Aware News 24 — समाधान की पत्रकारिता | Solution-oriented Journalism
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कम शब्दों में L:ove "सच्चा प्यार चेहरे, पैसे और हैसियत से नहीं, बल्कि दिल, विश्वास और भावनात्मक जुड़ाव से होता है।" टेक्स्ट मेसेज कॉल्स एंड उसके बाद physical apparencies arrange हो या love नियम apply कीजिये सम्बन्ध अटूट रहेगा या फिर 10 दिन में नही 1 घंटे में एक दुसरे से उब जायेंगे check your compatibility Through dailouges । बाहरी सुंदरता से ज़्यादा महत्वपूर्ण व्यक्ति का चरित्र है। सच्चा प्रेम धैर्य और विश्वास मांगता है। यदि प्रेम सच्चा हो, तो परिस्थितियाँ और दूरी भी उसे मिलाने का रास्ता बना देती हैं। "दिलों का रिश्ता आँखों से नहीं, विश्वास और सच्ची भावनाओं से बनता है।" ✍️ शुभेन्दु प्रकाश
6 days ago | [YT] | 1
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भारत के ‘इनोवेशन दशक’ को नई दिशा: hackFront India का शुभारंभ, युवाओं को मिलेगा राष्ट्रीय मंच
जब नरेंद्र मोदी फ्रांस के नीस शहर में "भारत इनोवेट्स" पहल के माध्यम से दुनिया के सामने भारत की नवाचार क्षमता का प्रदर्शन कर रहे हैं, उसी समय देश के भीतर अगली पीढ़ी के नवोन्मेषकों को तैयार करने के उद्देश्य से hackFront India का शुभारंभ किया गया है।
नई दिल्ली स्थित कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित hackFront India Leadership Forum में उद्योग, शिक्षा, स्टार्टअप, निवेश और नीति क्षेत्र के कई प्रमुख प्रतिनिधि शामिल हुए।
क्या है hackFront India?
hackFront India, Where U Elevate की एक राष्ट्रीय पहल है, जिसका उद्देश्य:
छात्र नवोन्मेषकों की पहचान करना
युवा उद्यमियों को मंच देना
तकनीकी समाधान विकसित करने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करना
स्टार्टअप, मेंटरशिप और निवेश के अवसर उपलब्ध कराना
इस पहल का लक्ष्य भारत के "Innovation Decade" को गति देना और अगले दस लाख नवोन्मेषकों को अवसर प्रदान करना है।
'भारत इनोवेट्स' की सोच से प्रेरित पहल
hackFront India प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन से प्रेरित है जिसमें भारत को:
👉 तकनीक का उपभोक्ता नहीं, निर्माता राष्ट्र बनाना
👉 युवाओं को रोजगार खोजने वाला नहीं, रोजगार सृजित करने वाला बनाना
👉 शिक्षा, उद्योग और नवाचार को एक मंच पर लाना
शामिल है।
कैसा होगा इसका मॉडल?
यह पहल पूरे भारत में:
Hackathons
Innovation Challenges
Startup Accelerators
Mentorship Programs
की संरचित राष्ट्रीय लीग तैयार करेगी।
इसका उद्देश्य छात्रों और युवा उद्यमियों को वास्तविक समस्याओं के तकनीकी समाधान विकसित करने के लिए प्रेरित करना है।
कौन कर रहा है नेतृत्व?
hackFront India का नेतृत्व:
ऋषभ इलवादी
कर रहे हैं, जो Where U Elevate के सह-संस्थापक और CEO हैं।
सलाहकार परिषद में शामिल प्रमुख नाम:
अमरेश खर
धीरज त्रिपाठी
डॉ. आलोक निखिल झा
नेताओं ने क्या कहा?
कार्यक्रम में मौजूद प्रमुख वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि:
नवाचार केवल प्रयोगशालाओं में नहीं बनता
स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय भारत के भविष्य के Innovation Hub हैं
उद्योग और शिक्षा जगत के बीच की दूरी कम करनी होगी
युवाओं की Employability और Entrepreneurship को बढ़ावा देना होगा
कार्यक्रम में सांसद डॉ. विनोद बिंद, खान मंत्रालय के निदेशक अंशू पांडेय सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियां मौजूद रहीं।
विश्लेषण: क्या भारत का अगला स्टार्टअप बूम कैंपस से निकलेगा?
