पृथ्वी दिवस पर बच्चों ने प्लास्टिक कचरा एकत्र करके पृथ्वी को संरक्षित करने का दिया संदेश
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सरोग के बच्चों ने मनाया पृथ्वी दिवस
पोस्टर मेकिंग में निहारिका ने प्रथम रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
शिमला। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में पृथ्वी दिवस बड़े ही प्रभावशाली और उत्साहपूर्ण ढंग से मनाया गया। इस अवसर पर अंजलि ने “Our Power, Our Planet” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को पृथ्वी के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गतिविधियों—कविता पाठ, स्लोगन लेखन और डिक्लेमेशन—का आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। स्कूल परिसर के आसपास से प्लास्टिक एकत्र कर स्वच्छता का संदेश दिया गया तथा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी फैलायी गई। प्रतियोगिताओं के परिणामों में सीनियर सेकेंडरी पोस्टर मेकिंग में निहारिका ने प्रथम, पलक ने द्वितीय और हर्षल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्लोगन प्रतियोगिता में आश्रिया प्रथम, पियूष द्वितीय और पलक तृतीय रहीं। कविता पाठ में यशस्विनी प्रथम और अनु द्वितीय स्थान पर रहीं। सीनियर वर्ग में दिव्या प्रथम, प्रतिज्ञा द्वितीय और आदोत्या तृतीय स्थान पर रहे। जूनियर वर्ग की पोस्टर मेकिंग में अंशुमान प्रथम तथा इशिता द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं स्लोगन लेखन में अर्पिता प्रथम, सृष्टि द्वितीय और आदर्श तृतीय स्थान पर रहे। कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसका संचालन स्वयं विद्यार्थियों—मिताली, पलक, खुशबू, दृष्टि, स्मृति, स्वाति और पियूष—द्वारा अत्यंत कुशलता से किया गया। प्राचार्या सरिका आहूजा ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की। इस प्रकार यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास के विकास का भी माध्यम बना। #followerseveryone#followersreels#RealNewsIndia#RealNewsRealJournalism#school#SchoolCommunity#schoolsafety#schoollife#schoolactivity
सीबीएसई स्कूलों में 30 जून तक होंगे अध्यापक उपलब्धः मुख्यमंत्री शाह नहर का दफ्तर मंडी से फतेहपुर जाएगा वापिस, मुख्यमंत्री ने की घोषणा हिमकेयर योजना में गड़बड़ी पर जाँच के दिए आदेशः सीएम रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा ज़िला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शाह नहर के प्रमुख अभियन्ता प्रोजेक्ट का कार्यालय, जिसे पहले फतेहपुर से मंडी स्थानांतरित किया गया था, अब पुनः फतेहपुर में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के महिला मंडलों को 20-20 हज़ार रुपये की सहायता प्रदान करने तथा वजीर राम सिंह स्टेडियम के जीर्णोद्वार के लिए 50 लाख रुपये देने की भी घोषणा की। कांगड़ा जिला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के जखबड़ में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्थानीय विधायक भवानी सिंह पठानिया ने जनसेवा के उद्देश्य से अढ़ाई करोड़ रुपये की नौकरी छोड़कर राजनीति का मार्ग चुना है। उन्होंने कहा कि पठानिया अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं और उनके विकास के लिए समर्पित हैं, ताकि क्षेत्र के लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को वर्तमान सरकार की तुलना में लगभग 60 हज़ार करोड़ रुपये अधिक प्राप्त हुए थे। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 54 हज़ार करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 16 हज़ार करोड़ रुपये मिले, जबकि वर्तमान सरकार को केवल 17 हज़ार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग एक हज़ार करोड़ रुपये की लागत से भवनों का निर्माण कराया, जो आज भी खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश को प्रति वर्ष 8 से 10 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बेतुकी बयानबाजी कर रही है और पार्टी आंतरिक रूप से पांच गुटों में विभाजित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हिमकेयर योजना में अनियमितताएं हुई, यहां तक कि पुरुषों के भी ओवरी ऑपरेशन दिखाए गए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के धन का दुरुपयोग किया, जबकि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के सभी रास्तों को बंद करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आम जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में शिक्षा का स्तर गिरा और वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 21वें स्थान पर पहुंच गया था। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने व्यवस्था में व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष से पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत की गई है और 151 स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि 30 जून तक इन सभी स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति पूरी कर दी जाएगी, जिसके लिए राज्य स्तर पर चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर मिलेंगे और वे भविष्य में चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे। श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश आज गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने में देश में 5वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि फीस के नाम पर बच्चों में कोई भेदभाव नहीं किया जाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार जन सेवा को ध्यान में रखकर काम करती है, न कि वोटों की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि फतेहपुर आदर्श स्वास्थ्य संस्थान में आठ विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो पहले कभी भी नहीं हुआ। एम्स की तर्ज पर बेहतर मशीनें और मेडिकल कॉलेजों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं घर के नजदीक ही मिल सके। वहीं पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से उगाई गई हल्दी को 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा। इसके अलावा गाय के दूध को 61 रुपये तथा भैंस के दूध को 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के हाथ में सीधे पैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि कांगड़ा ज़िला के ढगवार में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिसके शुरू होने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, राज्य सरकार ने जलाशयों में मछली पालन करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का निर्णय लिया है। मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि में मछुआरा परिवारों को 3,500 रुपये सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, जलाशयों में पकड़ी जाने वाली मछलियों पर रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया है। ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार अनाथ बच्चों की सहायता के साथ-साथ विधवाओं और एकल नारियों के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं को समझते हुए प्रभावित परिवारों को भूमि के पट्टे प्रदान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि गरीब से गरीब व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बीपीएल सर्वे जारी है। छह चरणों में एक लाख से अधिक अति गरीब परिवारों की पहचान की जा चुकी है और सातवां चरण पूर्ण होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि अति गरीब परिवारों के लिए ‘अपना परिवार-सुखी परिवार योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह पेंशन तथा 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी। राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष और विधायक भवानी सिंह पठानिया ने सभी विकासात्मक परियोजनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नया बनने वाला पुल क्षेत्र के विकास में मदद करेगा, क्योंकि पहले रात आठ बजे के बाद निजी वाहनों की आवाजाही डैम के कारण बंद हो जाती है, लेकिन पुल शुरू होने से यहां वैकल्पिक मार्ग होगा और डैम से गुजरने की आवश्यकता नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पुल को प्राथमिकता देते हुए आज इस पुल का काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि पुल बनने के बाद यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा और अगले दो वर्षांे में यहां उद्योग आएंगे। यह पुल पूरे हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी बदल देगा। उन्होंने कहा कि फतेहपुर में बस अड्डे, सिविल जज कोर्ट, आदर्श स्वास्थ्य संस्थान के भवनों सहित अन्य परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जबकि आज ही मिनी सचिवालय का उद्घाटन किया है। इसके अलावा पानी और बिजली में सुधार के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
विकास की दृष्टिकोण से पीछे न रहे चौपाल, मिलजुल कर करेंगे प्रयास - रोहित ठाकुर
शिक्षा मंत्री ने चौपाल में खेल छात्रावास का किया लोकार्पण, छात्रावास के नए भवन और स्कूल के प्राथमिक अनुभाग कार्यालय का किया शिलान्यास रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि चौपाल विकास की दृष्टिकोण से पीछे न रहे इसके लिए मिलजुल कर प्रयास किये जायेंगे।
रोहित ठाकुर ने आज जिला शिमला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र के प्रवास के दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौपाल में 14 लाख रुपए की राशि से निर्मित किए गए अस्थाई खेल छात्रावास का लोकार्पण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 62.41 लाख रुपए की राशि से बनने वाले वॉलीबॉल खेल छात्रावास और 25 लाख रुपए की राशि से स्कूल के प्राथमिक अनुभाग कार्यालय का शिलान्यास भी किया।
रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश नवीन पहल के साथ आगे बढ़ रहा है और विद्यार्थियों को नवीनतम उपकरणों सहित गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार 650 शारीरिक शिक्षकों को पटियाला में पांच दिन के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है ताकि छात्र खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को हासिल कर सकें। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में 69 नेशनल गेम में हिमाचल के छात्रों ने 8 गोल्ड, 11 सिल्वर और 29 ब्रोंज मेडल हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल में तीन नए खेल छात्रावास खोले गए हैं जिनमें चौपाल में वॉलीबॉल छात्र, शिलाई में कबड्डी छात्रा और घुमारवीं में हैंडबॉल छात्रा का हॉस्टल स्वीकृत हुआ है।
शिक्षा मंत्री ने कहा की 151 सी.बी.एस.ई स्कूल खोले जा रहे हैं जिनमे चौपाल विधानसभा क्षेत्र के लिए 4 सी.बी.एस.ई स्कूल शामिल हैं जिसके तहत चौपाल, नेरवा, कुपवी और बलसन में सी.बी.एस.ई आधारित विद्यालय खोले जायेंगे। इन विद्यालयों के लिए 3468 स्टाफ की भर्ती की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश में स्पोर्ट्स कोच के 16 पद भरे जाएंगे ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ खेलों का भी बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त हो।
उन्होंने बताया कि हिमाचल पहला राज्य है जहां 12 खेल छात्रावास है, इनको अपग्रेड करने के लिए 15 करोड़ की राशि व्यय की जाएगी। लगभग 12 वर्षों के बाद वर्तमान प्रदेश सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए 03 राष्ट्र स्तर की खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई, खिलाडियों की डाइट मनी को दोगुना किया गया, 43 मैडल विभिन्न प्रतियोगिताएं में प्राप्त हुए, अवार्ड मनी में भी अप्रत्याशित वृद्धि की गई है जिससे खिलाडियों को बढ़ावा मिल रहा है।
शिक्षा मंत्री ने पुस्तकालय में किताबों के लिए राशि और स्कूल के लिए डेस्क उपलब्ध करवाने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह आश्वासन दिया कि हॉस्टल में कबड्डी खेल शुरू करने और क्षेत्र में इंडोर स्टेडियम व ग्राउंड तथा क्षेत्र की अन्य मांगों को भी पूर्ण करने के प्रयास किये जायेंगे।
इस दौरान शिक्षा मंत्री ने स्थानीय विद्यालय के बच्चों द्वारा लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया और उनके प्रयासों की सराहना की।
118 करोड़ के 05 प्रस्तावों को दी मंज़ूरी रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
जिला में राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड के तहत उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में लगभग 118 करोड़ रूपए के 5 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें रामपुर वार्ड नंबर 1 के कल्याणपुर नाले के चैनेलाइजेशन के लिए 3 करोड़ 21 लाख 34 हजार रुपए की डीपीआर बनाई गई है। इसके अतिरिक्त 9 करोड़ 05 लाख रुपए सुन्नी शिमला मार्ग के सुदृढ़ीकरण, सैंज चौपाल में भूस्खलन प्रभावित सड़क के जीर्णोद्धार के लिए 10 करोड़ 42 लाख रुपए, चौपाल में खागना सड़क में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के लिए 4 करोड़ 90 लाख रुपए और शिमला शहर में 90 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य करवाया जाएगा।
उपायुक्त ने बताया कि सभी प्रस्तावों को राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा । उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। आपदा की वजह से जिन क्षेत्रों में खतरा बना हुआ है, उनके लिए राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड के माध्यम से भविष्य के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए है।
इस बैठक में एडीएम प्रोटोकॉल ज्योति राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड का उद्देश्य प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं के प्रभाव को कम करना और पूर्व तैयारी को मजबूत बनाना है। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, आग और बादल फटने जैसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इस फंड का उपयोग किया जाता है। इस फंड का मुख्य लक्ष्य जोखिम को कम करना और सुरक्षित वातावरण तैयार करना है। इसके अंतर्गत भूस्खलन रोकने के उपाय, नदियों के किनारे तटबंध निर्माण, जल निकासी सुधार और सुरक्षित भवन निर्माण जैसे कार्य किए जाते हैं। इससे आपदा के समय नुकसान कम होता है और लोगों की सुरक्षा बढ़ती है। इसके अलावा, यह फंड जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी खर्च किया जाता है। स्कूलों, पंचायतों और स्थानीय स्तर पर मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं, ताकि लोग आपदा के समय सही निर्णय ले सकें। अर्ली वार्निंग सिस्टम के माध्यम से समय रहते लोगों को सचेत भी किया जाता है।
इस फंड का संचालन जिला प्रशासन द्वारा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के माध्यम से किया जाता है। इस प्रकार, यह फंड आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाकर समाज को सुरक्षित और सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
राजस्व कार्यों में तेज़ी लाने के लिए फील्ड स्टाफ के साथ विशेष रणनीति बनाएं एसडीएम - उपायुक्त रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
