जीवन की पुरानी होती संदूकची खोलते ही बूढ़ी होती देह का जीवंत दस्तावेज बनकर झांकने लगती हैं वे मटमैली पुरानी तस्वीरें, तस्वीरों में कैद चेहरे... चेहरों में कैद अनगिनित किस्से... बयां करते उस वक्त को! (चौखटे तोड़ जीवित करके अपनी यथावत देह।)
धीरे-धीरे अतीत में जाते हुए हम सब ढूंढने लग जाते हैं -- अपना बचपन... अपनी जवानी... अपनी कहानी...अपना संघर्ष...अपने दुःख... अपने सुख... गुजरे वक्त की धुंधली होती छायाओं को छूकर एक लम्बी साँस भरकर -- कुछ नम... कुछ चमकती हुई आंखों में मोती ले... हो तरोताज़ा -- निकल पड़ते हैं एक और तस्वीर गढ़ने।
जो स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है।अगर कोई स्त्री तुम्हारे पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो तुम घबरा जाओगे तुम भागोगे। क्योंकि वह स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है, स्त्रैण नहीं है, स्त्री का स्त्रैण होना ही उसका माधुर्य है।वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है। तुम्हें उकसाती है, लेकिन आक्रमण नहीं करती। वह तुम्हें बुलाती है, लेकिन चिल्लाती नहीं। उसका बुलाना भी बड़ा मौन है, वह तुम्हें सब तरफ से घेर लेती, लेकिन तुम्हें पता भी नहीं चलता। उसकी जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं, वे दिखाई भी नहीं पड़तीं, वह बड़े पतले धागों से, सूक्ष्म धागों से तुम्हें सब तरफ से बांध लेती है, लेकिन उसका बंधन कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता।
स्त्री अपने को नीचे रखती है, लोग गलत सोचते हैं कि पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया। नहीं, स्त्री दासी बनने की कला है, मगर तुम्हें पता नहीं, उसकी कला बड़ी महत्वपूर्ण है। और लाओत्से उसी कला का उद्घाटन कर रहा है। कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता। दुनियाँ के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है, तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है, क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है। वह जीवन का राज समझती है।
स्त्री अपने को नीचे रखती है, चरणों में रखती है। और तुमने देखा है कि जब भी कोई स्त्री अपने को तुम्हारे चरणों में रख देती है, तब अचानक तुम्हारे सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है। रखती चरणों में है, पहुँच जाती है बहुत गहरे, बहुत ऊपर, तुम चौबीस घंटे उसी का चिंतन करने लगते हो। छोड़ देती है अपने को तुम्हारे चरणों में, तुम्हारी छाया बन जाती है। और तुम्हें पता भी नहीं चलता कि छाया तुम्हें चलाने लगती है, छाया के इशारे से तुम चलने लगते हो।
स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि यह करो, लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है। वह कभी नहीं कहती कि यह ऐसा ही हो, लेकिन वह जैसा चाहती है वैसा करवा लेती है।लाओत्से यह कह रहा है कि उसकी शक्ति बड़ी है। और उसकी शक्ति क्या है? क्योंकि वह दासी है। शक्ति उसकी यह है कि वह छाया हो गई है। बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं, और एकदम अशक्त हो जाते है, और अनजाने में ही बड़ी सहजता से उतर जाते हो उसके प्रेम में ! 💐❤💯🥰😘
आप सभी का चैनल community मे स्वागत हैं, यहाँ आप अपनी तरफ से अच्छी जानकारी पोस्ट कर सकते है, और हमारी youtube family यहाँ किसी मुद्दे को लेकर disscusion कर सकते है,,, आप सभी के लिए sarkariresult98 चैनल के community section open है....
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Apple mei kon sa vitamin hota hai????
6 months ago | [YT] | 0
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Real apple photo kon si Hai????
6 months ago | [YT] | 0
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7 months ago | [YT] | 0
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11 months ago | [YT] | 3
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जीवन की पुरानी होती संदूकची
खोलते ही
बूढ़ी होती देह का जीवंत दस्तावेज बनकर
झांकने लगती हैं
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तस्वीरों में कैद चेहरे...