भारत आज दुनिया के सबसे बड़े स्टार्टअप इकोसिस्टम में से एक है।
लेकिन चुनौतियां अब भी हैं:
1. Idea से Startup तक की दूरी
बहुत से छात्रों के पास अच्छे विचार होते हैं, लेकिन उन्हें मार्गदर्शन नहीं मिलता।
2. Industry Exposure की कमी
कॉलेज स्तर पर Innovation Projects अक्सर बाजार तक नहीं पहुंच पाते।
3. Funding Gap
शुरुआती चरण में निवेश और नेटवर्किंग सबसे बड़ी चुनौती बनी रहती है।
hackFront India जैसी पहल इन तीनों खाइयों को भरने का प्रयास करती दिखाई देती है।
निष्कर्ष: Innovation India का नया अध्याय?
जब भारत वैश्विक मंच पर Deep-Tech और Startup Innovation का प्रदर्शन कर रहा है, तब hackFront India जैसी पहलें जमीनी स्तर पर भविष्य के नवोन्मेषकों को तैयार करने का प्रयास कर रही हैं।
यदि यह पहल अपने उद्देश्यों में सफल होती है, तो आने वाले वर्षों में भारत के कई बड़े स्टार्टअप, टेक समाधान और उद्यमी इसी मंच से निकल सकते हैं।
#HackFrontIndia #InnovationIndia #StartupIndia #PMModi #technology
6 days ago (edited) | [YT] | 2
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Meta is experiencing server down no official report from the meta but many users experiencing problems while posting and loging in
Radhe-Radhe. 🙏🏻🌿
Platform :- Aware News 24, Category/column :- साहित्य की महफिल, शुभेन्दु प्रकाश की रिपोर्ट
Shubhendu Prakash all social handel @shubhenduan24
website :- www.awarenews24.com www.minimetrolive.com
1 week ago | [YT] | 1
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1 week ago | [YT] | 0
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बड़े बुजर्गो का आशीर्वाद खुश रहिये माने क्या ? खुश रहने का मतलब है तुम पर भगवान् की कृपा रहे, अब इससे होगा क्या ? तो इस आशीर्वाद से आप खुश रहेंगे तो आपका काम में मन लगेगा और काम में मन लगेगा तो समृधि आएगी और उसी से गौरव भी आएगा, इश्लाम में अस-सलाम-वालेकुम कहा जाता है बदले में व्व्लेकुम सलाम लोग बोलते हैं मतलब वही है अलाह की रहमत बरकरार रहे और सामने से जिसको कहा गया वो कहता है वालेकुम सलाम, तो रहमत या कृपा बरकार रहेगी तो आप खुश रहेंगे इसलिए अपने बड़े बुजर्ग से आशीर्वाद लीजिये, सनातन में क्या है की अहम ब्राह्म्ष्मी का भी कांसेप्ट है तो सिंपल है सामने वाला डायरेक्ट कहता है खुश रहिये, जिसकी जितनी उम्र उसके पास उतना अनुभव और उतना ही ज्ञान, वास्तव में हम ज्ञान को प्रणाम करते हैं और ज्ञान क्या है कृष्ण, भगवान् भगवद गीता में कहते हैं मै ज्ञान हु अर्थात जितना ज्ञान बढेगा वो उतना इश्वर के करीब जाएगा और जो इश्वर के करीब है उसके करीब आप हो लीजिये बस राधे राधे हो जाएगा हर व्यक्ति में अलग अलग तरह का ज्ञान है इसलिए कोई भी व्यक्ति सबसे अधिक ज्ञानी नही हो सकता इसलिए संस्कार का निर्वहन करे सम्मान दे लोगो को बिना ओहदा देखे कल्याण हो जाएगा राधे राधे
Platform :- Aware News 24,
Category/column :- धर्म का मर्म,
शुभेन्दु प्रकाश की कलम से
2 weeks ago | [YT] | 1
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2 weeks ago | [YT] | 0
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“Khan Sir’s Coaching Under Attack Again!
