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हिमाचल आज
हिमाचल प्रदेश का वेतन संकट: क्या सचमुच खजाना खाली है या खेल कुछ और है? 🏔️🛑
सचिवालय से लेकर शिमला के माल रोड तक इस समय केवल एक ही चर्चा आम है—क्या हिमाचल प्रदेश का खजाना सचमुच खाली हो चुका है? या फिर राजनीतिक लाभ के लिए पुरानी पेंशन योजना (OPS) को बहाल करने का लोकलुभावन फैसला ही कर्मचारियों के रुके हुए एरियर और भत्तों के लिए जिम्मेदार है?
पहाड़ों की शांत वादियों में इस वक्त एक ऐसा आर्थिक बवंडर उठ खड़ा हुआ है, जिसने पौने दो लाख सरकारी कर्मचारियों और करीब दो लाख पेंशनभोगियों की रातों की नींद उड़ा दी है। मुख्यमंत्री, मंत्रियों और आईएएस अधिकारियों के वेतन को टालने (defer) के फैसले ने इस बात पर मुहर लगा दी है कि वित्तीय स्थिति बेहद नाजुक दौर में पहुंच चुकी है। छठे वेतन आयोग के एरियर और महंगाई भत्ते (DA) की किश्तों के रूप में कर्मचारियों का लगभग 10,000 करोड़ रुपया फंसा हुआ है।
क्या वाकई ओपीएस की बहाली ही इस पूरे संकट की असली जड़ है या कहानी में केंद्र सरकार द्वारा लगाई गई पाबंदियों और रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (RDG) के बंद होने का कोई और बड़ा मोड़ है?
इस पूरे सियासी और आर्थिक चक्रव्यूह का एक-एक सच जानने के लिए हमारी इस विशेष और निष्पक्ष ग्राउंड रियलिटी रिपोर्ट को अभी देखें!
नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके पूरा वीडियो देखें और अपनी राय कमेंट बॉक्स में साझा करें: 👇👇
https://youtu.be/WAE5WOpKEJ0
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9 hours ago (edited) | [YT] | 0
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हिमाचल आज
नाबालिग को धमकाने और बयान बदलवाने के आरोप में चंबा के 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड!
हिमाचल प्रदेश में कानून के रखवालों की कार्यप्रणाली पर एक के बाद एक कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अभी हाल ही में प्रदेश के चार पुलिस जवानों को नारकोटिक्स के एक मामले को दबाने और रफा-दफा करने की कोशिश के आरोप में सस्पेंड किया गया था, और अब खाकी को शर्मसार करने वाला एक और नया मामला चंबा जिले से सामने आ गया है। इस बार चंबा के पुलिस अधीक्षक (SP) ने सब-इंस्पेक्टर समेत चार पुलिस अधिकारियों को तुरंत प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है। इन पुलिसकर्मियों पर आरोप है कि उन्होंने 2800 किलोमीटर दूर चेन्नई से बरामद की गई एक नाबालिग लड़की को डराया, धमकाया और उस पर अपने बयान बदलने का गंभीर दबाव बनाया।
दरअसल, हिमाचल प्रदेश पुलिस के लिए यह बेहद असहज करने वाली स्थिति बन चुकी है। एक तरफ जहां नारकोटिक्स मामले में पुलिस जवानों द्वारा केस को दबाने (Hush up) की कोशिश ने महकमे की साख पर बट्टा लगाया था, वहीं चंबा की इस घटना ने जनता के विश्वास को और गहरी चोट पहुंचाई है।
पूरा मामला चंबा के चुराह उपमंडल की एक नाबालिग लड़की से जुड़ा है, जो बीते अप्रैल महीने में लापता हो गई थी। पुलिस की एक विशेष टीम ने तकनीकी सर्विलांस की मदद से इस लड़की को चेन्नई से सुरक्षित रेस्क्यू तो कर लिया, लेकिन चंबा वापस लाते समय कहानी पूरी तरह पलट गई। आरोप है कि रास्ते में इन पुलिस अधिकारियों ने कानूनी प्रक्रियाओं का पालन करने के बजाय, पीड़ित नाबालिग लड़की को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया और मजिस्ट्रेट के सामने जबरन अपने पक्ष में बयान बदलने के लिए मजबूर किया।
