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Himalayilog| e- Book of Himalayan Civilization | हिमालयीलोग । By Journalist Dr.Harish Chandra Lakhera, New Delhi, India /
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भारत में सभी के निशाने पर क्यों हैं ब्राह्मण ? Why are Brahmins the target of everyone in India?
भारत में ब्राह्मण सभी के निशाने पर क्यों हैं ?
- डा. हरीश चंद्र लखेड़ा ( Dr. Harish Chandra Lakhera )
पूरी रिपोर्ट मेरे इस ब्लॉग में है।
himalayilog.blogspot.com/2025/07/why-are-brahmins-…
1 day ago | [YT] | 12
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Himalayilog
youtube.com/live/mnArXtcbNmo?si=pYqNLoFcaE0Rf9G1
उत्तराखंड : "डॉक्टर मरीज ढूंढ रहे हैं" या मौत मरीजों को ढूंढ रही है?
Shame on You, Dhami Govt! पहाड़ों में कब तक इलाज के अभाव में मरती रहेंगी महिलाएं?
उत्तराखंड के स्वास्थ्य मंत्री रहे धन सिंह रावत ने कहा था कि उत्तराखंड में अब डाक्टर ही मरीजों को ढूंढ रहे हैं। यह दावा कितना झठा था, यह चमोली के थराली में 35 वर्षीय सरिता देवी की मौत की घटना बयां कर रही है। उत्तराखंड के पहाड़ों में बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। चमोली के थराली में 35 वर्षीय सरिता देवी की एम्बुलेंस में हुई मौत कोई पहली घटना नहीं है। गढ़वाल से लेकर कुमाऊं तक, गर्भवती महिलाएं विशेषज्ञ डॉक्टरों, विशेषकर गायनोकोलॉजिस्ट (स्त्री रोग विशेषज्ञ) की कमी और बदहाल आपातकालीन परिवहन व्यवस्था के कारण रास्ते में ही दम तोड़ने को मजबूर हैं। अस्पताल केवल 'रेफरल सेंटर' बनकर रह गए हैं, जहां गंभीर मरीजों को भगवान भरोसे मैदानी इलाकों के लिए भेज दिया जाता है। घुमावदार रास्तों पर बिना ऑक्सीजन और पंखे की एम्बुलेंस में जिंदगी की जंग हारती इन प्रसूताओं की मौत सीधे तौर पर शासन-प्रशासन की नाकामी को दर्शाती है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल, स्वास्थ्य सचिव और स्वास्थ्य महानिदेशक की नाक के नीचे चल रही यह बदहाली पहाड़ी जनमानस के साथ क्रूर मजाक है। आखिर कब तक पहाड़ों की माताओं-बहनों को इस लचर और संवेदनहीन सिस्टम की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी? अब समय केवल खोखले दावों का नहीं, बल्कि धरातल पर जवाबदेही तय करने और डॉक्टरों की स्थायी नियुक्ति का है।
पहाड़ का दर्द: अस्पतालों के चक्रव्यूह में टूटा फौजी के लाल का दम
जुलाई 2025 में चमोली के फौजी दिनेश चंद्र के डेढ़ वर्षीय बेटे शुभांशु की मौत ने उत्तराखंड के खोखले स्वास्थ्य तंत्र को उजागर कर दिया। गंभीर डिहाइड्रेशन से पीड़ित बच्चे को ग्वालदम, बैजनाथ और बागेश्वर के अस्पतालों से केवल 'रेफर' किया गया। 108 एम्बुलेंस की देरी और समय पर बाल रोग विशेषज्ञ न मिलने से मासूम ने हल्द्वानी में दम तोड़ दिया।
इस व्यवस्था के खिलाफ अक्टूबर 2025 में अल्मोड़ा के चौखुटिया से देहरादून तक ऐतिहासिक पैदल सत्याग्रह यात्रा निकाली गई। सामाजिक कार्यकर्ता भुवन सिंह कठायत के नेतृत्व में उमड़े जनसैलाब ने मांग की कि पहाड़ के अस्पतालों को केवल 'रेफरल सेंटर' बनाना बंद किया जाए।
उत्तराखंड में विशेषज्ञ डाक्टरों के 45% से अधिक पद खाली हैं। राज्य में सर्जन, शिशु रोग विशेषज्ञ, फिजिशियन और रेडियोलॉजिस्ट जैसे विशेषज्ञों के लगभग 45% से 50% पद रिक्त पड़े हैं।
गायनाकोलॉजिस्ट का बड़ा अकाल: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHCs) और जिला अस्पतालों में स्त्री रोग विशेषज्ञों (Gynecologists) की कमी सबसे घातक साबित हो रही है। कुल स्वीकृत पदों में से मात्र 25% से 30% पर ही स्थायी महिला डॉक्टर तैनात हैं, जिससे प्रसूताओं को मैदानी क्षेत्रों में रेफर करना मजबूरी बन गया है।
सरकार कहती रही है कि इस कमी को दूर करने के लिए 'यू-कोट' (You Quote We Pay) जैसी योजनाओं के तहत संविदा पर डॉक्टरों को ऊंचे वेतन पर रख रही है। साथ ही, जून 2026 में 300 से अधिक डॉक्टरों के तबादले कर पर्वतीय क्षेत्रों में डॉक्टरों को भेजने की कोशिश की गई है, मगर धरातल पर अब भी चमोली और उत्तरकाशी जैसे सीमांत जिले डॉक्टरों के इंतजार में हैं।
