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ओ मिहिर शिवा के वीर सपूतों, निज बलिदानों को याद करो।
आ गई मई 10 कोतवाल धन सिंह सी, क्रांति का पुनः शंखनाद करो।
सह लिया अपमान बहुत अब लेंगे, हक अपना संकल्प करो।
पहुंचो मेरठ सुभारती में निज अधिकारों, की नई हुंकार भरो।
शेष अभी ईमान कौम में सत्ता के, छल प्रपंचों का पर्दाफाश करो।
हो चुका बहुत अन्याय नहीं सहेंगे अब, छीनेंगे हक ऐलान करो।
है अटल प्रतिज्ञा जन जन की, दिया जीवन राष्ट्र भूमि को।
पहुंचेंगे मेरठ पाने खोया सम्मान, याद पन्ना का बलिदान करो।

“राष्ट्रभक्त गुर्जर योद्धाओं की अजेय तलवारों से शत्रु का खून कभी सूखता ही नहीं था, गुर्जर प्रतिहारों की अजेय सेनाएं 300 वर्षों तक भारत की पश्चिमी सीमा पर यवन आक्रांताओं की बर्बर आंधी के सामने अजेय दीवार बनकर खड़ी रही।” यह गौरवशाली कथन सैकड़ो ईमानदार इतिहासकारों की कलम से निकला भारतीय इतिहास का स्वर्णिम पृष्ठ है, जिस पर प्रत्येक राष्ट्रभक्त को गर्व होगा।आपको भी, मुझे भी और प्रत्येक उस व्यक्ति को भी जिसमें जाति का स्वाभिमान शेष है, उसका सीना गर्व से दुगुना हो जाएगा। हमें गर्व है विश्व विजेता सम्राट कनिष्क पर, अजेय मिहिर कुल पर, गुर्जर प्रतिहार वंश के सभी राष्ट्र रक्षक सम्राटों पर, पृथ्वीराज चौहान पर, जोगराज पंवार पर, मां वीरांगना रामप्यारी गुर्जरी पर, वीर शिवा पर और सदियों की गुलामी के विरुद्ध 10 मई 1857 को मेरठ की धारा से क्रांति का शंखनाद करने वाले धन सिंह कोतवाल और उन अनाम शहीदों पर जिनके बलिदान को जान बूझ कर भुला दिया गया। हमने और आपने आजादी के संघर्ष की कीमत अंग्रेजों के बर्बर अत्याचारों को सहन कर, क्रिमिनल ट्राइब एक्ट झेल कर लगभग 100 वर्ष चुकाई है। जिस देश के लिए बलिदान दिया उस राष्ट्र ने भी आजादी के बाद हमारा बलिदान भुला दिया, क्योंकि सत्ता में चाटुकार और अवसरवादी हावी हो गए।
“जागरूक की जय निश्चित है, हार चुके सोने वाले।” दिनकर जी की यह पंक्तियां हमें स्मरण रखनी चाहिए। हमारी राष्ट्रभक्ति ने कभी शहादत का मुआवजा नहीं मांगा, परंतु उपेक्षा अपमान भी बर्दाश्त करना कायरता है। गुर्जर समाज के स्वाभिमानी महानुभावों आजादी के 77 साल बाद हमें यह एहसास हो गया कि अधिकार भीख में नहीं मिलते छीनने पड़ते हैं। आज जमाना तलवार का नहीं, साहस शौर्य बलिदान का नहीं, आज समय संगठित जन बल की हुंकार का है, कलम की आवाज़ का है। भीड़ से भय खाती सरकारों के लिए संख्या बल का बड़ा महत्व है। हां कुछ चाटुकार सदियों से सत्ता में जड़ जमाए हैं और मलाई खा रहे हैं। हमें तो अपनी मेहनत पर विश्वास है, हम अपना हक प्राप्त कर लेंगे, लेकिन सत्ता में बैठे शकुनी के पासे इंद्रप्रस्थ को ही हड़पना चाहते हैं। आप समझ गए होंगे हमारे इतिहास को भी मिटा देना चाहते हैं, संवैधानिक हक भी मारना चाहते हैं और सत्ता में भागीदारी भी नहीं देना चाहते। जागरूक लोगों में हो रहे अपमान की वेदना पीड़ा है। अपमान और तिरस्कार का एक ही निदान है, संगठित होकर विरोध की हुंकार भरो।
बड़े लक्ष्य के लिए छोटे मत भेद भुला दिए जाते हैं। सभी संगठन समाज के उत्थान के लिए काम करते हैं। समाज सबका धन्यवाद ज्ञापित करता है। कहा भी अपनों से जाता है, अपेक्षा भी अपनों से की जाती है। मेरठ की धरा क्रांतिकारी धरा है। ब्रिटिश शासन के विरुद्ध 10 मई 1857 की प्रथम क्रांति की धरा है। यह धरा कई लोगों के साहस शौर्य की धरा है, कई लोगों की राजनैतिक पहल की धरा है। यह धरा आज शिक्षा, व्यापार, व्यवसाय और समृद्धि संपन्नता की धरा है। मेरठ के सभी सामाजिक राणा-महाराणाओं से विनम्र निवेदन है कि मेरठ क्रांति की पहचान के लिए बनी संयुक्त परिषद के प्रयासों में सहयोग कर एक दिन का समय इतिहास के गौरव को जीवंत करने के लिए और लोकतंत्र में दमदार भूमिका का इतिहास रचने के लिए दें। 10 मई 2026 को सुभारती विश्वविद्यालय से एक नई दास्तान लिखने के भागीदार बने। समस्त गुर्जर समाज आपका ऋणी रहेगा।
निवेदक:- गुर्जर सभा मेरठ।

