मेरा कोटि कोटि नमन श्री मान निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह... व इस विशेष फिल्म के निर्माता श्री मान विपुल अमृतलाल शाह... जी को हृदय से आभार व्यक्त करता हूं ऐसा कटु सत्य दिखाने के लिए...। अगर आप मेरे इस वक्तव्य को पढ़ रहे हैं तो इस फिल्म को अवश्य देखें... और फिल्म के मेकर्स की सराहना करें...! जिन्होंने अपनी पूंजी लगाकर देश की आंतरिक, व विचलित कर देने वाली स्थिति को (घटनाओं) का सजीव चित्रण किया...! मेरी सर्वशक्तिमान से यही प्रार्थना है कि आपको ऐसी ही जिहादियों (कटुओं) द्वारा देश में किए जा रहे कुकृत्य लवजिहाद सनातनी बहन बेटी का धर्मांतरण जैसी आपराधिक घटनाओं पर सजीव चित्रित फिल्म बनाने की अभिप्रेरणा व शक्ति प्रदान करे...! जो सोए व मरे हिंदुओं की आँखें खोलने का काम करतीं हैं....! (द केरल स्टोरी २) ...धन्यवाद.... द अरुन भट्ट ।
... उस समय मैं किशोर ही था... मैंने अपने आपको लगभग समझ ही लिया था... दुनियां में जिस तरह लोग पैसा कमा रहे हैं... इस तरह तो मैं कभी नहीं कमा पाऊंगा... फिर प्रश्न यह खड़ा हुआ कि आखिर मैं करूंगा क्या...वर्ष दो वर्ष निकल गए किंतु इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा था...फिर धीरे धीरे मुझे लगने लगा ... कि आगे चल कर मुझे वैराग्य धारण ही करना पड़ेगा... सन्यासी बन कर आजीवन जीवन निर्वहन करना पड़ेगा...! परन्तु फिल्मों का अधिक शौक होने के कारण... कुछ फिल्मी हसीनाओं का सौंदर्य मुझे असहज कर देता था...फिर महीनों उनके इश्क का भूत मुझ पर सवार रहता था... एक दो वर्षों का समय और बीता ...उस समय मेरी आयु युवावास्था में प्रवेश करने के निकट ही थी...! दिन प्रतिदिन नए स्वप्न, नए विचारों से मेरे मस्तिष्क के अंदर रक्त का प्रवाह अधिक तीव्र था...! उन्हीं दिनों फिल्मों में अभिनेत्रियों का नायक के प्रति असीमित प्रेम व समर्पण देख कर ... मुझे अनुभव हुआ कि अब मुझे भी प्रेम करना चहिए...? किंतु ...! अब समस्या यह खड़ी हुई कि प्रेम करने के लिए विवाह करना अति आवश्यक है... और विवाह करने के लिए आपको आर्थिक रूप से अधिक धनाढ्य होना चाहिए... क्योंकि विवाह का मूल आधार धन पर ही टिका होता है... और ऐसा आज से नहीं अनादिकाल से है...और मुझे तो निर्धनता का अभिशाप लगा हुआ है... अर्थात यह सुनिश्चित हो गया कि वैवाहिक जीवन के आनंद का लोप होना मेरे जीवन की एक दुर्दांत घटना है...! धीरे धीरे समय बीतता है... मुझे एक शब्द के बारे में पता चलता है..., मेरे मस्तिष्क में कई चित्र फिल्म रील की तरह घूम गए... अब आप सोचेंगे आखिर वो शब्द कौन सा था या है.... तो वह शब्द था "घर जमाई, मन में कुछ स्वप्न स्वतः ही गढ़ गए... आश्चर्य भी हुआ क्या यह संभव है...? मन में एक आशा का दीप जला... मैंने मन ही मन यह स्वीकार किया या ये कहिए मन ही मन यह निर्णय लिया... मैं "घर जमाई, बनूंगा...! बीतते समय और विचारों के अनुक्रम में यह एक धारणा सी बनने लगी कि प्रेम, और विवाह बिना धन के भी किया जा सकता है "घर जमाई, बनकर... मन में मधुर भावो का उदय हुआ...