नाबालिग लड़की के परिजनों द्वारा जब इस बात की शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई, तो मामले की गंभीरता और खाकी की साख को देखते हुए एसपी चंबा ने बिना किसी देरी के सब-इनस्पेक्टर और उनके साथ गए तीन अन्य जवानों को सस्पेंड कर विभागीय जांच (Departmental Inquiry) के आदेश दे दिए हैं।
हिमाचल पुलिस में बैक-टू-बैक आ रहे ऐसे मामले साफ तौर पर यह इशारा करते हैं कि महकमे के भीतर कुछ भेड़िए कानून की रक्षा करने के बजाय अपराधियों को संरक्षण देने या पीड़ितों को दबाने का काम कर रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर और पुलिस विभाग की इस सख्त कार्रवाई पर आपकी क्या राय है? कमेंट बॉक्स में आकर हमें जरूर बताएं... (यहां वीडियो क्लिप या ग्राफिक प्ले करें)
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धन्यवाद! देखते रहिए हिमाचल आज।
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1 day ago | [YT] | 3
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हिमाचल आज
हिमाचल के मंडी जिला की चनौल पंचायत में लोकतंत्र का एक ऐसा रंग देखने को मिला है, जिसने पंचायती राज में 'वंशवाद' की बहस को दोबारा गर्म कर दिया है। यहाँ एक ही घर के भीतर पंचायत की पूरी सत्ता सिमटकर रह गई है। 53 साल की बहु नीलम अब पंचायत की प्रधान हैं, और उनके 96 साल के बुजुर्ग ससुर शंकर सिंह लगातार चौथी बार उपप्रधान चुन लिए गए हैं। सवाल यह उठता है कि क्या पंचायतों का गठन इसीलिए हुआ था कि एक ही परिवार के लोग आपस में मिलकर मुख्य और मलाईदार पदों को बांट लें? 96 साल की उम्र में भी ससुर साहब का कुर्सी का मोह नहीं छूटा है, वे 1973 से चुनाव लड़ रहे हैं। उधर बहु भी अब चुनाव जीत गई हैं। विचारधाराएं अलग हैं—ससुर कांग्रेसी और बहु भाजपाई—लेकिन जब बात मलाईदार पदों पर कब्ज़े की आती है, तो परिवार एक हो जाता है। क्या आम जनता के पास इस पंचायत में कोई और विकल्प नहीं बचा था, या फिर यह ग्रामीण राजनीति पर पैर पसारता वो वंशवाद है जो नए युवाओं को कभी आगे बढ़ने ही नहीं देगा? इस 'ससुर-बहु' राज पर आपकी क्या राय है, कमेंट में ज़रूर बताएं!
2 days ago | [YT] | 10
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हिमाचल आज
🚨 सावधान! खूबसूरत सिस्सू गांव पर मंडराया 'घेपन झील' का बड़ा खतरा! 🚨
लाहौल-स्पीति का बेहद खूबसूरत सिस्सू गांव (Sissu Village) आज एक बड़े संकट के मुहाने पर खड़ा है। वैज्ञानिकों ने पहाड़ों के ऊपर बन रही घेपन झील (Ghepan Lake) के फटने का गंभीर अलर्ट जारी किया है।
📉 33 साल में 3 गुना बढ़ी झील
HPSDMA और इसरो (NRSC) की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 1989 में जो झील 36.49 हेक्टेयर की थी, वह 2022 तक बढ़कर 101.30 हेक्टेयर हो चुकी है! 33 वर्षों में इसका आकार लगभग 3 गुना बढ़ गया है और गहराई 50 मीटर तक पहुंच चुकी है।
⚠️ सिर्फ 21 मिनट का वक्त और 65 फीट ऊंचा सैलाब!
यह एक 'मोरेन-डैम्ड' झील है, जो कंक्रीट के बांध पर नहीं बल्कि कच्चे मलबे और पत्थरों के भरोसे टिकी है।
झील फटने की स्थिति में पानी 43 किमी/घंटा की रफ्तार से नीचे आएगा।
झील से सिस्सू की दूरी सिर्फ 11 किमी है, यानी तबाही का पानी गांव तक पहुंचने में सिर्फ 21 मिनट का समय लेगा!
जब यह सैलाब पहुंचेगा, तो पानी और मलबे की ऊंचाई 20 मीटर (65 फीट से ज्यादा) हो सकती है।
🛠️ क्या हैं मांगें और बचाव के रास्ते?
