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दोस्तो ऐसा कम ही होता है कि थियेटर में किसी फिल्म के क्लोजिंग क्रेडिट्स चल रहे हों और दर्शक हिलने को तैयार नहीं. दर्शकों को बांधे रखने की इस कुव्वत के दम पर आदित्य धर की फिल्म धुरंधर टू रोज बॉक्स ऑफिस पर नए नए कीर्तिमान बना रही है. इसने 20वें दिन 1600 करोड़ का आंकड़ा भी पीछे छोड़ दिया और देश के भीतर 1000 करोड़ कमाई करने वाली पहली फिल्म होने का दावा भी कर रही है.
वो भी उस दौर में जब यंग ऑडियंस थियेटर में जाने के बजाय अब फिल्मों के ओटीटी पर आने का इंतेजार करती है, धुरंधर की इस भीड़ में बड़ी संख्या में सीनियर सीटिजेन्स हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा का वो दौर भी देखा है, जब फिल्मों के टिकट ब्लैक में बिकते थे. टिकट खिड़की पर लाइन राशन और गैस सिलिंडर की कतारों से बड़ी हुआ करती थीं.
ऐसे में यही सीनियर ऑडियंस जब फ्लैशबैक में जाती है तो कई धुरंधर फिल्में नजर आती हैं जिन्होंने लंबी अवधि में खूब हाइप और पैसे कूटे थे.
और ये जेनरेशन तमाम आंकड़ों के बावजूद ये मानने को तैयार नहीं कि धुरंधर वाकई ऑल टाइम ग्रासर फिल्म हो सकती है. तो फिर कौन सी है वो फिल्म जिसे अब तक की सबसे कमाऊ और कौन सा है वो एक्टर जिसे बॉक्स ऑफिस का सबसे बड़ा धुरंधर कहा जा सके.
देखें ये खास वीडियो हमारे चैनल EcoPol Filmy पर.
2 months ago | [YT] | 14
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सभी मित्रों को होली की हार्दिक शुभ कामनाएं. Happy Holi. Wish you all the best.
3 months ago | [YT] | 36
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दोस्तो आपसे शेयर करते हुए मुझे अत्यंत खुशी हो रही है कि आपके इस चैनल ने आप लोगों के सहयोग और समर्थन के दम पर एक अहम पड़ाव हासिल किया है. मेरे लिए यह किसी मील के पत्थर से कम नहीं. आपके चैनल EcoPol Filmy पर सब्सक्राइवर्स की तादाद एक लाख को पार कर गई है. इसके लिए यूट्यूब की तरफ से भेज गए सिल्वर बटन के असली हकदार आप सब हैं, जिन्होंने इस चैनल पर भरोसा जताया और इसे इतना प्यार दिया. असल में यूट्यूब की तरफ से यह सिल्वर क्रिएटर अवार्ड है जो एक लाख सब्सक्राइवर्स के जुड़ने पर किसी चैनल को दिया जाता है. हालांकि मेरे लिए आप एक लाख लोगों के जुड़ने और भरोसा बनाए रखने से बड़ा अवार्ड कुछ नहीं हो सकता.
दोस्तो करीब दो साल पहले फिल्मी किस्सों से शुरू हुए सफर में कई तरह के मोड़ और रुझान आए. नई नई कहानियां आईं और साथ ही नई पसंद और नापसंद वाले दोस्त भी जुड़े. वैसे तो हमारा फोकस अमिताभ बच्चन से जुड़ी फिल्मी कहानियों पर रहा और बहुत हद तक आज भी है, लेकिन जैसाकि आप सब जानते हैं फिल्मी कैनवास बहुत बड़ा है. ऊपर से एक मेगास्टार के जीवन के तमाम पहलू इतने व्यापक हैं कि कहानी एक जगह से निकल कर दूसरी ओर जानी तय है. ऐसे में कई दूसरे कलाकारों और फिल्मों से होते हुए हमने आपके लिए दूसरी कलासिक और दिलचस्प कहानियां भी परोसीं . लेकिन इरादा एक ही था, सच्ची और तथ्यपरक बातें ही आपको बताई जाएं. आपने मोहम्मद रफी से लेकर गुरुदत्त और दूसरे कई कलाकारों फिल्मकारों पर कहानियां भी खूब पसंद कीं.
दोस्तो कंटेंट भले ही बदला और आगे भी बदलाव होते ही रहेंगे लेकिन एक बात साफ है व्यूज या चैनल ग्रोथ के लिए झूठ और भ्रामक तथ्यों का सहारा न लिया है न लेंगे. हालांकि भूलचूक मझसे भी हुई होगी पर आप पर भरोसा है कि उसे इग्नोर करेंगे या मेरी नजर में भी लाएंगे. आपकी बदौलत ही हम इसे और बेहतर चैनल बना पाएंगे. आपके सुझावों और मार्गदर्शन का हमेशा ही स्वागत रहा है, आगे भी रहेगा.