1 month ago | [YT] | 1

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#noida श्रमिक मुद्दों पर प्रतिनिधिमंडल की जिलाधिकारी एवं पुलिस कमिश्नर से वार्ता

गौतम बुद्ध नगर में श्रमिकों पर हो रही दमनात्मक कार्रवाइयों, मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी एवं अन्य संबंधित मुद्दों को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल प्रशासन से मुलाकात करेगा।
दिनांक 17 अप्रैल 2026 (शुक्रवार) को प्रातः 11:00 बजे, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव (पूर्व सांसद) सहित अन्य तीन सांसदों का प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी कार्यालय, सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा में जिलाधिकारी एवं पुलिस कमिश्नर से मुलाकात करेगा।
इस प्रतिनिधिमंडल में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी एवं सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियंस (सीटू) के राष्ट्रीय, राज्य एवं जिला स्तर के नेता भी शामिल रहेंगे। वार्ता के दौरान श्रमिकों की गिरफ्तारी, पुलिसिया दमन, लंबित मांगों तथा औद्योगिक क्षेत्र के वर्तमान हालात पर विस्तार से चर्चा की जाएगी।
अतः आप सभी मीडिया प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि इस महत्वपूर्ण बैठक/वार्ता को कवर करने हेतु समय पर उपस्थित होकर श्रमिकों से जुड़े इस अहम मुद्दे को जनता तक पहुंचाने का कष्ट करें।
स्थान: जिलाधिकारी कार्यालय, सूरजपुर, ग्रेटर नोएडा
समय: प्रातः 11:00 बजे
दिनांक: 17 अप्रैल 2026

जारीकर्ता:
सीटू जिला कमेटी, गौतम बुद्ध नगर
मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, गौतम बुद्ध नगर

2 months ago | [YT] | 1

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आप बुलेट न्यूज़ इंडिया न्यूज़ चैनल को कहां से देख रहे हैं वीडियो आपको कैसे लगी ताकि हमें भी पता लगे कि हमारी वीडियो देश और विदेश में कहां कहां देखीजा रही
साथी आपके पास कोई और सुझाव हो तो वह भी भेजें जिससे भविष्य में न्यूज़ चैनल को और अत्यधिक सुंदर बनायाजा सकेआप बुलेट न्यूज़ इंडिया न्यूज़ चैनल को कहां से देख रहे हैं वीडियो आपको कैसे लगी ताकि हमें भी पता लगे कि हमारी वीडियो देश और विदेश में कहां कहां देखीजा रही
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8 months ago (edited) | [YT] | 4

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देश में कई किसान संगठन है रोज कही न कही धरना प्रदर्शन करते है
क्या यह सच में किसान है अपने दिल पर हाथ रखकर सच बताएं

8 months ago (edited) | [YT] | 2

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आखिर पत्रकारिता को कब तक कुछ धंधेबाज,पेशेवर,ब्लैकमेलरों, दलालों और वसूली बाजों का विशेष अधिकार बना कर जनता जनार्दन का शोषण करोगे?

खुद को कर्तव्यनिष्ठ पत्रकार कहने और साबित करने के लिए चिखने वाला कब तक टीवी चैनलों और अखबारों के मालिकों के हितों के लिए जनता जनार्दन को धोखा देने को मजबूर होता रहेगा? कब तक जनता जनार्दन को दुधारू गाय की तरह दुहा जायेगा?

