Munmun Srivastava



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28 मई (बकरीद) को न हो DU की परीक्षा

दिल्ली विश्वविद्यालय ने बकरीद (28 मई) की भारत सरकार के आधिकारिक अवकाश घोषित किये जाने के बावजूद, 25 मई को DU के रजिस्ट्रार के हस्ताक्षर से जारी नोटिस में ये स्पष्ट कर दिया है कि परीक्षा तय कार्यक्रम के अनुसार ही होगी।

इस नोटिस के जारी होने के बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के EC एवं कोर्ट सदस्य अमन कुमार ने DU के वीसी प्रो योगेश सिंह को आज शाम एक पत्र भेजकर उनसे इस मामले में हस्तक्षेप करते हुए 28 को निर्धारित परीक्षा को किसी अन्य तिथि पर कराए जाने का अनुरोध किया है। अमन का कहना है कि ये मुस्लिमों का एक प्रमुख त्यौहार है, लिहाजा परीक्षाओं को इस दिन करवाना दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थान के लिए अच्छा कदम नहीं होगा। इस पत्र में DU के AC सदस्य प्रो.लतिका गुप्ता और DUTA एक्जीक्यूटिव रामानंदन के भी नाम हैं।
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2 days ago | [YT] | 40

Munmun Srivastava

DU के पॉलिटिकल साइंस विभाग में किसलिये पहुँचे ऑर्गनाइजर के संपादक प्रफुल्ल केतकर और आंबेडकर यूनिवर्सिटी की VC प्रो.अनु सिंह लाठर ❓

नई दिल्ली, 25 मई
ममुनमुन श्रीवास्तव
‪@munmunsrivastava‬

अम्बेडकर विश्वविद्यालय, दिल्ली की कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठर ने कहा कि बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर को सच्ची श्रद्धांजलि देने का सबसे बड़ा तरीका यह है कि उनकी जो सोच रही है, उसको आप अपने रोजमर्रा के जीवन में उतारें। प्रो. लाठर दिल्ली विश्वविद्यालय के राजनीति विज्ञान विभाग, उत्तरी परिसर में “Constitutionalism, Equality, and Ambedkar's Legacy” विषय पर आयोजित एक चर्चा की अध्यक्षता करते हुए बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रही थी। उन्होंने कहा कि बाबा साहब की विचारधारा को समझने और आगे बढ़ाने में ऐसे आयोजन, सेमिनार और कॉन्फ्रेंस बहुत लाभकारी हैं।

🚨 बाबा साहब ने शिक्षा को आंदोलन में बदला

प्रो.लाठर ने अपने संबोधन में कहा कि उस दौर में हमारे देश के बहुत से नेता ऑक्सफोर्ड और कैम्ब्रिज आदि जैसे विदेशी विश्वविद्यालयों में पढ़ें, लेकिन बाबा साहब का कोई मुक़ाबला नहीं है। बाबा साहब ने अपनी शिक्षा को मूवमेंट में बदला। उन्होंने लोजिकल लर्नर्स की एक मूवमेंट खड़ी की। प्रो. लाठर ने कहा कि मैं बाबा साहब के साथ एक रिसर्चर और यूनिवर्सिटी प्रोफेसर के तौर पर कनैक्ट करती हूँ तो मुझे लगता है कि अगर वो किसी यूनिवर्सिटी में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर होते तो वह और भी अधिक योगदान दे सकते थे।

🚨56 कोर्स

प्रो.लाठर ने बताया कि अम्बेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) में 56 कोर्स बाबा साहेब पर चल रहे हैं। एयूडी में प्रतिवर्ष 14 अप्रैल को बाबा साहब का जयंती समारोह आयोजित किया जाता है जो निरंतर सात दिनों तक चलता है। इस दौरान सभी प्रोग्राम बाबा साहेब भीम राव अम्बेडकर आधारित पर ही होते हैं।


