उत्तर--(c) उपरोक्त पंक्तियों सेनापति द्वारा रचित कवित्त रत्नाकर से ली गई है, भावार्थ यह है: शीत ऋतु में सर्दी बढ़ जाती है। ऐसा लगता है जैसे शीत रूपी प्रबल सेनापति ने क्रोध करके अपने दल के साथ चढ़ाई कर दी। आग कमज़ोर हो गई है और सूर्य को शीत लग गया है। बर्फीली हवा तो ऐसी लगती है जैसे तीखे तीर छोड़ रही हो। गर्मी तो रही ही नहीं। वह तो जैसे भवनों के कोनों में जाकर छिप गई है। लोग सर्दी से बचाव करने के लिए आग जलाते हैं। उसके धुएँ से उनकी आँखों से आँसू निकल आते हैं। लोग सर्दी से परेशान होकर आग पर जैसे गिरे ही पड़ते हैं। वे उसके पास धिरकर बैठ जाते हैं। उसे वे अपने हृदय से ही लगाए लेते से प्रतीत होते हैं। आग उन्हें अच्छी लगती है। वे ऐसे लगते हैं मानो वे शीत से डरे हुए हैं और अपने हाथ फैलाकर आग को अपने सीने की छाया से रख लेना चाहते हैं।
(i)विद्यानिवास मिश्र का प्रथम निबन्ध संग्रह है "छितवन की छांह" है।
(ii)विद्यानिवास मिश्र भ्रमरानंद उपनाम से श्रीनारायण चतुर्वेदी को पत्र लिखते थे।
(iii)निबंध संग्रह :-
छितवन की छांह (1953), हल्दी दूध (1955), कदम के फूली डाल (1956), तुम चंदन हम पानी (1957), आंगन का पंछी और बंजारा मन (1963), मैंने सील पहुंचाई (1966), वसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972), मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974), परंपरा बंधन नहीं (1976), कटीले तारों के आर पार (1976), कौन तू फुलवा बीन निहारी (1980), निज मुख मुकुल (1981), भ्रमरानंद के पत्र (1981), कमाल के झरोखे से (1981), अस्मिता के लिए (1981)
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प्रश्न. निम्नलिखित कवित्त के आशय हैं:
सीत कौं प्रबल सेनापति कोपि चढ्यौ दल, निबल अनल, गयौ सूरि सियराइ कै।
हिम के समीर, तेई बरसे विषम तीर, रही है गरम भौन कोनन मैं जाइ के।
धूम नैन बहैं, लोग आगि पर गिरे रहें, हिए सीं लगाइ रहें बैंक सुलगाइ कै।
मानी भीत जानि, महा सीत तें पसारि पानि, छतियाँ की छाँह राख्यौ पाउक छिपाइ के।।
1. यह सामान्य जीवन का चित्र है।
II. ठंड को गुस्सैल सेना जैसा बताया गया है।
III. गर्मी केवल लोगों के दिलों में बची है।
IV. सामान्य लोग आग के भरोसे सर्दी बिताते हैं।
नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर को चुनिएः
(a) III और IV सही
(b) II और III सही
(c) I, II और IV सही
(d) II. III और IV सही
उत्तर--(c) उपरोक्त पंक्तियों सेनापति द्वारा रचित कवित्त रत्नाकर से ली गई है, भावार्थ यह है: शीत ऋतु में सर्दी बढ़ जाती है। ऐसा लगता है जैसे शीत रूपी प्रबल सेनापति ने क्रोध करके अपने दल के साथ चढ़ाई कर दी। आग कमज़ोर हो गई है और सूर्य को शीत लग गया है। बर्फीली हवा तो ऐसी लगती है जैसे तीखे तीर छोड़ रही हो। गर्मी तो रही ही नहीं। वह तो जैसे भवनों के कोनों में जाकर छिप गई है। लोग सर्दी से बचाव करने के लिए आग जलाते हैं। उसके धुएँ से उनकी आँखों से आँसू निकल आते हैं। लोग सर्दी से परेशान होकर आग पर जैसे गिरे ही पड़ते हैं। वे उसके पास धिरकर बैठ जाते हैं। उसे वे अपने हृदय से ही लगाए लेते से प्रतीत होते हैं। आग उन्हें अच्छी लगती है। वे ऐसे लगते हैं मानो वे शीत से डरे हुए हैं और अपने हाथ फैलाकर आग को अपने सीने की छाया से रख लेना चाहते हैं।