👉सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के चलते अब देश का हर नागरिक संपादक और पत्रकार है। प्रत्येक नागरिक खुद को पत्रकारिता के लिए निपुर्ण करें और पेशेवर पत्रकारों से खुद के साथ-साथ अपने समाज और लोकतंत्र को बचाने के लिए काम करें। पत्रकारिता करें लेकिन पेशेवर पत्रकारिता से बचें।

👉एक बात कान और दिमाग़ दोनों खोल कर समझ लें। पेशेवर पत्रकार हमेशा निष्पक्ष, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ नहीं हो सकता। क्योंकि उसके पेशे की कुछ मजबूरियां भी होती हैं। सबसे बड़ी मजबूरी तो उसका व्यवसाय ही है। व्यवसाय मतलब पत्रकारिता का धंधा जिससे उसे पैसा चाहिए। एक पेशेवर पत्रकार की और भी सैकड़ों मजबूरियां होती हैं। जिन्हें वह जनता जनार्दन के सामने खुद को तोप सिंह साबित करने के चलते उजागर नहीं करता। चलो इस पर कभी फिर चर्चा करेंगे। मेरा उद्देश्य पेशेवर पत्रकारों के देश व जनता जनार्दन के लिए योगदान को नकारना भी नही है।

👉हमारा मूल उद्देश्य जनता जनार्दन को पेशेवर पत्रकारों के चंगुल से आजाद करने का है। इसलिए आगे बढ़ते हैं।

👉पहले आम आदमी के सामने एक बड़ी समस्या यह थी कि वह अपनी बात को सर्वजनिक रुप से देश की जनता जनार्दन और जिम्मेदार सरकारी मशीनरी तक कैसे पहुंचाये? उसके लिए आम आदमी के पास सोशल मीडिया प्लेटफार्मों जैसा कोई मंच नहीं था। समाचार पत्रों और पत्रिकाओं के पत्रकारों की चौधराट झेलना एक मजबूरी थी।

👉वर्तमान में जनता जनार्दन की यह मजबूरी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों ने पूरी तरह से खत्म कर दी है। सोशल मीडिया प्लेटफार्मों ने प्रिंट मीडीया से लेकर सैटेलाइट टीवी चैनलों तक को हासिये पर ला दिया है। आप देखेंगे कि बड़े से बड़े अखबारों और सैटेलाइट टीवी चैनलों को भी सोशल मीडिया प्लेटफार्मों का सहारा लेना पड़ रहा हैं। प्रिंट मीडीया (समाचार पत्रों और पत्रिकाओं) से लेकर सैटेलाइट टीवी चैनलों तक सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर अपने मीडीया संस्थान होने को प्रमाणित करने के संघर्ष करते नज़र आते हैं क्योंकि सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर सूचनाएं हमेशा व प्रत्येक स्थान पर दिखाई देती हैं।

👉कुछ अवसरों पर ढोल बजवा कर मुनादी करवाना, नाई के द्वारा किसी प्रोग्राम की निमंत्रण देना भी सूचनाओं के प्रसारण का माध्यम ही तो था और है। अपनी बात को जनता जनार्दन के सामने रखने के लिए पर्चे छपवाकर बाटना भी एक माध्यम था और आज भी है।

👉भारतीयों को संविधान में पत्रकारिता का अधिकार, जिसे प्रेस की स्वतंत्रता भी कह सकते हैं। भारत के संविधान के अनुच्छेद 19(1)(ए) में भाषण और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार के तहत निहित है। जो प्रत्येक भारतीय नागरिक का भी अधिकार है।

👉इसका मतलब यह है कि पत्रकारों और मीडिया को बिना किसी डर के जानकारी लिखने, प्रकाशित करने, प्रसारित करने और प्रसारित करने का अधिकार है।

👉इसका मतलब यह बिलकुल भी नही है कि यह अधिकार केवल पेशेवर पत्रकारों को ही है। ये बात अलग है कि पूर्व में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों जैसा कोई मंच जनता जनार्दन के पास नही था। ऐसे में जनता जनार्दन को पेशेवर पत्रकारों के मुंह की ओर ताकना पड़ता था। वर्तमान समय में सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर आप खुद अपनी व अपने आस-पास की सूचनाओं को लिखकर व वीडियो बना कर दोनों माध्यमों से प्रसारित कर सकते हो।