🚨अभिव्यक्ति की आज़ादी पर प्रतिबंध न्यूनतम: केतकर

इस अवसर पर मुख्य वक्ता के तौर पर ऑर्गनाइज़र साप्ताहिक के संपादक प्रफुल्ल केतकर ने संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि संविधान का पहला संशोधन अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर था। उन्होंने कहा कि अम्बेडकर चाहते थे कि अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध कम से कम हों। उन्होंने त्रिपुरदमन सिंह की पुस्तक ‘सिक्सटीन स्टॉर्मी डेज़’ का हवाला देते हुए कहा कि 1951 में भारत के पहले चुनाव से पूर्व पहले संविधान संशोधन को लेकर सदन के भीतर और बाहर बहुत सी बहसें होती थी। सदन के बाहर भी बहुत कुछ घट रहा था जो अंदर सदन में पहुँचकर उसे प्रभावित कर रहा था। छात्रों को ये बहसों को पढ़ना चाहिए। उन्होंने संविधान निर्माण में बाबा साहेब अम्बेडकर के योगदान और उस दौरान कई मामलों में जवारलाल नेहरू के साथ हुए वैचारिक मतभेदों को विस्तार से बताया। प्रफुल्ल केतकर ने कहा कि आज हम जब सीएए पर बात करते हैं तो उसकी जड़ें नेहरू-लियाकत समझौते से जुड़ी हैं।

🚨 प्रो.रेखा सक्सेना ने दिया स्वागत भाषण

कार्यक्रम के आरंभ में राजनीति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेखा सक्सेना ने स्वागत भाषण किया। इस अवसर पर बतौर विशिष्ट अतिथि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (भारत सरकार) के सदस्य डॉ. पार्थ बिस्वास उपस्थित रहे। उनके साथ सफदरजंग अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अश्विनी कुमार तथा समाजसेवी एवं दिल्ली उच्च न्यायालय के अधिवक्ता प्रशांत कुमार बतौर विशेष आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे
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2 days ago | [YT] | 17

Munmun Srivastava

BREAKING NEWS ‼️

EID DAY (28th MAY) DU EXAM WILL NOT BE RESCHEDULE ON ANOTHER DAY‼️

in this Regard a NOTICE From DU Registrar Will Be Out Today

2 days ago | [YT] | 38

Munmun Srivastava

🚨CBSE Ke Class 12 RESULT REVALUATION Process 2026 par ab aapko Kitna Bharosa hai ?

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4 days ago | [YT] | 8

Munmun Srivastava

DU के श्याम लाल कॉलेज में सामान रखने पर डीयू के एसओएल के छात्रों से वसूला गया शुल्क!

केवाईएस ने की कड़ी निंदा!
नई दिल्ली 23 मई
मुनमुन श्रीवास्तव
‪@munmunsrivastava‬

क्रांतिकारी युवा संगठन ने एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से दिल्ली विश्वविद्यालय के श्याम लाल कॉलेज द्वारा स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (SOL) के छात्रों के साथ किए गए भेदभाव की कड़े शब्दों में निंदा करता है। ज्ञात हो कि हाल ही में श्याम लाल कॉलेज प्रशासन ने एसओएल के छात्रों से कॉलेज के बाहर, जो कि एक निर्धारित परीक्षा केंद्र है, अपने बैग और मोबाइल फोन रखने के लिए शुल्क वसूला ।

🚨10 रुपये चार्ज, कोई जवाबदेही नहीं

जब छात्र श्याम लाल कॉलेज में सेमेस्टर-अंत परीक्षा के लिए पहुंचे, तो उन्होंने कॉलेज के गेट के बाहर एक बैनर लटका हुआ पाया, जिस पर बैग और मोबाइल जमा कराने का शुल्क लिखा हुआ था। ज्ञात हो कि बैग और मोबाइल रखने के लिए 10-10 रुपये वसूले जा रहे थे। इतना ही नहीं, यह शुल्क लेने के बावजूद कॉलेज प्रशासन ने किसी भी सामान के खोने की स्थिति में अपनी कोई जिम्मेदारी लेने से साफ इनकार कर दिया।

