इस मंदिर को एक बार देखे बिना मृत्यु होना मतलब आप का भारत मे जन्म लेना व्यर्थ है।
भारत का गौरव दुनिया का अजूबा
यह मंदिर कर्नाटक राज्य के हासन ज़िले के बेलूर नामक ऐतिहासिक स्थान पर स्थित हैं। यहमंदिरक़रीब900वर्षपुरानाहैं। इस मंदिर का निर्माण होयसल वंश के राजा विष्णुवर्धन द्वारा 1106 से 1117 के बीच करवाया गया था। 1104 में युद्ध जीतने की ख़ुशी में विष्णुवर्धन ने इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया जो की 1117 में पूरा हुआ।
पुराने दिनों के दौरान, यह "द्वारसमुद्र" के रूप में जाना जाता था, जिसका अर्थ है "समुद्र का द्वार"।
इस मंदिर की कई जगाह इतनी महीन शिल्पकारी है कि जिसे सामान्य आंखों से देख पाना ना मुमकिन है उसे देखने समझने के लिए मेग्नीफाइन ग्लॉस की जरूरत होती है सोचिये ये उस 10वी 11वी सदी के कारीगरों ने बनाया कैसे होगा जबकि मेग्नीफाईन ग्लास की खोज 1296 में इंग्लैंड में हुई है।
आधुनिक दुनिया मे होली की पिचकारी की खोज और पेटेंट 1896 का है पर इस मंदिर के शिल्पों में 10वी 11वी सदी में ही होली में पिचकारी का उपयोग करते हुवे शिल्प है जिन्हें हाली ही में खोजा गया है 🙏🏼
"यह है महाराष्ट्र के ओल्ड महाबलेश्वर में स्थित ऐतिहासिक 'कृष्णबाई मंदिर'। इसे नदी का उद्गम स्थल माना जाता है।"
"यहाँ का सुकून और हज़ारों साल पुरानी वास्तुकला आपको किसी और ही दुनिया में ले जाएगी। अगर आप शांति और इतिहास के शौकीन हैं, तो यह जगह आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए!"
"महाबलेश्वर की खूबसूरती का एक अनमोल कोना। क्या आप यहाँ जाना चाहेंगे? कमेंट्स में बताएं!"
"क्या आपने कभी किसी ऐसे शहर के बारे में सुना है, जहाँ की हवाओं में आज भी इतिहास की गूंज सुनाई देती है? स्वागत है हम्पी में—विजयनगर साम्राज्य की वह राजधानी, जिसे कभी 'विजय का शहर' कहा जाता था।"
"14वीं शताब्दी में, हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने तुंगभद्रा नदी के तट पर एक ऐसे साम्राज्य की नींव रखी, जिसने दक्षिण भारत के इतिहास को स्वर्ण अक्षरों में लिख दिया। यह था विजयनगर साम्राज्य। व्यापार, कला और वास्तुकला के मामले में हम्पी दुनिया के सबसे समृद्ध शहरों में गिना जाता था।"
"हम्पी का हृदय है—विरूपाक्ष मंदिर। 7वीं शताब्दी से चला आ रहा यह मंदिर भगवान शिव के स्वरूप को समर्पित है। यह उन चुनिंदा स्थानों में से है, जहाँ विजयनगर काल के पतन के बाद भी आज तक निरंतर पूजा होती आ रही है।"
"और फिर आता है विट्ठल मंदिर परिसर—भारतीय वास्तुकला का एक बेजोड़ उदाहरण। यहाँ का 'स्टोन चैरियट' (पत्थर का रथ) हम्पी की पहचान है। इसके 'रंगमंडप' के 56 स्तंभ किसी वाद्य यंत्र की तरह संगीत की लहरियाँ पैदा करते हैं, जो आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य हैं।"
"क्या आपने कभी किसी ऐसे शहर के बारे में सुना है, जहाँ की हवाओं में आज भी इतिहास की गूंज सुनाई देती है? स्वागत है हम्पी में—विजयनगर साम्राज्य की वह राजधानी, जिसे कभी 'विजय का शहर' कहा जाता था।"
"1565 का तालीकोटा का युद्ध इस गौरवशाली साम्राज्य के अंत का कारण बना। लेकिन विनाश के बीच भी, पत्थर की ये कलाकृतियाँ आज भी जिंदा हैं। 1986 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया, ताकि हम जान सकें कि एक समय में भारत का वैभव कैसा दिखता था।"
"हम्पी केवल पत्थरों का ढेर नहीं, यह हमारी संस्कृति की अमर गाथा है। अगली बार जब आप हम्पी आएं, तो इन पत्थरों की खामोश भाषा को सुनने की कोशिश जरूर कीजिएगा।"
