ण श्रद्धांजलि! 🌹🙏
2 hours ago (edited) | [YT] | 377
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
शताब्दी वर्ष विशेष: नॉर्थ अमेरिका प्रवास | टोरंटो, ओंटारियो, कनाडा
अपने नार्थ अमेरिका प्रवास के अगले क्रम में परम आदरणीय डॉ चिन्मय पंड्या जी कनाडा के टोरंटो शहर पहुँचे।
इस अवसर पर उन्होंने परिजनों से भेंट की एवं गुरुसत्ता का आशीष प्रदान किया।
#dsvv #shantikunj #wisdom #visit #sanskriti
3 hours ago | [YT] | 86
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
🌞 शुभ प्रभात - एक प्रेरणादायक विचार के साथ ✨
हड़बड़ाहट, भाग-दौड़, उछल-कूद, जल्दबाजी से काम तो खराब होते ही हैं साथ ही शक्तियाँ भी व्यर्थ में नष्ट होती हैं।
अखण्ड ज्योति 1964 जनवरी
📺 जुड़े रहें – “ऋषि चिंतन”
➨ yugrishi-erp.awgp.org/l?id=Ip
#PositiveThinking #Smile #Happiness #Motivation #Spirituality #RishiChintan
6 hours ago | [YT] | 107
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
शताब्दी वर्ष विशेष: नॉर्थ अमेरिका प्रवास | ओटावा, ओंटारियो, कनाडा।
अपने नॉर्थ अमेरिका प्रवास के क्रम में परम आदरणीय डॉ चिन्मय पण्ड्या जी कनाडा की राजधानी ओटावा पहुँचे।
इस दौरान उन्होंने परिजनों से भेंट-वार्ता के माध्यम से गुरु-चिंतन एवं प्रेरणाएँ साझा की।
#dsvv #shantikunj #wisdom #international #growth
1 day ago | [YT] | 686
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
🌞 शुभ प्रभात - एक प्रेरणादायक विचार के साथ ✨
मनुष्य दुख नहीं खोजता, किंतु जिस रीति से यह सुख खोजता है उससे उसे अनिवार्य रूप से दुःख भी मिलता है। वह अपनी इच्छाओं की तृप्ति द्वारा सुख प्राप्त करना चाहता है। किंतु इच्छाओं की तृप्ति कोई निश्चय वस्तु नहीं होती।
अखण्ड-ज्योति, अप्रैल 1957
📺 जुड़े रहें – “ऋषि चिंतन”
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#PositiveThinking #Smile #Happiness #Motivation #Spirituality #RishiChintan
1 day ago | [YT] | 211
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
जन-जागरण एवं मानवता के उत्थान का संदेश लिए परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने “श्रद्धा एवं पात्रता” विषय पर मॉन्ट्रियल में संबोधन दिया।
सभागार में उपस्थित सैकड़ों परिजन इस अत्यंत प्रभावशाली उद्बोधन को सुनकर भाव-विभोर हुए तथा गुरु-सत्ता के कार्य को आगे बढ़ाने हेतु प्रेरित अनुभव किया।
#dsvv #shantikunj #international #wisdom #gayatripariwar
1 day ago | [YT] | 636
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
शताब्दी वर्ष विशेष: नार्थ अमेरिका प्रवास || मांट्रियल, क्यूबेक, कनाडा।
आत्मीयता-विस्तार एवं संवाद के क्रम में परम आदरणीय डॉ. चिन्मय पंड्या जी ने परिजनों से भेंट कर उन्हें देव-स्थापना चित्र एवं गुरुसत्ता का आशीष प्रदान किया।
यह वर्ष मांट्रियल अश्वमेध की 30वीं वर्षगांठ है। इस अवसर पर परम आदरणीय डॉ. पंड्या जी ने आयोजन के मील के पत्थर जैसे वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से मिलकर उनके अनवरत पुरुषार्थ एवं श्रद्धा हेतु साधुवाद भी ज्ञापित किया।