दावा देखिए--- आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, जहाँ वर्ष 2021-22 में राज्य की प्रति व्यक्ति आय ₹1,94,670 थी, वह अब बढ़कर ₹2,73,921 तक पहुँच गई है। सरकार का मुख्य दावा यह है कि उत्तराखंड की यह औसत वार्षिक आय देश के राष्ट्रीय औसत (लगभग ₹2.19 लाख) से करीब ₹54,000 अधिक है और यह पड़ोसी पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश से भी आगे है। सरकार इस विकास का श्रेय होमस्टे, पर्यटन और बढ़ते औद्योगिक निवेश को देती है।
"The healthcare infrastructure in the mountains of Uttarakhand is in a state of collapse. The tragic demise of 35-year-old Sarita Devi in a poorly equipped ambulance in Chamoli's Tharali is not an isolated incident. Across the Himalayan state, pregnant women are losing their lives on treacherous roads due to a severe shortage of specialists, particularly gynecologists, and a dysfunctional emergency transit system. Rural community health centers have turned into mere 'referral hubs' that push critical patients toward plains without stabilizing them. Fighting for breath in moving cages without oxygen or functional fans, these mothers pay the ultimate price for systemic apathy. This critical failure directly points toward the negligence of CM Pushkar Singh Dhami, Health Minister Subodh Uniyal, the Health Secretary, and the Director-General of Health. How long will the women of the hills remain victims of administrative indifference? It is high time the government stops making empty promises, ensures accountability, and deploys permanent medical staff in remote areas to save innocent lives."
#उत्तराखंड_स्वास्थ्य_संकट #पहाड़_का_दर्द #धामी_सरकार_जवाब_दो #सुबोध_उनियाल #थराली_घटना #पहाड़_में_लापरवाही #उत्तराखंड_पलायन #स्वास्थ्य_सुविधाएं_शून्य
#UttarakhandHealthcareCrisis #MaternalHealth #SaveTheHills #DhamiGovernment #SubodhUniyal #TharaliTragedy #MedicalApathy #HillStateReality
3 days ago | [YT] | 8
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Himalayilog
https://youtu.be/L77QT9G-6vI
पहाड़ों की शांति भंग: निहंगों का गौरवशाली इतिहास बनाम वर्तमान का 'उत्पात'---
निहंग सिखों का इतिहास वीरता, त्याग और मुगल अत्याचारों के विरुद्ध अदम्य संघर्ष की गाथा है। 'गुरु के लाडले' के रूप में विख्यात, निहंगों ने सदियों तक खालसा पंथ की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर किया। पारंपरिक नीले वस्त्र, दस्तार और शस्त्रों से लैस ये योद्धा कभी सिख धर्म की मर्यादा और स्वाभिमान के प्रतीक थे।
दुर्भाग्यपूर्ण है कि आज उत्तराखंड और हिमाचल जैसे शांत पर्वतीय राज्यों में कुछ निहंग समूहों का आचरण इस गौरवशाली इतिहास के विपरीत दिखाई दे रहा है। धार्मिक स्थलों के आसपास अवैध अतिक्रमण, स्थानीय परंपराओं को चुनौती देना और प्रशासन के सामने 'शक्ति प्रदर्शन' करना आम हो गया है। जब एक योद्धा वर्ग अपने शस्त्रों का उपयोग अपनी आस्था की रक्षा के बजाय सार्वजनिक व्यवस्था बिगाड़ने और डराने-धमकाने में करता है, तो उनका गौरव धूमिल होने लगता है।
हिमाचल और उत्तराखंड की भोली-भाली जनता और उनकी शांत संस्कृति के लिए निहंगों का यह आक्रामक रवैया किसी 'उत्पात' से कम नहीं है। कानून को अपने हाथ में लेने की प्रवृत्ति यह दर्शाती है कि कहीं न कहीं 'साधना' का स्थान अब 'अहंकार' ने ले लिया है। यदि इस पंथ को अपनी मर्यादा बचानी है, तो उन्हें आत्ममंथन करना होगा कि क्या वे 'रक्षक' बने रहना चाहते हैं या 'उपद्रवी' का तमगा लेना चाहते हैं।
#निहंग #उत्तराखंड #हिमाचल #कानूनकाशासन #अतिक्रमण #धार्मिकमर्यादा #पहाड़ #सुरक्षा
#Nihang #Uttarakhand #HimachalPradesh #RuleOfLaw #Encroachment #MountainCulture #PublicOrder #Accountability
1 week ago | [YT] | 4
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Himalayilog
जाति जनगणना 1901 का सच।
1 week ago | [YT] | 3
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Himalayilog
यह वीडियो एक बार देखिए तो सही।
1 week ago | [YT] | 12
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Himalayilog
जै हिमालय, जै भारत।
दोस्तों !
