Welcome to BhautikKrishiv, a delightful YouTube channel where you can join the adventures of a young and vibrant child named Bhautik. Step into the world of innocence and joy as Bhautik shares his daily activities, discoveries, and explorations with you.
On this channel, you'll witness the wonders of childhood through Bhautik's eyes. From playful moments in the park to imaginative storytelling sessions, Bhautik's infectious enthusiasm will brighten your day. Get ready to laugh, learn, and be inspired by the genuine curiosity and creativity that Bhautik brings to each video.
Join Bhautik as he embarks on exciting journeys of imagination and shares his discoveries from the world around him. From nature walks to science experiments, art projects to cooking adventures, there's always something new and exciting happening on BhautikKrishiv. You'll get a firsthand look at the joys and challenges of growing up, as Bhautik fearlessly explores and learns about the world.
Dotu & Kitu
4 hours ago | [YT] | 2
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Dotu & Kitu
NAPS
2 days ago | [YT] | 8
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Dotu & Kitu
मंदिर
1 week ago | [YT] | 10
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Dotu & Kitu
आम तोड़े जाएं
1 week ago | [YT] | 8
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Dotu & Kitu
Jay Hanuman
1 week ago | [YT] | 6
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Dotu & Kitu
Ganga दशहरा
1 week ago | [YT] | 8
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Dotu & Kitu
First day of school after summer vacation
1 week ago | [YT] | 7
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Dotu & Kitu
First
1 week ago | [YT] | 9
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Dotu & Kitu
स्कूल के बाद
1 week ago | [YT] | 9
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Dotu & Kitu
आज का दिन मेरे लिए एक सूक्ष्म किन्तु गहन मानवीय अनुभूति लेकर आया। जब मैं अपने पाँच वर्षीय पुत्र को विद्यालय से लेने पहुँचा, तो उसके मुखमंडल पर सामान्य दिनों की चंचल आभा के स्थान पर एक अव्यक्त विषाद की छाया स्पष्ट दृष्टिगोचर हो रही थी। उसकी आँखें डबडबाई हुई थीं—मानो अभी-अभी आँसुओं का कोई मौन प्रवाह भीतर ही भीतर थम गया हो।
सामान्यतः विद्यालय से लौटते समय वह कभी अत्यन्त प्रफुल्लित होकर चहकता है, तो कभी किसी गहन विचार में निमग्न होकर असामान्य गंभीरता का परिचय देता है; किन्तु आज की उसकी निस्तब्धता में एक अलग प्रकार का विषाद निहित था। मैंने उसके हाथों से उसका बस्ता और जल-पात्र लेकर कार की ओर प्रस्थान किया। वह बिना कुछ कहे मेरे साथ चलकर कार में बैठ गया—एक असामान्य मौन उसके छोटे से व्यक्तित्व को आच्छादित किए हुए था।
मैंने स्नेहपूर्वक पूछा, “क्या हुआ बेटा?”
कुछ क्षणों की चुप्पी के बाद उसने धीमे स्वर में कहा, “पापा, आज क्लास में ड्राइंग बनाने पर सबको स्टार मिला… लेकिन मुझे नहीं मिला।”
उसकी इस छोटी-सी पीड़ा में भी आत्मसम्मान का एक मासूम कम्पन था—मानो बाल-हृदय पहली बार संसार की उस सूक्ष्म असमानता से परिचित हो रहा हो, जहाँ प्रयास और प्रशंसा का समीकरण सदैव एक-सा नहीं होता। मैंने उसे समझाया कि जीवन में कभी-कभी ऐसा भी होता है, और यह किसी मूल्य-निर्णय का अंतिम सत्य नहीं होता। तत्पश्चात मैंने उसका ध्यान अन्य विषयों की ओर मोड़ने का प्रयास किया, जिससे उसके कोमल मन पर अंकित वह क्षणिक पीड़ा धीरे-धीरे विलीन हो सके।
घर पहुँचने पर उसने वही प्रसंग अपनी दादी को भी सुनाया। दादी का हृदय स्वाभाविक रूप से द्रवित हो उठा; उन्हें अपने नाती की उस अल्प-सी वेदना में भी एक गहरी करुणा का अनुभव हुआ।
तभी मैंने मुस्कराकर कहा—
“कोई बात नहीं। तुम्हारे द्वारा बनाई गई यह चित्रकला हमारे लिए किसी ‘स्टार’ से कम नहीं है। इसे हम अपने ड्राइंग रूम की दीवार पर आदरपूर्वक स्थान देंगे, ताकि यह हमें प्रतिदिन यह स्मरण कराती रहे कि सृजन का वास्तविक मूल्य बाहरी पुरस्कारों में नहीं, बल्कि उस निष्कपट प्रयास में निहित होता है जो एक बाल-मन पूरे समर्पण से करता है।”
वस्तुतः जीवन का यह एक अत्यंत सूक्ष्म किन्तु गूढ़ पाठ है—
प्रशंसा का अभाव किसी सृजन की गरिमा को क्षीण नहीं करता। कभी-कभी संसार की उपेक्षा ही वह मौन परीक्षा होती है, जिसमें संवेदनशील आत्माएँ अपनी वास्तविक ऊँचाई प्राप्त करती हैं।
3 months ago | [YT] | 5
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