👉हालांकि, यह अधिकार असीमित नहीं है। इसका प्रयोग कुछ "युक्तियुक्त प्रतिबंधों" के अधीन किया जा सकता है। जो संविधान में उल्लिखित हैं। जैसे कि संप्रभुता, अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था, शालीनता और नैतिकता आदि।

👉मेरा खुद का मानना है कि अपने खुद के मामले में आपसे बड़ा ना तो कोई पत्रकार हो सकता है और ना ही कोई वकील हो सकता है। अत: आपको पत्रकारिता के साथ-साथ यह भी बताना बहुत जरुरी है कि आपको खुद की वकालत करने का अधिकार एक मौलिक अधिकार है, लेकिन आपको यह सुनिश्चित करना होगा कि आप अपने मामले को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत करने में सक्षम हैं। इस पर आगे चर्चा करेंगे।

11 months ago | [YT] | 4

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पत्रकारिता नहीं पिशाचिता — भारतीय मीडिया का आत्महंता संक्रमण



"पत्रकार कलम चलाते हैं, मगर आज कुछ पत्रकार कटार चला रहे हैं। और ये कटार शब्दों की नहीं, समाज के सीने पर चलती है।"

भारतीय पत्रकारिता कभी चौथा स्तंभ हुआ करती थी। आज वही पत्रकारिता विषाक्त एजेंडावादी गिरोहों, कॉरपोरेट प्रायोजकों, और राजनीतिक कठपुतलियों की चौकीदारी में तब्दील हो गई है। लोकतंत्र की प्रहरी मानी जाने वाली मीडिया अब समाज को बांटने वाली, भय फैलाने वाली और जनता की चेतना को अपंग करने वाली फैक्ट्री बन गई है। यह कोई अतिशयोक्ति नहीं — यह आज की कटु सच्चाई है।

1. खबर नहीं, हेट बेचने का उद्योग:

आजकल समाचार चैनलों की हेडलाइंस देखकर लगता है जैसे देश किसी युद्धक्षेत्र में तब्दील हो गया हो। "धर्म बनाम धर्म", "वे बोले अल्लाह हू अकबर", "यह हिन्दू लड़की है", "उसका नाम मोहम्मद निकला!" — ये शब्द पत्रकारिता के नहीं, घृणा के हथियार हैं। जब किसी क्राइम की रिपोर्टिंग में सबसे पहले आरोपी या पीड़ित का धर्म तलाशा जाता है, तब यह स्पष्ट हो जाता है कि पत्रकार नहीं, विचारधारा के एजेंट खबरें लिख रहे हैं।

2. अपराध की रिपोर्टिंग नहीं, एजेंडा की रचाई जाती पटकथा:

जब किसी घटना में आरोपी एक खास धर्म से हो, तो पूरी मीडिया स्क्रिप्ट बनाती है — उसकी तस्वीरें, नाम, सोशल मीडिया पोस्ट, सब कुछ स्क्रीन पर चमकता है। लेकिन जैसे ही आरोपी बहुसंख्यक समाज से हो, तो "युवक", "अज्ञात", या "मनचला" जैसे शब्दों में उसे छुपा दिया जाता है।

यानी पाप वही है, मगर रिपोर्टिंग का लहजा और नैरेटिव बदल जाता है — क्योंकि मक़सद अपराध दिखाना नहीं, समाज को दिशा देना है — नफरत की दिशा में।

3. पेड न्यूज़ से प्रायोजित पिशाचिता तक

प्रेस की आत्मा पहले पेड न्यूज़ में गिरवी रखी गई, फिर टीआरपी की हवस में नीलाम हुई, और अब सांप्रदायिक जहर के इंजेक्शन से मरे हुए समाज को नचाया जा रहा है। पत्रकारिता अब सत्य खोजने का माध्यम नहीं रही, बल्कि "किसे बचाना है", "किसे उछालना है", और "किससे वोट प्रभावित होंगे", इसका खेल बन चुकी है।

4. न्यूज़ रूम नहीं, टूलकिट सेंटर:

आज कई समाचार संस्थान खबर को वस्तुनिष्ठ तरीके से नहीं, बल्कि विशिष्ट तरीके से छापते हैं — किससे किस भावना को ठेस पहुंचेगी, किस धर्म को दोषी ठहराना है, किस नेता की छवि चमकानी है। यहाँ पत्रकार नहीं, न्यूज़ टूलकिट ऑपरेटर हैं। रिपोर्टर की जगह प्रोपेगेंडा इंजीनियर आ बैठे हैं।

5. संपादकीय विवेक का पतन:

भारत में अब ऐसा युग आ गया है जहाँ सम्पादक अखबार के लिए नहीं, पार्टी के लिए सोचता है। न संपादकीय में नैतिक दृष्टि बची है, न विवेक की जगह। अब अगर कोई घटना सत्ताधारी दल के विपरीत जाती है, तो ब्लैकआउट, और अगर विपक्ष पर आरोप हो, तो विस्तृत विश्लेषण।

6. कौन बचाएगा समाज को इस मीडिया से?