जिला राजस्व विभाग की विशेष समीक्षा बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में बचत भवन में शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक में राजस्व से जुड़े मामलों के अतिरिक्त पंचायती राज चुनावों और विभिन्न मुददों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि राजस्व विभाग के कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी अधिकारी फील्ड स्टाफ के साथ विशेष रणनीति बनाएं। उपायुक्त ने हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में एक भी अवैध खनन का चालान एसडीएम ने नहीं काटा है। इसके अलावा ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी एसडीएम औचक निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि अवैध खनन को लेकर शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सभी एसडीएम कार्यवाही मल में लाए। इसके अलावा कई उपमंडलों में ट्रैफिक की समस्या बढ़ती जा रही है। इसलिए सभी एसडीएम अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में पीक ऑवर में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए वैक्लपिक व्यवस्थाओं के प्रस्ताव उपायुक्त कार्यालय को प्रेषित करें। इसके बाद उपायुक्त कार्यालय इस सम्बन्ध में अधिसूचना जारी करेगा।
उन्होंने जिला को टीबी मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान को धरातल पर उतारने के लिए संबंधित अधिकारियों को विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिमला ग्रामीण, ठियोग आदि क्षेत्र में धारा 118 के तहत कई आवदेन आ रहे हैं। ऐसे में यहां के फील्ड स्टाफ से लेकर आला अधिकारी सारे दस्तावेजों की जांच पड़ताल करने के बाद ही आगामी प्रक्रिया को आंरभ करें। ऐसे मामलों में कोई भी कोताही स्वीकार्य नहीं होगी।
उपायुक्त ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। ऐसे में सभी एसडीएम निष्पक्ष, पारदर्शी चुनाव करवाना सुनिश्चित करें। चुनावों के दौरान पेश आने वाली दिक्कतों के निराकरण के लिए पहले से ही योजना बनाकर कार्य करें।
अनुपम कश्यप ने कहा कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदा के प्रभावितों को मिली वित्तीय सहायता का सही ढंग से इस्तेमाल सुनिश्चित करवाने के लिए अधिकारी और फील्ड स्टाफ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि तीन सालों में आपदा के कारण पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए 541 लोगों को विशेष आपदा राहत पैकेज के तहत वित्तीय सहायता दी गई है। कई घरों के निर्माण के लिए पहली किश्त का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है। ऐसे में संबधित अधिकारी और फील्ड स्टाफ तय मानकों के अनुसार वित्तीय सहायता का सही खर्च करवाना सुनिश्चित करें।
राज्य में पहली बार सरकारी पैट स्कैन की सुविधा आरम्भ मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी में किया न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन
सपैक्ट-सीटी स्कैन मशीन के लिए 8 करोड़ रुपये की घोषणा
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला में न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसी के साथ अब राज्य में सरकारी क्षेत्र में पहली बार पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पैट) स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो गई है। पैट स्कैन सुविधा रोगों का प्रारंभिक स्तर पर, मेटाबॉलिक और मॉलिक्यूलर स्तर पर पता लगाने में सक्षम है। पारंपरिक इमेजिंग तकनीकों जैसे सीटी और एमआरआई की तुलना में, जो बाद के चरणों में संरचनात्मक बदलाव दिखाती हैं, पैट तकनीक बहुत पहले ही शारीरिक परिवर्तनों का पता लगा लेती है। यह सुविधा कैंसर के स्टेज निर्धारण और पुनः मूल्यांकन, उपचार के प्रभाव का आकलन, बीमारी की पुनरावृत्ति का पता लगाने और रोग के पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह तकनीक मस्तिष्क ट्यूमर, सिर और गर्दन के कैंसर, थायरॉयड कारसिनोमा, लंग्स कारसिनोमा, प्लूरल मैलिगनेंसिज़, थाइमिक ट्यूमर, इसोफेगोगेसट्रिक कारसिनोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, ब्रेस्ट कारसिनोमा, कोलोरेक्टल कारसिनोमा तथा यूरोलॉजिकल एवं टेस्टिकूलर मैलिगनेंसिज़ के निदान और प्रबंधन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। नई तकनीकों और ट्रेसर के विकास के साथ, ऑन्कोलॉजी में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऑन्कोलॉजी के अलावा, पैट स्कैन का उपयोग अब हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, संक्रमण और सूजन संबंधी रोगों के आकलन में भी किया जा रहा है, विशेषकर उन मामलों में जहां पारंपरिक इमेजिंग से स्पष्ट निष्कर्ष नहीं मिल पाता। मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में इस प्रमुख संस्थान में 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का भी शुभारम्भ किया गया है। आने वाले समय में प्रदेश सरकार राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीकी उन्नयन के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी ताकि लोगों को उनके घर के पास ही सुलभ और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें। उन्होंने आईजीएमसी शिमला में स्पैक्ट-सीटी स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये की भी घोषणा की।
- शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की सुक्खू की कवायद हिमाचल प्रदेश रियल न्यूज़ नेटवर्क
नन्हें कदमों को अब पहाड़ कठिन नहीं लगेंगे। हिमाचल प्रदेश की कठिन भूगौलिक परिस्थितियों व पिछड़े इलाकों के विद्यार्थियों को देश-दुनिया के मुकाबले वाली स्तरीय शिक्षा ले सकेंगे।स्कूलों में बेहतर पढ़ाई के लिए पुराने ढर्रे पर चलने वाली शिक्षा प्रणाली को सुखविंद्र सिंह ने पूरी तरह से बदल दिया है। इस बदलाव का अहसास धरातल पर भले ही तुरंत ना दिखे लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में हिमाचल के बेटियां व बेटे, नौकरियों में कंपीटिशन के हिसाब से प्रशिक्षित किए जाएंगे। यानी प्रदेश में शिक्षा मात्र अक्षर ज्ञान ना होकर, पूरी तरह रोजगार से जोड़ दी गई है।
यह व्यवहारिक परिवर्तन राज्य के गठन के 55 वर्षों के बाद तब लिए गए हैं जब समय के अनुसार, शिक्षा प्रणाली व नौकरियों का स्वरूप बदल गया है। तीन वर्षों की लंबी कसरत व चिंतन मंथन के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गांव-गांव तक स्कूलों का ना सिर्फ युक्तिकरण किया बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के हिसाब से नई पढ़ाई की व्यवस्था बना दी है।
हैरत यह है कि छात्रों को क्वालिटी शिक्षा के मद्देनजर टीचरों को भी परीक्षा के दौर से पहले गुजरना होगा। यानी नए सिलेबस के हिसाब से पढ़ा रहे पक्के सरकारी टीचर भी क्या उस गुणवत्ता में खरे उतरते हैं, जिस स्तर पर बच्चों को पढ़ाया जाना है? हालांकि टीचर इसका विरोध कर रहेे हैं कि वह परीक्षा नहीं देंगे लेकिन टीचरों के युक्तिकरण पर भी कार्य ही सरकार ने शुरू हो चुका है। कुल मिलाकर उन अध्यापकों के लिए चिंता का विषय बना है जिन्होंने पूर्व सरकारों में बैकडोर ऐंट्री ली, शिक्षा का स्तर निम्न किया और कार्य संस्कृति से समझौता भी किया। स्कूल ही नहीं कालेजों को भी अब मर्ज कर दिया है।
दरअसल प्रदेश में अभी तक हो यह रहा था कि कुछ स्कूलों में बच्चों की संख्या ना के बराबर थी और टीचर ज्यादा थे। कहीं पर अब छात्र भर्ती भी नहीं हो रहे थे। उन्होंने प्राइवेट स्कूलों का रूख किया तो सरकारी स्कूलों में संख्या बेहद घट गई। यही हाल कालेजों में भी हुआ। लड़कों के स्कूल अलग थे और लड़कियों के अलग। इस कारण सह शिक्षा ना होने से स्कूलों की गुणवत्ता खतम हो गई। विषयों के शिक्षक कहीं थे, कहीं नहीं थे। यहां तक कि स्कूल बोर्ड के विषयों में प्रतिस्पर्धा में बच्चे टिक नहीं पा रहे थे।
