बाबा नीम करौली मंदिर, कैंची धाम, नैनीताल, उत्तराखंड, नीम करौली बाबा, कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में है, आज भारतवर्ष का सबसे लोकप्रिय आस्था के केन्द्र बनकर सामने आया है, इस धाम में भक्त अपने श्रद्धासुमन से जो भी मांगते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती ही है, नीम करौली बाबा, कैंची धाम हल्द्वानी अल्मोड़ा हाईवे पर है,यह नैनीताल से 17 किमी, हल्द्वानी से 50किमी, अल्मोड़ा से 45 किमी की दूरी पर स्थित है
जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के अद्भुत और अलौकिक दृश्य, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान बलराम और बहन सुभद्रा के साथ 3 रथ में सवार हैं, और यात्रा अगले 10 दिनों तक चलेगी
केशी घाट, वृन्दावन मथुरा, केशी घाट मथुरा के विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल वृन्दावन में यमुना के किनारे 'चीर घाट' से कुछ पूर्व दिशा में अवस्थित है। श्रीकृष्ण ने यहाँ केशी दैत्य का वध किया था, इसीलिए इस घाट का नाम केशी घाट पड़ा। एक समय सखाओं के साथ कृष्ण यहाँ गोचारण कर रहे थे। तब उनके सखा मधुमंगल ने हँसते हुए श्रीकृष्ण से कहा- "प्यारे सखा! यदि तुम अपना मोरमुकुट, मधुर मुरलिया और पीतवस्त्र मुझे दे दो तो सभी गोप-गोपियाँ मुझे ही प्यार करेंगी तथा रसीले लड्डू मुझे ही खिलाएँगी। तुम्हें कोई पूछेगा भी नहीं। भगवान कृष्ण ने हँसकर अपना मोरपंख, पीताम्बर, मुरली और लकुटी उसे दे दी। श्रीकृष्ण की इन वस्तुओं को पाकर सखा मधुमंगल इठलाता हुआ इधर-उधर घूमने लगा। इतने में ही महापराक्रमी केशी दैत्य विशाल घोड़े का रूप धारण कर कृष्ण का वध करने के लिए हिनहिनाता हुआ वहाँ उपस्थित हुआ। उसने महाराज कंस से सुन रखा था कि जिसके सिर पर मोरपंख, हाथों में मुरली, अंगों पर पीतवसन देखो, उसे ही कृष्ण समझकर अवश्य मार डालना। केशी ने कृष्ण बने हुए मधुमंगल को देखकर अपने दोनों पिछले पैरों से आक्रमण किया। कृष्ण ने झपटकर पहले मधुमंगल को बचा लिया। इसके पश्चात् केशी दैत्य का वध किया। मधुमंगल को केशी दैत्य के पिछले पैरों की चोट तो नहीं लगी, किन्तु उसकी हवा से ही उसके होश उड़ गये। केशी वध के पश्चात् वह सहमा हुआ तथा लज्जित होता हुआ कृष्ण के पास गया तथा उनकी मुरली, मयूरमुकुट, पीताम्बर लौटाते हुए बोला- "मुझे लड्डू नहीं चाहिए। प्राण बचे तो लाखों पाये।" सभी ग्वाल-बाल हँसने लगे। आज भी केशी घाट इस लीला को अपने हृदय में संजोये हुए विराजमान है। दोस्तों यह चैनल भारत के सभी टूरिस्ट प्लेस को दिखाने के लिए बनाया गया है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा चैनल को सब्सक्राइब और शेयर करे। धन्यवाद
जयपुर के समीप स्थित आमेर (आंबेर) दुर्ग , Amber palace, का निर्माण कछवाहा शासक के द्वारा करवाया गया था, जो अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए विख्यात है. विशाल प्राचीरों, द्वारों की शृंखलाओं एवं पत्थर के बने रास्तों से भरा यह दुर्ग पहाड़ी के ठीक नीचे बने मावठा सरोवर को देखता हुआ प्रतीत होता है. यह दुर्ग लाल-बलुआ पत्थर एवं संगमरमर से निर्मित है. इस आकर्षक एवं भव्य दुर्ग की ख्याति पूरे विश्व में है. इसे युनेस्को के द्वारा विश्व विरासत स्थल भी घोषित किया गया है This is a Tourism channel, so please Subscribe and share.
