Vishal ki report | विशाल की रिपोर्ट

नमस्कार मैं- विशाल गुप्ता टीवी चैनलों और अखबारों के (बाध्यकरी) अनुभवों के बाद कुछ अलग लीक से हटकर (पूरी आजादी के साथ) ..🆚.. लाने की कोशिश कर रहा हूं, जिसकी जानकारी जरा हटकर जमीनी स्तर की होगी। पत्रकारिता के क्षेत्र में 2017 से संघर्षमय सफ़र (सिद्धांतों के साथ) चल रहा है। सभी प्लेटफार्मों पर संघर्षकरते हुए "जनता की बात, जनता के साथ" (अबकी बार.... किसकी सरकार ) सभी विधानसभाओं की चुनावी खबरों की जमीनी रिपोर्ट करने की कोशिश
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( VISHAL GUPTA )


Vishal ki report | विशाल की रिपोर्ट

🚨 कानपुर पुलिस कमिश्नरेट में हड़कंप!
ITBP जवान मां का कटा हाथ लेकर पहुंचा
न्याय न मिलने पर बढ़ा दबाव

4 days ago | [YT] | 12

Vishal ki report | विशाल की रिपोर्ट

यूपी पंचायत चुनाव पर बड़ा अपडेट: विधानसभा चुनाव के बाद होंगे पंचायत चुनाव, 26 मई से पहले गांवों में बनेंगे ‘प्रशासक’

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर अब लगभग विराम लग गया है। राज्य सरकार की ओर से संकेत मिले हैं कि पंचायत चुनाव अब 2027 के विधानसभा चुनाव के बाद कराए जाएंगे। इससे पहले प्रदेश की 57,695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में सरकार गांवों में प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए ‘प्रशासक’ नियुक्त करने की तैयारी कर रही है।

क्या है पूरा मामला?

उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का पांच वर्षीय कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। सामान्यतः कार्यकाल खत्म होने से पहले नए पंचायत चुनाव कराए जाते हैं, लेकिन इस बार प्रशासनिक और राजनीतिक कारणों से चुनाव को आगे बढ़ाने की चर्चा तेज हो गई है।

सूत्रों के मुताबिक, पंचायतीराज विभाग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को प्रस्ताव भेजा है कि ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद ग्राम पंचायतों में अस्थायी रूप से प्रशासक नियुक्त किए जाएं, ताकि गांवों का विकास कार्य और सरकारी योजनाएं प्रभावित न हों।

26 मई के बाद क्या होगा?

अगर सरकार इस प्रस्ताव को मंजूरी देती है, तो 26 मई के बाद ग्राम प्रधानों की शक्तियां समाप्त हो जाएंगी और पंचायतों की कमान प्रशासन द्वारा नियुक्त अधिकारियों या प्रशासकों के हाथ में चली जाएगी।

इन प्रशासकों की जिम्मेदारियां होंगी:

गांव में विकास कार्यों की निगरानी

सरकारी योजनाओं का संचालन

पंचायत निधि का उपयोग

साफ-सफाई, सड़क, पानी जैसी मूल सुविधाओं की व्यवस्था

प्रशासनिक फैसले लेना


सरकार का क्या कहना है?

पंचायतीराज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा है कि अभी इस संबंध में अंतिम आदेश जारी नहीं हुआ है, लेकिन प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है। सरकार जल्द निर्णय ले सकती है।

चुनाव टालने के पीछे क्या कारण?

विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत चुनाव टालने के पीछे कई कारण हो सकते हैं:

1. 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी
सरकार और राजनीतिक दल अभी से विधानसभा चुनाव की रणनीति बनाने में जुटे हैं।


2. परिसीमन (Delimitation) की संभावना
पंचायत क्षेत्रों के पुनर्गठन की प्रक्रिया भी चुनाव में देरी का कारण हो सकती है।


3. प्रशासनिक सुविधा
एक साथ कई बड़े चुनावों के प्रबंधन से बचने के लिए यह फैसला लिया जा सकता है।



गांवों पर क्या असर पड़ेगा?

यदि चुने हुए प्रधानों की जगह प्रशासक आते हैं, तो गांवों में लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व कुछ समय के लिए खत्म हो जाएगा। इससे कुछ लोग नाराज हो सकते हैं, क्योंकि गांव की जनता सीधे चुने गए प्रधान के बजाय सरकारी अधिकारी के अधीन होगी।

हालांकि सरकार का तर्क है कि इससे विकास कार्य नहीं रुकेंगे और प्रशासनिक निरंतरता बनी रहेगी।

राजनीतिक प्रतिक्रिया शुरू

इस मुद्दे पर विपक्ष सरकार को घेर सकता है। विपक्षी दल इसे लोकतांत्रिक अधिकारों में कटौती बता सकते हैं, जबकि सरकार इसे व्यवस्था बनाए रखने का जरूरी कदम बता रही है।