प्रशासन ने यहां एक Early Warning System का पायलट टेस्ट शुरू किया है। लेकिन स्थानीय लोगों और पर्यावरणविदों का मानना है कि बढ़ते तापमान और गाड़ियों के धुएं (सीजन में रोज 5,000 से 8,000 वाहन) के कारण ग्लेशियर तेजी से पिघल रहा है।
स्थानीय पंचायत की मांग है कि रोहतांग की तर्ज पर सिस्सू और लाहौल घाटी में भी नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के तहत वाहनों की संख्या तुरंत सीमित की जाए, ताकि देवभूमि को एक और बड़ी विभीषिका से बचाया जा सके।
इस गंभीर स्थिति पर आपकी क्या राय है? क्या पर्यटन को नियंत्रित करने का समय आ गया है? अपने विचार कमेंट्स में साझा करें।
https://youtu.be/F53OHj37cCM?si=5PicK...
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3 days ago (edited) | [YT] | 2
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हिमाचल आज
🚨 सोलन के सरकारी अस्पताल में दवाइयों का स्टॉक खत्म 🚨
सोलन, हिमाचल प्रदेश: क्षेत्रीय अस्पताल सोलन में इन दिनों स्वास्थ्य व्यवस्थाएं चरमरा गई हैं। अस्पताल की सरकारी फार्मेसी में हाई ब्लड प्रेशर की जरूरी गोलियां और कैल्शियम सप्लीमेंट पूरी तरह खत्म हैं। इस भारी किल्लत के बावजूद, डॉक्टर लगातार मरीजों को Amlodipine 5mg दवा पर्चे पर लिख रहे हैं।
हैरान करने वाली बात यह है कि सरकारी फार्मेसी में स्टॉक न होने के साथ-साथ यह साल्ट अब सोलन के स्थानीय खुले बाजार और निजी मेडिकल स्टोर्स पर भी उपलब्ध नहीं है। जीवन रक्षक दवाओं की इस भारी कमी के कारण मरीज बेहद परेशान हैं और बाजार में दवा न मिलने से दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
क्या आपको भी अस्पताल में दवाइयां मिलने में परेशानी आ रही है? अपनी राय कमेंट बॉक्स में जरूर साझा करें और इस महत्वपूर्ण खबर को शेयर करें ताकि प्रशासन तक आवाज पहुंच सके।
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1 week ago | [YT] | 2
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हिमाचल आज
🚨 हिमाचल नगर निकाय चुनाव: क्या बीजेपी ने 2022 की हार से कोई सबक नहीं सीखा? 🏔️🗳️
नमस्कार दोस्तों,
हिमाचल प्रदेश के शहरी स्थानीय निकाय (ULB) चुनाव के नतीजों ने राज्य की सियासत में एक बार फिर दावों और प्रतिदावों का दौर शुरू कर दिया है। जहाँ एक तरफ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल का दावा है कि कुल 229 पार्षदों में से 120 भाजपा समर्पित हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस सामान्य सचिव विनोद जिंटा का कहना है कि कुल 47 नगर पंचायतों में से 31 पर कांग्रेस ने स्पष्ट बहुमत हासिल किया है।
लेकिन इन दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ग्राउंड जीरो पर हुआ क्या?
🔍 हमारे विशेष विश्लेषण के मुख्य बिंदु:
फेल हुआ नैरेटिव: सुक्खू सरकार के खिलाफ 'एंटी-इंकंबेंसी' और सरकारी कर्मचारियों की नाराजगी को भुनाने में विपक्ष पूरी तरह नाकाम रहा।
भीतरघात और गुटबाजी (Factionalism): ठीक साल 2022 के विधानसभा चुनाव की तरह, इस बार भी गलत टिकट वितरण और बागियों को शांत न कर पाना बीजेपी को भारी पड़ा।
हाइपर-लोकल मुद्दे: राष्ट्रीय मुद्दों के बजाय उम्मीदवारों की निजी छवि और स्थानीय समस्याएं वोटिंग का मुख्य आधार बनीं।
क्या बीजेपी का संगठन अपने ही बागियों को साधने में असफल रहा? क्या कांग्रेस के लिए यह जीत आगामी चुनावों का संकेत है या सिर्फ स्थानीय समीकरणों का खेल?
इस पूरे सियासी गणित को बेहद आसान और निष्पक्ष तरीके से समझने के लिए हमारा ताजा वीडियो अभी देखें!
👇 वीडियो की लिंक यहाँ है:
🔗https://youtu.be/zGlosbx85MQ
🗳️ हमें कमेंट बॉक्स में जरूर बताएं: आपके क्षेत्र में इस चुनाव का क्या नतीजा रहा और आपके अनुसार बीजेपी की इस कमजोरी की सबसे बड़ी वजह क्या है?