एक विश्वास सा पनपने लगा... किंतु अब प्रश्न यह आया कि अपने पुरुषार्थ, सिद्धांत, उसूलों और आत्मसम्मान का क्या...? समय बीत रहा था मैं किशोरावस्था से युवावस्था की ओर बढ़ रहा था... मस्तिष्क में एक सुकोमल सौंदर्य से भरी आकृति बनती मिटती रहती थी...! और अब निष्कर्ष का समय था... मैंने फैसला किया... मैं स्वयं को "नीलाम, या स्वयं का सौदा करूंगा...! और मैंने मेरे "घर जमाई, बनने का इस्तहार समाचार पत्रों में दे दिया...! "मैं जीवन भर आपका दास बनकर रहूंगा..., आप जो कहेंगी वो करूंगा..., आप जैसी भी परिस्थितियों में रखेंगी मैं रहूंगा..., आपके लिए कई वेदनाओं असहनीय पीड़ाओं को सहन करूंगा..., ताउम्र आपका सम्मान करूंगा..., आखिरी सांस तक आपकी रक्षा करूंगा..., जीवन पर्यंत तक आदर्श चरित्र का प्रमाण दूंगा..., आपके मनोभावों और विचारों का सम्मान करूंगा..., मेरे और आपके संबंध में मैं हमेशा ईमानदार रहूंगा..., आपके वृद्ध होने तक आपके सौंदर्य की सराहना करूंगा..., मेरी इस घोषणा के बाद आपकी और कोई निजी शर्त है तो उसका आजीवन पालन करूंगा...। ...अगर आपको मेरा थोपड़ा कद, काठी ठीक लगे तो आप मुझे "घर जमाई, के रूप में चुन सकती हैं...। (...मुझे युवावास्था में प्रवेश किए हुए कई वर्ष बीत गए...और आज इतने लंबे अंतराल के बाद भी ऐसा हो न सका...) ...द अरुन भट्ट । .
माना हजारों चाहने वाले हैं तुम्हारे इस जहां में... मगर मुझ सा दीवाना कहाँ... होंगे कई किस्से मगर मुझ सा अफसाना कहाँ... ये चल न सकेंगे तुम्हारे साथ चार कदम... मिलेंगे वहीं मेरे अक्स और निशां ...तुम जहां... मेरी बातें झूंठीं लगें कभी आ कर देख लेना... तुम्हारे बिना न जिंदगी न सुकूँ न चैन यहाँ...। | Mr. X | The Arun Bhatt . . . #images#concept#discovery#imagination#life#vision#frame#emotion#poet#struggle#art#poeter#deewana
THE ARUN BHATT
मेरा कोटि कोटि नमन श्री मान निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह... व इस विशेष फिल्म के निर्माता श्री मान विपुल अमृतलाल शाह... जी को हृदय से आभार व्यक्त करता हूं ऐसा कटु सत्य दिखाने के लिए...।
अगर आप मेरे इस वक्तव्य को पढ़ रहे हैं तो इस फिल्म को अवश्य देखें... और फिल्म के मेकर्स की सराहना करें...! जिन्होंने अपनी पूंजी लगाकर देश की आंतरिक, व विचलित कर देने वाली स्थिति को (घटनाओं) का सजीव चित्रण किया...! मेरी सर्वशक्तिमान से यही प्रार्थना है कि आपको ऐसी ही जिहादियों (कटुओं) द्वारा देश में किए जा रहे कुकृत्य लवजिहाद सनातनी बहन बेटी का धर्मांतरण जैसी आपराधिक घटनाओं पर सजीव चित्रित फिल्म बनाने की अभिप्रेरणा व शक्ति प्रदान करे...! जो सोए व मरे हिंदुओं की आँखें खोलने का काम करतीं हैं....!
