Shantanu Kumar Official

मेरा नाम Shantanu Kumar है।
मैंने Mathematics और Geography में M.Sc किया है तथा UGC NET भूगोल और Population Studies विषय में क्वालिफाइड हूं।
मुझे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (BPSC, UPSC, State PCS, SSC, Teacher Exams) और शिक्षण का लंबा अनुभव है। मुझे जटिल विषयों को सरल शब्दों में समझाना पसंद है।

यह चैनल education, awareness, learning और motivation को समर्पित है —
जहाँ हम विभिन्न कठिन विषयों को सरल, तार्किक और वस्तुनिष्ठ तरीके से समझाते हैं।

इसके साथ ही मुझे हिंदी साहित्य, कविता, कहानी और शायरी से गहरा लगाव है। मैं अपने विचारों और भावनाओं को कविताओं, कहानियों और शायरियों के माध्यम से आपसे साझा करता रहूंगा।
यह चैनल आपके ज्ञान, सोच और संवेदनशीलता — तीनों का संगम है।

सीखने, सोचने और महसूस करने की इस यात्रा में हमारे साथ जुड़ें।
Subscribe करें | Like करें | Share करें — और ज्ञान व प्रेरणा की इस दुनिया का हिस्सा बनें।

🌱 क्योंकि सीखना, सोचना और भावनाओं को महसूस करना — मिलकर ही एक बेहतर दुनिया बनाते हैं।
Because learning, thinking, and feeling emotions– together create a better world.
mks💝


Shantanu Kumar Official

मैया/मां ♥️
#maa #mother'sday

2 weeks ago (edited) | [YT] | 22

Shantanu Kumar Official

नमस्ते साथियों,
विषय : आत्महत्या
(वो जो मरने पे तुला है 'अख़्तर' , उस ने जी कर भी तो देखा होगा)
अक्सर या रोज ही ऐसी कोई ना कोई घटना सुनने को मिल ही जाती है जिसमें कोई व्यक्ति अपने जीवन को समाप्त कर लेता है।
ऐसा करने वाले में बहुत सारे पढ़े लिखे और समझदार लोग होते हैं।
ऐसे समाचार पर मैने देखा है कि लोगों की अपनी अलग प्रतिक्रिया होती है । मैं भी पहले ऐसा करने वाले लोगों को अच्छा नहीं मानता था, ज्यादातर मामलों में अक्सर कायर बोल दिया करते थे।
लेकिन... लेकिन... लेकिन...
मैंने ऐसे लोगों की स्थिति को महसूस करने प्रयास किया और मेरा ऐसा मानना है की यदि व्यक्ति किसी strong feelings से जूझ रहा हो तब ही शायद ऐसे कदम ले लेता है। यदि strong feelings के बीच में व्यक्ति का दिमाग आए तो फिर शायद ना करता हो ।

वकील अख़्तर लिखते ने सही ही लिखा है :

वो जो वीरान फिरा करता है
उस के सर में कोई सहरा होगा

तुझ से दिल तेरे परस्तारों का
टूटते टूटते टूटा होगा

झुक के जो आप से मिलता होगा
उस का क़द आप से ऊँचा होगा

वो जो मरने पे तुला है 'अख़्तर'
उस ने जी कर भी तो देखा होगा

लेकिन यदि आप कभी ऐसी खबर सुने तो Judgemental होने से पहले उस इंसान को महसूस करने का प्रयास जरूर कीजियेगा । मुझे लगता है जब भी ऐसा कोई विचार आए हमें स्वयं से जुड़े सभी चेहरे पर बस एक नजर दे देनी चाहिए, बहुत सारी उम्मीदें दिख जाएंगी आपको ।
बहुत शुक्रिया
#sucide #shantanukumar #puresoul

3 weeks ago (edited) | [YT] | 9

Shantanu Kumar Official

बरसात पर कविता :

मेरी साँसों पर मेघ उतरने लगे हैं,
आकाश पलकों पर झुक आया है,
क्षितिज मेरी भुजाओं से टकराता है,
आज रात वर्षा होगी।
कहाँ हो तुम?

मैंने शीशे का एक बहुत बड़ा एक्वेरियम
बादलों के ऊपर आकाश में बनाया है,
जिसमें रंग-बिरंगी असंख्य मछलियाँ डाल दी हैं,
सारा सागर भर दिया है।
आज रात वह एक्वेरियम टूटेगा—
बौछारों की एक-एक बूँद के साथ
रंगीन मछलियाँ गिरेंगी।
कहाँ तो तुम?