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1 week ago | [YT] | 6
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हिमाचल आज
📌 आज की बड़ी खबरें | हिमाचल दिनभर 🏔️
हिमाचल प्रदेश की हर छोटी-बड़ी हलचल के लिए 'हिमाचल आज' के साथ जुड़ें। आज के बुलेटिन की मुख्य सुर्खियां यहाँ देखें:
📍 0:00 - आज की ताजा सुर्खियां
📍 1:15 - मौसम अलर्ट: कुल्लू-कांगड़ा में भारी बारिश और ओलावृष्टि का ऑरेंज अलर्ट।
📍 2:30 - बड़ी दुर्घटना: कांगड़ा में ड्राइवर को हार्ट अटैक के बाद पलटी बस, 28 घायल।
📍 3:45 - नकल पर नकेल: अब बोर्ड परीक्षा में आवाज भी होगी रिकॉर्ड! HP बोर्ड का बड़ा फैसला।
📍 4:50 - खुशखबरी: सरकारी स्कूलों में 2,068 शिक्षकों की भर्ती को कैबिनेट की हरी झंडी।
📍 6:10 - OPS आंदोलन: 17 मई को मुख्यमंत्री आवास का घेराव करेंगे कर्मचारी।
📍 7:15 - राहत: दारचा-शिंकुला मार्ग बहाल, पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा।
📍 8:30 - सुरक्षा चूक: शिमला हादसे ने उठाए सवाल; क्या स्मार्ट सिटी के नाम पर सुरक्षा से समझौता हो रहा है?
💬 आपकी राय: क्या आपको लगता है कि परीक्षाओं में ऑडियो रिकॉर्डिंग करने से नकल पूरी तरह रुक जाएगी? कमेंट बॉक्स में अपने विचार जरूर साझा करें!
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2 weeks ago | [YT] | 1
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हिमाचल आज
📢 हिमाचल प्रदेश चुनाव 2026: क्या 'गांव की सरकार' बदलेगी राज्य की राजनीति?
हिमाचल प्रदेश के शांत पहाड़ों में राजनीतिक पारा चरम पर है! पंचायती राज संस्थाओं (PRIs) और नगर निकायों (ULBs) के चुनावों ने राज्य की सत्ताधारी कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भाजपा को सीधे मुकाबले में खड़ा कर दिया है।
जहाँ कांग्रेस अपनी 'जमीनी पकड़' को साबित करने की कोशिश कर रही है, वहीं भाजपा इन चुनावों को आगामी विधानसभा चुनावों के लिए 'सेमीफाइनल' के तौर पर देख रही है।
📊 चुनावी रणक्षेत्र का पूरा ब्यौरा (मई 2026):
राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार, इस बार का मुकाबला विशाल है:
नगर निगम (Municipal Corporations): धर्मशाला, मंडी, सोलन और पालमपुर जैसे प्रमुख निगमों में 17 मई 2026 को मतदान होगा।
नगर निकाय (ULBs): राज्य की 51 नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों में पार्षदों के लिए जंग जारी है।
पंचायती राज (PRIs): हिमाचल की 3,615 ग्राम पंचायतों में प्रधान, उप-प्रधान और वार्ड सदस्यों के लिए वोट डाले जाएंगे।
पंचायती राज श्रेणियां: इसमें 81 पंचायती राज समितियां और 12 जिला परिषदों के सदस्य भी शामिल हैं।
उम्मीदवारों की संख्या: इस विशाल लोकतांत्रिक प्रक्रिया में 20,000 से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं, जो वार्ड सदस्य से लेकर जिला परिषद तक के पदों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
⚔️ मुख्य चुनावी संघर्ष
यह चुनाव केवल स्थानीय विकास का नहीं, बल्कि साख का है। कांग्रेस अपनी योजनाओं के भरोसे है, जबकि भाजपा "परिवर्तन" की लहर का दावा कर रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत समिति के चुनाव यह तय करेंगे कि किसका 'वोट बैंक' अधिक मजबूत है।
🗓️ महत्वपूर्ण तारीखें (रिमाइंडर):
नगर निगम चुनाव: 17 मई 2026
पंचायती राज चुनाव (3 चरण): 26, 28 और 30 मई 2026
परिणाम: स्थानीय स्तर पर मतगणना मतदान के तुरंत बाद शुरू हो जाएगी।
आपकी राय: क्या स्थानीय चुनावों में पार्टी का सिंबल मायने रखता है या उम्मीदवार का व्यक्तित्व? नीचे कमेंट बॉक्स में हमें बताएं! 👇
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3 weeks ago | [YT] | 6
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हिमाचल आज
नमस्ते दोस्तों! 🙏
आज के दौर में सोशल मीडिया पर 'Views' की होड़ लगी है। हाल ही में इशिता पुंडीर विवाद ने यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या लोकप्रियता पाने के लिए हमारी भारतीय सेना और संस्कारों का अपमान करना सही है?