मुख्य बातें एक नजर में

✅ यूपी में पंचायत चुनाव अभी नहीं होंगे
✅ 2027 विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव संभावित
✅ 26 मई को प्रधानों का कार्यकाल खत्म
✅ गांवों में प्रशासक नियुक्त करने का प्रस्ताव
✅ मुख्यमंत्री योगी के फैसले का इंतजार

निष्कर्ष

उत्तर प्रदेश की पंचायत राजनीति में यह बड़ा बदलाव हो सकता है। अगर प्रशासक नियुक्त होते हैं, तो पहली बार इतने बड़े स्तर पर ग्राम पंचायतें अस्थायी प्रशासनिक नियंत्रण में जाएंगी। अब सबकी नजर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के अंतिम फैसले पर टिकी है।

4 days ago | [YT] | 11

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लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल पर हाईकोर्ट का सख्त एक्शन!, सुषमा खर्कवाल के अधिकार हाईकोर्ट ने सीज कर दिए!

इलाहाबाद हाईकोर्ट (लखनऊ बेंच) ने लखनऊ मेयर सुषमा खर्कवाल के सभी वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए हैं। अब इन अधिकारों को डीएम और नगर आयुक्त संभालेंगे।
क्या है पूरा मामला?
फैजुल्लागंज वार्ड (नंबर 73) में 2023 के नगर निगम चुनाव में BJP के प्रदीप शुक्ला (टिंकू) जीते थे। लेकिन कोर्ट में उनके नामांकन में गलत एफिडेविट (2 पत्नियों का जिक्र न करने का आरोप) साबित हुआ।
कोर्ट ने प्रदीप शुक्ला का चुनाव रद्द कर दिया और उपविजेता SP के ललित किशोर तिवारी को पार्षद घोषित कर दिया।
हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट दोनों ने मेयर को ललित तिवारी को शपथ दिलाने का आदेश दिया। लेकिन 5 महीने बीत गए, मेयर ने शपथ नहीं दिलाई।
इस पर हाईकोर्ट बहुत नाराज हुआ और मेयर के अधिकार छीन लिए। साथ ही अवमानना की कार्रवाई के भी निर्देश दिए।
नोट: यह किसी मेयर के खिलाफ ऐसी कार्रवाई का पहला मामला माना जा रहा है।
#Lucknow #LMC #SushmaKharkwal #HighCourt #Faizullaganj

5 days ago | [YT] | 5

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कॉकरोच जनता पार्टी का X अकाउंट भारत में बैन | CJP पर कार्रवाई से सोशल मीडिया में बवाल

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का आधिकारिक X (Twitter) अकाउंट भारत में ब्लॉक कर दिया गया है।
@CJP_2029 अकाउंट पर बैन लगने से पहले 1.93 लाख से ज्यादा फॉलोअर्स थे।
पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने इसकी पुष्टि की है।

क्या यह अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला है, या नियमों के तहत की गई कार्रवाई?
जानिए पूरी खबर और अपनी राय कमेंट में जरूर बताइए।

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6 days ago | [YT] | 15

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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का X अकाउंट भारत में बैन, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

नई दिल्ली/लखनऊ, 21 मई 2026: सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुई कॉकरोच जनता पार्टी (Cockroach Janata Party - CJP) का आधिकारिक X (पूर्व ट्विटर) अकाउंट @CJP_2029 भारत में ब्लॉक कर दिया गया है। अकाउंट पर कार्रवाई से पहले इसके करीब 1.93 लाख फॉलोअर्स थे।

पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने खुद इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि अकाउंट अमेरिका से संचालित हो रहा था, लेकिन भारत में अब इसे एक्सेस नहीं किया जा सकता। हालांकि, पार्टी के इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स अभी भी सक्रिय हैं।

क्या है कॉकरोच जनता पार्टी?

कॉकरोच जनता पार्टी हाल ही में एक व्यंग्यात्मक और मीम-आधारित राजनीतिक अभियान के रूप में उभरी थी। इसकी शुरुआत सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत के उस बयान के बाद हुई, जिसमें युवाओं की तुलना "कॉकरोच" से किए जाने की चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी।

इसके बाद बड़ी संख्या में युवाओं, बेरोजगारों और सरकार विरोधी विचार रखने वाले लोगों ने इसे एक डिजिटल आंदोलन का रूप दे दिया। पार्टी की अपनी वेबसाइट, मेनिफेस्टो और सोशल मीडिया कैंपेन ने कुछ ही दिनों में लाखों लोगों का ध्यान खींचा।

बैन के बाद प्रतिक्रियाएं

अकाउंट ब्लॉक होने के बाद सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

एक वर्ग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर हमला और सरकार की आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिश बता रहा है।

वहीं, पार्टी समर्थकों का कहना है कि
"एक अकाउंट बंद होने से आंदोलन नहीं रुकेगा, क्योंकि यह अब लोगों के बीच फैल चुका है।"

फिलहाल X प्लेटफॉर्म या सरकार की ओर से इस कार्रवाई को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।

यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।

6 days ago | [YT] | 24