मैं तुम्हें बूँदों पर उड़ती
धारों पर चढ़ती-उतरती
झकोरों में दौड़ती, हाँफती,
उन असंख्य रंगीन मछलियों को दिखाना चाहता हूँ
जिन्हें मैंने अपने रोम-रोम की पुलक से आकार दिया है।

सर्वेश्वर दयाल सक्सेना

#बरसात #patna #poetry #nature #shantanukumar #puresoul

1 month ago (edited) | [YT] | 12

Shantanu Kumar Official

पढ़िए Down to Earth ( ‪@D2E‬ ) की रिपोर्ट,

ग्राउंड रिपोर्ट: मां के दूध में यूरेनियम से शिशुओं के ‘सुरक्षा कवच’ में दरार, बिहार में बढ़ा कैंसर और प्रदूषण
मां का दूध यानी ब्रेस्टमिल्क शिशुओं के लिए सबसे सुरक्षित और संपूर्ण पोषण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) समेत वैज्ञानिकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने इसे लंबे समय से नवजात शिशु की पहली वैक्सीन और रोगों के खिलाफ प्राथमिक सुरक्षा कवच बताया है। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर यही पहला भोजन पर्यावरणीय प्रदूषकों के बढ़ते बोझ को दर्शाने लगे तो क्या होगा?
hindi.downtoearth.org.in/health/ground-report-uran…

#downtoearth #pollution #infantlife #milk #mother #shantanukumarofficial

1 month ago | [YT] | 14

Shantanu Kumar Official

नमस्ते/प्रणाम,
कल विलियम शेक्सपियर की जयंती के साथ साथ विश्व पुस्तक दिवस भी था और आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर जी की पुण्यतिथि है । तो मेरी ही कहानी के अंश को आपसे साझा करने की इच्छा हुई ।
जरूर पढ़िए और अपनी प्रतिक्रिया दीजिए,
बच्चे का मन और स्वभाव सर्वाधिक पवित्र या शुद्ध होता है। इतनी की मिट्टी में भी प्राण डाल और मिट्टी को सोना बना दे । कहानी ऐसी ही एक बच्ची की है जो मिट्टी से खेल रही है। वह बिखरी हुई मिट्टी को समेटती है, बड़े प्यार से उसका एक गुड्डा बनाती है। चूंकि यह उसका अपना बनाया हुआ है तो उसे वह बहुत बहुत प्यारा लगता है, वह उसे बहुत प्यार और दुलार देती है। वह उस गुड्डे को इतना प्यार देती है कि उसमें जीवन आ जाता है, उसकी बेजान हृदय धक धक करने लगती हैं। अब तो उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहता है, वह खुशी से झूम उठती है। उसे खुद भी कभी कभी भरोसा नहीं हो पाता है कि क्या उसमें इतनी शक्ति है कि वह बेजान में भी जान फूंक दे। पर मन में कई डर और भ्रांति भी है उसके ।
हम सब जानते हुए भी कि बच्ची बहुत खुश है और भारतीय धर्म और दर्शन की समझ के बावजूद भी, हम बच्चे को ऐसा खेलते देख डांटने और फटकारने से अपने को रोक नहीं पाते हैं। उस बच्ची के साथ भी ऐसा ही होता है। उसे भी ऐस करते देख बहुत डांट और फटकार पड़ती है। घर वाले उसे बार बार वापस बुलाते हैं कि अंदर से जाओ, मिट्टी से नहीं खेलते हैं, बहुत डांटते हैं , फटकारते हैं, उसे बाजार से खिलौने का देने की बात भी बताई जाती है, पर उसे तो अब उससे बहुत प्यार हो चुका है।
पर वह तो घर वालों को भी बहुत प्यार करती हैं, अब वह बहुत असमंजस में है। बहुत डांट फटकार के बाद वह अपने बनाए गुड्डे जिसमें की उसने जीवन भरा, प्यार भरा को वापस वहीं छोड़ देने पर मजबूर है वह। लड़की को अपनी सारी कोशिशें नाकाम मालूम होती हैं, दोनों एक दूसरे को समझाते भी हैं ।
लड़की जिसमें इतनी शक्ति रही कि वह बेजान में जान भर दे , मिट्टी को सोना बना दे, पर ऐसी स्थिति में आकर वह एकदम शक्तिहीन बन चुकी है।
पर आखिरकार रोते धोते वह इतनी झटके और जोर से भागने की कोशिश करती हैं, कि लड़की का पैर तेज लग जाता है उस गुड्डे को और वह गुड्डा फिर से बिखरकर मिट्टी हो जाता है।अभी अभी जिसमें प्राण था अब प्राणहीन प्रतीत हो रहा है।
यह मेरा लिखा एक अत्यंत सूक्ष्म सार मात्र है। उम्मीद है कि हृदय तक पहुंची होगी। कैसा लगा जरूर बताएं ।