एलिफेंटा की गुफाएं मुख्य रूप से हिंदू भगवान शिव को समर्पित गुफा मंदिरों का एक संग्रह हैं; यूनेस्को ने इन्हें विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया है। ये मुंबई हार्बर में एलिफेंटा द्वीप, या घारापुरी (शाब्दिक अर्थ "गुफाओं का शहर") पर स्थित हैं, जो भारतीय राज्य महाराष्ट्र में मुंबई से 10 किलोमीटर (6.2 मील) पूर्व में है। यह द्वीप, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से लगभग 2 किलोमीटर (1.2 मील) पश्चिम में है, जिसमें पांच हिंदू गुफाएं, बौद्ध स्तूप के कुछ टीले जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं, और पानी के टैंकों के साथ दो बौद्ध गुफाएं हैं।
पुणे के पवना लेक (Pawna Lake) के नीचे 700 साल पुराना एक रहस्य छिपा है? यह है प्राचीन वाघेश्वर महादेव मंदिर। जब 1964 में पवना बांध (Pawna Dam) बना, तो यह मंदिर और पूरा वाघेश्वर गांव पानी में समा गया। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर 12वीं से 13वीं शताब्दी (Yadava Period) के आसपास का है। साल के 8 महीने यह मंदिर जलमग्न रहता है और केवल गर्मियों में (मार्च से मई) जब पानी का स्तर कम होता है, तभी इसके दर्शन हो पाते हैं। सदियों पुराना इतिहास, पानी की लहरों के बीच आज भी मजबूती से खड़ा है। क्या आप इस रहस्यमयी मंदिर को देखना चाहेंगे? ऐसे ही अनसुने इतिहास के लिए सब्सक्राइब करें! हर हर महादेव!
भगवान कृष्ण और इंद्र के बीच दिव्य पारिजात वृक्ष के लिए हुए युद्ध का सुंदर चित्रण होयसलेश्वर मंदिर की दीवारों पर मिलता है। इस मंदिर का निर्माण 1121 ईस्वी में होयसल राजा विष्णुवर्धन द्वारा हलेबीडु (हासन, कर्नाटक) में कराया गया था। 🛕
पत्थरों पर की गई यह बारीक नक्काशी प्राचीन भारत की बेजोड़ कला और कहानी सुनाने की अद्भुत क्षमता को दर्शाती है। मंदिर की इन दीवारों पर उकेरी गई हर मूर्ति इतिहास, भक्ति और कालजयी शिल्प कौशल की जीवंत गवाही देती है।
राजस्थान का मिनी खजुराहो: भांड देवरा मंदिर का अनसुना इतिहास
राजस्थान की वीर भूमि पर किलों और महलों की कमी नहीं है, लेकिन बारां जिले में एक ऐसा मंदिर छिपा है जिसकी वास्तुकला देखकर आप दंग रह जाएंगे। इसे राजस्थान का 'मिनी खजुराहो' कहा जाता है—भांड देवरा मंदिर।
मंदिर के मुख्य आकर्षण और तथ्य
ऐतिहासिक महत्व: इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में राजा मलय वर्मन ने अपनी जीत के उपलक्ष्य में करवाया था। यह भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन धरोहर है।
अद्भुत वास्तुकला: यह मंदिर अपनी कामोत्तेजक मूर्तिकला और बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है, जो प्रसिद्ध खजुराहो मंदिरों की शैली से मेल खाती है।
नाम का रहस्य: 'भांड' शब्द का अर्थ है 'टूटा हुआ' या 'खंडित'। सदियों की मार और आक्रमणों के कारण मंदिर का कुछ हिस्सा खंडित हो गया, जिस कारण इसे 'भांड देवरा' कहा जाने लगा।
भौगोलिक चमत्कार: यह मंदिर दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है जो एक विशाल 'उल्कापिंड के गड्ढे' (Meteor Crater) के अंदर स्थित है। रामगढ़ का यह क्षेत्र भूवैज्ञानिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
तांत्रिक केंद्र: इतिहासकार बताते हैं कि पुराने समय में यह मंदिर तांत्रिक साधना का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यहाँ की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियाँ उस काल की धार्मिक और सामाजिक सोच को दर्शाती हैं।