एक बार फिर आप सबको धन्यवाद, बधाई और ढेरों शुभकामनाएं.
4 months ago | [YT] | 52
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इसे अमिताभ बच्चन की नई दीवार कह लें या एंग्री यंग मैन का नया अवतार, आज से ठीक 36 साल पहले 16 फरवरी 1990 को रिलीज हुई यह अनूठी फिल्म उस दौर में आई थी, जब अमिताभ बच्चन का सुपरस्टारडम गर्दिश में जाता दिख रहा था. एक तो बढ़ती उम्र, ऊपर से नये दौर की पब्लिक का नया मिजाज. हालांकि यह फिल्म कमर्शियल पैमानों पर हिट या सुपरहिट नहीं कही गई लेकिन इसका मिजाज भी कम नया नहीं था. यश जौहर के प्रोडक्शन और मुकुल आनंद के निर्देशन में आई अग्निपथ ने अमिताभ बच्चन की दमदार अदाकारी के दम पर आगे चलकर खुद अपना इतिहास लिखा. ऐसा पहली बार हुआ जब क्रिटिक्स ने अमिताभ की किसी तथाकथित फ्लॉप फिल्म की तारीफ में कसीदे पढ़े थे और अवार्ड समारोहों में भी इसकी वाहवाही हुई. इस फिल्म के लिए अमिताभ बच्चन को बेस्ट एक्टिंग का नेशनल अवार्ड मिला और यह आज भी एक कल्ट क्लासिक के रूप में याद की जाती है.
4 months ago | [YT] | 122
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नाराज सलीम-जावेद ने मुंबई में लगे इस फिल्म के एक-एक पोस्टर पर बाद में अपना नाम क्यों छपवाया ?
मई 1973. सलीम खान और जावेद अख्तर ने जब पहली बार शहर में इस फिल्म के पोस्टर देखे तो उनका दिल धक से करके रह गया. पोस्टरों पर कहीं भी उनका नाम नहीं था. उन्हें भरोसा नहीं हुआ. जूहू में एक बड़े बिलबोर्ड पर लगे फिल्म के विशाल पोस्टर के नीचे क्रेडिट लाइन में एक-एक नाम पढ़ा. बतौर लेखकर उनका नाम कहीं नहीं मिला. ये कैसे हो सकता है? उन्होंने फिल्म के प्रोड्यूसर प्रकाश मेहरा को 55 हजार रुपये में कहानी बेचते समय यह पहली और सबसे बड़ी शर्त रखी थी कि फिल्म के सभी पब्लिसिटी मैटीरियल पर बतौर लेखक उनका नाम लिखना होगा. मेहरा ने यह शर्त मान भी ली थी.
सलीम जावेद बतौर स्क्रिप्ट राइटर अब तक तीन हिट फिल्में दे चुके थे लेकिन वहां भी उन्हें बड़ा क्रेडिट या पब्लिसिटी नहीं मिली. अब उनके लिए पैसे से ज्यादा खुद की पहचान बनाना ज्यादा जरूरी लगने लगा था और इसीलिए उन्होंने फिल्म जंजीर की कहानी जिसे कई दूसरे प्रोड्यूसर और एक्टर ठुकरा चुके थे, प्रकाश मेहरा को उनके पहले होम प्रोडक्शन पीएमपी के लिए बेचते समय अपनी यह इच्छा जताई थी कि फिल्म के सभी पब्लिशिंग और प्रमोशनल मैटीरियल में बतौर लेखक उनका नाम छपेगा.
पहले तो उन्हें लगा कि प्रकाश मेहरा ने जानबूझकर वादाखिलाफी की है और जब उनसे इस बात की शिकायत की तो मेहरा चौंक गए माफी मांगी. लेकिन अब तो कुछ नहीं हो सकता. शहर के सारे पोस्टर दीवारों औऱ बिलबोर्ड पर चस्पा हो चुके हैं.
दीप्तकीर्ति चौधऱी की किताब रिटेन बाई सलीम जावेद में दर्ज इस दिलचस्प वाकये के मुताबिक प्रकाश मेहरा ने सलीम जावेद को भरोसा दिलाया अब आगे जो भी पोस्टर या पब्लिसिटी मैटीरियल छपेगा उसमें आपका नाम डलवा देंगे. कोई और होता तो यह मामला वहीं रफादफा हो जाता लेकिन सलीम जावेद तो मानो किसी और ही मिशन पर थे.