ज्केवाईएस का दावा है कि देशभर के विश्विद्यालयों में परीक्षा केंद्रों की यह जिम्मेदारी होती है कि वे परीक्षार्थियों के बैग और अन्य सामान सुरक्षित रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करें। किसी भी परीक्षा केंद्र के प्रशासन की ज़िम्मेदारी है कि छात्रों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाए। दिल्ली विश्वविद्यालय रेगुलर कॉलेज के छात्रों के लिए ऐसी सुविधाएँ सुनिश्चित करता है। लेकिन एसओएल छात्रों के संदर्भ में इस प्रकार का व्यवहार साफ तौर पर भेदभावपूर्ण रवैये को दर्शाता है। यह समाज के सबसे वंचित तबकों से आने वाले छात्रों के साथ किए जा रहे भेदभाव का स्पष्ट प्रमाण है।

🚨पहले भी SOL छात्रों के साथ हुई हैं घटनाएं

यह पहली बार नहीं है कि एसओएल के छात्रों को इस तरह के भेदभाव का सामना करना पड़ रहा है। जनवरी 2024 में, एसओएल बी.कॉम प्रथम सेमेस्टर के छात्रों को कड़ाके की ठंड में मोतीलाल नेहरू कॉलेज और अरबिंदो कॉलेज में अस्थायी तंबुओं में परीक्षा देने के लिए मजबूर किया गया था। इसी प्रकार, पिछले वर्ष मई में छात्रों को नॉर्थ कैंपस स्थित विश्वविद्यालय भवन के निर्माणाधीन बेसमेंट पार्किंग क्षेत्र में परीक्षा देने के लिए बाध्य किया गया था। इतना ही नहीं, इसी वर्ष मार्च महीने में दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा आयोजित एक जॉब मेला कार्यक्रम में भी अत्यंत भेदभावपूर्ण रवैया अपनाया गया, जिसमें डीयू के स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग (एसओएल) के छात्रों की भागीदारी पर विशेष रूप से रोक लगा दी गई थी। इसी प्रकार, वर्ष 2019 में महिला अध्ययन विकास केंद्र द्वारा आयोजित एक लोगो-डिज़ाइन प्रतियोगिता में भी एसओएल छात्रों को विशेष रूप से भाग लेने से वंचित किया गया था।

🚨SOL छात्र लाचार

इस प्रकार, निर्माणाधीन बेसमेंटों और तंबुओं में परीक्षा देने से लेकर परीक्षा कार्यक्रम में अचानक बदलाव किए जाने और अध्ययन सामग्री जैसी बुनियादी चीजों के लिए कई दिनों तक लंबी कतारों में खड़े रहने तक, एसओएल के छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय की खुली उदासीनता और भेदभाव का शिकार रहे हैं।

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4 days ago | [YT] | 37

Munmun Srivastava

BREAKING NEWS 📢

CBSE Revaluation अपडेट

CBSE ने अब से कुछ देर पहले एक्स हैंडल पर एक पोस्ट डालकर कहा है कि संस्थान पूरी स्पष्टता, पारदर्शिता और सटीकता के साथ Revaluation प्रोसेस को पूरा कर रहा है। CBSE ने यह भी कहा है कि स्कैन्ड कॉपियों को लेकर बहुत अधीरता न दिखाएं हर GENUINE इश्यू को एक निश्चित प्रक्रिया के तहत निवारण किया जाएगा। साथ ही CBSE ने छात्रों एवं अभिभावकों से अपील की है कि वह CBSE की आधिकारिक वेबसाइट से ही सूचनाएँ प्राप्त करें। इस सलाह से आप कितने संतुष्ट हैं कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं। यह भी बताएं कि CBSE के दावे पर आपको भरोसा है⁉️

इसके साथ ही CBSE ने सोशल मीडिया में घूम रहे एक अन्य सर्कुलर को FAKE बताया है।
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4 days ago | [YT] | 14