खंडित होने के बावजूद, भांड देवरा मंदिर की नागर शैली और पत्थर पर की गई कारीगरी आज भी बेमिसाल है। अगर आप इतिहास और स्थापत्य कला के प्रेमी हैं, तो राजस्थान के इस छिपे हुए रत्न को देखना आपके लिए एक यादगार अनुभव होगा।
यह तस्वीर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सूर्य देव की एक प्राचीन प्रतिमा की है। यह प्रतिमा विशेष रूप से अपनी विशिष्ट बनावट और ऐतिहासिक संदर्भों के लिए जानी जाती है।
यहाँ इस प्रतिमा के इतिहास और विशेषताओं का विवरण दिया गया है: प्रतिमा की पहचान और स्थान यह प्रतिमा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित प्रसिद्ध मार्तंड सूर्य मंदिर (Martand Sun Temple) के परिसर या उससे संबंधित पुरातात्विक अवशेषों का हिस्सा मानी जाती है। मार्तंड मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में कार्कोट राजवंश के महान सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ ने करवाया था।
ऐतिहासिक विशेषताएँ :- इस प्रतिमा में आप कुछ ऐसे विवरण देख सकते हैं जो उस काल की उत्कृष्ट मूर्तिकला को दर्शाते हैं: गांधार और कश्मीरी शैली का मिश्रण: इस प्रतिमा के चेहरे की बनावट और घुंघराले बालों की शैली में गांधार कला (Indo-Greek style) और स्थानीय कश्मीरी मूर्तिकला का सुंदर संगम दिखता है।
त्रिनेत्र (तीसरी आंख): प्रतिमा के माथे पर स्पष्ट रूप से एक तीसरी आंख दिखाई दे रही है। हालांकि यह सूर्य देव की प्रतिमा है, लेकिन कश्मीर की मूर्तिकला में अक्सर सौर और शैव (भगवान शिव) प्रतीकों का मिश्रण देखने को मिलता है।
बनावट: प्रतिमा का धड़ काफी सुडौल और चिकना (polished) है, जो मध्यकालीन भारतीय मूर्तिकला की उच्च गुणवत्ता का प्रमाण है। वर्तमान स्थिति: वर्तमान में यह प्रतिमा एक स्थानीय मंदिर या पूजा स्थल में स्थापित है, जहाँ श्रद्धालु आज भी इस पर पुष्प और सिंदूर अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं।
Skumar vlogs
चेन्नाकेशव मंदिर, बेलूर
इस मंदिर को एक बार देखे बिना मृत्यु होना मतलब आप का भारत मे जन्म लेना व्यर्थ है।
भारत का गौरव दुनिया का अजूबा
यह मंदिर कर्नाटक राज्य के हासन ज़िले के बेलूर नामक ऐतिहासिक स्थान पर स्थित हैं।
यहमंदिरक़रीब900वर्षपुरानाहैं। इस मंदिर का निर्माण होयसल वंश के राजा विष्णुवर्धन द्वारा 1106 से 1117 के बीच करवाया गया था। 1104 में युद्ध जीतने की ख़ुशी में विष्णुवर्धन ने इस मंदिर का निर्माण कार्य शुरू करवाया जो की 1117 में पूरा हुआ।
पुराने दिनों के दौरान, यह "द्वारसमुद्र" के रूप में जाना जाता था, जिसका अर्थ है "समुद्र का द्वार"।
इस मंदिर की कई जगाह इतनी महीन शिल्पकारी है कि जिसे सामान्य आंखों से देख पाना ना मुमकिन है उसे देखने समझने के लिए मेग्नीफाइन ग्लॉस की जरूरत होती है सोचिये ये उस 10वी 11वी सदी के कारीगरों ने बनाया कैसे होगा जबकि मेग्नीफाईन ग्लास की खोज 1296 में इंग्लैंड में हुई है।
आधुनिक दुनिया मे होली की पिचकारी की खोज और पेटेंट 1896 का है पर इस मंदिर के शिल्पों में 10वी 11वी सदी में ही होली में पिचकारी का उपयोग करते हुवे शिल्प है जिन्हें हाली ही में खोजा गया है
🙏🏼
4 days ago | [YT] | 39
View 8 replies
Skumar vlogs
कृष्णबाई मंदिर, महाबलेश्वर का अद्भुत नज़ारा! 🚩
"क्या आपने कभी इस जादुई जगह को देखा है?"