सुक्खू ने पूरा शोध किया। सूत्र बताते हैं कि अफसरशाही इस हक में नहीं थी परंतु मुख्यमंत्री ने पहाड़ों की पीड़ा को समझा और कंपीटिशन के लिए स्कूलों में ही कोचिंग की व्यवस्था की। फिर 3 वर्षों में 1250 स्कूल किए और उसकी जगह पर कम स्कूल बनाए जहां गुणवत्ता पर जोर दिया गया। स्कूलों के मर्जर के साथ ही 21 कालेज मर्ज किए। जो छात्र 2 किलोमीटर दूरी के आते हैं , उनको बस का टिकट सरकार ने दिया। राज्य बोर्ड को कई जगह खतम करके सीबीएसई में बदल दिया।
प्रदेश के कुछ स्कूल चिन्हित किए। जहां के बच्चों को अंग्रेजी मीडियम के साथ डिजिटल पढ़ाना शुरू किया। ऐसे करीब 100 स्कूल हैं जो सीबीएसई से जोड़े गए।
स्कूलों का पाठ्यक्रम डाक्टर, इंजीनियर जैसे अन्य प्रोफेषपनल कोर्स के साथ बदल गया। यानी जब हिमाचल के बच्चे पढ़कर निकलें तो सीधा नौकरी पा सकें। निजी क्षेत्र के लिए जाॅब तैयारी के हिसाब से पढ़ाई का पैर्टन बदल दिया गया है।
टीचरों का बोर्ड के हिसाब से अलग कैडर अलग करने की भी रूपरेखा तैयार की गई। परंतु उन्हें अलग से परीक्षा देनी होगी। यानी शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं। टीचर्स की शिक्षा भी हिमाचल प्रदेश स्कूल बोर्ड ही लेगा।
मुख्य बिंदु:-
- शून्य दाखिले वाले स्कूल -450
- मर्ज किए स्कूल - 1250
- सरकारी कालेज मर्ज 21 (100 )से कम संख्या वाले छात्र
महोबा पान से स्वरोजगार की नई पहचान: भाई-बहन की जोड़ी ने रचा नवाचार का इतिहास रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला :
महोबा देशावरी पान आज सिर्फ स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वरोजगार और नवाचार की मिसाल बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा के मलकपुरा गांव की मयंकिता चौरसिया और उनके भाई चित्रांश चौरसिया ने पान के पारंपरिक उपयोग को आधुनिक उत्पादों में बदलकर एक नई पहचान बनाई है। वर्ष 2023 में स्थापित उनकी कंपनी “अच्युत्यम ऑर्गेनिक एंड हर्बल” के तहत “बीटलाईफ” ब्रांड से पान के पत्तों से चॉकलेट, माउथ फ्रेशनर, गुलकंद, लड्डू, शरबत और डेट्स जैसे अनोखे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि मयंकिता ने पीएचडी की पढ़ाई छोड़कर इस उद्यम को अपनाया और परिवार के सहयोग से इसे सफल बनाया। आज यह पहल 50 से अधिक लोगों को रोजगार दे रही है। महोबा देशावरी पान को वर्ष 2021 में जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मांग दोनों में वृद्धि हुई है। पहले जहां इसकी खेती 25 प्रतिशत तक सीमित थी, अब यह बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है और भविष्य में इसे 80 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है। इस पान की खासियत इसका कुरकुरापन और बिना रेशे का होना है, जो मुंह में जाते ही घुल जाता है। इसका हल्का मीठा स्वाद इसे प्रीमियम श्रेणी में स्थान दिलाता है। इसकी खेती भी बेहद जटिल होती है, जिसमें ‘बरेजा’ नामक संरचना के भीतर नियंत्रित तापमान और आर्द्रता बनाए रखनी पड़ती है। आयुर्वेद के अनुसार, यह पान पाचन में सहायक और औषधीय गुणों से भरपूर होता है। साथ ही भारतीय संस्कृति में इसका विशेष महत्व है। आज मयंकिता और उनकी टीम न केवल देशभर में अपने उत्पाद बेच रही है, बल्कि हिमाचल प्रदेश में आयोजित जीआई महोत्सव जैसे आयोजनों में भाग लेकर महोबा पान को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य कर रही है।
शूलिनी यूनिवर्सिटी में ट्राई आयोजित करेगा 'उपभोक्ता आउटरीच कार्यक्रम'
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) देश भर में उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए नियमित रूप से 'उपभोक्ता आउटरीच कार्यक्रम' (Consumer Outreach Programmes) आयोजित कर रहा है। इसी प्रकार का एक कार्यक्रम 27 मार्च 2026 को सोलन जिला में स्थित शूलिनी यूनिवर्सिटी के परिसर में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दूरसंचार सेवाओं, साइबर सुरक्षा, और उपभोक्ता-हितैषी नियमों के बारे में जागरूकता बढ़ाना। इस कार्यक्रम में साइबर धोखाधड़ी से बचाव, दूरसंचार शिकायत निवारण और नए नियमों की जानकारी दी जा रही है। इसमें दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उपभोक्ता संगठनों (NGOs), और आम जनता के अलावा विश्वविद्यालय के छात्रों और अध्यापकों को भी शामिल किया जाएगा। ये प्रयास दूरसंचार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और उन्हें जागरूक रहने में मदद करने के लिए TRAI की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं। #followerseveryone#followers
गद्दी समुदाय की अनदेखी पर चिंता, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला :
हिमाचल प्रदेश का गद्दी समुदाय, जो सदियों से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहकर पशुपालन और ऊन उत्पादन से अपनी आजीविका चलाता है, एक बार फिर राज्य बजट में उपेक्षित महसूस कर रहा है। जहां सरकार ने दालों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया है, वहीं ऊन, जो गद्दी समुदाय की आय का मुख्य स्रोत है, आज मात्र 30 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रही है। इस पर MSP का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
कठोर मौसम, सीमित संसाधनों और जोखिमपूर्ण जीवन परिस्थितियों के बावजूद यह समुदाय प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके बावजूद बजट में इनके लिए ठोस प्रावधानों का अभाव सवाल खड़े करता है। समुदाय की मांग है कि ऊन पर MSP तय किया जाए, विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए और दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए।
वहीं, अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का स्वागत किया है। मोर्चा के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने वाले SC/ST वर्ग के लोगों को आरक्षण और विशेष सुविधाओं से वंचित करने का यह फैसला सामाजिक न्याय और पारदर्शिता को मजबूत करेगा। मोर्चा ने इसे वास्तविक पात्रों तक लाभ सुनिश्चित करने वाला कदम बताया और न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया। — सुनील नेगी, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा, हिमाचल प्रदेश।
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पृथ्वी दिवस पर बच्चों ने प्लास्टिक कचरा एकत्र करके पृथ्वी को संरक्षित करने का दिया संदेश
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सरोग के बच्चों ने मनाया पृथ्वी दिवस
पोस्टर मेकिंग में निहारिका ने प्रथम
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
शिमला। राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला में पृथ्वी दिवस बड़े ही प्रभावशाली और उत्साहपूर्ण ढंग से मनाया गया। इस अवसर पर अंजलि ने “Our Power, Our Planet” विषय पर अपने विचार प्रस्तुत करते हुए विद्यार्थियों को पृथ्वी के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का बोध कराया।
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न गतिविधियों—कविता पाठ, स्लोगन लेखन और डिक्लेमेशन—का आयोजन किया गया, जिनमें विद्यार्थियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। स्कूल परिसर के आसपास से प्लास्टिक एकत्र कर स्वच्छता का संदेश दिया गया तथा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता भी फैलायी गई।