3 months ago | [YT] | 1
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विद्यानिवास के निबंध संग्रह---
(i)विद्यानिवास मिश्र का प्रथम निबन्ध संग्रह है "छितवन की छांह" है।
(ii)विद्यानिवास मिश्र भ्रमरानंद उपनाम से श्रीनारायण चतुर्वेदी को पत्र लिखते थे।
(iii)निबंध संग्रह :-
छितवन की छांह (1953),
हल्दी दूध (1955),
कदम के फूली डाल (1956),
तुम चंदन हम पानी (1957),
आंगन का पंछी और बंजारा मन (1963),
मैंने सील पहुंचाई (1966),
वसंत आ गया पर कोई उत्कंठा नहीं (1972),
मेरे राम का मुकुट भीग रहा है (1974),
परंपरा बंधन नहीं (1976),
कटीले तारों के आर पार (1976),
कौन तू फुलवा बीन निहारी (1980),
निज मुख मुकुल (1981),
भ्रमरानंद के पत्र (1981),
कमाल के झरोखे से (1981),
अस्मिता के लिए (1981)
3 months ago | [YT] | 0
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https://youtu.be/T3R0rko6nQQ?si=07SQB...
3 months ago | [YT] | 0
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सिद्ध साहित्य :- कवि कालक्रम
सरहपा - 769 ई.
लुइपा - 773ई.
शबरपा - 780 ई.
कण्हपा - 820 ई.
डोम्भिपा - 840 ई.
वीरूपा - 843ई.
4 months ago | [YT] | 3
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https://youtu.be/QX_e4AyuPPE?si=eCknM...
4 months ago | [YT] | 2
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"रस कलश" किसकी रचना है?
4 months ago | [YT] | 2
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https://youtu.be/bkS79GJS3Yo?si=5Itr-...
4 months ago | [YT] | 0
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UGC NET Exam Mathematical Portion:-
1 यदि (A + B) का 20% = (A-B) का 60% है, तो A और B का अनुपात ज्ञात कीजिए।
1. 1:2
2. 2:1
3. 1:3
4. 3:1
हल:-
(A+B) का 20%=(A-B)का 60%
=20/100(A+B)=60/100(A-B)
=1/5(A+B)=3/5((A-B)
=(A+B)=3(A-B)
= A+B = 3A-3B
=B+3B =3A-A
=4B =2A
=4/2 =A/B
=2 /1 = A/B
सही उत्तर विकल्प 2 है|
5 months ago | [YT] | 3
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प्रियप्रवास महाकाव्य से महत्वपूर्ण तथ्य:-------
* द्विवेदी मंडल के प्रसिद्ध कवि अयोध्या सिंह उपाध्याय हरिऔध विरचित प्रियप्रवास खड़ी बोली का प्रथम महाकाव्य है और ये खड़ी बोली के प्रथम महाकवि ।
* इस महाकाव्य की रचना सन् 1909 से प्रारंभ हुआ और 24 फरवरी 1913 ई. को समाप्त ।
* प्रियप्रवास का प्रकाशन सन् 1914 ई. में हुआ।
*प्रियप्रवास के कथा का आधार भगवत पुराण है।
*प्रियप्रवास का नाम पहले 'ब्रजागना विलाप' था जिसे बाद में कथा वस्तु को 'ध्यान में रखते हुए प्रिय-प्रवास रखा गया।
*दिवस का अवसान समीप था। गगन था कुल लोहित हो चला। इसे मंगलाचरणात्मक पद कहा जा सकता है।
*संपूर्ण महाकाव्य सत्र सर्गो में विभक्त है|
*इसका बेकार प्रधान पत्र कृष्णा नहीं राधा है|
5 months ago | [YT] | 2
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https://youtu.be/C7NMZiRb1Uw?si=ReDU4...
5 months ago | [YT] | 1
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