(द केरल स्टोरी २)
...धन्यवाद.... द अरुन भट्ट ।
3 months ago | [YT] | 2
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THE ARUN BHATT
शुभ आरंभ | THE BEGINNINGS | SESSION 3 ||Mr. X | The Arun Bhatt... #vision #emotion #art #different #high
4 months ago | [YT] | 2
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THE ARUN BHATT
... उस समय मैं किशोर ही था... मैंने अपने आपको लगभग समझ ही लिया था... दुनियां में जिस तरह लोग पैसा कमा रहे हैं... इस तरह तो मैं कभी नहीं कमा पाऊंगा... फिर प्रश्न यह खड़ा हुआ कि आखिर मैं करूंगा क्या...वर्ष दो वर्ष निकल गए किंतु इस प्रश्न का उत्तर नहीं मिल रहा था...फिर धीरे धीरे मुझे लगने लगा ... कि आगे चल कर मुझे वैराग्य धारण ही करना पड़ेगा... सन्यासी बन कर आजीवन जीवन निर्वहन करना पड़ेगा...! परन्तु फिल्मों का अधिक शौक होने के कारण... कुछ फिल्मी हसीनाओं का सौंदर्य मुझे असहज कर देता था...फिर महीनों उनके इश्क का भूत मुझ पर सवार रहता था... एक दो वर्षों का समय और बीता ...उस समय मेरी आयु युवावास्था में प्रवेश करने के निकट ही थी...!
दिन प्रतिदिन नए स्वप्न, नए विचारों से मेरे मस्तिष्क के अंदर रक्त का प्रवाह अधिक तीव्र था...! उन्हीं दिनों फिल्मों में अभिनेत्रियों का नायक के प्रति असीमित प्रेम व समर्पण देख कर ... मुझे अनुभव हुआ कि अब मुझे भी प्रेम करना चहिए...?
किंतु ...! अब समस्या यह खड़ी हुई कि प्रेम करने के लिए विवाह करना अति आवश्यक है... और विवाह करने के लिए आपको आर्थिक रूप से अधिक धनाढ्य होना चाहिए... क्योंकि विवाह का मूल आधार धन पर ही टिका होता है... और ऐसा आज से नहीं अनादिकाल से है...और मुझे तो निर्धनता का अभिशाप लगा हुआ है... अर्थात यह सुनिश्चित हो गया कि वैवाहिक जीवन के आनंद का लोप होना मेरे जीवन की एक दुर्दांत घटना है...!
धीरे धीरे समय बीतता है... मुझे एक शब्द के बारे में पता चलता है..., मेरे मस्तिष्क में कई चित्र फिल्म रील की तरह घूम गए... अब आप सोचेंगे आखिर वो शब्द कौन सा था या है.... तो वह शब्द था "घर जमाई, मन में कुछ स्वप्न स्वतः ही गढ़ गए... आश्चर्य भी हुआ क्या यह संभव है...?
मन में एक आशा का दीप जला... मैंने मन ही मन यह स्वीकार किया या ये कहिए मन ही मन यह निर्णय लिया... मैं "घर जमाई, बनूंगा...!
बीतते समय और विचारों के अनुक्रम में यह एक धारणा सी बनने लगी कि प्रेम, और विवाह बिना धन के भी किया जा सकता है "घर जमाई, बनकर... मन में मधुर भावो का उदय हुआ...एक विश्वास सा पनपने लगा... किंतु अब प्रश्न यह आया कि अपने पुरुषार्थ, सिद्धांत, उसूलों और आत्मसम्मान का क्या...?
समय बीत रहा था मैं किशोरावस्था से युवावस्था की ओर बढ़ रहा था... मस्तिष्क में एक सुकोमल सौंदर्य से भरी आकृति बनती मिटती रहती थी...! और अब निष्कर्ष का समय था... मैंने फैसला किया... मैं स्वयं को "नीलाम, या स्वयं का सौदा करूंगा...! और मैंने मेरे "घर जमाई, बनने का इस्तहार समाचार पत्रों में दे दिया...!