हिमालय की पहाडि़यों में गूंजती है राजुला-मालूशाही की ये अमर प्रेम कहानी! ❤️✨
https://youtu.be/S5hirZfkdpQ?si=SV4PP...
मेरी नई प्रस्तुति 'तू मेरी राजूला, मि तेरो मालूशा' अब आपके बीच है। कुमाऊं, उत्तराखंड हिमालय की गोद में पनपी यह अमर प्रेम गाथा न केवल एक गीत है, बल्कि हमारे हिमालय उत्तराखंड की आत्मा है। इसकी हर धुन में मेरा हिमालय बसता है। उत्तराखंड बसता है।
आपसे विनम्र निवेदन है कि इस गीत को एक बार अवश्य सुनें। मुझे पूरा विश्वास है कि यह आपको पसंद आएगा। यदि यह आपके हृदय को छू जाए, तो इसे अपने कम से कम 5 मित्रों के साथ साझा करना न भूलें।
#RajulaMalushahi #GarhwaliGeet #Uttarakhand #DrHarishChandraLakhera #PahadiCulture#GarhwaliSong #PahadiSoul #Pahadi
आपका प्यार और समर्थन ही मेरी पूंजी है। वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें।
धन्यवाद!
- डॉ. हरीश चंद्र लखेड़ा
2 weeks ago | [YT] | 2
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Himalayilog
जै हिमालय, जै भारत।
दोस्तों !
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https://youtu.be/S5hirZfkdpQ?si=SV4PP...
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आपका प्यार और समर्थन ही मेरी पूंजी है। वीडियो को लाइक और शेयर जरूर करें।
धन्यवाद!
- डॉ. हरीश चंद्र लखेड़ा
2 weeks ago | [YT] | 27
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Himalayilog
जै हिमालय, जै भारत।
दोस्तों !
हिमालय की पहाडि़यों में गूंजती है राजुला-मालूशाही की ये अमर प्रेम कहानी! ❤️✨
https://youtu.be/S5hirZfkdpQ?si=SV4PP...
मेरी नई प्रस्तुति 'तू मेरी राजूला, मि तेरो मालूशा' अब आपके बीच है। कुमाऊं, उत्तराखंड हिमालय की गोद में पनपी यह अमर प्रेम गाथा न केवल एक गीत है, बल्कि हमारे हिमालय उत्तराखंड की आत्मा है। इसकी हर धुन में मेरा हिमालय बसता है। उत्तराखंड बसता है।
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धन्यवाद!
- डॉ. हरीश चंद्र लखेड़ा
2 weeks ago | [YT] | 5
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Himalayilog
youtube.com/live/9CcE4i1I8Tw?si=zesneeXLkzGRjaXc
2 weeks ago | [YT] | 16
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Himalayilog
youtube.com/live/9CcE4i1I8Tw?si=zesneeXLkzGRjaXc
The Untold Saga: From Lokpal to Hemkund---
The history of Hemkund Sahib and Lokpal Lake is a complex confluence of faith, mythology, and modern history. For centuries, this remote Himalayan region was revered as 'Lokpal,' believed in Hindu tradition to be the site of penance for Lord Lakshman and King Pandu. The ancient temple situated here continues to stand as a living testament to this profound mythological heritage.
Until the early 20th century, this site remained largely outside the mainstream Sikh consciousness. It was only after deciphering the references to 'Hemkunt'—the site of his previous life's penance—in Guru Gobind Singh’s autobiography, Bachittar Natak, that Sant Sohan Singh undertook its search in the 1930s. From a small shrine, it gradually evolved into a majestic Gurdwara, becoming one of the most sacred pilgrimage sites in the Sikh world.
2 weeks ago | [YT] | 0
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