हरिवंश राय बच्चन की लिखते हैं :
मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,
फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;
कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकर
मैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ!
और
“मिट्टी का तन मस्ती का मन,
क्षण भर जीवन मेरा परिचय"।

एक और शेर है,
दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है
मिल जाए तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है ।

बहुत शुक्रिया ❣️
##story #novel #shakespeare #dinkar #shantanukumar #puresoul

1 month ago (edited) | [YT] | 18

Shantanu Kumar Official

नमस्कार दोस्तों !
पृथ्वी ना केवल मानवों के लिए बल्कि सभी प्रकार के जीवों के लिए एकमात्र घर है । इसे हमें हमेशा बेहतर बनाने के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। कई अन्य ग्रह पर जीवन की खोज या कल्पना ठीक बात है लेकिन पृथ्वी को छोड़ अन्य ग्रह पर भाग जाने को सोच बेहद ही सनकी और नकारात्मक है।

हमें याद रखनी चाहिए :
“The only home for any living being"

आज 22 अप्रैल को पूरा विश्व 'पृथ्वी दिवस' मना रहा है।
✅ कब से शुरू हुआ? पहली बार 1970 में मनाया गया।
✅ 2026 की थीम: "Our Power, Our Planet" (हमारी शक्ति, हमारा ग्रह)।
✅ हमारा लक्ष्य: जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को समझना और भावी पीढ़ी के लिए एक सुरक्षित पर्यावरण तैयार करना।
शुक्रिया ❣️
#worldearthday #shantanukumarofficial #puresoul

1 month ago | [YT] | 15

Shantanu Kumar Official

The Officer's Vision : A sharp vision to be an officer.
नमस्कार दोस्तों !
यदि आप अधिकारी बनना चाहते हैं और एक result oreiented संस्थान एवं मार्गदर्शक की तलाश में हैं तो आइए मै आपको भरोसा दिलाता हूं कि आपकी तलाश यहां पूरी होती है।
हम वही बताते और पढ़ते हैं जो परीक्षा में पूछा जाता है। आज के जानकारी और कोचिंग के बाढ़ के बीच हम एकदम सटीक जैयरी कराने वाले हैं ।
तो दोस्तों आज ही हमसे जुड़े ।
हमारा ऑफलाइन सेंटर का पता है : डॉक्टर कॉलोनी, कंकड़बाग, पटना, 9430934375
Youtube: ‪@TheOfficersVisionPatna‬

1 month ago | [YT] | 26

Shantanu Kumar Official

युगपुरुष बाबासाहेब: एक संघर्ष 🇮🇳⚖️

वो आदमी नहीं है मुकम्मल बयान है,
माथे पे उसके चोट का गहरा निशान है।

वे कर रहे हैं इश्क़ पे संजीदा गुफ़्तगू,
मैं क्या बताऊँ मेरा कहीं और ध्यान है।

सामान कुछ नहीं है फटेहाल है मगर,
झोले में उसके पास कोई संविधान है।
~ दुष्यंत कुमार

क्या आप जानते हैं कि भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पकार डॉ. भीमराव अंबेडकर का जीवन कितने अकल्पनीय संघर्षों से भरा था? 📚✨

14 अप्रैल को बाबा साहेब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर की जन्म जयंती मनाई गई । आज के इस इन्फोग्राफिक में हमने बाबासाहेब के जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं को दर्शाया है:

🔹 प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: 14 अप्रैल 1891 को महू (मध्य प्रदेश) में जन्मे बाबासाहेब ने बचपन से ही कड़े जातिगत भेदभाव का सामना किया। इसके बावजूद, उन्होंने हार नहीं मानी और अमेरिका की कोलंबिया यूनिवर्सिटी और लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (LSE) से अर्थशास्त्र व राजनीति विज्ञान में उच्च शिक्षा (एम.ए., पी.एच.डी., एम.एस.सी., डी.एस.सी., बार-एट-लॉ) प्राप्त की।
🔹 ऐतिहासिक सामाजिक आंदोलन: 20 मार्च 1927 का ऐतिहासिक 'महाड़ सत्याग्रह', जहाँ उन्होंने हज़ारों अनुयायियों के साथ अछूतों को सार्वजनिक चवदार तालाब से पानी पीने का अधिकार दिलाया। इसके बाद 1930 में नासिक का 'कालाराम मंदिर सत्याग्रह' भी उनके संघर्ष का एक बड़ा हिस्सा रहा।
🔹 पूना पैक्ट (1932): अछूतों के राजनीतिक अधिकारों (पृथक निर्वाचिका) के लिए उनका महात्मा गांधी के साथ वैचारिक मतभेद हुआ। गांधी जी के आमरण अनशन के कारण अंततः 1932 में यरवदा जेल में ऐतिहासिक 'पूना पैक्ट' पर हस्ताक्षर किए गए।
🔹 संविधान निर्माण: 15 अगस्त 1947 के बाद स्वतंत्र भारत के पहले कानून मंत्री और संविधान की प्रारूप समिति (Drafting Committee) के अध्यक्ष के रूप में उन्होंने एक ऐसा संविधान तैयार किया जो देश के सभी नागरिकों को न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व की गारंटी देता है।
🔹 धम्म दीक्षा: 14 अक्टूबर 1956 को नागपुर की दीक्षाभूमि में उन्होंने अपने लाखों अनुयायियों के साथ समता, करुणा और विज्ञान पर आधारित बौद्ध धर्म (नवयान) को अपना लिया।

• बाबासाहेब का हम सभी के लिए सबसे बड़ा संदेश था: "शिक्षित बनो, संगठित रहो, संघर्ष करो"।
• “मैं किसी भी समाज की प्रगति इस बात से मापता हूं की उस समाज की महिलाओं ने कितनी प्रगति की है।”
- डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर

👇 इन्फोग्राफिक देखें और कमेंट्स में बताएं: बाबासाहेब के जीवन का कौन सा पहलू या विचार आपको सबसे ज्यादा प्रेरित करता है?

👍 अगर आपको यह जानकारी पसंद आई, तो पोस्ट को Like करें, Share करें और हमारे चैनल को Subscribe करना न भूलें!

#drambedkar #babasahebambedkar #constitutionofindia #mahadsatyagraha #dalithistory #indianhistory #ambedkarjayanti #jaibhim #knowledgeIspower #socialjustice #shantanukumarofficial

1 month ago (edited) | [YT] | 16

Shantanu Kumar Official

एक कच्चा घड़ा हूँ मैं
एक कच्चा घड़ा हूँ मैं
फ़िर भी बरसात में खड़ा हूँ मैं

बूँदें बेरहम हैं, उनको ये वहम है
कि मैं टूट रहा हूँ, जो मैं चीख रहा हूँ
पर वो बेवकूफ़ हैं, मैं तो सीख रहा हूँ

ऐसे पहले भी लड़ा हूँ मैं
एक कच्चा घड़ा हूँ मैं

हम वो हैं जो क़िस्मत के चाँटों के शोर पे नाचते हैं
हम वो हैं जो क़िस्मत के चाँटों के शोर पे नाचते हैं
जितनी ज़ोर का चाँटा, हम उतनी ज़ोर से नाचते हैं

ये जो फ़िसल-फ़िसल के मैं पीछे आ रहा हूँ
ये जो पिघल-पिघल के मैं बहता जा रहा हूँ
ये जो सिसक-सिसक के मैं आहें भर रहा हूँ

नीचे हैं खाइयाँ और मैं काँप रहा हूँ
पर ज़िंदा हूँ अभी, अभी हाँफ़ रहा हूँ

ऐसे पहले भी चढ़ा हूँ मैं
एक कच्चा घड़ा हूँ मैं
‪@RahgirLive‬

#shantanukumar #rahgir #kachchaghada #puresoul

1 month ago | [YT] | 19