जब लोकतंत्र का प्रहरी ही लोकतंत्र को तोड़ने लगे, तब खतरा दुगना हो जाता है। कुछ पत्रकार अब अपराधियों से भी खतरनाक हैं — क्योंकि अपराधी शरीर घायल करते हैं, मगर ये पत्रकार आत्मा को जख्मी करते हैं। ये हमारी सोच को मारते हैं, सहिष्णुता को खत्म करते हैं और भाईचारे को खून में डुबोते हैं।

समाधान: पत्रकारिता को जनता ही शुद्ध करेगी

* मीडिया लिटरेसी को बढ़ावा दें — खबर को न खाएं, उसे जांचें।
* एंटी-हेट रिपोर्टिंग प्लेटफॉर्म्स को सपोर्ट करें।
* ऐसे पत्रकारों का सोशल बॉयकॉट करें जो नफरत बेचते हैं।
* लोकल स्तर पर जन-संपादकीय समितियों का गठन करें जो मीडिया पर नजर रखें।
* और सबसे महत्वपूर्ण — सवाल पूछना न छोड़ें, क्योंकि जब सवाल मरते हैं, तब तानाशाही जन्म लेती है।

और अंत में:

पत्रकार वह है जो सच्चाई की तलाश में सत्ता से भिड़े, न कि जो सत्ता के तलवे चाटे और झूठ को सच कहे। अगर आज पत्रकार ही पिशाच बन जाएं, तो समाज को बचाना केवल जनता के हाथ में बचता है। अब वक्त है — कलम वालों से जवाब मांगने का, और स्याही को खून से नहीं, सच्चाई से भरने का।

"ये कलम के सिपाही नहीं, नफरत के ठेकेदार हैं — जो ख़बर नहीं, ज़हर लिखते हैं।"