प्रतियोगिताओं के परिणामों में सीनियर सेकेंडरी पोस्टर मेकिंग में निहारिका ने प्रथम, पलक ने द्वितीय और हर्षल ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। स्लोगन प्रतियोगिता में आश्रिया प्रथम, पियूष द्वितीय और पलक तृतीय रहीं। कविता पाठ में यशस्विनी प्रथम और अनु द्वितीय स्थान पर रहीं। सीनियर वर्ग में दिव्या प्रथम, प्रतिज्ञा द्वितीय और आदोत्या तृतीय स्थान पर रहे। जूनियर वर्ग की पोस्टर मेकिंग में अंशुमान प्रथम तथा इशिता द्वितीय और तृतीय स्थान पर रहीं। वहीं स्लोगन लेखन में अर्पिता प्रथम, सृष्टि द्वितीय और आदर्श तृतीय स्थान पर रहे।
कार्यक्रम की विशेषता यह रही कि इसका संचालन स्वयं विद्यार्थियों—मिताली, पलक, खुशबू, दृष्टि, स्मृति, स्वाति और पियूष—द्वारा अत्यंत कुशलता से किया गया। प्राचार्या सरिका आहूजा ने विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए उनके प्रयासों की सराहना की।
इस प्रकार यह आयोजन न केवल पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने में सफल रहा, बल्कि विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और आत्मविश्वास के विकास का भी माध्यम बना।
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सीबीएसई स्कूलों में 30 जून तक होंगे अध्यापक उपलब्धः मुख्यमंत्री
शाह नहर का दफ्तर मंडी से फतेहपुर जाएगा वापिस, मुख्यमंत्री ने की घोषणा
हिमकेयर योजना में गड़बड़ी पर जाँच के दिए आदेशः सीएम
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कांगड़ा ज़िला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में औद्योगिक क्षेत्र के निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपये देने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि शाह नहर के प्रमुख अभियन्ता प्रोजेक्ट का कार्यालय, जिसे पहले फतेहपुर से मंडी स्थानांतरित किया गया था, अब पुनः फतेहपुर में स्थापित किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के महिला मंडलों को 20-20 हज़ार रुपये की सहायता प्रदान करने तथा वजीर राम सिंह स्टेडियम के जीर्णोद्वार के लिए 50 लाख रुपये देने की भी घोषणा की।
कांगड़ा जिला के फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र के जखबड़ में आयोजित एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए आज मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि स्थानीय विधायक भवानी सिंह पठानिया ने जनसेवा के उद्देश्य से अढ़ाई करोड़ रुपये की नौकरी छोड़कर राजनीति का मार्ग चुना है। उन्होंने कहा कि पठानिया अपने क्षेत्र के लोगों की समस्याओं को भली-भांति समझते हैं और उनके विकास के लिए समर्पित हैं, ताकि क्षेत्र के लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिल सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार को वर्तमान सरकार की तुलना में लगभग 60 हज़ार करोड़ रुपये अधिक प्राप्त हुए थे। उन्होंने बताया कि पूर्व सरकार को राजस्व घाटा अनुदान के रूप में 54 हज़ार करोड़ रुपये तथा जीएसटी प्रतिपूर्ति के रूप में 16 हज़ार करोड़ रुपये मिले, जबकि वर्तमान सरकार को केवल 17 हज़ार करोड़ रुपये ही प्राप्त हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली भाजपा सरकार ने ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से लगभग एक हज़ार करोड़ रुपये की लागत से भवनों का निर्माण कराया, जो आज भी खाली पड़े हैं। उन्होंने कहा कि आरडीजी बंद होने से प्रदेश को प्रति वर्ष 8 से 10 हज़ार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। उन्होंने कहा कि भाजपा केवल सुर्खियों में बने रहने के लिए बेतुकी बयानबाजी कर रही है और पार्टी आंतरिक रूप से पांच गुटों में विभाजित है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पिछली सरकार के कार्यकाल में हिमकेयर योजना में अनियमितताएं हुई, यहां तक कि पुरुषों के भी ओवरी ऑपरेशन दिखाए गए। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली भाजपा सरकार ने जनता के धन का दुरुपयोग किया, जबकि वर्तमान सरकार ने भ्रष्टाचार के सभी रास्तों को बंद करने की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आम जनता की आकांक्षाओं और जरूरतों को ध्यान में रखते हुए नीतियां बनाई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में शिक्षा का स्तर गिरा और वर्ष 2021 में हिमाचल प्रदेश गुणात्मक शिक्षा के मामले में 21वें स्थान पर पहुंच गया था। इसके विपरीत, वर्तमान सरकार ने व्यवस्था में व्यापक सुधार किए हैं। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष से पहली कक्षा से अंग्रेजी माध्यम की शुरुआत की गई है और 151 स्कूलों को सीबीएसई पैटर्न पर लाया गया है। उन्होंने कहा कि 30 जून तक इन सभी स्कूलों में अध्यापकों की नियुक्ति पूरी कर दी जाएगी, जिसके लिए राज्य स्तर पर चयन प्रक्रिया के तहत परीक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राज्य सरकार के इन प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों को बेहतर शिक्षा के अवसर मिलेंगे और वे भविष्य में चुनौतियों के लिए अधिक सक्षम बन सकेंगे। श्री सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार के प्रयासों से हिमाचल प्रदेश आज गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने में देश में 5वें स्थान पर पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि फीस के नाम पर बच्चों में कोई भेदभाव नहीं किया जाए।
उन्होंने कहा कि वर्तमान राज्य सरकार जन सेवा को ध्यान में रखकर काम करती है, न कि वोटों की राजनीति करती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा के साथ-साथ स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बदलाव कर रही है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में आदर्श स्वास्थ्य संस्थान बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि फतेहपुर आदर्श स्वास्थ्य संस्थान में आठ विशेषज्ञ डॉक्टर उपलब्ध हैं, जो पहले कभी भी नहीं हुआ। एम्स की तर्ज पर बेहतर मशीनें और मेडिकल कॉलेजों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों में अत्याधुनिक उपकरण उपलब्ध करवाए जा रहे हैं, ताकि लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं घर के नजदीक ही मिल सके। वहीं पानी की गुणवत्ता सुधारने के लिए राज्य सरकार प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक रूप से उगाई गई हल्दी को 150 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जाएगा। इसके अलावा गाय के दूध को 61 रुपये तथा भैंस के दूध को 71 रुपये प्रति लीटर की दर से खरीदा जा रहा है, ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के हाथ में सीधे पैसे पहुंचे। उन्होंने कहा कि कांगड़ा ज़िला के ढगवार में लगभग 200 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक मिल्क प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किया जा रहा है, जिसके शुरू होने से किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। साथ ही, राज्य सरकार ने जलाशयों में मछली पालन करने वाले किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य देने का निर्णय लिया है। मानसून के दौरान मछली पकड़ने पर प्रतिबंध की अवधि में मछुआरा परिवारों को 3,500 रुपये सम्मान राशि प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, जलाशयों में पकड़ी जाने वाली मछलियों पर रॉयल्टी दर को 15 प्रतिशत से घटाकर 1 प्रतिशत कर दिया गया है।
ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार अनाथ बच्चों की सहायता के साथ-साथ विधवाओं और एकल नारियों के कल्याण के लिए भी प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के अधिकारों की रक्षा के लिए सरकार निरंतर प्रयास कर रही है। पौंग बांध विस्थापितों की समस्याओं को समझते हुए प्रभावित परिवारों को भूमि के पट्टे प्रदान किए गए हैं। उन्होंने बताया कि गरीब से गरीब व्यक्ति तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बीपीएल सर्वे जारी है। छह चरणों में एक लाख से अधिक अति गरीब परिवारों की पहचान की जा चुकी है और सातवां चरण पूर्ण होने की कगार पर है। उन्होंने कहा कि अति गरीब परिवारों के लिए ‘अपना परिवार-सुखी परिवार योजना’ शुरू की गई है, जिसके तहत पात्र महिलाओं को 1,500 रुपये प्रति माह पेंशन तथा 300 यूनिट तक मुफ्त बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।
राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष और विधायक भवानी सिंह पठानिया ने सभी विकासात्मक परियोजनाओं के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि नया बनने वाला पुल क्षेत्र के विकास में मदद करेगा, क्योंकि पहले रात आठ बजे के बाद निजी वाहनों की आवाजाही डैम के कारण बंद हो जाती है, लेकिन पुल शुरू होने से यहां वैकल्पिक मार्ग होगा और डैम से गुजरने की आवश्यकता नहीं रहेगी। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री ने इस पुल को प्राथमिकता देते हुए आज इस पुल का काम शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि पुल बनने के बाद यहां औद्योगिक क्षेत्र विकसित किया जाएगा और अगले दो वर्षांे में यहां उद्योग आएंगे। यह पुल पूरे हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी बदल देगा। उन्होंने कहा कि फतेहपुर में बस अड्डे, सिविल जज कोर्ट, आदर्श स्वास्थ्य संस्थान के भवनों सहित अन्य परियोजनाओं का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। जबकि आज ही मिनी सचिवालय का उद्घाटन किया है। इसके अलावा पानी और बिजली में सुधार के लिए कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है।
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विकास की दृष्टिकोण से पीछे न रहे चौपाल, मिलजुल कर करेंगे प्रयास - रोहित ठाकुर
शिक्षा मंत्री ने चौपाल में खेल छात्रावास का किया लोकार्पण, छात्रावास के नए भवन और स्कूल के प्राथमिक अनुभाग कार्यालय का किया शिलान्यास
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि चौपाल विकास की दृष्टिकोण से पीछे न रहे इसके लिए मिलजुल कर प्रयास किये जायेंगे।
रोहित ठाकुर ने आज जिला शिमला के चौपाल विधानसभा क्षेत्र के प्रवास के दौरान राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला चौपाल में 14 लाख रुपए की राशि से निर्मित किए गए अस्थाई खेल छात्रावास का लोकार्पण किया। इसके अतिरिक्त उन्होंने 62.41 लाख रुपए की राशि से बनने वाले वॉलीबॉल खेल छात्रावास और 25 लाख रुपए की राशि से स्कूल के प्राथमिक अनुभाग कार्यालय का शिलान्यास भी किया।
रोहित ठाकुर ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हिमाचल प्रदेश नवीन पहल के साथ आगे बढ़ रहा है और विद्यार्थियों को नवीनतम उपकरणों सहित गुणवत्ता युक्त शिक्षा उपलब्ध करवाई जा रही है। उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहली बार 650 शारीरिक शिक्षकों को पटियाला में पांच दिन के प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है ताकि छात्र खेल के क्षेत्र में नई ऊंचाइयों को हासिल कर सकें। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में 69 नेशनल गेम में हिमाचल के छात्रों ने 8 गोल्ड, 11 सिल्वर और 29 ब्रोंज मेडल हासिल किए हैं। उन्होंने बताया कि हिमाचल में तीन नए खेल छात्रावास खोले गए हैं जिनमें चौपाल में वॉलीबॉल छात्र, शिलाई में कबड्डी छात्रा और घुमारवीं में हैंडबॉल छात्रा का हॉस्टल स्वीकृत हुआ है।
शिक्षा मंत्री ने कहा की 151 सी.बी.एस.ई स्कूल खोले जा रहे हैं जिनमे चौपाल विधानसभा क्षेत्र के लिए 4 सी.बी.एस.ई स्कूल शामिल हैं जिसके तहत चौपाल, नेरवा, कुपवी और बलसन में सी.बी.एस.ई आधारित विद्यालय खोले जायेंगे। इन विद्यालयों के लिए 3468 स्टाफ की भर्ती की जाएगी। इसके अलावा प्रदेश में स्पोर्ट्स कोच के 16 पद भरे जाएंगे ताकि छात्रों को पढ़ाई के साथ खेलों का भी बेहतर प्रशिक्षण प्राप्त हो।
उन्होंने बताया कि हिमाचल पहला राज्य है जहां 12 खेल छात्रावास है, इनको अपग्रेड करने के लिए 15 करोड़ की राशि व्यय की जाएगी। लगभग 12 वर्षों के बाद वर्तमान प्रदेश सरकार ने खेलों को बढ़ावा देने के लिए 03 राष्ट्र स्तर की खेल प्रतियोगिताएं आयोजित करवाई, खिलाडियों की डाइट मनी को दोगुना किया गया, 43 मैडल विभिन्न प्रतियोगिताएं में प्राप्त हुए, अवार्ड मनी में भी अप्रत्याशित वृद्धि की गई है जिससे खिलाडियों को बढ़ावा मिल रहा है।
शिक्षा मंत्री ने पुस्तकालय में किताबों के लिए राशि और स्कूल के लिए डेस्क उपलब्ध करवाने की घोषणा की। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यह आश्वासन दिया कि हॉस्टल में कबड्डी खेल शुरू करने और क्षेत्र में इंडोर स्टेडियम व ग्राउंड तथा क्षेत्र की अन्य मांगों को भी पूर्ण करने के प्रयास किये जायेंगे।
इस दौरान शिक्षा मंत्री ने स्थानीय विद्यालय के बच्चों द्वारा लगाई गई विज्ञान प्रदर्शनी का भी निरीक्षण किया और उनके प्रयासों की सराहना की।
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118 करोड़ के 05 प्रस्तावों को दी मंज़ूरी
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
जिला में राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड के तहत उपायुक्त शिमला अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में विशेष बैठक आयोजित की गई। बैठक में लगभग 118 करोड़ रूपए के 5 प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इसमें रामपुर वार्ड नंबर 1 के कल्याणपुर नाले के चैनेलाइजेशन के लिए 3 करोड़ 21 लाख 34 हजार रुपए की डीपीआर बनाई गई है। इसके अतिरिक्त 9 करोड़ 05 लाख रुपए सुन्नी शिमला मार्ग के सुदृढ़ीकरण, सैंज चौपाल में भूस्खलन प्रभावित सड़क के जीर्णोद्धार के लिए 10 करोड़ 42 लाख रुपए, चौपाल में खागना सड़क में भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र के लिए 4 करोड़ 90 लाख रुपए और शिमला शहर में 90 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कार्य करवाया जाएगा।
उपायुक्त ने बताया कि सभी प्रस्तावों को राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा । उन्होंने कहा कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए प्रशासन निरंतर प्रयासरत है। आपदा की वजह से जिन क्षेत्रों में खतरा बना हुआ है, उनके लिए राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड के माध्यम से भविष्य के लिए प्रस्ताव तैयार किए गए है।
इस बैठक में एडीएम प्रोटोकॉल ज्योति राणा सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
राज्य आपदा न्यूनीकरण फंड का उद्देश्य प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं के प्रभाव को कम करना और पूर्व तैयारी को मजबूत बनाना है। बाढ़, भूकंप, भूस्खलन, आग और बादल फटने जैसी आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने के लिए इस फंड का उपयोग किया जाता है। इस फंड का मुख्य लक्ष्य जोखिम को कम करना और सुरक्षित वातावरण तैयार करना है। इसके अंतर्गत भूस्खलन रोकने के उपाय, नदियों के किनारे तटबंध निर्माण, जल निकासी सुधार और सुरक्षित भवन निर्माण जैसे कार्य किए जाते हैं। इससे आपदा के समय नुकसान कम होता है और लोगों की सुरक्षा बढ़ती है। इसके अलावा, यह फंड जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर भी खर्च किया जाता है। स्कूलों, पंचायतों और स्थानीय स्तर पर मॉक ड्रिल और प्रशिक्षण आयोजित किए जाते हैं, ताकि लोग आपदा के समय सही निर्णय ले सकें। अर्ली वार्निंग सिस्टम के माध्यम से समय रहते लोगों को सचेत भी किया जाता है।
