bidar politics

“2.5 लाख सैनिक बंगाल चुनाव में तैनात किए जा सकते हैं,
हजारों करोड़ रुपये चुनावों में खर्च किए जा सकते हैं,
लेकिन सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए
न समय है, न पैसा।

आखिर क्यों?

सीमा सुरक्षा किसी राज्य सरकार की नहीं, बल्कि केन्द्रीय सरकार की जिम्मेदारी होती है।
अगर देश की सीमाएँ सुरक्षित नहीं होंगी, तो देश के अंदर की राजनीति और चुनाव किस काम के?

जब चुनाव आते हैं, तब सुरक्षा बलों की भारी तैनाती संभव हो जाती है,
लेकिन सीमा पर लगातार हो रही घुसपैठ को रोकने के लिए वही गंभीरता क्यों नहीं दिखाई जाती?

देश की जनता को यह सवाल पूछने का पूरा अधिकार है कि —
क्या राष्ट्र सुरक्षा सिर्फ चुनावी भाषणों और नारों तक सीमित रह गई है?
क्या “राष्ट्रीय सुरक्षा” का मुद्दा केवल वोट लेने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है?

अगर हजारों करोड़ रुपये चुनावी व्यवस्थाओं पर खर्च हो सकते हैं,
तो सीमा सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए क्यों नहीं?

राष्ट्र पहले होना चाहिए, राजनीति बाद में।
सीमाएँ सुरक्षित होंगी, तभी देश सुरक्षित होगा।”

--
विनय बिरादर ( अध्यक्ष ) जन नेता

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2 months ago | [YT] | 1

bidar politics

🇮🇳 भारतीय संविधान सभा की समितियाँ एवं उनका योगदान

भारत का संविधान विश्व के सबसे विस्तृत और सुविचारित संविधानों में से एक है। इसका निर्माण भारतीय संविधान सभा द्वारा किया गया, जिसका गठन 9 दिसंबर 1946 को हुआ और 26 जनवरी 1950 को संविधान लागू हुआ।

संविधान निर्माण की प्रक्रिया को व्यवस्थित और प्रभावी बनाने के लिए संविधान सभा ने विभिन्न समितियों का गठन किया। कुल मिलाकर 22 समितियाँ (8 प्रमुख + 14 गौण/अन्य समितियाँ) बनाई गई थीं।

🔷 1. प्रमुख समितियाँ (Major Committees – 8)

ये समितियाँ संविधान के मूल ढांचे और नीतियों को तय करने में सबसे महत्वपूर्ण थीं:

1.संघ शक्ति समिति
अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
सदस्य: 9
2.संघ संविधान समिति
अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
सदस्य: 15
3.प्रांतीय संविधान समिति
अध्यक्ष: सरदार वल्लभभाई पटेल
सदस्य: 25
4.प्रारूप समिति (Drafting Committee)
अध्यक्ष: डॉ. भीमराव आंबेडकर
सदस्य: 7

5. मौलिक अधिकार, अल्पसंख्यक, जनजातीय एवं बहिष्कृत क्षेत्र संबंधी सलाहकार समिति
अध्यक्ष: सरदार वल्लभभाई पटेल
सदस्य: 64

➤ इसके अंतर्गत उप-समितियाँ भी बनाई गईं:

* मौलिक अधिकार उप-समिति (12 सदस्य)
* अल्पसंख्यक उप-समिति (9 सदस्य)
* असम जनजातीय क्षेत्र समिति (8 सदस्य)
* अन्य बहिष्कृत क्षेत्र समिति (7 सदस्य)

6. कार्य प्रक्रिया समिति
अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
सदस्य: 15
7. संचालन समिति (Steering Committee)
अध्यक्ष: डॉ. राजेंद्र प्रसाद
सदस्य: 14
8. राज्यों की समिति (States Committee)
अध्यक्ष: सरदार वल्लभभाई पटेल
सदस्य: 17