1 year ago | [YT] | 2

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निगम की विज्ञापन नीति में सड़क सुरक्षा व दृश्य सौंदर्य पर विशेष ध्यान
-महापौर व नगरायुक्त ने लोकार्पित किया ‘‘आउटडोर विज्ञापन नीति-2025’’ का ड्राफ्ट
सहारनपुर। नगर निगम सहारनपुर ने अपनी ‘‘आउटडोर विज्ञापन नीति-2025’’ जारी की है। विज्ञापन नीति का ड्राफ्ट आज महापौर डॉ.अजय कुमार, नगरायुक्त शिपू गिरि व अपर नगरायुक्त राजेश यादव ने लोकार्पित करते हुए महानगर के विज्ञापनदाताओं, विज्ञापन एजेंसियों, सरकारी व गैर सरकारी संस्थानों-प्रतिष्ठानों, कंपनियों, चिकित्सकों, शिक्षण संस्थानों आदि से 31 मई तक उनके सुझाव आमंत्रित किये है।
निगम विज्ञापन नीति-2025 की जानकारी देते हुए नगरायुक्त शिपू गिरि ने बताया कि महानगर में सड़क सुरक्षा, दृश्य सौंदर्य और पारदर्शी राजस्व सृजन पर विशेष ध्यान देते हुए आउटडोर विज्ञापनों को विनियमित और प्रबंधित करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसमें मुख्य रुप से वाणिज्यिक और औद्यौगिक क्षेत्रों में विज्ञापन की अनुमति रहेगी। जबकि आवासीय क्षेत्रों, विरासत स्थलों, धार्मिक स्थलों के निकट व यातयात संवेदनशील स्थानों पर निगम से अनुमति के बाद ही विज्ञापन किया जाना संभव होगा। निगम की ‘आउटडोर विज्ञापन नीति-2025’ विज्ञापनों को चार श्रेणियों में वर्गीकृत करती है। इनमें बिलबोर्ड, सार्वजनिक उपयोगिता विज्ञापन, परिवहन आधारित विज्ञापन और व्यवसायों द्वारा स्वयं विज्ञापन शामिल है। प्रत्येक श्रेणी के लिए विशिष्ट दिशा निर्देश और अलग-अलग शुल्क संरचनाएं रखी गयी हैं।
विज्ञापन नीति में इस बात पर जोर दिया गया है कि विज्ञापन टैªफिक दृश्यता और पैदल यात्री के चलने में कहीं बाधक न हो और मानदण्डों का पालन किया जाए। नगरायुक्त ने बताया कि नग्नता, ड्रग्स, हिंसा या सामाजिक रुप से अनुचित संदेशों को बढ़ावा देने वाली सामग्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। प्रकाश व्यवस्था के लिए नये ऊर्जा उपकरणों के उपयोग को प्रोत्साहन और प्रदूषण फैलाने वाले जनरेटरों पर प्रतिबंध रहेगा। उन्होंने बताया कि अनधिकृत विज्ञापनों को हटाने के अलावा दंड भी दिया जा सकता है। विज्ञापन नीति में कहा गया है कि सरकारी या नीजि भूमि पर विज्ञापनों से होने वाली आय को नगर निगम के साथ साझा किया जाना चाहिए।
‘‘आउटडोर विज्ञापन नीति-2025’’के ड्राफ्ट पर 31 मई तक सुझाव आमंत्रित किये गए है। सुझाव मो.9258193560 पर या व्यक्तिगत रुप से स्मार्ट सिटी पहुंचकर स्मार्ट सिटी पीआरओ को प्राप्त कराये जा सकते हैं। निगम की यह विज्ञापन नीति सहारनपुर स्मार्ट सिटी की वेबसाइटwww.saharanpursmartcity.com/ व नगर निगम सहारनपुर की वेबसाइटsaharanpurnagarnigam.com/ पर देखी जा सकती है। महापौर डॉ. अजय कुमार ने कहा कि विज्ञापन दाताओं एवं विज्ञापन एजेंसियों व अन्य कंपनियों तथा संस्थानों से जो सुझाव आयेंगे, परीक्षण के बाद उन्हें विज्ञापन नीति में शामिल करने का प्रयास किया जायेगा।
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न्यूज़ रिपोर्ट राजश्री जिला सहारनपुर उत्तर प्रदेश उत्तराखंड

1 year ago | [YT] | 2

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बैंक अपने सीएसआर से संवारे सहारनपुर: नगरायुक्त
-शहर के विकास एवं सौंदर्यीकरण में सीएसआर फण्ड के उपयोग पर नगरायुक्त ने किया मंथन
सहारनपुर। बैंकों एवं बड़ी कम्पनियों के सीएसआर से शहर का सौंदर्यीकरण कर शहर को संवारने के लिए आज नगरायुक्त द्वारा यहां अनेक बैंक व कंपनियों के अधिकारियों के साथ विचार विमर्श किया गया। उन्होंने बैंकों और कंपनियों से आह्वान किया कि वे अपने सीएसआर से शहर को संवारने के लिए आगे आएं।
नगरायुक्त शिपू गिरि ने बैंक व कम्पनियों के प्रतिनिधियों को सम्बोधित करते हुए कहा कि निजी एवं राष्ट्रीयकृत बडे़ बैंक विभिन्न नगर निगमों में सीएसआर से कार्य कर रहे हैं। वाराणसी में एचडीएफसी बैंक द्वारा करीब दस करोड़ रुपये की लागत से कूड़ा निस्तारण प्लांट की स्थापना का उदाहरण देते हुए उन्होंने सहारनपुर के बैंकों से सहयोग की अपील की। उन्होंने जानना चाहा कि नगर निगम क्या नवाचार कर सकता है।
नगरायुक्त ने बैंक से सीएसआर के माध्यम से निगम की कार्यदक्षता बढ़ाने के लिए नगर निगम के विभिन्न विभागों के डिजीटिलाइजेशन एवं शहर के आम नागरिकों को तकनीकी के आधार पर नगर निगम की सुविधाओं से बेहतर संयोजन किये जाने का अनुरोध किया। उन्होंने बैंकों से ये भी अनुरोध किया कि पूरे देश में सीएसआर के माध्यम से नगरीय क्षेत्रों में जो भी श्रेष्ठ व सराहनीय कार्य किये जा रहे है वे उनका अध्ययन करें और सहारनपुर में उसे लागू करें। नगरायुक्त ने कहा सहारनपुर पश्चिमी उत्तर प्रदेश का सबसे महत्वपूर्ण शहर है, उन्होंने बैंको से अनुरोध किया कि केवल वित्तीय पूंजी सृजन में काम करने के स्थान पर सामाजिक पूंजी सृजन में भी सहयोग करें।
नगरायुक्त ने बैंकों एवं कंपनियों के प्रतिनिधियों से कूड़ा प्रबंधन, नगरीय वनीकरण, झील-तालाबों के संरक्षण व मियांवाकि वनीकरण व प्रमुख मार्गाे के सौंदर्यीकरण आदि पर सहयोग की अपील की। कोटक महेंद्रा के प्रतिनिधि ने बताया कि सफाई के वाहनों की लॉग बुक का सॉफ्टवेयर उनके द्वारा प्रदान किया गया है तथा वनीकरण कराया गया है। आईटीसी “मिशन सुनहरा कल” के कार्यक्रम अधिकारी पमिश कुमार द्वारा एक प्रेजेंटेशन के माध्यम से आईटीसी द्वारा सहारनपुर में सामाजिक दायित्वों के अंतर्गत किए जा रहे डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन व ठोस कचरा प्रबंधन, तालाबों के नवीनीकरण, कौशल विकास कार्यक्रम, प्राथमिक विद्यालय एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के नवीनीकरण सहित अनेक सामाजिक एवं विकासात्मक कार्यो की जानकारी दी।
बैठक में कोटक बैंक, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी, आईडीएफसी, इण्डियन बैंक व कोटक महेंद्रा सहित अनेक बैंकों व कंपनियों से आदेश कुमार, शोभित अग्रवाल, मौ.फैजान अब्बास, अनुज कुमार, गौरव शर्मा, सुशील तिवारी, सूर्यकांत, विशाल गुप्ता, रवि अरोड़ा, आशीष आदि के अलावा आईटीसी से रिया गुप्ता, उमंग के मयंक पांडेय, फोर्स के मोहम्मद अर्श व शादाब, स्पेस सोसायटी के मदन भारती आदि शामिल रहे।
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1 year ago | [YT] | 2