Is Patna’s Coaching Hub Turning Into a Battlefield of Dominance?”
Analysis Report
Shubhendu Prakash
Founding Editor, Aware News 24
The firing incident outside Khan Sir’s coaching institute in Patna’s Musallahpur Haat area on the night of June 2, 2026, has once again raised serious questions about both Bihar’s education system and law-and-order situation.
According to initial reports, around 5 to 10 rounds of bullets were fired. Police are investigating the matter and are also examining the angle of rivalry and dominance battles among coaching institutions.
However, if this incident is seen merely as a one-day event, we may end up ignoring the larger picture.
Because this is not the first time Khan Sir or his institution has been linked to violent incidents.
Back in 2019, unidentified attackers reportedly carried out a bomb attack on Khan GS Research Centre in Musallahpur Haat, Patna. Panic spread across the area, the coaching premises were vandalized, bombs were hurled, and chaos erupted among students. At that time, police investigations also pointed toward student-related and local dispute angles.
Over the years, Khan Sir himself has repeatedly claimed in interviews and public forums that his institute was targeted due to its rising popularity and growing influence in the coaching industry.
And now, in 2026 — another firing incident.
The big question is: Why does this keep happening again and again?
Musallahpur Haat, Bhikhna Pahadi, and nearby areas in Patna are not just centers of education. They are also the heart of Bihar’s massive coaching economy. Every year, lakhs of students come here. Hostels, mess facilities, books, test series, online platforms, and coaching institutes together form a business ecosystem worth crores of rupees.
In such an environment, the institute attracting the largest number of students becomes not just an educational center, but also an economic and social power.
Khan Sir’s model has always been different from traditional coaching systems — low fees, massive social media reach, strong YouTube presence, and direct communication with students. These factors transformed him from just a teacher into a major public personality.
That is why when bullets are fired outside his institute, it is not viewed merely as an attack on one person or one coaching center, but as a question mark on the entire education ecosystem.
The most worrying aspect is that Bihar’s youth are already struggling with competitive exams, paper leaks, recruitment controversies, and unemployment. In such a situation, if educational hubs themselves begin to appear unsafe, it is natural for young people to lose faith in the system.
Police investigations are ongoing, and hopefully the truth will emerge soon. But one thing is certain — when the 2019 bombing and the 2026 firing incidents are viewed together, the question becomes even bigger:
Why are violent incidents repeatedly surfacing in Patna’s coaching hub?
If bullets and bombs start becoming part of discussions outside temples of education, then it is no longer just a crime story — it becomes a matter of concern for the future of society itself.
3 weeks ago | [YT] | 1
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Psychology के चक्कर मे लोग कम बात करते हैं value न कहीं गिर जाये लेकिन मैं वैल्यू के चक्कर मे अपने स्वभाव से क्यों समझौता करूँ? I love to talk इंसान हु कोई रुपया नहीं जो मेरी वैल्यू गिर जाये
कई लोग आजकल “less talk = more value” वाली psychology में जीते हैं।
हर चीज़ को strategy बना दिया गया है —
कितना reply करना है, कितना दिखना है, कितना express करना है।
लेकिन हर इंसान का स्वभाव अलग होता है।
अगर तुम्हारा स्वभाव खुलकर बात करना, अपनापन देना और दिल से connect करना है,
तो सिर्फ “mysterious” दिखने के लिए खुद को बदलना भी एक तरह का नकलीपन है।
इंसान की value उसकी चुप्पी से नहीं,
उसकी नीयत, व्यवहार, सोच और presence से बनती है।
जो लोग तुम्हारी बातचीत को “cheap” समझते हैं,
शायद वो emotions को market psychology से तौलते हैं।
तुम सही कह रहे हो —
इंसान कोई currency नहीं है जिसकी ज्यादा circulation से value गिर जाए।
कभी-कभी खुलकर बात करना ही सबसे बड़ी honesty होती है।
Aajkal social media aur psychology culture mein ek trend chal raha hai —
“Less talk = More value”
Har cheez ko strategy bana diya gaya hai:
👉 Kitna reply karna hai
👉 Kitna express karna hai
👉 Kitna visible rehna hai
Lekin kya har insan ko mysterious banna zaroori hai?
