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लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर जयंती पर श्रद्धांजलि
31 मई 1725 को जन्मी लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर भारतीय इतिहास की उन विरल शासकों में से थीं, जिन्होंने सत्ता को वैभव का नहीं, बल्कि जनसेवा का माध्यम बनाया। अपने पति खंडेराव होल्कर और पुत्र की मृत्यु के बाद उन्होंने मालवा राज्य की बागडोर संभाली और लगभग तीन दशकों तक न्याय, सुशासन तथा लोककल्याण का अद्वितीय उदाहरण प्रस्तुत किया।
अहिल्याबाई ने अपने शासनकाल में किसानों को संरक्षण दिया, व्यापार को बढ़ावा दिया और महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिए अनेक कदम उठाए। वे धार्मिक सहिष्णुता और सामाजिक समरसता की प्रतीक थीं। उनके द्वारा बनवाए गए मंदिर, घाट, कुएँ, धर्मशालाएँ और सड़कें आज भी उनकी दूरदर्शिता और जनहितकारी सोच की गवाही देते हैं।
काशी विश्वनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण से लेकर सोमनाथ, गया, उज्जैन, नासिक और देश के अनेक तीर्थस्थलों के विकास में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा। यही कारण है कि जनता ने उन्हें सम्मानपूर्वक "लोकमाता" की उपाधि दी।
आज उनकी जयंती पर हम उस महान शासिका को नमन करते हैं, जिन्होंने यह सिद्ध किया कि सच्चा नेतृत्व शक्ति से नहीं, बल्कि न्याय, करुणा और जनकल्याण से पहचाना जाता है।
"सिंहासन पर बैठकर राज करना आसान है, लेकिन जनता के दिलों पर राज करना अहिल्याबाई होल्कर जैसी महान विभूतियों के ही बस की बात है।"
🌹 लोकमाता महारानी अहिल्याबाई होल्कर जी को उनकी जयंती पर शत-शत नमन। 🙏🏻
1 week ago | [YT] | 7
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बुद्ध पूर्णिमा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि मानव इतिहास की सबसे क्रांतिकारी वैचारिक यात्राओं में से एक की याद है। यह वही दिन है जब गौतम बुद्ध का जन्म हुआ, उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई और अंततः महापरिनिर्वाण भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है।
बुद्ध का सबसे बड़ा योगदान यह था कि उन्होंने जीवन के जटिल सवालों को किसी अलौकिक शक्ति या अंधविश्वास से नहीं, बल्कि तर्क, अनुभव और निरीक्षण से समझाने की कोशिश की। उन्होंने कहा दुःख है, दुःख का कारण है, और उससे मुक्ति का मार्ग भी है। यह कोई आस्था का दावा नहीं, बल्कि एक प्रेक्षणीय सत्य (observable reality) है जिसे हर व्यक्ति स्वयं जांच सकता है।
आज के समय में, जब समाज अक्सर धर्म, जाति और पहचान के नाम पर बंटा हुआ दिखता है, बुद्ध का संदेश और भी प्रासंगिक हो जाता है। उन्होंने न तो किसी विशेष वर्ग को श्रेष्ठ माना और न ही किसी को नीचा। उनके संघ में हर व्यक्ति को समान स्थान मिला चाहे वह राजा हो या साधारण नागरिक। यह उस समय की सामाजिक व्यवस्था के खिलाफ एक शांत लेकिन गहरा विद्रोह था।
बुद्ध ने यह भी स्पष्ट किया कि अंधविश्वास और कर्मकांड व्यक्ति को मुक्त नहीं करते। उन्होंने बार-बार कहा कि किसी बात को सिर्फ इसलिए मत मानो क्योंकि वह परंपरा है, या किसी गुरु ने कहा है। उसे तभी स्वीकार करो जब वह तुम्हारे तर्क और अनुभव पर खरा उतरे। यह दृष्टिकोण आज के वैज्ञानिक सोच के बेहद करीब है।
उनकी शिक्षा का मूल था
सम्यक दृष्टि, सम्यक विचार, सम्यक कर्म।
यानी सही समझ, सही सोच और सही आचरण। यह कोई जटिल दर्शन नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक जीवन-पद्धति है, जिसे अपनाकर व्यक्ति अपने जीवन में संतुलन और शांति ला सकता है।
बुद्ध पूर्णिमा पर अगर हम सच में उन्हें याद करना चाहते हैं, तो सिर्फ दीप जलाने या शुभकामनाएँ देने से ज्यादा जरूरी है कि हम उनके विचारों को अपने जीवन में लागू करें
क्रोध की जगह करुणा चुनें,
अंधविश्वास की जगह तर्क अपनाएँ,
और भेदभाव की जगह समानता को स्वीकार करें।
यही बुद्ध को सच्ची आदरंजलि होगी। 🙏
1 month ago | [YT] | 15
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ब्रिज भूषण सरन सिंह कल परशुराम जयंती समारोह में गए थे.