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शहर में भ्रमण कर नगरायुक्त ने लिया डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का जायजा
-विभिन्न वार्डो में कूड़ाघरों, नालों और एमआरएफ सेंटरों का किया निरीक्षण
सहारनपुर। नगरायुक्त शिपू गिरि ने आज सुबह शहर में भ्रमण कर अनेक वार्डो के कूड़ाघरों, एमआरएफ सेंटरों का निरीक्षण किया और मौहल्ला समितियों के लोगों से मुलाकात कर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन का जायजा लिया। उन्होंने अनेक स्थानों पर नाला सफाई का भी निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए।
नगरायुक्त शिपू गिरि आज सुबह निगम अधिकारियों के साथ वार्ड नंबर 18 के आईटीसी रोड स्थित साहिब जी नगर पहुंचे और कॉलोनीवासियों से डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की जानकारी लेते हुए कूड़ा संग्रह करने वाले कर्मचारियों द्वारा दी जा रही यूजर चार्ज की रसीदें देखी। कॉलोनी के कुछ लोगों ने नगरायुक्त को बताया कि वे कूडे़ से कम्पोस्ट बनाकर स्वयं ही उसका निस्तारण कर रहे हैं। उन्होंने खाली प्लाट में पानी भरा देखकर प्लाट स्वामी नोटिस भेजने के निर्देश दिए।
नगरायुक्त ने वार्ड 24 में कचहरी पुल के निकट बने कूड़ाघर का निरीक्षण करते हुए क्षेत्रीय सफाई निरीक्षक अमर ज्योति से उनके फील्ड में आने का समय और आने के बाद क्या-क्या काम किया की जानकारी लेने के साथ ही मस्टररोल की जांच की। वार्ड 54 में पुराने घास कांटे के पास स्पेस सोसायटी द्वारा संचालित एमआरएफ सेंटर का भी निरीक्षण किया। उन्होंने सोसायटी के रजिस्टर का निरीक्षण करते हुए कर्मचारियों की संख्या, हर दिन आने वाले कूडे़ की मात्रा, कूड़ा पृथक्करण तथा गीले कूडे़ का क्या करते है आदि की जानकारी ली। संचालक मदन भारती ने बताया कि गीले कूड़े से कम्पोस्ट खाद तैयार की जा रही है। उन्होंने नवादा रोड स्थित वेद विहार कॉलोनी में भी मौहल्ला समिति के सदस्यों से बात कर डोर टू डोर कूड़ा कलेक्शन की जानकारी ली।
इसके अलावा नगरायुक्त ने वार्ड 62 में जेबीएस इण्टर कॉलेज के पास मेन रोड पर नाला सफाई देखी और सड़क से अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने वार्ड 68 में भी नाला सफाई का निरीक्षण किया और रोस्टर बनाकर नालों की सफाई कराने को कहा। उन्होंने वार्ड 9-10 काजीपुरा, फतेहपुर जट में भी नालों का निरीक्षण किया। क्षेत्रीय पार्षद प्रतिनिधि अनिल शर्मा द्वारा पानी निकासी न होने की ओर ध्यान दिलाये जाने पर नगरायुक्त ने अधिकारियों को समस्या का समाधान करने के निर्देश दिए। नगरायुक्त काजीपुरा शौचालय का भी निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान अपर नगरायुक्त मृत्युंजय, नगर स्वास्थय अधिकारी प्रवीन शाह, जेडएसओ राजीव चौधरी, मुख्य सफाई निरीक्षक इंद्रपाल व परमानंद, सफाई निरीक्षक सोमकुमार, राजवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
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Bullet News India