Munmun Srivastava

DU Update: 30 जून तक हॉस्टल में रह सकेंगी अंतिम वर्ष की छात्राएं

छात्रहितों से संबंधित मांगों को लेकर ABVP ने डीयू क VC को सौंपा ज्ञापन

नई दिल्ली, 22 मई, 2026
मुनमुन श्रीवास्तव
‪@munmunsrivastava‬

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद(ABVP)दिल्ली प्रांत और अभाविप नीत दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ द्वारा छात्रहित से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों को लेकर आज दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति से मिलकर ज्ञापन सौंपा। प्रशासन ने इन विषयों को गंभीरता से लेते हुए कुछ विषयों का समाधान तो तुरंत और कुछ का जल्द से जल्द समाधान करने का आश्वासन दिया।

🚨 हॉस्टल छात्राओं की समस्या

अभाविप नीत डूसू ने विश्वविद्यालय महिला छात्रावास सहित विभिन्न छात्रावासों में रह रही छात्राओं की समस्याओं को लेकर प्रशासन को विस्तृत ज्ञापन सौंपा था। परिषद ने अपने ज्ञापन में कहा था कि विश्वविद्यालय की अंतिम सेमेस्टर परीक्षाएँ जून माह तक चल रही हैं तथा इसी अवधि में यूजीसी-नेट, सीएसआईआर-नेट एवं अन्य प्रतियोगी परीक्षाएँ भी आयोजित हो रही हैं। ऐसे समय में छात्राओं पर छात्रावास खाली करने का दबाव बनाना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि उनके शैक्षणिक भविष्य, मानसिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा के लिए भी गंभीर चिंता का विषय है। अभाविप की पहल के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने अंतिम वर्ष की छात्राओं को 30 जून 2026 तक छात्रावास में नियमित निवासी के रूप में रहने की अनुमति प्रदान की।

🚨 पीजी प्रवेश प्रक्रिया में नहीं आएंगी दिक्कतें

साथ ही परिषद द्वारा पीजी प्रवेश प्रक्रिया में विद्यार्थियों के समक्ष आ रही तकनीकी एवं दस्तावेजी समस्याओं को लेकर उठाई गई मांगों को भी प्रशासन ने गंभीरता से संज्ञान में लिया है। अभाविप ने प्रशासन को यह भी अवगत कराया कि अनेक छात्रावासों में छात्राओं पर दबाव बनाने के लिए पानी और बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओं को बाधित किया जा रहा है, अध्ययन कक्षों को बंद किया जा रहा है तथा अतिरिक्त आर्थिक दंड लगाने की चेतावनियाँ दी जा रही हैं। परिषद ने इसे छात्राओं के साथ संस्थागत उत्पीड़न बताते हुए तत्काल रोक लगाने की मांग की थी।

🚨छात्र हितों पर गंभीरता दिखाये DU: सार्थक शर्मा

अभाविप दिल्ली प्रांत मंत्री सार्थक शर्मा ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन का प्रत्येक निर्णय छात्रहित, पारदर्शिता और समान अवसर के सिद्धांत पर आधारित होना चाहिए। छात्रों के अधिकारों, गरिमा और शैक्षणिक हितों की रक्षा के लिए अभाविप निरंतर संघर्षरत रहेगी और छात्रहित से जुड़े प्रत्येक मुद्दे को गंभीरता से उठाती रहेगी।
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5 days ago | [YT] | 24

Munmun Srivastava

BREAkING NEWS 📢

CBSE की वेबसाइट पर लगातार चल रही दिक्कतों के चलते क्लास 12 के विद्यार्थियों को Revaluation के लिये अपनी answer Script के लिए आवेदन करने में बहुत परेशानी आ रही थी। अब CBSE ने एक नया सर्कुलर जारी किया है, जिसमें एक और अतिरिक्त दिन दिया गया है। अब देखना यह है कि वेबसाइट आगे ठीक से काम करती है या नहीं ?
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5 days ago | [YT] | 21

Munmun Srivastava

डीयू के VIce Chancellor ने किसलिए की आईसीसीआर प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक, क्या है एजेंडा ❓

दिल्ली, 21 मई
मुनमुन श्रीवास्तव
@munmunsrivastava

दिल्ली विश्वविद्यालय(DU ) के कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के एक उच्च-स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व आईसीसीआर की महानिदेशक के. नंदिनी सिंगला ने किया। इस बैठक का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीयकरण, सांस्कृतिक जुड़ाव और विद्यार्थियों तक पहुँच को बढ़ावा देने के लिए संस्थागत सहयोग को मजबूत करना था।