#dsvv #international #visit #wisdom #gayatripariwar
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2 days ago (edited) | [YT] | 450
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
🚭 विश्व तम्बाकू निषेध दिवस 🚭
तम्बाकू केवल एक आदत नहीं, बल्कि स्वास्थ्य, परिवार और भविष्य का शत्रु है।
आइए, आज संकल्प लें—
✅ तम्बाकू से दूर रहेंगे।
✅ दूसरों को भी इसके दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करेंगे।
✅ स्वस्थ, नशामुक्त और सकारात्मक जीवन अपनाएँगे।
"नशा नहीं, स्वास्थ्य चुनें।"
#DrChinmayPandya #awgp #awgpofficial #GayatriParivar #Shantikunj #ShantikunjRishiChintan #WorldNoTobaccoDay #विश्वतम्बाकूनिषेधदिवस #SayNoToTobacco #HealthyLife #TobaccoFreeIndia #NashaMuktBharat #HealthAwareness #NoTobacco 🚭
2 days ago | [YT] | 173
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Shantikunj Rishi Chintan- AWGP
🌞 शुभ प्रभात 🙏 Sunday Special विचार के साथ ✨
पुस्तक - गुरुगीता
शिष्य के लिए गुरूसेवा साधना है। गुरू सेवा का अर्थ है- गुरूदेव जो भी कहें, जैसा भी काम सौपें- वैसा ही करना। कई बार गुरूदेव द्वारा कहे गये कार्य को बड़ी सांसारिक, लौकिक एवं सामाजिक रीति से आँकते हैं और ऐसा करते हुए वे भूल जाते हैं कि गुरूदेव तो संसार की सभी बातों से परे हैं, फिर भला वे सांसारिक कैसे हो सकते हैं? वे यदि शिष्य को काँटों भरी डगर से गुजारते हैं, तो केवल इसलिए कि इससे उसका कल्याण होगा। उनके द्वारा दिये गये प्रत्येक कष्ट में भविष्य के अनेकों सुखद् अहसास समाये होते हैं। पर इसे केवल वही समझ पाता, जिसका हृदय भक्ति की भावनाओं से भरा है। ऐसी भावनाएँ जिसकी चेतना में अंकुरित हैं- वह जानता है, गुरूदेव तो केवल अपनी ज्ञान ज्योति से शिष्य में ब्रह्मज्ञान की परम ज्योति जला रहे हैं।
शिष्य के लिए गुरूसेवा साधना है। गुरू सेवा का अर्थ है- गुरूदेव जो भी कहें, जैसा भी काम सौपें- वैसा ही करना। कई बार गुरूदेव द्वारा कहे गये कार्य को बड़ी सांसारिक, लौकिक एवं सामाजिक रीति से आँकते हैं और ऐसा करते हुए वे भूल जाते हैं कि गुरूदेव तो संसार की सभी बातों से परे हैं, फिर भला वे सांसारिक कैसे हो सकते हैं? वे यदि शिष्य को काँटों भरी डगर से गुजारते हैं, तो केवल इसलिए कि इससे उसका कल्याण होगा। उनके द्वारा दिये गये प्रत्येक कष्ट में भविष्य के अनेकों सुखद् अहसास समाये होते हैं। पर इसे केवल वही समझ पाता, जिसका हृदय भक्ति की भावनाओं से भरा है। ऐसी भावनाएँ जिसकी चेतना में अंकुरित हैं- वह जानता है, गुरूदेव तो केवल अपनी ज्ञान ज्योति से शिष्य में ब्रह्मज्ञान की परम ज्योति जला रहे हैं।
इस सम्बन्ध में बड़ी प्यारी अनुभूति कथा है। यह कथा एक ऐसे शिष्य की है, जिसके मन में तो उज्ज्वल विचार थे, पर जिसके संस्कार बड़े दूषित थे। जो अनचाहे व अनजाने अनेकों वासनाओं से घिर जाता है। अनेकों प्रयत्नों के बावजूद जिसकी काम वासना शान्त न होती थी। बड़ी दुःखद स्थिति थी उसकी। इस गहरी पीड़ा में उसका कोई साझीदार न था। उसकी कामवासना की परिणति सदा अवसाद में होती है, पर करे भी तो क्या? कोई रास्ता भी तो न था। कामवासना की भीषणता में ध्यान, जप एवं उपवास के सारे प्रयोग निरर्थक चले जाते। अपने आन्तरिक द्वन्द्व व संघर्ष की इसी घड़ी में गुरू ने अपने शिष्य को अपना लिया और शिष्य ने अपने उद्धारक सद्गुरू को पहचान लिया।