"यह है महाराष्ट्र के ओल्ड महाबलेश्वर में स्थित ऐतिहासिक 'कृष्णबाई मंदिर'। इसे नदी का उद्गम स्थल माना जाता है।"
"यहाँ का सुकून और हज़ारों साल पुरानी वास्तुकला आपको किसी और ही दुनिया में ले जाएगी। अगर आप शांति और इतिहास के शौकीन हैं, तो यह जगह आपकी लिस्ट में जरूर होनी चाहिए!"
"महाबलेश्वर की खूबसूरती का एक अनमोल कोना। क्या आप यहाँ जाना चाहेंगे? कमेंट्स में बताएं!"
Subscribe 👉 Skumar vlogs
6 days ago | [YT] | 15
View 0 replies
Skumar vlogs
स्वर्ण युग की गौरवगाथा
"क्या आपने कभी किसी ऐसे शहर के बारे में सुना है, जहाँ की हवाओं में आज भी इतिहास की गूंज सुनाई देती है? स्वागत है हम्पी में—विजयनगर साम्राज्य की वह राजधानी, जिसे कभी 'विजय का शहर' कहा जाता था।"
"14वीं शताब्दी में, हरिहर और बुक्का नामक दो भाइयों ने तुंगभद्रा नदी के तट पर एक ऐसे साम्राज्य की नींव रखी, जिसने दक्षिण भारत के इतिहास को स्वर्ण अक्षरों में लिख दिया। यह था विजयनगर साम्राज्य। व्यापार, कला और वास्तुकला के मामले में हम्पी दुनिया के सबसे समृद्ध शहरों में गिना जाता था।"
"हम्पी का हृदय है—विरूपाक्ष मंदिर। 7वीं शताब्दी से चला आ रहा यह मंदिर भगवान शिव के स्वरूप को समर्पित है। यह उन चुनिंदा स्थानों में से है, जहाँ विजयनगर काल के पतन के बाद भी आज तक निरंतर पूजा होती आ रही है।"
"और फिर आता है विट्ठल मंदिर परिसर—भारतीय वास्तुकला का एक बेजोड़ उदाहरण। यहाँ का 'स्टोन चैरियट' (पत्थर का रथ) हम्पी की पहचान है। इसके 'रंगमंडप' के 56 स्तंभ किसी वाद्य यंत्र की तरह संगीत की लहरियाँ पैदा करते हैं, जो आज भी वैज्ञानिकों के लिए एक रहस्य हैं।"
"क्या आपने कभी किसी ऐसे शहर के बारे में सुना है, जहाँ की हवाओं में आज भी इतिहास की गूंज सुनाई देती है? स्वागत है हम्पी में—विजयनगर साम्राज्य की वह राजधानी, जिसे कभी 'विजय का शहर' कहा जाता था।"
"1565 का तालीकोटा का युद्ध इस गौरवशाली साम्राज्य के अंत का कारण बना। लेकिन विनाश के बीच भी, पत्थर की ये कलाकृतियाँ आज भी जिंदा हैं। 1986 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया, ताकि हम जान सकें कि एक समय में भारत का वैभव कैसा दिखता था।"
"हम्पी केवल पत्थरों का ढेर नहीं, यह हमारी संस्कृति की अमर गाथा है। अगली बार जब आप हम्पी आएं, तो इन पत्थरों की खामोश भाषा को सुनने की कोशिश जरूर कीजिएगा।"
Subscribe 👉 Skumar vlogs
1 week ago | [YT] | 14
View 0 replies
Skumar vlogs
एलिफेंटा की गुफाएं मुख्य रूप से हिंदू भगवान शिव को समर्पित गुफा मंदिरों का एक संग्रह हैं; यूनेस्को ने इन्हें विश्व धरोहर स्थल के रूप में नामित किया है। ये मुंबई हार्बर में एलिफेंटा द्वीप, या घारापुरी (शाब्दिक अर्थ "गुफाओं का शहर") पर स्थित हैं, जो भारतीय राज्य महाराष्ट्र में मुंबई से 10 किलोमीटर (6.2 मील) पूर्व में है। यह द्वीप, जवाहरलाल नेहरू पोर्ट से लगभग 2 किलोमीटर (1.2 मील) पश्चिम में है, जिसमें पांच हिंदू गुफाएं, बौद्ध स्तूप के कुछ टीले जो दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के हैं, और पानी के टैंकों के साथ दो बौद्ध गुफाएं हैं।
