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रोहिणी कोर्ट में सुनवाई के दौरान एक वकील द्वारा दलित जज को जातिसूचक गालियां देकर अपमानित करने की कोशिश का मामला चर्चा में है। इस घटना ने न्यायपालिका की गरिमा, अदालतों में पेशेवर आचरण और संविधान के समानता के सिद्धांत पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। न्याय व्यवस्था में सम्मान, निष्पक्षता और जवाबदेही को लेकर बहस तेज हो रही है।
The case of a lawyer trying to insult a Dalit judge by using casteist abuses during a hearing in Rohini Court is in discussion.
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14 hours ago | [YT] | 2
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संयुक्त राष्ट्र के स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग के प्रमुख और ओडिशा हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एस. मुरलीधर ने कहा है कि गाजा में इजराइली सैन्य कार्रवाई के दौरान बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाए जाने के ठोस सबूत मिले हैं। इंडियन एक्स्प्रेस से एक इंटरव्यू में जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि आयोग की रिपोर्ट में फिलिस्तीनी बच्चों की मौत और चोटों से जुड़े गंभीर निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल की सैन्य कार्रवाई के दौरान कम से कम 20,179 फिलिस्तीनी बच्चों की मौत हुई और 44,143 बच्चे घायल हुए।
जस्टिस मुरलीधर ने कहा कि बच्चों की मौत को केवल “अनचाहा नुकसान” नहीं कहा जा सकता। उनके अनुसार, उच्च घनत्व वाले इलाकों में बमबारी और स्नाइपर, ड्रोन तथा क्वाडकॉप्टर के इस्तेमाल के मामलों में बच्चों को निशाना बनाए जाने के संकेत मिले हैं।
14 hours ago | [YT] | 0
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क्या पति और उसके परिवार पर झूठा दहेज प्रताड़ना का केस दर्ज कराना तलाक का आधार बन सकता है? छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने इस पर बड़ा फैसला दिया है।
मामला धमतरी का है। पत्नी ने वर्ष 2017 में पति, सास और देवर के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। करीब 5 साल तक मुकदमा चला, लेकिन आरोप साबित नहीं होने पर सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।
इसके बाद पति ने मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की। हाईकोर्ट ने कहा कि झूठे आपराधिक मुकदमे के कारण वर्षों तक अदालतों के चक्कर लगाना, गिरफ्तारी का डर और सामाजिक प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचना मानसिक क्रूरता है। इसी आधार पर हाईकोर्ट ने पति को तलाक की मंजूरी दे दी।
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1 day ago | [YT] | 5
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लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़े को सुरक्षा देने पर दिल्ली हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला।
क्या लिव-इन रिलेशनशिप शादी के बराबर है? दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर अहम टिप्पणी करते हुए बड़ा आदेश दिया है।
दिल्ली हाईकोर्ट ने लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे दो बालिग व्यक्तियों को पुलिस सुरक्षा देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि उनका रिश्ता एक तरह से विवाह जैसा है, हालांकि इसे कानूनन विवाह की मान्यता प्राप्त नहीं है।
कोर्ट ने कहा कि दोनों वयस्क हैं और संविधान के अनुच्छेद 19 और 21 के तहत उन्हें अपनी पसंद का जीवनसाथी चुनने और साथ रहने का अधिकार है।
इस मामले में युवती के पिता से कथित धमकियां मिलने के बाद दोनों ने अदालत से सुरक्षा की मांग की थी। अदालत ने माना कि बालिग जोड़े को परिवार के हस्तक्षेप और धमकियों से सुरक्षा मिलनी चाहिए।
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1 day ago | [YT] | 5
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क्या मीडिया को किसी आरोपी को 'मास्टरमाइंड' या 'गुनेहगार' बताने का हक है? पटना हाई कोर्ट ने 'ऋशु श्री बनाम बिहार राज्य' मामले में मीडिया ट्रायल पर सख़्त टिप्पणी की है. कोर्ट ने साफ कहा है कि जब तक अदालत का फैसला नहीं आ जाता, तब तक मीडिया किसी भी आरोपी के लिए 'मास्टरमाइंड', 'किंगपिन' या 'स्कैमस्टर' जैसे शब्दों का इस्तेमाल नहीं कर सकता. कोर्ट ने कहा कि ऐसी गैर-जिम्मेदाराना रिपोर्टिंग किसी व्यक्ति के निष्पक्ष सुनवाई के अधिकार और उसकी प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती है.