इस फंड का संचालन जिला प्रशासन द्वारा, जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) के माध्यम से किया जाता है। इस प्रकार, यह फंड आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाकर समाज को सुरक्षित और सक्षम बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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राजस्व कार्यों में तेज़ी लाने के लिए फील्ड स्टाफ के साथ विशेष रणनीति बनाएं एसडीएम - उपायुक्त
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
जिला राजस्व विभाग की विशेष समीक्षा बैठक उपायुक्त अनुपम कश्यप की अध्यक्षता में बचत भवन में शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक में राजस्व से जुड़े मामलों के अतिरिक्त पंचायती राज चुनावों और विभिन्न मुददों को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।
बैठक के दौरान उपायुक्त अनुपम कश्यप ने कहा कि राजस्व विभाग के कार्यों में तेजी लाने के लिए सभी अधिकारी फील्ड स्टाफ के साथ विशेष रणनीति बनाएं। उपायुक्त ने हैरानी जताते हुए कहा कि पिछले तीन महीनों में एक भी अवैध खनन का चालान एसडीएम ने नहीं काटा है। इसके अलावा ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर भी एसडीएम औचक निरीक्षण नहीं कर रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिए कि अवैध खनन को लेकर शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए सभी एसडीएम कार्यवाही मल में लाए। इसके अलावा कई उपमंडलों में ट्रैफिक की समस्या बढ़ती जा रही है। इसलिए सभी एसडीएम अपने-अपने अधिकार क्षेत्र में पीक ऑवर में ट्रैफिक व्यवस्था को सुचारू बनाए रखने के लिए वैक्लपिक व्यवस्थाओं के प्रस्ताव उपायुक्त कार्यालय को प्रेषित करें। इसके बाद उपायुक्त कार्यालय इस सम्बन्ध में अधिसूचना जारी करेगा।
उन्होंने जिला को टीबी मुक्त बनाने के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान को धरातल पर उतारने के लिए संबंधित अधिकारियों को विशेष रणनीति बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि शिमला ग्रामीण, ठियोग आदि क्षेत्र में धारा 118 के तहत कई आवदेन आ रहे हैं। ऐसे में यहां के फील्ड स्टाफ से लेकर आला अधिकारी सारे दस्तावेजों की जांच पड़ताल करने के बाद ही आगामी प्रक्रिया को आंरभ करें। ऐसे मामलों में कोई भी कोताही स्वीकार्य नहीं होगी।
उपायुक्त ने कहा कि पंचायती राज संस्थाओं की चुनावी प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। ऐसे में सभी एसडीएम निष्पक्ष, पारदर्शी चुनाव करवाना सुनिश्चित करें। चुनावों के दौरान पेश आने वाली दिक्कतों के निराकरण के लिए पहले से ही योजना बनाकर कार्य करें।
अनुपम कश्यप ने कहा कि वर्ष 2023, 2024 और 2025 में आई प्राकृतिक आपदा के प्रभावितों को मिली वित्तीय सहायता का सही ढंग से इस्तेमाल सुनिश्चित करवाने के लिए अधिकारी और फील्ड स्टाफ अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करें। उन्होंने कहा कि तीन सालों में आपदा के कारण पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त घरों के लिए 541 लोगों को विशेष आपदा राहत पैकेज के तहत वित्तीय सहायता दी गई है। कई घरों के निर्माण के लिए पहली किश्त का सही इस्तेमाल नहीं हो पाया है। ऐसे में संबधित अधिकारी और फील्ड स्टाफ तय मानकों के अनुसार वित्तीय सहायता का सही खर्च करवाना सुनिश्चित करें।
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राज्य में पहली बार सरकारी पैट स्कैन की सुविधा आरम्भ
मुख्यमंत्री ने आईजीएमसी में किया न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन
सपैक्ट-सीटी स्कैन मशीन के लिए 8 करोड़ रुपये की घोषणा
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला
मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने आज इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज, शिमला में न्यूक्लियर मेडिसिन ब्लॉक का उद्घाटन किया। इसी के साथ अब राज्य में सरकारी क्षेत्र में पहली बार पॉज़िट्रॉन एमिशन टोमोग्राफी (पैट) स्कैन की सुविधा उपलब्ध हो गई है।
पैट स्कैन सुविधा रोगों का प्रारंभिक स्तर पर, मेटाबॉलिक और मॉलिक्यूलर स्तर पर पता लगाने में सक्षम है। पारंपरिक इमेजिंग तकनीकों जैसे सीटी और एमआरआई की तुलना में, जो बाद के चरणों में संरचनात्मक बदलाव दिखाती हैं, पैट तकनीक बहुत पहले ही शारीरिक परिवर्तनों का पता लगा लेती है। यह सुविधा कैंसर के स्टेज निर्धारण और पुनः मूल्यांकन, उपचार के प्रभाव का आकलन, बीमारी की पुनरावृत्ति का पता लगाने और रोग के पूर्वानुमान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
यह तकनीक मस्तिष्क ट्यूमर, सिर और गर्दन के कैंसर, थायरॉयड कारसिनोमा, लंग्स कारसिनोमा, प्लूरल मैलिगनेंसिज़, थाइमिक ट्यूमर, इसोफेगोगेसट्रिक कारसिनोमा, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्ट्रोमल ट्यूमर, ब्रेस्ट कारसिनोमा, कोलोरेक्टल कारसिनोमा तथा यूरोलॉजिकल एवं टेस्टिकूलर मैलिगनेंसिज़ के निदान और प्रबंधन में व्यापक रूप से उपयोग की जाती है। नई तकनीकों और ट्रेसर के विकास के साथ, ऑन्कोलॉजी में इसकी भूमिका लगातार बढ़ रही है।
ऑन्कोलॉजी के अलावा, पैट स्कैन का उपयोग अब हृदय रोग, न्यूरोलॉजी, संक्रमण और सूजन संबंधी रोगों के आकलन में भी किया जा रहा है, विशेषकर उन मामलों में जहां पारंपरिक इमेजिंग से स्पष्ट निष्कर्ष नहीं मिल पाता।
मुख्यमंत्री ने कहा राज्य सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र में अत्याधुनिक तकनीकों का समावेश करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि हाल ही में इस प्रमुख संस्थान में 3 टेस्ला एमआरआई मशीन का भी शुभारम्भ किया गया है। आने वाले समय में प्रदेश सरकार राज्य के सभी चिकित्सा महाविद्यालयों और स्वास्थ्य संस्थानों में तकनीकी उन्नयन के लिए 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश करेगी ताकि लोगों को उनके घर के पास ही सुलभ और विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाई जा सकें।
उन्होंने आईजीएमसी शिमला में स्पैक्ट-सीटी स्कैन मशीन स्थापित करने के लिए 8 करोड़ रुपये की भी घोषणा की।
1 month ago | [YT] | 2
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नन्हें कदम आसानी से चढ़ेंगे हिमाचल के पहाड़
- शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की सुक्खू की कवायद
हिमाचल प्रदेश
रियल न्यूज़ नेटवर्क
नन्हें कदमों को अब पहाड़ कठिन नहीं लगेंगे। हिमाचल प्रदेश की कठिन भूगौलिक परिस्थितियों व पिछड़े इलाकों के विद्यार्थियों को देश-दुनिया के मुकाबले वाली स्तरीय शिक्षा ले सकेंगे।स्कूलों में बेहतर पढ़ाई के लिए पुराने ढर्रे पर चलने वाली शिक्षा प्रणाली को सुखविंद्र सिंह ने पूरी तरह से बदल दिया है। इस बदलाव का अहसास धरातल पर भले ही तुरंत ना दिखे लेकिन आने वाले कुछ वर्षों में हिमाचल के बेटियां व बेटे, नौकरियों में कंपीटिशन के हिसाब से प्रशिक्षित किए जाएंगे। यानी प्रदेश में शिक्षा मात्र अक्षर ज्ञान ना होकर, पूरी तरह रोजगार से जोड़ दी गई है।
यह व्यवहारिक परिवर्तन राज्य के गठन के 55 वर्षों के बाद तब लिए गए हैं जब समय के अनुसार, शिक्षा प्रणाली व नौकरियों का स्वरूप बदल गया है। तीन वर्षों की लंबी कसरत व चिंतन मंथन के बाद मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने गांव-गांव तक स्कूलों का ना सिर्फ युक्तिकरण किया बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं के हिसाब से नई पढ़ाई की व्यवस्था बना दी है।
हैरत यह है कि छात्रों को क्वालिटी शिक्षा के मद्देनजर टीचरों को भी परीक्षा के दौर से पहले गुजरना होगा। यानी नए सिलेबस के हिसाब से पढ़ा रहे पक्के सरकारी टीचर भी क्या उस गुणवत्ता में खरे उतरते हैं, जिस स्तर पर बच्चों को पढ़ाया जाना है? हालांकि टीचर इसका विरोध कर रहेे हैं कि वह परीक्षा नहीं देंगे लेकिन टीचरों के युक्तिकरण पर भी कार्य ही सरकार ने शुरू हो चुका है। कुल मिलाकर उन अध्यापकों के लिए चिंता का विषय बना है जिन्होंने पूर्व सरकारों में बैकडोर ऐंट्री ली, शिक्षा का स्तर निम्न किया और कार्य संस्कृति से समझौता भी किया। स्कूल ही नहीं कालेजों को भी अब मर्ज कर दिया है।