Is video mein baat personality, honesty aur human connection ki।
👉 Kya openly baat karna weakness hai?
👉 Kya emotions ko market psychology se measure karna sahi hai?
👉 Kya insaan koi currency hai jiska circulation badhne se value gir jaaye?
📢 Yeh ek social observation aur philosophical discussion hai।
Platform: Aware News 24
Vicharak: Shubhendu Prakash
Column: Sahitya Ki Mehfil
#psychology #humanconnection #personality #philosophy #awarenews24
less talk more value psychology, fake psychology trends, human connection discussion, personality and emotions, social media psychology, aware news 24, shubhendu prakash, sahitya ki mehfil, philosophical thoughts hindi
4 weeks ago | [YT] | 0
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देखिये मौका लोगों को जरूर दीजिए लेकिन कोई बार बार जब disrespectful रहे, आपकी कदर नहीं करे फिर भाड़ में जाओ मुझे कोई मतलब नहीं। किसी को सिर्फ उसकी/उसका समस्या, उसका टाइम, फिर आपको enterprenure होना चाहिए, लेकिन आप खड़ूस boss बनेंगे, humble नहीं। मैं बदल जाता हूँ, कोई प्यार से कह दे कि “ये नहीं हो पाया” बोल देता हूँ “ठीक है”, लेकिन चिल्लाना कि “क्यों नहीं हुआ?” ये फालतूगिरी है। आपको कोई पसंद नहीं, बात नहीं करेंगे, मगर उसको गाली देना मेरे ख्याल से ठीक नहीं, ये नीच मानसिकता है।
बहुत लोगों के विचार नहीं मिलते तो अलग रहेंगे लेकिन फिर भी respect तो करना ही चाहिए। जैसे आप हमको पसंद हो, हम आपको follow करते हैं। आपको मेरे content पसंद नहीं इसमें कौन सी बड़ी बात है? ये ठीक बात है। लोगों को समझ क्यों ही आता, लेकिन follow करके unfollow और बंदे या बंदी ने जब पूछा कि “unfollow क्यों किया?” तो आप जब ये कहते हैं कि “आप nonveg खाते हैं इसलिए”, या “आपका dressing sense ठीक नहीं”, या “आपकी पसंद ठीक नहीं”, या “आप लोगों को इतना praise क्यों करते हैं?”
आप फिर पूछेंगे “मेरे काम और ज्ञान में क्या कमी है?” जवाब मिलेगा “नहीं नहीं आपका काम बहुत बढ़िया है, आपका ज्ञान बहुत अच्छा है लेकिन आपका intrest ठीक नहीं।”
तब आप judge कर रहे होते हैं। तब मैं Bhagavad Gita खोल लेता हूँ 18th chapter — “जो लोग आपको judge करें वो राजशी ज्ञान हैं, ऐसे लोगों को लगता है मैं सबकुछ हूँ और लोग फालतू, ये मूर्खता है।” ऐसा गीता में लिखा है। गीता कहती है “सबमें ईश्वर है, चल अचल।” फिर कोई खराब कैसे? अच्छा कैसे? सिर्फ काम से व्यक्ति का मूल्यांकन करने की सीख, ना कि उसके intrest से।
1 month ago | [YT] | 1
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कृष्ण से संवाद ✍️
माधव खुशी को कैसे प्राप्त करे?
क्या अच्छे कर्म या दूसरों से तुलना नहीं करने से खुशी मिलेगी?
भगवान कृष्ण बोले:
हे पार्थ, खुशी कोई वस्तु नहीं जिसे तुम प्राप्त करो, अच्छा कर्म करते वक्त ही खुशी मिलती है।
पार्थ:
मैं समझा नहीं माधव, जरा विस्तार से बताये!