चेहरों में कैद अनगिनित किस्से...
बयां करते उस वक्त को!
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धीरे-धीरे अतीत में जाते हुए
हम सब ढूंढने लग जाते हैं --
अपना बचपन... अपनी जवानी... अपनी कहानी...अपना संघर्ष...अपने दुःख... अपने सुख...
गुजरे वक्त की धुंधली होती छायाओं को छूकर
एक लम्बी साँस भरकर --
कुछ नम... कुछ चमकती हुई आंखों में मोती ले...
हो तरोताज़ा --
निकल पड़ते हैं
एक और तस्वीर गढ़ने।
-- संजय यादव
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11 months ago | [YT] | 1
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11 months ago | [YT] | 2
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जो स्त्री आक्रामक होती है वह आकर्षक नहीं होती है।अगर कोई स्त्री तुम्हारे पीछे पड़ जाए और प्रेम का निवेदन करने लगे तो तुम घबरा जाओगे तुम भागोगे।
क्योंकि वह स्त्री पुरुष जैसा व्यवहार कर रही है, स्त्रैण नहीं है, स्त्री का स्त्रैण होना ही उसका माधुर्य है।वह सिर्फ प्रतीक्षा करती है। तुम्हें उकसाती है, लेकिन आक्रमण नहीं करती। वह तुम्हें बुलाती है, लेकिन चिल्लाती नहीं। उसका बुलाना भी बड़ा मौन है, वह तुम्हें सब तरफ से घेर लेती, लेकिन तुम्हें पता भी नहीं चलता। उसकी जंजीरें बहुत सूक्ष्म हैं, वे दिखाई भी नहीं पड़तीं, वह बड़े पतले धागों से, सूक्ष्म धागों से तुम्हें सब तरफ से बांध लेती है, लेकिन उसका बंधन कहीं दिखाई भी नहीं पड़ता।
स्त्री अपने को नीचे रखती है, लोग गलत सोचते हैं कि पुरुषों ने स्त्रियों को दासी बना लिया। नहीं, स्त्री दासी बनने की कला है, मगर तुम्हें पता नहीं, उसकी कला बड़ी महत्वपूर्ण है। और लाओत्से उसी कला का उद्घाटन कर रहा है। कोई पुरुष किसी स्त्री को दासी नहीं बनाता। दुनियाँ के किसी भी कोने में जब भी कोई स्त्री किसी पुरुष के प्रेम में पड़ती है, तत्क्षण अपने को दासी बना लेती है, क्योंकि दासी होना ही गहरी मालकियत है। वह जीवन का राज समझती है।
स्त्री अपने को नीचे रखती है, चरणों में रखती है। और तुमने देखा है कि जब भी कोई स्त्री अपने को तुम्हारे चरणों में रख देती है, तब अचानक तुम्हारे सिर पर ताज की तरह बैठ जाती है। रखती चरणों में है, पहुँच जाती है बहुत गहरे, बहुत ऊपर, तुम चौबीस घंटे उसी का चिंतन करने लगते हो। छोड़ देती है अपने को तुम्हारे चरणों में, तुम्हारी छाया बन जाती है। और तुम्हें पता भी नहीं चलता कि छाया तुम्हें चलाने लगती है, छाया के इशारे से तुम चलने लगते हो।
स्त्री कभी यह भी नहीं कहती सीधा कि यह करो, लेकिन वह जो चाहती है करवा लेती है। वह कभी नहीं कहती कि यह ऐसा ही हो, लेकिन वह जैसा चाहती है वैसा करवा लेती है।लाओत्से यह कह रहा है कि उसकी शक्ति बड़ी है। और उसकी शक्ति क्या है? क्योंकि वह दासी है। शक्ति उसकी यह है कि वह छाया हो गई है। बड़े से बड़े शक्तिशाली पुरुष स्त्री के प्रेम में पड़ जाते हैं, और एकदम अशक्त हो जाते है, और अनजाने में ही बड़ी सहजता से उतर जाते हो उसके प्रेम में ! 💐❤💯🥰😘
11 months ago | [YT] | 3
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SarkaariResult98
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1 year ago | [YT] | 2
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