|| “एकोम् सत् विप्रा बहुधा वदन्ति”। || जय श्री राम 🙏 ||🚩🕉️
“सत्यमेव जयते नानृतम्”— सत्य की ही जीत होती है, असत्य की नहीं।
Welcome to a space where Sanatan Dharma meets Science —
जहाँ प्राचीन वेदों की गहराई और आधुनिक विज्ञान की समझ साथ आती है।
यहाँ हम decode करते हैं:
🔹 मंदिरों के रहस्य
🔹 शास्त्रों के hidden meanings
🔹 rituals के पीछे का science
🔹 और जीवन के गहरे spiritual truths
✨ यह सिर्फ ज्ञान नहीं, एक inner awakening journey है।
📿 अगर आप भी सच को समझना चाहते हैं,
तो इस यात्रा का हिस्सा बनिए।
📩 Collaboration / Queries: spiritualconce@gmail.com
SpiritualConce
Detail Explanation Ke liye Comment kariye "Mahadev🕉️" Video kal Saam 4 baje Tak Aapko Mil Jayegi...
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3 weeks ago (edited) | [YT] | 2,386
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SpiritualConce
youtube.com/shorts/6BHV75jfx-...
This isn’t just a diagram — it’s a map of consciousness.
From Maya (illusion) at the base to Shiva Tattva (pure awareness) at the peak, this journey shows how human existence evolves beyond limitations. The rise isn’t physical — it’s internal. Every layer you cross is a layer of identity you drop.
Tantra doesn’t ask you to believe — it asks you to experience and transcend.
🔥 You’re not climbing upward… you’re peeling away everything that isn’t you.
1 month ago (edited) | [YT] | 924
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SpiritualConce
श्रीमद्भगवद्गीता में कुल कितने श्लोक हैं??
1 month ago | [YT] | 70
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SpiritualConce
👉यदि आदि गुरु शंकराचार्य जी से आपको एक प्रश्न पूछना होता तो आप क्या पूछते ? Comment करें👇👇
1 month ago (edited) | [YT] | 24
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SpiritualConce
आदि गुरु शंकराचार्य जी की जयंती पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएं!🙏 शिवोहम 🙏
1 month ago (edited) | [YT] | 1,425
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SpiritualConce
व्यास संहिता (व्यास स्मृति) का जो अनुवाद आप देख रहे हैं (विशेषकर एम.एन. दत्त वाला 1906 का संस्करण), उसमें कई गंभीर विसंगतियां और अनुवाद की त्रुटियां हैं।
1. श्लोक 55: शाकाहारी भोजन का वर्णन
इमेज में श्लोक 55 का अनुवाद कहता है कि ब्राह्मण को मांस नहीं खाना चाहिए, जिससे यह संकेत मिलता है कि अन्य समय पर वह खा सकता है। लेकिन मूल संस्कृत श्लोक कुछ और ही कहता है।
मूल संस्कृत (अध्याय 3, श्लोक 55):
कृसरं संयावं पूपं पायसं च विशेषतः। भोजयेद् ब्राह्मणांस्तत्र स्वयं चैव तथाऽश्नुयात्॥ ५५ ॥
सही अर्थ: इसमें 'कृसर' (खिचड़ी), 'संयाव' (हलवा/मिठाई), 'पूप' (मालपुआ) और 'पायस' (खीर) का वर्णन है। यहाँ ब्राह्मणों को यह शुद्ध शाकाहारी भोजन कराने और स्वयं खाने का निर्देश है। मूल श्लोक में 'मांस' शब्द का कहीं उल्लेख ही नहीं है। अनुवादक ने यहाँ अपनी ओर से मांस का संदर्भ जोड़कर अर्थ का अनर्थ कर दिया है।
2. श्लोक 56: 'माष' (दाल) बनाम 'मांस' का भ्रम
इमेज में लिखा है कि यज्ञ में मांस न लेने से ब्राह्मण पतित हो जाता है। यह सबसे विवादास्पद हिस्सा है और यहीं सबसे बड़ी अनुवाद की गलती है।
शब्दों का खेल: कई विद्वानों और पांडुलिपियों (Manuscripts) के अनुसार, यहाँ शब्द 'माष' (Maasha) था, जिसका अर्थ होता है उड़द की दाल।
सत्य: श्राद्ध और यज्ञों में उड़द की दाल का विशेष महत्व होता है। 'माष' और 'मांस' सुनने और लिखने में मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण बाद के अनुवादकों ने या तो गलती से या जानबूझकर 'माष' की जगह 'मांस' लिख दिया। व्यास स्मृति जैसे ग्रंथों का मूल भाव सात्विक भोजन का ही रहा है।
2 months ago | [YT] | 131
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SpiritualConce
आप सभी को महाशिवरात्रि के इस पवन पर्व की ढेर सारी शुभकामनाएं..
हर हर महादेव 🙏🙏
2 months ago (edited) | [YT] | 873
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SpiritualConce
एकादशी के दिन पृथ्वी पर वायुमंडलीय दबाव (Atmospheric Pressure) सबसे कम होता है। इस समय पेट खाली रखने से शरीर के अंगों पर दबाव नहीं पड़ता और शरीर आसानी से Detox हो जाता है। साथ ही, चंद्रमा का प्रभाव हमारे शरीर के जल तत्व को प्रभावित करता है; उपवास से मन शांत और स्थिर रहता है।
महीने में: 2 एकादशी (शुक्ल और कृष्ण पक्ष)।
साल में: कुल 24 एकादशी।
फरवरी की तिथियां: 13 फरवरी (विजया) और 27 फरवरी (आमलकी)।
यह व्रत शरीर की गंदगी साफ करने और मानसिक शक्ति बढ़ाने का सबसे प्राचीन तरीका है।
2 months ago | [YT] | 112
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SpiritualConce
सरस्वती पूजा के लिए कई श्लोक और मंत्र हैं, जिनमें सबसे प्रमुख हैं "सरस्वती महाभागे विद्ये कमल लोचने" (ज्ञान और विद्या के लिए) और "ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः" (बीज मंत्र), जो ज्ञान, बुद्धि और कला की प्राप्ति के लिए जपे जाते हैं; साथ ही "या देवी सर्वभूतेषु" (हर रूप में देवी की स्तुति) भी बहुत महत्वपूर्ण है, जिनका जाप करके भक्त माँ सरस्वती को प्रसन्न करते हैं।
4 months ago | [YT] | 478
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SpiritualConce
उदयातिथि के अनुसार इस वर्ष मकर संक्रांति का पर्व 15 जनवरी को ही मनाना शास्त्रसम्मत माना गया है. पंचांग के अनुसार, 14 जनवरी यानी आज रात करीब 9:35 बजे सूर्य मकर राशि में प्रवेश करेंगे, इसलिए संक्रांति का पुण्यकाल 15 जनवरी की प्रातःकाल में रहेगा.
4 months ago | [YT] | 62
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