कृष्ण:
मुस्कुराये और बोले —
हे पार्थ, भोजन करने में ही मजा आता है, स्वादिष्ट खाना बना हो तो तुम तारीफ करते हो, मतलब तुम आनंद कर्म में ही कर रहे हो। आनंद के बाद संतुष्टि मिलती है, मन प्रफुल्लित होता है।
फल की कामना से किया गया कर्म कभी खुशी नहीं देगा, जैसे तुमने किसी भूखे व्यक्ति को खाना खिलाया उसके चेहरे की मुस्कान देखकर ही तुम्हें खुशी की प्राप्ति हो गई।
ठीक इसी प्रकार से —
दुनिया का कोई भी कर्म जिसको करने में तुम्हें मज़ा आ रहा, जैसे तुमको लोगों की समस्या सुनने और उसके समाधान खोजने में मजा आता है, किसी संगीतकार को गाने में मजा आता है, अनाज उपजाने वाले को बुआई कटाई में मजा आता है, किसी इंजीनियर को भवन या पुल बनाने में मज़ा आता है।
पुल के बाद वो सिर्फ संतुष्ट होता है, उसे कुछ प्राप्त नहीं हुआ, खाना भी शरीर से निकल जाएगा, पुल भी एक दिन गिर जाएगा, तो खुश क्यों होना चाहिए! रुपया पैसा धन दौलत ऐश्वर्य एक दिन सब खत्म हो जाएगा।
फिर कर्म करो और जिसमें मजा आ रहा है वही तुम्हारी नियति है, इसलिए पार्थ कर्म में enjoy करो।
मूर्ख और अज्ञानी व्यक्ति ही कहता है —
मुझे ये मिला,
आज मैंने उससे बात की,
मेरे इतने follower हो गए,
मेरे इतने subscriber हो गए।
क्या लोग अंधे हैं? फिर ढिंढोरा क्यों पीट रहे हो?
अपने बारे में बताना, किसी को अपना परिचय देना गलत नहीं है निजी लेवल पर, लेकिन उस बात का ढिंढोरा पीटना कि मेरे पास कार है, गाड़ी है, मुझे इतने लोग जानते हैं — यह सब मूर्खता और अभिमान की श्रेणी में आता है।
दूसरों से जलना या फिर खुद की तुलना दूसरों से करना — ये अकर्म है।
अकर्मी होने से हमें बचना चाहिए।
दूसरे के बारे में सोचना ही क्यों है!
जीवन का आनंद लो और कर्म में ही खुद को झोंक दो।
क्योंकि कर्म ही तो धर्म है।
खाना खाना कर्म है, नहाना धोना, मंदिर जाना, पूजा पाठ, गीत संगीत और तुम्हारे जीवन जीने के जीविकोपार्जन के लिए किया गया कर्म — सब कर्म ही है।
किसी से अकारण लड़ना भी कर्म है, लड़ते वक्त या लड़ने के बाद क्या मिला?
गुस्सा, अपमान, द्वेष।
अच्छे काम में खुशी और काम होने के बाद संतुष्टि, लेकिन एक दिन फिर भी सब खत्म होगा।
इसलिए पार्थ, कर्म करने में मजा लो, कल्याण हो जाएगा…
इतना कहकर प्रभु अंतर्ध्यान हो गए।
🔴 मुख्य बिंदु (Highlighted Points):
1️⃣ दूसरों के बारे में सोचते रहना,
उससे जलना या खुद की तुलना करना —
यही कर्म में अकर्म है।
2️⃣ “मुझे ऐसा करके खुशी मिलेगी” —
इसका मतलब आप फल की कामना से कर्म कर रहे हैं।
कोई भी काम करने में ही खुशी मिलनी चाहिए।
धर्म करने में खुशी होनी चाहिए,
न कि खुशी पाने के लिए धर्म।
3️⃣ खाना खाने में ही खुशी मिलती है,
खाने के बाद केवल संतुष्टि मिलती है।
खाते वक्त कोई कहता है —
“बहुत स्वादिष्ट भोजन है”
यानी वह कर्म करते समय ही खुश है।
राधे राधे 🙏
2 months ago | [YT] | 0
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