विकल वासनाओं से घिरे शिष्य की यही एक चाहत थी कि उसकी वासनाएँ गिरें, उसका चित्त निर्मल हो। गुरूदेव ने उसे आश्वसन भी दिया और कहा कि वह अपने को आश्रम की साफ- सफाई में लगा दें। ऊपर से साधारण दिखने वाले इस काम में शिष्य ने अपने को झोंक दिया। रात- दिन उसका एक ही काम था- जो कहा गया, उसे करना। अपमान तिरस्कारों की झड़ी, शारीरिक व मानसिक परेशानियाँ उसे डिगा न सकीं। गुरूदेव को दिया गया वचन ही उसका जीवन था। ऐसा करते हुए उसकी किशोरावस्था कब प्रौढ़ावस्था में बदल गयी, पता नहीं चला। हालाँकि उसे अपने जीवन के इस तरह बीत जाने का कोई दुःख न था, परन्तु एक पीड़ा अवश्य उसके मन में पलती थी। एक वेदना से अवश्य उसका मन विकल होता था और वह वेदना थी- वासनाओं के आकर्षण की। अभी तक उसका मन पूर्ण निर्मल न हो पाया था।
अपनी इस वेदना को अपने अकेलेपन में जीता हुआ वह गुरू आज्ञा का पालन किये जा रहा था, पर कहीं गहरे छूपे दुःख में वह लिपटा हुआ था। बार- बार उसका आर्त स्वर बाबा सर्वानन्द को पुकार लेता, जो अब अपनी स्थूल देह में नहीं थे। अरे! यह क्या हुआ बाबा? मेरा अन्तस् इतना कलुषित क्यों है? पुकार के स्वर निरन्तर गहरे- घने होते गये। पीड़ा बढ़ती गयी। यह सघन पीड़ा ही उसकी प्रार्थना बन गयी। अपने शिष्य की इस असह्य वेदना को भला कृपालु सद्गुरू कब तक सहन करते। एक दिन वह उसके ध्यान में प्रकट हो गये। बेचारा शिष्य बिलख- बिलख कर रो पड़ा। उसके अन्तस् से यही भाव फूटे- गुरूदेव! आपने जैसा कहा- मैंने वहीं किया। फिर भी मेरी यह दुर्दशा क्यों है? उसकी भाव चेतना में उपस्थित बाबा सर्वानन्द की सूक्ष्म चेतना स्पन्दित हुई। वत्स! हम तुम्हारी पीड़ाओं से परिचित हैं। यह सच है कि तुम अभी पूर्ण परिष्कृत नहीं हो पाये हो; परन्तु अपने परिष्कार की राह पर गतिशील हो। तुम्हारे इस वर्तमान जीवन और शरीर की कुछ सीमाएँ हैं।
तुम्हें यह जीवन एवं शरीर तुम्हारे विगत दुष्कर्मों के प्राययिश्चत के लिए मिला है और वही हो रहा है। प्रत्येक घड़ी- प्रत्येक पल में विभिन्न परिस्थितियों के द्वारा तुम्हारे चित्त को निर्मल बना रहा हूँ। तुम्हारा सूक्ष्म शरीर भी जाग्रत् होकर परिपक्व होने की दशा में है। इसके सम्पूर्ण विकास के साथ ही तुम्हारी स्थूल देह नष्ट हो जायेगी, क्योंकि इस देह से उच्चस्तरीय आध्यात्मिक साधनाओं का क्रम तुम अपनी सूक्ष्म चेतना द्वारा पूरा करोगे। अगले जीवन में इसमें और भी विकास होगा। बाबा सर्वानन्द की इन बातों ने शिष्य को यह अनुभव करा दिया कि कृपालु गुरूदेव सदा अपने शिष्य का ध्यान रखते हैं। बस शिष्य उन्हें अपने भावों मे अनुभव करता रहे।
📺 जुड़े रहें – “ऋषि चिंतन”
➨ yugrishi-erp.awgp.org/l?id=Ip
#PositiveThinking #Smile #Happiness #Motivation #Spirituality #RishiChintan
2 days ago | [YT] | 486
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