सलीम जावेद ने एक पेंटर हायर किया. उसे एक स्टेंसिल थमाई और कहा कि पूरे शहर में जहां कहीं जंजीर के पोस्टर दिखें, उन पर सलीम-जावेद छाप देना. लेकिन पेंटर ने या तो पी रखी थी या फिर इतनी बड़ी तादाद में पोस्टरों पर लिखने की हड़बड़ी में उसने जो किया वो भी कम दिलचस्प नहीं था. जब सलीम जावेद ने पोस्टरों का मुआयना किया ....
(Watch Full Video – Link in Comment Box)
4 months ago | [YT] | 43
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यशराज बैनर की पहली ही फिल्म दाग की एक गोल्डन जुबली पार्टी में जब पत्रकारों ने यश चोपड़ा से सवाल किया राजेश खन्ना के साथ इतनी कामयाब ओपनिंग के बाद भी आपने दीवार के लिए अमिताभ बच्चन को साइन क्यों किया ? तो वो झेंप गए.
ये सवाल पहली बार नहीं पूछा गया था. उन दिनों फिल्मी पत्रिकाओं में ये खबर साया होने लगी थी कि यश चोपड़ा ने राजेश खन्ना से पहली फिल्म से ही पल्ला झाड़ लिया है और दोनों ही खेमों के पीआर ऐसी खबरों को अटकलें बताने में जुटे थे क्योंकि इसका बिजनेस इम्पैक्ट बुरा हो सकता था. हालांकि जंजीर ने अमिताभ को रातोंरात फ्लॉप हीरो से उभरते स्टार में बदल दिया था, लेकिन राजेश खन्ना अब भी वो नाम थे, जिनकी अदाओं पर हवाएं अपना रुख बदलती थीं. ऐसे में यश चोपड़ा ने मीडिया को बड़ा ही सधा हुआ जवाब दिया. कहा, दीवार एक एक्शन फिल्म है, जिसका लीड किरदार इमोशनल के साथ ही थोड़ा टफ टाइप का आदमी है. जो अमिताभ पर सूट करता है.
@EcoPol_Filmy
5 months ago | [YT] | 8
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राजकपूर ने जब सुना कि सलीम-जावेद ने उनके बेटे और शाइनिंग स्टार ऋषि कपूर को धमकी दी है कि हम तुम्हारा करियर बर्बाद कर देंगे तो उनके तन बदन में आग लग गई थी. लेकिन मुट्ठियाँ भींचने और दांत पीसकर रह जाने के अलावा कुछ और रिएक्ट करना उन्हें हवा के खिलाफ थूकने जैसा लगा. और हवा सलीम-जावेद के साथ बह रही थी. लेकिन ये हवा अब अपने साथ एक ऐसा तूफान लाने वाली थी थी जो बॉक्सऑफिस ही नहीं नामी गिरामी निर्माता निर्देशकों की जमी जमाई दुकानें उड़ा ले गई. ये कहानी उस साल की है जब राज कपूर, देव आनंद, बीआर चोपड़ा जैसे प्रोड्यूसर डायरेक्टर ही नहीं बड़े बड़े फिल्मी सितारों ने बॉक्स ऑफिस कब्जाने में अपनी पूरी ताकत, झोंक दी थी, लेकिन जो हुआ उसकी कल्पना इन दिग्गजों ने तो क्या खुद बॉक्स ऑफिस ने भी नहीं की थी.