🚨अधिक संख्या में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को करें आकर्षित

इस बैठक के दौरान सामूहिक चर्चा में दोनों संस्थानों ने संस्थागत सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य को लेकर विश्वविद्यालय में अधिक संख्या में अंतरराष्ट्रीय विद्यार्थियों को आकर्षित करने की रणनीतियों पर बात की और विश्वविद्यालय को एक पसंदीदा वैश्विक शैक्षणिक केंद्र के रूप में स्थापित करने के तरीकों पर विचार किया। बैठक में अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के जुड़ाव से संबंधित विभिन्न चुनौतियों और सहयोगात्मक पहलों के माध्यम से उन पर काबू पाने के तरीकों पर भी चर्चा की गई।

🚨 विदेशी छात्रों के लिए योग सत्र

इस बैठक के दौरान आईसीसीआर प्रतिनिधिमंडल में उप महानिदेशक डॉ. राजेश रंजन, छात्रवृत्ति निदेशक डॉ. संजय वेदी और श्रीमती विनोद रानी कपूर शामिल रहे जबकि दिल्ली विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व कुलपति प्रो. योगेश सिंह के नेतृत्व में रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता, अंतर्राष्ट्रीय संबंध की अध्यक्षा प्रो. नीरा अग्निमित्रा और विदेशी छात्र रजिस्ट्री की डीन प्रो. रूपम कपूर ने किया।

चर्चा के दौरान सांस्कृतिक कूटनीति और छात्रों के कल्याण के महत्व पर भी ज़ोर दिया गया। इस संबंध में, दोनों पक्ष विदेशी छात्रों के लिए योग सत्र शुरू करने पर सहमत हुए; इसके साथ ही भारतीय नृत्य और संगीत के सत्र भी आयोजित किए जाएँगे, जिनका उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और कल्याणकारी परंपराओं से गहराई से परिचित कराना है।

🚨वैश्विक दूत

इस पहल का उद्देश्य भारत के ऐसे वैश्विक दूत तैयार करना है जो सांस्कृतिक रूप से समृद्ध हों। इस अवसर पर कुलपति ने प्रतिनिधिमंडल को ऐतिहासिक 'वाइस रीगल लॉज' का भ्रमण भी कराया। इस दौरान उन्होंने इस प्रतिष्ठित विरासत भवन की समृद्ध ऐतिहासिक विरासत के बारे में जानकारी साझा की; विदित रहे कि वर्तमान में इसी भवन में विश्वविद्यालय का प्रशासनिक कार्यालय स्थित है।
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1 week ago | [YT] | 14

Munmun Srivastava

CBSE के Class 12 में मैथमेटिक्स के खराब रिजल्ट पर गणित के एक सीनियर शिक्षक की टिप्पणी

नई दिल्ली 20 मई 2026
मुनमुन श्रीवास्तव
@munmunsrivastava

सीबीएसई द्वारा इस वर्ष लागू की गई OSM (On-Screen Marking) प्रणाली ने विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के बीच गंभीर चिंता पैदा कर दी है, विशेषकर गणित जैसे विषय में जहाँ स्टेप-वाइज मार्किंग, लॉजिक और विश्लेषणात्मक समझ का बहुत अधिक महत्व होता है।
डिजिटल मूल्यांकन का उद्देश्य भले ही पारदर्शिता और एक्यूरेसी बढ़ाना रहा हो, लेकिन जमीनी स्तर पर इस प्रणाली में कई प्रकार की समस्याएँ और अनियमितताएँ देखने को मिलीं। इसके बाद अब रिवॉल्यूशन प्रक्रिया को लेकर भी छात्र और अभिभावक खासे परेशान हैं।