🔷 2. गौण / अन्य समितियाँ (Minor Committees – 14)

ये समितियाँ प्रशासनिक, तकनीकी और सहायक कार्यों के लिए बनाई गई थीं:

1.वित्त एवं कार्यालय समिति
2.प्रमाण-पत्र समिति
3.गृह समिति
4.कार्य-व्यवसाय समिति
5.झंडा समिति
6.भाषा समिति
7.प्रेस दीर्घा समिति
8.मुख्य आयुक्त प्रांत समिति
9.वित्तीय प्रावधान विशेषज्ञ समिति
10.कार्य प्रक्रिया संशोधन समिति
11.अल्पसंख्यक उप-समिति
12.जनजातीय एवं बहिष्कृत क्षेत्र उप-समिति
13.समिति कक्ष आवंटन समिति
14. अन्य तदर्थ समितियाँ

📊 कुल सारांश
* प्रमुख समितियाँ: 8
* गौण/अन्य समितियाँ: 14
* ✅ कुल समितियाँ: 22

📌 महत्वपूर्ण तथ्य
* संविधान सभा ने कुल 165 बैठकें कीं
* संविधान निर्माण में लगभग 2 वर्ष 11 माह 18 दिन लगे
* कुल 299 सदस्य थे (विभाजन के बाद) 229 सदस्य शेष रहे ।,
* इनमें से 284 सदस्यों ने हस्ताक्षर किए

⚖️ निष्कर्ष
भारतीय संविधान का निर्माण केवल एक व्यक्ति या एक समिति का कार्य नहीं था, बल्कि यह सामूहिक बौद्धिक प्रयास का परिणाम था। विभिन्न समितियों ने अपने-अपने विषयों पर काम किया और अंततः प्रारूप समिति ने सभी सुझावों को एक कानूनी दस्तावेज के रूप में ढाला।

👉 इसलिए यह कहना सही होगा कि:
“संविधान निर्माण एक सामूहिक प्रक्रिया थी, जिसमें सभी समितियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, लेकिन अंतिम रूप प्रारूप समिति ने दिया।”

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* बाल गंगाधर तिलक ने 1895 मे 113 अनुच्छेद लिखे ,
* एम. एन. रॉय ने 928 - 1944 मे 13 अध्याय, 137 अनुच्छेद लिखे,
* बी. एन. राव ने 1947 मे 240 अनुच्छेद 25 भाग,13 अनुसूचियाँ
* डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने 1949 मे 395 अनुच्छेद, 8 अनुसूचियाँ, ( सिर्फ ड्रॉफ्ट कमेटि के चेरमेन थे डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर), जबकि कुल 22 कमेटियाँ थी ।

* डॉ. राजेन्द्र प्रसाद पुरे संविधान सभा के अध्यक्ष थे ।
* संविधान मे 284 लोगों ने हस्ताक्षर किये जिसमे भीमराव आंबेडकर जी का हस्ताक्षर दुसरे पेज मे वो भी 26वें स्थान पर है ।
* कांग्रेस - बीजेपी ने 2026 तक 130 से अधिक संशोधन किया और 448 अनुच्छेद, 25 भाग, 12 अनुसूचियाँ बना दी I

ऐसे मे संविधान निर्माता किसे कहें ?
जिस संविधान को जलाने कि बात कही और किसीके लिए भी अच्छा नही बताया , तो ऐसे संविधान को फिर से क्यों नही बनाया गया ?
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कानून : सांसद, जनता की जरुरत अनुसार बनाते है ।
विभाग: कानूनों के अनुसार काम करते है, न कि सांसदों निर्देश अनुसार ।

सिर्फ आपातकाल में ही अध्यक्ष (राष्ट्रपति) पुरे देश मे अनुसार जनता के हितों अनुसार निर्देश व कानुन मे बदलाव कर सकता है ।

— विनय बिरादर (UCP अध्यक्ष)

2 months ago | [YT] | 1