Subscribe 👉 Skumar vlogs
2 weeks ago | [YT] | 10
View 2 replies
Skumar vlogs
पुणे के पवना लेक (Pawna Lake) के नीचे 700 साल पुराना एक रहस्य छिपा है?
यह है प्राचीन वाघेश्वर महादेव मंदिर। जब 1964 में पवना बांध (Pawna Dam) बना, तो यह मंदिर और पूरा वाघेश्वर गांव पानी में समा गया।
स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यह मंदिर 12वीं से 13वीं शताब्दी (Yadava Period) के आसपास का है। साल के 8 महीने यह मंदिर जलमग्न रहता है और केवल गर्मियों में (मार्च से मई) जब पानी का स्तर कम होता है, तभी इसके दर्शन हो पाते हैं।
सदियों पुराना इतिहास, पानी की लहरों के बीच आज भी मजबूती से खड़ा है। क्या आप इस रहस्यमयी मंदिर को देखना चाहेंगे?
ऐसे ही अनसुने इतिहास के लिए सब्सक्राइब करें! हर हर महादेव!
3 weeks ago | [YT] | 42
View 0 replies
Skumar vlogs
भगवान कृष्ण और इंद्र के बीच दिव्य पारिजात वृक्ष के लिए हुए युद्ध का सुंदर चित्रण होयसलेश्वर मंदिर की दीवारों पर मिलता है। इस मंदिर का निर्माण 1121 ईस्वी में होयसल राजा विष्णुवर्धन द्वारा हलेबीडु (हासन, कर्नाटक) में कराया गया था। 🛕
पत्थरों पर की गई यह बारीक नक्काशी प्राचीन भारत की बेजोड़ कला और कहानी सुनाने की अद्भुत क्षमता को दर्शाती है। मंदिर की इन दीवारों पर उकेरी गई हर मूर्ति इतिहास, भक्ति और कालजयी शिल्प कौशल की जीवंत गवाही देती है।
Subscribe 👉 Skumar vlogs
3 weeks ago | [YT] | 20
View 0 replies
Skumar vlogs
राजस्थान का मिनी खजुराहो: भांड देवरा मंदिर का अनसुना इतिहास
राजस्थान की वीर भूमि पर किलों और महलों की कमी नहीं है, लेकिन बारां जिले में एक ऐसा मंदिर छिपा है जिसकी वास्तुकला देखकर आप दंग रह जाएंगे। इसे राजस्थान का 'मिनी खजुराहो' कहा जाता है—भांड देवरा मंदिर।
मंदिर के मुख्य आकर्षण और तथ्य
ऐतिहासिक महत्व: इस मंदिर का निर्माण 10वीं शताब्दी में राजा मलय वर्मन ने अपनी जीत के उपलक्ष्य में करवाया था। यह भगवान शिव को समर्पित एक प्राचीन धरोहर है।
अद्भुत वास्तुकला: यह मंदिर अपनी कामोत्तेजक मूर्तिकला और बारीक नक्काशी के लिए जाना जाता है, जो प्रसिद्ध खजुराहो मंदिरों की शैली से मेल खाती है।
नाम का रहस्य: 'भांड' शब्द का अर्थ है 'टूटा हुआ' या 'खंडित'। सदियों की मार और आक्रमणों के कारण मंदिर का कुछ हिस्सा खंडित हो गया, जिस कारण इसे 'भांड देवरा' कहा जाने लगा।
भौगोलिक चमत्कार: यह मंदिर दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है जो एक विशाल 'उल्कापिंड के गड्ढे' (Meteor Crater) के अंदर स्थित है। रामगढ़ का यह क्षेत्र भूवैज्ञानिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण है।