निगम सौ करोड़ की आय के लिए अपने को तैयार करे: नगरायुक्त
-नगर निगम व स्मार्ट सिटी की आय बढ़ाने पर किया अधिकारियों के साथ मंथन
सहारनपुर। नगर निगम वर्ष 2025-26 में अपनी आय सौ करोड़ रुपये करने के लिए अपने को तैयार करें और निगम की आय बढ़ाने के लिए आय के सभी स्त्रोतों की समीक्षा करें कि किन-किन मदों में निगम की आय बढ़ायी जा सकती हैं।
नगरायुक्त शिपू गिरि ने यह निर्देश आज शाम अधिकारियों को एक बैठक में दिए। निगम के प्रमुख अधिकारी व स्मार्ट सिटी के अधिकारी जहां बैठक मंे मौजूद रहे वहीं विभागों के सभी विभागाध्यक्ष ऑन लाइन मीटिंग के माध्यम से शामिल रहे। नगरायुक्त ने कहा कि निगम की जितनी अधिक आय होगी उसी के अनुपात में केंद्र सरकार से सीएम ग्रिड में निगम को विकास योजनाओं के लिए धन मिलेगा। उन्होंने स्मार्ट सिटी को भी आत्म निर्भर बनाने के लिए स्मार्ट सिटी परियोजनाओं के रेवेन्यू मॉडल शीघ्र से शीघ्र तैयार करने पर जोर दिया। नगरायुक्त ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में टैक्स वसूली की समीक्षा हर रोज करने और बडे़ बकायादारों की सूची बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि यदि कोई भवन जीआईएस सर्वे में छूट गए हैं तो उन्हें चिह्नित कर उनसे वसूली की जाए। गत वर्ष जिन लोगों ने टैक्स नहीं दिया है उनकी सूची बनाकर उन्हें एसएमएस करें।
उन्होंने कहा कि मनोरंजन कर अधिकारी से सभी सिनेमाओं की सूची प्राप्त कर सभी पर टैक्स वृद्धि के लिए प्रति सीट के हिसाब से प्रस्ताव बनाए। गुघाल आदि मेलों में विज्ञापन के लिए टैण्डर किये जाएं। इसके अलावा सीएमओ कार्यालय से नर्सिंग होम व हॉस्पिटल, खाद्य विभाग से होटल, रेस्टोरेन्ट व मीट-मछली की दुकानों की सूची, जिला विद्यालय निरीक्षक से स्कूल, कॉलेज, व डिग्री कॉलेजों की सूची तथा सराय एक्ट के तहत संचालित प्रतिष्ठानों एवं बारात घर आदि की सूची लेकर उन पर लगाये गए टैक्स की समीक्षा करने के भी निर्देश दिए। उन्होंने जीएसटी विभाग से डाटा लेने के भी निर्देश दिए।
नगरायुक्त ने स्मार्ट सिटी अधिकारियों के साथ मुख्य परियोजनाओं पर चर्चा करते हुए उनके रेवेन्यू मॉडल विकसित करने पर जोर दिया। बैठक में अपर नगरायुक्त राजेश यादव, मुख्य अभियंता निर्माण बी के सिंह, लेखाधिकारी मनोज त्रिपाठी, स्मार्ट सिटी के कंपनी सचिव शंकर तायल सहित अनेक अधिकारी शामिल रहे।
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फोटो-बैठक को सम्बोधित करते नगरायुक्त शिपू गिरि

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