परशुराम जयंती पर परशुराम की बात न करके आरक्षण पर बात करने लगे.21 बार पृथ्वी को क्षत्रिय शून्य कर ही दिए परशुराम जी, ऐसा महाभारत के आदिपर्व में लिखा है, (सबूत संलग्न है )थोड़ा इस पर भी बोल देते कि फिर आए कहाँ से 🤔 खैर
ब्रिज भूषण सरन सिंह ने कहा, आरक्षण चाहे 175 साल तक जारी रहे, सवर्ण समाज को कोई फर्क नही पड़ता है.
उन्होंने आगे कहा, ब्राह्मण ठाकुर बनिया दिहाड़ी मजदूरी कर के, ऑटोरिक्शा चला के किसी तरह कमा खा रहे हैं.कितने चला रहे हैं यह भी बता देते साथ में. देश के सभी संसाधनो पर सदियों से कुंडली मार कर बैठे हैं, सभी में बराबर बटवारा कीजिए SC ST OBC अपना रिजर्वेशन तुम्हारे मुँह पर फेंक कर मारेंगे.
ब्रिज भूषण परशुराम जयंती में गए थे या India Against Reservation के कार्यक्रम में. ये ब्रिज भूषण कौन होते हैं OBC SC ST आरक्षण पर बोलने वाले. सवर्णों को आबादी के लिहाज से 10% EWS आरक्षण मिला है इस पर क्यों नही बोला ?
ऐसी मानसिकता के कारण ही देश गुलाम बना. ये लोग अपने हेजेमोनी बनाए रखने के लिए आरक्षण का विरोध कर रहे हैं. आरक्षण का विरोध करने के बावजूद ये लोग OBC SC ST वोटों से लोकसभा चुनाव भी जीत जाते हैं ?ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
1 month ago | [YT] | 5
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✨ बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर जयंती की हार्दिक शुभकामनाएँ ✨
Dr. B. R. Ambedkar जी का जीवन हमें सिखाता है कि शिक्षा, समानता और आत्मसम्मान से ही समाज का सच्चा विकास संभव है।
उनके दिखाए मार्ग पर चलकर हम एक ऐसे भारत का निर्माण करें, जहाँ हर व्यक्ति को बराबरी का अधिकार और सम्मान मिले।
📘 “शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो” यही उनके विचार आज भी हमें आगे बढ़ने की प्रेरणा देते हैं।
जय भीम! 💙
1 month ago | [YT] | 15
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आज हम उस महान क्रांतिकारी को नमन करते हैं, जिन्होंने समाज की जड़ता को चुनौती दी, अज्ञान के अंधकार में शिक्षा की मशाल जलाई, और समानता की नींव रखी।
राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले जी सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि एक विचार थे एक ऐसी चेतना, जिसने सदियों से चले आ रहे भेदभाव, छुआछूत और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाई।
उन्होंने कहा था कि
"शिक्षा ही वह शस्त्र है, जिससे समाज में बदलाव लाया जा सकता है।"
और इसी विचार को जीवन में उतारते हुए उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के लिए शिक्षा के द्वार खोले।
आज जब हम उनकी जयंती मना रहे हैं, तो यह केवल श्रद्धांजलि देने का दिन नहीं, बल्कि उनके विचारों को अपनाने का संकल्प लेने का दिन है।
आइए, हम सब मिलकर एक ऐसे समाज का निर्माण करें
जहाँ समानता हो, न्याय हो, और हर व्यक्ति को सम्मान मिले।
राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले जी को कोटि-कोटि नमन।
#JyotibaPhuleJayanti #SocialJustice #Equality #EducationForAll
1 month ago | [YT] | 47
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इस पोस्ट पर 14अप्रेल तक 10हजार जय भीम कमेंट लिख सकते हैं बहुजनों?