1 day ago | [YT] | 2
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झारखंड हाईकोर्ट ने एक संवेदनशील मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए 17 साल से सेवा दे रहे चपरासी को बहाल करने का आदेश दिया है। मामला उस वक्त का है जब अधिकारी मीटिंग के बाद बची चाय-पत्ती और बिस्कुट घर ले जाने पर कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया था।
अदालत ने सुनवाई में पाया कि कर्मचारी को दिया गया कारण बताओ नोटिस स्पष्ट नहीं था और उसे अपना पक्ष रखने का उचित मौका भी नहीं मिला। कोर्ट ने इसे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन माना।
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि इतने छोटे आरोप पर वर्षों की सेवा खत्म करना अनुचित और असंवेदनशील फैसला है। साथ ही कर्मचारी की आर्थिक स्थिति और उसके अच्छे सेवा रिकॉर्ड को नजरअंदाज करना भी गलत ठहराया।
कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि कर्मचारी को 1 जुलाई 2026 तक नौकरी पर वापस लिया जाए और उसे 50% बकाया वेतन भी दिया जाए। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए राहत की उम्मीद बनकर सामने आया है, जो छोटी-छोटी बातों पर सख्त कार्रवाई का सामना करते हैं।
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1 day ago | [YT] | 10
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कर्नाटक हाई कोर्ट ने कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना गिरफ्तारी करने पर पुलिस की कड़ी फटकार लगाई। जस्टिस एम. नागप्रसन्ना ने पत्नी की शिकायत पर धोखाधड़ी के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति को तुरंत रिहा करने का आदेश देते हुए जांच अधिकारी के खिलाफ विभागीय जांच के निर्देश दिए।
जज ने चेतावनी देते हुए कहा, “तुम्हारे पास वर्दी है, तो क्या तुम कुछ भी कर सकते हो? क्या किसी व्यक्ति को जेल भेजना कोई खेल है? क्या आपको लगता है कि किसी को जेल भेजना कोई खेल है? अगर कोई अपराध हुआ है, तो निश्चित रूप से उसे जेल भेजें, लेकिन कानून के अनुसार।”
#Karnataka #HighCourt #Police #KarnatakaPolice | Karnataka High Court | Karnataka Police
2 days ago | [YT] | 4
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👉🎓🎩एससी-एसटी एक्ट के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता के दुरुपयोग पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा है कि अब अगली किस्त लेने से पहले पीड़ित को शपथ पत्र देना होगा कि वह आरोपी से समझौता नहीं करेगा और अपने बयान से नहीं मुकरेंगे।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई पीड़ित बाद में अपने बयान से पीछे हटता है, तो उसे मिली आर्थिक सहायता 30 दिनों के भीतर वापस करनी होगी।
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2 days ago | [YT] | 12
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फर्जीवाड़े से हासिल जमीन
2 days ago | [YT] | 1
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मध्य प्रदेश की एक 🐄 मुस्लिम महिला न्यायाधीश को 2022 में एक मुस्लिम ट्रक चालक की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के मामले में 14 लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बाद हिंदुत्व समूहों से ऑनलाइन तीव्र दुर्व्यवहार और धमकियों का सामना करना पड़ा है। 🐄 🐮 🐄 A Muslim woman judge in Madhya Pradesh has come under intense online abuse and threats from Hindutva groups after sentencing 14 men to life imprisonment in the 2022 mob lynching of a Muslim truck driver.
Tabassum Khan, an Additional District and Sessions Judge, on June 12 convicted the accused in the killing of Nazir Ahmed, calling the assault “extremely brutal” and holding that the group had formed an unlawful assembly with the intention of attacking the victim.
The case dates back to the night of August 2, 2022, when Nazir Ahmed was transporting cattle from Madhya Pradesh to Maharashtra. He was intercepted near Barakhar village in Seoni Malwa and allegedly beaten to death by a mob of self-proclaimed cow vigilantes.
Emotional Scenes Outside Court After Verdict
After nearly four years of trial, the court handed life imprisonment to all 14 accused. The verdict led to emotional scenes outside the court as family members of the convicts protested and broke down in tears.
Soon after the judgment, several right-wing groups and cow protection organisations launched protests against the verdict, focusing on the judge’s Muslim identity rather than the findings of the court.
2 days ago | [YT] | 4
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