Śrī Śakti Tribe

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Thank you everyone , gratitude

5 months ago | [YT] | 1

Śrī Śakti Tribe

अन्नपूर्णा माँ का गूढ़ अर्थ केवल भोजन देने वाली देवी तक सीमित नहीं है। भीतर से देखने पर:

"अन्नपूर्णा" का अर्थ है —
अन्न (भोजन) + पूर्णा (पूर्णता, सम्पूर्णता)।
अर्थात् वह शक्ति जो संपूर्ण सृष्टि को न केवल भौतिक भोजन, बल्कि प्राण, चेतना, प्रेम, और ज्ञान से भी पोषित करती है।
वह यह दर्शाती हैं कि अभाव (कमतरता) एक माया है।
असल में ब्रह्माण्ड में सब कुछ पूर्ण और प्रचुरता से भरा है।
अन्नपूर्णा माँ इस ब्रह्माण्डीय सच्चाई की मूर्तिमान अभिव्यक्ति हैं — कि अस्तित्व स्वयं पोषक है।
तांत्रिक दृष्टि से, अन्नपूर्णा माँ पराशक्ति (सर्वोच्च शक्ति) का ही एक रूप हैं, जो स्वयं चेतना को भी पोषण देती हैं।
वह केवल शरीर को नहीं, बल्कि आत्मा को भी "भोजन" (ऊर्जा) देती हैं।
एक गहरे प्रतीक के रूप में, जब शिव स्वयं अन्नपूर्णा से भिक्षा माँगते हैं, तो यह दिखाता है कि निर्गुण ब्रह्म (शुद्ध चेतना) भी शक्ति (माँ) के बिना शून्य है।
शिव बिना शक्ति के शव (Dead Body) के समान है।
इसलिए अन्नपूर्णा माँ वह ऊर्जा हैं जो अस्तित्व को गतिशील बनाती हैं।
साधना के स्तर पर, अन्नपूर्णा माँ यह सिखाती हैं कि विश्वास रखो — जब बाहरी रूप से कुछ भी न दिखे, तब भी माँ का पोषण अंदर से निरंतर बह रहा होता है।
माँ स्वयं हमारे जीवन के हर क्षण का संचालन करती हैं, चाहे हमें इसका भान हो या न हो।
एक और सूक्ष्म अर्थ में, अन्नपूर्णा का "अन्न" केवल भौतिक भोजन नहीं है, बल्कि "ज्ञान-अन्न" (ज्ञान का भोजन) भी है
जो आत्मा की भूख (सत्य की प्यास) को तृप्त करता है।

1 year ago | [YT] | 0

Śrī Śakti Tribe

वराही अम्मा देवी दुर्गा का एक उग्र और रहस्यमयी स्वरूप हैं। वह सप्तमातृकाओं (सात माताओं) में से एक हैं और वराह (सूअर) के मुख वाली देवी के रूप में जानी जाती हैं। उनका स्वरूप शक्ति, साहस, और प्रचंड संरक्षण का प्रतीक है।
वराही अम्मा रात्रि की देवी हैं — अज्ञान, भय और अंधकार पर विजय देने वाली। वे साधक को भीतर के गहरे, छिपे हुए भय और आत्म-अवरोधों से मुक्ति दिलाती हैं।

उनका रंग अक्सर गहरा लाल या काला बताया जाता है, जो गहन ऊर्जा और चेतना का सूचक है। वे एक हाथ में अंकुश (अनियंत्रित प्रवृत्तियों को वश में करने के लिए) और दूसरे में पाश (बंधन काटने के लिए) धारण करती हैं। कई बार उन्हें पांच मुखों और आठ भुजाओं के साथ भी दर्शाया जाता है।
वराही अम्मा साधक के जीवन में तब प्रकट होती हैं जब साधक अंधकार में भी आगे बढ़ने का साहस जुटाता है। उनका साक्षात्कार भीतर की गहरी परतों को शुद्ध करता है, भय को शक्ति में बदलता है, और आत्मा को स्वर्ण-सा निखारता है।
Hail to maa varahi.....

1 year ago (edited) | [YT] | 2

Śrī Śakti Tribe

Kamakhya var devi Neel parvat vasini tvam devi jagat mata yoni mudre namastute
Long ago, when Lord Shiva's beloved wife Sati immolated herself, Shiva was devastated. Grief-stricken, he roamed the universe carrying her lifeless body. To save the world from the chaos caused by Shiva's sorrow, Lord Vishnu cut Sati's body into 51 pieces with his Sudarshan Chakra. Each place where a piece fell became a sacred Shakti Peetha.

At Nilachal Hill in Assam, Sati's yoni (womb) fell. This place became the most revered, for it symbolized the source of all creation. Here, Kamakhya Devi manifested — the powerful, fertile, and compassionate Mother Goddess. She is worshipped as the granter of desires, fertility, and ultimate liberation.

Kamakhya Ma is not represented by a typical idol, but by a stone shaped like a yoni, naturally kept moist by an underground spring — a symbol of eternal feminine energy.

1 year ago | [YT] | 3