तांत्रिक केंद्र: इतिहासकार बताते हैं कि पुराने समय में यह मंदिर तांत्रिक साधना का एक प्रमुख केंद्र हुआ करता था। यहाँ की दीवारों पर उकेरी गई मूर्तियाँ उस काल की धार्मिक और सामाजिक सोच को दर्शाती हैं।
खंडित होने के बावजूद, भांड देवरा मंदिर की नागर शैली और पत्थर पर की गई कारीगरी आज भी बेमिसाल है। अगर आप इतिहास और स्थापत्य कला के प्रेमी हैं, तो राजस्थान के इस छिपे हुए रत्न को देखना आपके लिए एक यादगार अनुभव होगा।
3 weeks ago | [YT] | 16
View 2 replies
Skumar vlogs
यह तस्वीर ऐतिहासिक और पुरातात्विक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण सूर्य देव की एक प्राचीन प्रतिमा की है। यह प्रतिमा विशेष रूप से अपनी विशिष्ट बनावट और ऐतिहासिक संदर्भों के लिए जानी जाती है।
यहाँ इस प्रतिमा के इतिहास और विशेषताओं का विवरण दिया गया है:
प्रतिमा की पहचान और स्थान
यह प्रतिमा जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में स्थित प्रसिद्ध मार्तंड सूर्य मंदिर (Martand Sun Temple) के परिसर या उससे संबंधित पुरातात्विक अवशेषों का हिस्सा मानी जाती है। मार्तंड मंदिर का निर्माण 8वीं शताब्दी में कार्कोट राजवंश के महान सम्राट ललितादित्य मुक्तापीड़ ने करवाया था।
ऐतिहासिक विशेषताएँ :-
इस प्रतिमा में आप कुछ ऐसे विवरण देख सकते हैं जो उस काल की उत्कृष्ट मूर्तिकला को दर्शाते हैं:
गांधार और कश्मीरी शैली का मिश्रण: इस प्रतिमा के चेहरे की बनावट और घुंघराले बालों की शैली में गांधार कला (Indo-Greek style) और स्थानीय कश्मीरी मूर्तिकला का सुंदर संगम दिखता है।
त्रिनेत्र (तीसरी आंख): प्रतिमा के माथे पर स्पष्ट रूप से एक तीसरी आंख दिखाई दे रही है। हालांकि यह सूर्य देव की प्रतिमा है, लेकिन कश्मीर की मूर्तिकला में अक्सर सौर और शैव (भगवान शिव) प्रतीकों का मिश्रण देखने को मिलता है।
बनावट: प्रतिमा का धड़ काफी सुडौल और चिकना (polished) है, जो मध्यकालीन भारतीय मूर्तिकला की उच्च गुणवत्ता का प्रमाण है।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान में यह प्रतिमा एक स्थानीय मंदिर या पूजा स्थल में स्थापित है, जहाँ श्रद्धालु आज भी इस पर पुष्प और सिंदूर अर्पित कर पूजा-अर्चना करते हैं।
Subscribe 👉 Skumar vlogs
3 weeks ago | [YT] | 17
View 0 replies
Skumar vlogs
Agarsena ki Baoli: Delhi's Mysterious History
दिल्ली के बीचों-बीच स्थित एक प्राचीन बावली, जिसका पानी कभी लोगों को मौत की ओर बुलाता था! 🌑 स्थापत्य कला का अद्भुत नमूना या एक डरावना सच?
4 weeks ago | [YT] | 20
View 0 replies
Skumar vlogs
Doddabasappa Temple
(Dambal, Karnataka)
Subscribe 👉 Skumar vlogs
1 month ago | [YT] | 26
View 2 replies
Load more