हमारा मानना है कि असली इन्फ्लुएंसर वो हैं जो हमारी कला और संस्कृति को आगे बढ़ाते हैं, न कि वो जो विवादों (Controversy) से पहचान बनाते हैं।
आपकी क्या राय है? आप किसे हिमाचल की असली पहचान मानते हैं? नीचे पोल में बताएं और अपनी बात कमेंट्स में लिखें। 👇
Poll Options:
कला और संस्कृति (जैसे अंकिता ठाकुर)
विवाद और वायरल वीडियो
ज्ञान और लोक शिक्षा
अन्य (कमेंट में बताएं)
Community Post Option 2: Image Post (विचारोत्तेजक और गंभीर)
Text:
क्या 'Views' हमारे आत्मसम्मान से बड़े हैं? 🇮🇳🏔️
'देवभूमि' की माटी ने हमेशा वीरों को जन्म दिया है। भारतीय सेना के जवानों पर की गई कोई भी गलत टिप्पणी केवल एक बयान नहीं, बल्कि हमारे गौरव पर चोट है। इशिता पुंडीर विवाद पर मेरा विस्तृत विश्लेषण अब चैनल पर लाइव है।
इस वीडियो में मैंने उन बेटियों का भी जिक्र किया है जो हिमाचल की असली ताकत हैं—जैसे अंकिता ठाकुर, स्मृति, इंदु, हेमा और अमृता।
आइए, मिलकर 'Controversy Queens' के बजाय 'Culture Influencers' का साथ दें।
अभी देखें और शेयर करें: [वीडियो लिंक यहाँ पेस्ट करें]
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1 month ago | [YT] | 6
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हिमाचल आज
हिमाचल कांग्रेस में 'सियासी भूकंप': क्या सुक्खू सरकार और संगठन के बीच सब ठीक है?
नमस्कार दोस्तों! 🚩
हिमाचल प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। वरिष्ठ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री कौल सिंह ठाकुर (Kaul Singh Thakur) के ताजा बयान ने अपनी ही सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कौल सिंह ठाकुर की नाराजगी के 3 बड़े कारण:
1️⃣ फाइलों में देरी: उन्होंने सीधा आरोप लगाया कि वीरभद्र सिंह के समय फाइलें तुरंत क्लियर होती थीं, लेकिन अब निचले स्तर पर और मुख्यमंत्री दफ्तर में फाइलें महीनों अटकी रहती हैं।
2️⃣ स्थानांतरण (Transfer) विवाद: उनके मुताबिक, कांग्रेस समर्थित प्रिंसिपलों को दूर भेजा जा रहा है जबकि भाजपा समर्थित लोग अपनी जगह पर जमे हुए हैं।
3️⃣ अफसरशाही पर शक: कौल सिंह का दावा है कि मुख्यमंत्री कार्यालय में अभी भी वही अधिकारी प्रभावी हैं जो पिछली भाजपा सरकार के समय थे। क्या ये अधिकारी जानबूझकर सरकार की छवि खराब कर रहे हैं?
कौल सिंह ने स्पष्ट कहा है—"पार्टी कार्यकर्ता कांग्रेस की रीढ़ हैं, उनकी अनदेखी पार्टी को भारी पड़ सकती है।"
👉 हम आपकी राय जानना चाहते हैं! क्या आपको भी लगता है कि हिमाचल में अधिकारियों की वजह से सरकार और संगठन के बीच तालमेल की कमी है?
अपने विचार नीचे कमेंट बॉक्स में साझा करें! 👇
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सवाल: क्या हिमाचल सरकार में अधिकारियों का दबदबा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर भारी पड़ रहा है?
A) हाँ, बिल्कुल।
B) नहीं, सब ठीक है।
C) संगठन और सरकार में तालमेल की कमी है।
D) अपनी राय कमेंट में बताएं।
1 month ago | [YT] | 1
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