5 months ago | [YT] | 8
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आज रफ़ी साहब की 101वीं जन्म-जयंती है . मोहम्मद रफ़ी सिर्फ़ एक आवाज़ नहीं थे। वे सुरों में इंसानियत थे। जब वे गाते थे, तो अहंकार पिघल जाता था। जब वे मुस्कुराते थे, तो स्टारडम भी शर्मा जाता था। उस इंडस्ट्री में जहाँ अक्सर शोर-ओ-गुल की पूजा होती है, रफ़ी साहब ने संयम को कमाल की ऊँचाई दी। वे गाने पर कब्ज़ा नहीं करते थे — वे उसकी सेवा करते थे। वे बोलों को अपनी शख़्सियत के आगे नहीं झुकाते थे — वे खुद को मिटा देते थे ताकि भावना नंगी और सच्ची खड़ी हो सके।
उनकी कला में कुछ गहरा आध्यात्मिक था। वे दुखी बाप बन सकते थे, शरारती आशिक़, भटकता फ़क़ीर, मस्तीख़ोऱ शैतान, या टूटा हुआ दिल — बिना खुद का कोई निशान छोड़े। बहुत कम कलाकार ऐसे होते हैं जो अपने काम में इस तरह ग़ायब हो जाते हैं जैसे संत नमाज़ में ग़ायब हो जाते हैं। रफ़ी साहब रोज़ ऐसा करते थे, बिना कोई ज़ोर लगाए।
हमारी मोहब्बत को और गहरा करने वाली बात सिर्फ़ उनका गाना नहीं, बल्कि उनका जीना भी है। कोई घमंड नहीं। सत्ता की भूख नहीं। स्टेज के बाहर कोई परफॉर्मेंस नहीं। वे उस बेरहम मुक़ाबले की दुनिया में नरम रहे। तालियों की पूजा करने वाले ज़माने में नम्र रहे। उन्होंने नए लोगों को जगह दी, चुपचाप दूसरों के पीछे खड़े रहे, और कभी केंद्र माँगा नहीं — फिर भी केंद्र हमेशा उन्हें ही मिलता था।
उनकी आवाज़ में रोशनी थी, लेकिन उनके व्यवहार में वज़न। यही दुर्लभ संयोग है जिसकी वजह से उनके गाने बूढ़े नहीं होते — वे साँस लेते हैं। अकेले को तसल्ली देते हैं, टूटे हुए को संभालते हैं, और याद दिलाते हैं कि ख़ूबसूरती को शोर की ज़रूरत नहीं होती।
उनकी 101वीं जन्म-जयंती पर ढेरों श्रद्धांजलि 💐🌸🌼🌻🌸🌹
6 months ago | [YT] | 216
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Born Dharam Singh Deol on 8 December 1935 in a dusty Punjabi village of Sahnewal (then in undivided India), he was a simple Jat boy who once drove tractors and never imagined he’d rule Bollywood. Destiny, however, had other plans.
He stepped in with Dil Bhi Tera Hum Bhi Tere (1960), but exploded onto the scene with Phool Aur Patthar (1966) – Bollywood’s first true He-Man who ripped off his shirt and redefined raw masculinity on screen. Then came Sholay’s Veeru: the laughing, drinking, bass-playing buddy who’d lay down his life for his friend – the ultimate desi dost every Indian wanted.
The 1970s belonged to him and Hema Malini. Thirty-one films together, crackling chemistry on screen, and a timeless love story off it. He made us cry in emotional dramas, doubled us over with laughter in Chupke Chupke, played the madcap father in Yamla Pagla Deewana, and at 87, melted hearts as the adorable romantic grandfather in Rocky Aur Rani Kii Prem Kahaani.
Over 250 films, two Filmfare Lifetime Achievement Awards, the Padma Bhushan, and something no trophy can measure – the undying love of generations.
He is not just “Dharmendra” or “Garam Dharam”; he is the eternal hero of the masses who never retired… he simply moved from the silver screen into our hearts forever. ❤️
7 months ago | [YT] | 324
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A very happy birthday to Dream Girl of Bollywood
Hema Malini, born V. S. Ramaniamurthy on October 16, 1948, in Ammankudi, Tamil Nadu, is an iconic Indian actress, dancer, producer, and politician. Dubbed the "Dream Girl" of Bollywood, she rose to stardom in the 1970s, captivating audiences with her ethereal beauty, classical dance prowess, and versatile acting. Trained in Bharatanatyam from a young age under Guru Kittappa, Hema blended her Odissi and Bharatanatyam expertise into her film performances, making her a cultural bridge between cinema and classical arts.
Her acting career began with the Tamil film Idhu Sathiyam (1963), but she exploded onto Hindi screens with Sapnon Ka Saudagar (1968), opposite Raj Kapoor. The 1970s solidified her as a leading lady, starring in over 150 films. Prominent works include Seeta Aur Geeta (1972), where her dual role as twins earned her the Filmfare Award for Best Actress—her first of many; Sholay (1975), the blockbuster Western where she played the fiery Basanti alongside Amitabh Bachchan and Dharmendra; Naseeb (1981), a multi-starrer hit; Kranti (1981); and Baghban (2003), a poignant family drama that showcased her emotional depth later in her career. She was the most prolific and hot shot actress in, 1970s and 1980s consistantly giving superhits.
Hema's achievements are staggering: Six Filmfare Awards, including Best Actress for Seeta Aur Geeta and a Lifetime Achievement Award (2000); the Padma Shri (2000) and Padma Bhushan (2016) from the Government of India; and the Kalabharti Award for classical dance. She produced films like Dil Aashna Hai .
In politics, as a BJP member since 2003, she served as Lok Sabha MP from Mathura (2014–2024), focusing on women's empowerment and heritage preservation. Married to Dharmendra since 1980, with daughters Esha and Ahana Deol, Hema remains a timeless icon, blending artistry, grace, and public service. At 77, her legacy endures through cinema, dance, and philanthropy
8 months ago (edited) | [YT] | 382
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