कॉपियों में विज़िबिलिटी की समस्या

कई शिक्षकों को स्कैन की गई कॉपियों में विज़िबिलिटी की समस्या आई, जहाँ उत्तरों के कुछ भाग स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहे थे। गणित जैसे विषय में छोटी-सी स्कैनिंग समस्या भी सीधे विद्यार्थियों के अंकों को प्रभावित कर सकती है।
सबसे बड़ी चिंता यह रही कि कंप्यूटर आधारित मूल्यांकन में अत्यधिक कठोरता दिखाई दी। गणित केवल अंतिम उत्तर का विषय नहीं है, बल्कि उसमें प्रयोग किए गए स्टेप्स, लॉजिक और सोचने की प्रक्रिया भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है।

OSM प्रणाली में मानवीय पक्ष लगभग समाप्त

अनेक विद्यार्थियों ने वैकल्पिक विधियों, शॉर्टकट्स या अलग तरीकों से सही समाधान निकाले, लेकिन निर्धारित पैटर्न से अलग होने के कारण उन्हें उचित अंक नहीं मिल पाए।
पारंपरिक मैनुअल चेकिंग में अनुभवी शिक्षक विद्यार्थियों के प्रयास, कॉन्सेप्ट और सोच को समझते हुए उचित निर्णय और मानवीय संवेदनशीलता के साथ मूल्यांकन करते थे। वहाँ एक अकादमिक संतुलन और व्यवहारिक समझ होती थी। लेकिन OSM प्रणाली में यह मानवीय पक्ष लगभग समाप्त हो गया और केवल तकनीकी एक्यूरेसी पर अत्यधिक निर्भरता के कारण कई योग्य विद्यार्थियों के साथ अन्याय जैसी स्थिति बनी।

बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स की आयी कंपार्टमेंट

एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इतनी बड़ी प्रणाली को लागू करने से पहले शिक्षकों को पर्याप्त प्रैक्टिकल ट्रेनिंग नहीं दी गई। अधिकांश शिक्षकों को केवल औपचारिक और सीमित प्रशिक्षण देकर सीधे डिजिटल मूल्यांकन की जिम्मेदारी सौंप दी गई। इसके बावजूद परिणाम बहुत जल्दबाजी में घोषित कर दिए गए और सीबीएसई द्वारा हर वर्ष अपनाई जाने वाली मॉडरेशन प्रक्रिया भी इस बार प्रभावी रूप से दिखाई नहीं दी।

गलती सिस्टम की भुगत रहे शिक्षक

इसका परिणाम यह हुआ कि अनेक विद्यार्थियों के अंक उम्मीद से काफी कम आए, बड़ी संख्या में विद्यार्थी कंपार्टमेंट में पहुँचे, अभिभावक मानसिक तनाव से गुज़रे और शिक्षक — गलती न होने के बावजूद — हर तरफ से दबाव और आलोचना का सामना कर रहे हैं। दुर्भाग्यपूर्ण बात यह है कि आजकल पूरी जिम्मेदारी सीधे शिक्षकों पर डाल दी जाती है, जबकि वास्तविक समस्याएँ सिस्टम और प्रक्रिया से जुड़ी होती हैं।
तकनीक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए होनी चाहिए, न कि विद्यार्थियों, अभिभावकों और शिक्षकों के लिए अतिरिक्त परेशानी का कारण बनने के लिए। शिक्षा केवल डेटा और स्क्रीन तक सीमित नहीं है; उसमें मानवीय समझ, निष्पक्षता और विद्यार्थियों के प्रयासों का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है।

मॉडरेशन प्रक्रिया को प्रभावी बनाएगा

आशा है कि सीबीएसई इस वर्ष की OSM मूल्यांकन प्रक्रिया की कमियों की गंभीरता से समीक्षा करेगा, स्कैनिंग और मूल्यांकन प्रणाली को और बेहतर बनाएगा, शिक्षकों को उचित प्रैक्टिकल ट्रेनिंग देगा, मॉडरेशन प्रक्रिया को प्रभावी बनाएगा और भविष्य में ऐसी संतुलित व्यवस्था लागू करेगा जिससे विद्यार्थियों को वास्तव में न्यायपूर्ण मूल्यांकन मिल सके।
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Links 🔗

https://youtu.be/E7wpI4CHgl4

https://youtu.be/dfJCnOo7J7M

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1 week ago | [YT] | 20