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हनुमान धाम, रामनगर, नैनीताल उत्तराखंड, जहां दर्शन करने से होते है हर मनोकामना पूरी , हनुमान जी का अद्भुत धाम
7 months ago | [YT] | 7
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बाबा नीम करौली मंदिर, कैंची धाम, नैनीताल, उत्तराखंड,
नीम करौली बाबा, कैंची धाम उत्तराखंड के नैनीताल जिले में है, आज भारतवर्ष का सबसे लोकप्रिय आस्था के केन्द्र बनकर सामने आया है, इस धाम में भक्त अपने श्रद्धासुमन से जो भी मांगते हैं उनकी मनोकामना पूरी होती ही है,
नीम करौली बाबा, कैंची धाम हल्द्वानी अल्मोड़ा हाईवे पर है,यह नैनीताल से 17 किमी, हल्द्वानी से 50किमी, अल्मोड़ा से 45 किमी की दूरी पर स्थित है
1 year ago | [YT] | 12
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जगन्नाथ पुरी रथयात्रा के अद्भुत और अलौकिक दृश्य, भगवान श्रीकृष्ण, भगवान बलराम और बहन सुभद्रा के साथ 3 रथ में सवार हैं, और यात्रा अगले 10 दिनों तक चलेगी
1 year ago | [YT] | 5
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2 years ago | [YT] | 3
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केशी घाट, वृन्दावन मथुरा,
केशी घाट मथुरा के विश्व प्रसिद्ध धार्मिक स्थल वृन्दावन में यमुना के किनारे 'चीर घाट' से कुछ पूर्व दिशा में अवस्थित है। श्रीकृष्ण ने यहाँ केशी दैत्य का वध किया था, इसीलिए इस घाट का नाम केशी घाट पड़ा।
एक समय सखाओं के साथ कृष्ण यहाँ गोचारण कर रहे थे। तब उनके सखा मधुमंगल ने हँसते हुए श्रीकृष्ण से कहा- "प्यारे सखा! यदि तुम अपना मोरमुकुट, मधुर मुरलिया और पीतवस्त्र मुझे दे दो तो सभी गोप-गोपियाँ मुझे ही प्यार करेंगी तथा रसीले लड्डू मुझे ही खिलाएँगी। तुम्हें कोई पूछेगा भी नहीं। भगवान कृष्ण ने हँसकर अपना मोरपंख, पीताम्बर, मुरली और लकुटी उसे दे दी।
श्रीकृष्ण की इन वस्तुओं को पाकर सखा मधुमंगल इठलाता हुआ इधर-उधर घूमने लगा। इतने में ही महापराक्रमी केशी दैत्य विशाल घोड़े का रूप धारण कर कृष्ण का वध करने के लिए हिनहिनाता हुआ वहाँ उपस्थित हुआ। उसने महाराज कंस से सुन रखा था कि जिसके सिर पर मोरपंख, हाथों में मुरली, अंगों पर पीतवसन देखो, उसे ही कृष्ण समझकर अवश्य मार डालना। केशी ने कृष्ण बने हुए मधुमंगल को देखकर अपने दोनों पिछले पैरों से आक्रमण किया। कृष्ण ने झपटकर पहले मधुमंगल को बचा लिया। इसके पश्चात् केशी दैत्य का वध किया।
मधुमंगल को केशी दैत्य के पिछले पैरों की चोट तो नहीं लगी, किन्तु उसकी हवा से ही उसके होश उड़ गये। केशी वध के पश्चात् वह सहमा हुआ तथा लज्जित होता हुआ कृष्ण के पास गया तथा उनकी मुरली, मयूरमुकुट, पीताम्बर लौटाते हुए बोला- "मुझे लड्डू नहीं चाहिए। प्राण बचे तो लाखों पाये।" सभी ग्वाल-बाल हँसने लगे। आज भी केशी घाट इस लीला को अपने हृदय में संजोये हुए विराजमान है।
दोस्तों यह चैनल भारत के सभी टूरिस्ट प्लेस को दिखाने के लिए बनाया गया है। इसलिए ज्यादा से ज्यादा चैनल को सब्सक्राइब और शेयर करे। धन्यवाद
3 years ago | [YT] | 12
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जयपुर के समीप स्थित आमेर (आंबेर) दुर्ग , Amber palace, का निर्माण कछवाहा शासक के द्वारा करवाया गया था, जो अपनी विशिष्ट वास्तुकला के लिए विख्यात है.
विशाल प्राचीरों, द्वारों की शृंखलाओं एवं पत्थर के बने रास्तों से भरा यह दुर्ग पहाड़ी के ठीक नीचे बने मावठा सरोवर को देखता हुआ प्रतीत होता है.
यह दुर्ग लाल-बलुआ पत्थर एवं संगमरमर से निर्मित है. इस आकर्षक एवं भव्य दुर्ग की ख्याति पूरे विश्व में है. इसे युनेस्को के द्वारा विश्व विरासत स्थल भी घोषित किया गया है
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3 years ago | [YT] | 16
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