दरअसल प्रदेश में अभी तक हो यह रहा था कि कुछ स्कूलों में बच्चों की संख्या ना के बराबर थी और टीचर ज्यादा थे। कहीं पर अब छात्र भर्ती भी नहीं हो रहे थे। उन्होंने प्राइवेट स्कूलों का रूख किया तो सरकारी स्कूलों में संख्या बेहद घट गई। यही हाल कालेजों में भी हुआ। लड़कों के स्कूल अलग थे और लड़कियों के अलग। इस कारण सह शिक्षा ना होने से स्कूलों की गुणवत्ता खतम हो गई। विषयों के शिक्षक कहीं थे, कहीं नहीं थे। यहां तक कि स्कूल बोर्ड के विषयों में प्रतिस्पर्धा में बच्चे टिक नहीं पा रहे थे।
सुक्खू ने पूरा शोध किया। सूत्र बताते हैं कि अफसरशाही इस हक में नहीं थी परंतु मुख्यमंत्री ने पहाड़ों की पीड़ा को समझा और कंपीटिशन के लिए स्कूलों में ही कोचिंग की व्यवस्था की। फिर 3 वर्षों में 1250 स्कूल किए और उसकी जगह पर कम स्कूल बनाए जहां गुणवत्ता पर जोर दिया गया। स्कूलों के मर्जर के साथ ही 21 कालेज मर्ज किए। जो छात्र 2 किलोमीटर दूरी के आते हैं , उनको बस का टिकट सरकार ने दिया। राज्य बोर्ड को कई जगह खतम करके सीबीएसई में बदल दिया।
प्रदेश के कुछ स्कूल चिन्हित किए। जहां के बच्चों को अंग्रेजी मीडियम के साथ डिजिटल पढ़ाना शुरू किया। ऐसे करीब 100 स्कूल हैं जो सीबीएसई से जोड़े गए।
स्कूलों का पाठ्यक्रम डाक्टर, इंजीनियर जैसे अन्य प्रोफेषपनल कोर्स के साथ बदल गया। यानी जब हिमाचल के बच्चे पढ़कर निकलें तो सीधा नौकरी पा सकें। निजी क्षेत्र के लिए जाॅब तैयारी के हिसाब से पढ़ाई का पैर्टन बदल दिया गया है।
टीचरों का बोर्ड के हिसाब से अलग कैडर अलग करने की भी रूपरेखा तैयार की गई। परंतु उन्हें अलग से परीक्षा देनी होगी। यानी शिक्षा की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं। टीचर्स की शिक्षा भी हिमाचल प्रदेश स्कूल बोर्ड ही लेगा।
मुख्य बिंदु:-
- शून्य दाखिले वाले स्कूल -450
- मर्ज किए स्कूल - 1250
- सरकारी कालेज मर्ज 21 (100 )से कम संख्या वाले छात्र
- सह-शिक्षा मिलेगी
-बंद किए बच्चों को बस का टिकट फ्री
- प्रतियोगी परीक्षा के दृष्टीगत सिलेबस तैयार
- बच्चों से पहले टीचरों की परीक्षा
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महोबा पान से स्वरोजगार की नई पहचान: भाई-बहन की जोड़ी ने रचा नवाचार का इतिहास
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला :
महोबा देशावरी पान आज सिर्फ स्वाद का प्रतीक नहीं, बल्कि स्वरोजगार और नवाचार की मिसाल बनता जा रहा है। उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र के महोबा के मलकपुरा गांव की मयंकिता चौरसिया और उनके भाई चित्रांश चौरसिया ने पान के पारंपरिक उपयोग को आधुनिक उत्पादों में बदलकर एक नई पहचान बनाई है।
वर्ष 2023 में स्थापित उनकी कंपनी “अच्युत्यम ऑर्गेनिक एंड हर्बल” के तहत “बीटलाईफ” ब्रांड से पान के पत्तों से चॉकलेट, माउथ फ्रेशनर, गुलकंद, लड्डू, शरबत और डेट्स जैसे अनोखे उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि मयंकिता ने पीएचडी की पढ़ाई छोड़कर इस उद्यम को अपनाया और परिवार के सहयोग से इसे सफल बनाया। आज यह पहल 50 से अधिक लोगों को रोजगार दे रही है।
महोबा देशावरी पान को वर्ष 2021 में जीआई टैग मिलने के बाद इसकी पहचान और मांग दोनों में वृद्धि हुई है। पहले जहां इसकी खेती 25 प्रतिशत तक सीमित थी, अब यह बढ़कर 35 प्रतिशत हो गई है और भविष्य में इसे 80 प्रतिशत तक ले जाने का लक्ष्य रखा गया है।
इस पान की खासियत इसका कुरकुरापन और बिना रेशे का होना है, जो मुंह में जाते ही घुल जाता है। इसका हल्का मीठा स्वाद इसे प्रीमियम श्रेणी में स्थान दिलाता है। इसकी खेती भी बेहद जटिल होती है, जिसमें ‘बरेजा’ नामक संरचना के भीतर नियंत्रित तापमान और आर्द्रता बनाए रखनी पड़ती है।
आयुर्वेद के अनुसार, यह पान पाचन में सहायक और औषधीय गुणों से भरपूर होता है। साथ ही भारतीय संस्कृति में इसका विशेष महत्व है।
आज मयंकिता और उनकी टीम न केवल देशभर में अपने उत्पाद बेच रही है, बल्कि हिमाचल प्रदेश में आयोजित जीआई महोत्सव जैसे आयोजनों में भाग लेकर महोबा पान को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में भी कार्य कर रही है।
2 months ago | [YT] | 1
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शूलिनी यूनिवर्सिटी में ट्राई आयोजित करेगा 'उपभोक्ता आउटरीच कार्यक्रम'
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला।
भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) देश भर में उपभोक्ताओं को सशक्त बनाने के लिए नियमित रूप से 'उपभोक्ता आउटरीच कार्यक्रम' (Consumer Outreach Programmes) आयोजित कर रहा है। इसी प्रकार का एक कार्यक्रम 27 मार्च 2026 को सोलन जिला में स्थित शूलिनी यूनिवर्सिटी के परिसर में आयोजित किया जा रहा है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य दूरसंचार सेवाओं, साइबर सुरक्षा, और उपभोक्ता-हितैषी नियमों के बारे में जागरूकता बढ़ाना। इस कार्यक्रम में साइबर धोखाधड़ी से बचाव, दूरसंचार शिकायत निवारण और नए नियमों की जानकारी दी जा रही है। इसमें दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उपभोक्ता संगठनों (NGOs), और आम जनता के अलावा विश्वविद्यालय के छात्रों और अध्यापकों को भी शामिल किया जाएगा। ये प्रयास दूरसंचार उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने और उन्हें जागरूक रहने में मदद करने के लिए TRAI की निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा हैं।
#followerseveryone #followers
2 months ago | [YT] | 1
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गद्दी समुदाय की अनदेखी पर चिंता, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्वागत
रियल न्यूज इंडिया टुडे, शिमला :
हिमाचल प्रदेश का गद्दी समुदाय, जो सदियों से दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में रहकर पशुपालन और ऊन उत्पादन से अपनी आजीविका चलाता है, एक बार फिर राज्य बजट में उपेक्षित महसूस कर रहा है। जहां सरकार ने दालों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित किया है, वहीं ऊन, जो गद्दी समुदाय की आय का मुख्य स्रोत है, आज मात्र 30 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रही है। इस पर MSP का अभाव गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है।
कठोर मौसम, सीमित संसाधनों और जोखिमपूर्ण जीवन परिस्थितियों के बावजूद यह समुदाय प्रदेश की अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक विरासत में महत्वपूर्ण योगदान देता है। इसके बावजूद बजट में इनके लिए ठोस प्रावधानों का अभाव सवाल खड़े करता है। समुदाय की मांग है कि ऊन पर MSP तय किया जाए, विशेष आर्थिक पैकेज दिया जाए और दुर्गम क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाए।
वहीं, अनुसूचित जनजाति मोर्चा ने सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय का स्वागत किया है। मोर्चा के अनुसार, धर्म परिवर्तन करने वाले SC/ST वर्ग के लोगों को आरक्षण और विशेष सुविधाओं से वंचित करने का यह फैसला सामाजिक न्याय और पारदर्शिता को मजबूत करेगा। मोर्चा ने इसे वास्तविक पात्रों तक लाभ सुनिश्चित करने वाला कदम बताया और न्यायपालिका का आभार व्यक्त किया।
— सुनील नेगी, प्रदेश अध्यक्ष, भाजपा अनुसूचित जनजाति मोर्चा, हिमाचल प्रदेश।
2 months ago | [YT] | 1
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