2 months ago | [YT] | 18
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आज महान सम्राट Asoka the Great की जयंती पर उन्हें नमन।🙏
वह केवल एक विजेता नहीं थे वह इतिहास के उन दुर्लभ शासकों में से थे जिन्होंने सत्ता की ऊँचाइयों से उतरकर मानवता की गहराइयों को समझा। Kalinga War की विभीषिका ने उनके भीतर ऐसा परिवर्तन जगाया कि तलवार छोड़ उन्होंने धम्म का मार्ग चुना अहिंसा, करुणा और समानता का मार्ग।
सम्राट असोक ने यह सिद्ध किया कि असली विजय दूसरों को हराने में नहीं, बल्कि स्वयं को बदलने में है। उनके शिलालेख आज भी गवाही देते हैं कि एक शासक जनता का सेवक भी हो सकता है जो धर्म, जाति और वर्ग से ऊपर उठकर सबके कल्याण की सोचता है।
आज के दौर में, जब समाज अक्सर विभाजन और वैमनस्य की ओर झुकता दिखता है, अशोक का जीवन हमें याद दिलाता है कि शक्ति का सर्वोच्च रूप करुणा है, और शासन का सर्वोच्च उद्देश्य मानव कल्याण।
जय सम्राट असोक शांति, न्याय और मानवता के प्रतीक।💐
#सम्राट_असोक_जयंती
2 months ago | [YT] | 15
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वीर सपूतो को नमन 🙏
2 months ago | [YT] | 5
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आज ही के दिन इतिहास ने करवट ली थी जब परम पूज्य बोधिसत्व डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने अन्याय के खिलाफ सिर्फ आवाज़ नहीं उठाई, बल्कि उसे तोड़कर रख दिया।
महाड़ सत्याग्रह सिर्फ पानी पीने का आंदोलन नहीं था, यह इंसान होने के अधिकार का ऐलान था।
जब समाज ने कहा “तुम अछूत हो”,
तब बाबा साहेब ने कहा “हम इंसान हैं, और अपने अधिकार लेकर रहेंगे।”
20 मार्च 1927 को महाड़ सत्याग्रह के दौरान चवदार तालाब का पानी पीना एक प्रतीक था
समानता का, स्वाभिमान का, और गुलामी की जंजीरें तोड़ने का।
यह आंदोलन हमें सिखाता है कि
हक़ मांगे नहीं जाते छीनने पड़ते हैं,
और सम्मान दिया नहीं जाता कमाया जाता है संघर्ष से।
आज का दिन सिर्फ याद करने का नहीं,
बल्कि उस संघर्ष को आगे बढ़ाने का संकल्प लेने का है।
जय भीम ✊
#महाड़_आंदोलन
2 months ago | [YT] | 13
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बहुजन समाज को संगठित करने वाले महान चिंतक, दूरदर्शी नेता और सामाजिक क्रांति के प्रणेता आदरणीय मान्यवर कांशीराम जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
मान्यवर साहेब ने अपना पूरा जीवन बहुजन समाज को जागरूक करने, संगठित करने और उसे राजनीतिक शक्ति बनाने के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने हमें सिखाया कि “जिसकी जितनी संख्या भारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी” केवल नारा नहीं बल्कि सामाजिक न्याय का सिद्धांत है।
उनकी मेहनत और संघर्ष का ही परिणाम है कि आज बहुजन समाज अपनी राजनीतिक और सामाजिक ताकत को समझ रहा है। उनका सपना था कि शोषित, वंचित और पिछड़े समाज को सत्ता में सम्मानजनक भागीदारी मिले और देश में सच्चे अर्थों में सामाजिक न्याय स्थापित हो।
आज उनकी जयंती पर हम संकल्प लें कि उनके बताए रास्ते पर चलकर बहुजन एकता को मजबूत करेंगे और सामाजिक परिवर्तन के उस मिशन को आगे बढ़ाएंगे जिसके लिए मान्यवर साहेब ने अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया।
जय भीम! जय भारत!
#मान्यवर_की_जयंती
2 months ago | [YT] | 6
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