"मैं जीवन भर आपका दास बनकर रहूंगा..., आप जो कहेंगी वो करूंगा..., आप जैसी भी परिस्थितियों में रखेंगी मैं रहूंगा..., आपके लिए कई वेदनाओं असहनीय पीड़ाओं को सहन करूंगा..., ताउम्र आपका सम्मान करूंगा..., आखिरी सांस तक आपकी रक्षा करूंगा..., जीवन पर्यंत तक आदर्श चरित्र का प्रमाण दूंगा..., आपके मनोभावों और विचारों का सम्मान करूंगा..., मेरे और आपके संबंध में मैं हमेशा ईमानदार रहूंगा..., आपके वृद्ध होने तक आपके सौंदर्य की सराहना करूंगा..., मेरी इस घोषणा के बाद आपकी और कोई निजी शर्त है तो उसका आजीवन पालन करूंगा...।
...अगर आपको मेरा थोपड़ा कद, काठी ठीक लगे तो आप मुझे "घर जमाई, के रूप में चुन सकती हैं...।
(...मुझे युवावास्था में प्रवेश किए हुए कई वर्ष बीत गए...और आज इतने लंबे अंतराल के बाद भी ऐसा हो न सका...)
...द अरुन भट्ट ।
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|Mr. X | The Arun Bhatt... #vision #emotion #art #different #high #writer
4 months ago | [YT] | 2
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THE ARUN BHATT
DESPERADO | Mr. X | The Arun Bhatt
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8 months ago (edited) | [YT] | 2
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THE ARUN BHATT
GAME | Mr. X | The Arun Bhatt
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#images #concept #discovery #imagination #life #vision #frame #emotion #कला #art #different #high #GAME #thearunbhatt
9 months ago | [YT] | 2
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THE ARUN BHATT
अवन्तिकायाम् विहितावतारम् मुक्तिप्रदानाय च संज्जनानाम् । आकालमृत्योः परिरक्षणार्थम् वन्दे महाकालमहासुरेशम् ।।
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"आज खुश तो बहुत होगे तुम...!
| Mr. X | The Arun Bhatt
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#images #concept #discovery #imagination #life #vision #frame #emotion #poet #struggle #art #poeter #mahakaal
1 year ago | [YT] | 1
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THE ARUN BHATT
...शफ्फाफ बदन ...!
...मलिका ए हुस्न...!
मेरे असल इश्क़ को अपने दिल में पनाह दे...
...ये हर किसी को नसीब नहीं होता...!
| Mr. X | The Arun Bhatt
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#images #concept #discovery #imagination #life #vision #frame #emotion #poet #struggle #art #poeter #deewana #ishq
1 year ago | [YT] | 2
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THE ARUN BHATT
मेरे निर्बाध प्रेम से वो परेशान हो गई...
न जाने क्यो वो मुझसे अनजान हो गई...
अब उसकी तस्वीर ही मेरे जीने का सामान हो गई... ।
| Mr. X | The Arun Bhatt
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#images #concept #discovery #imagination #life #vision #frame #emotion #poet #struggle #art #poeter #deewana #tasveer #anjaan
1 year ago | [YT] | 2
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THE ARUN BHATT
माना हजारों चाहने वाले हैं तुम्हारे इस जहां में...
मगर मुझ सा दीवाना कहाँ...
होंगे कई किस्से मगर मुझ सा अफसाना कहाँ...
ये चल न सकेंगे तुम्हारे साथ चार कदम...
मिलेंगे वहीं मेरे अक्स और निशां ...तुम जहां...
मेरी बातें झूंठीं लगें कभी आ कर देख लेना... तुम्हारे बिना न जिंदगी न सुकूँ न चैन यहाँ...।
| Mr. X | The Arun Bhatt
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#images #concept #discovery #imagination #life #vision #frame #emotion #poet #struggle #art #poeter #deewana
1 year ago | [YT] | 3
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THE ARUN BHATT
...जहाँ सुकूँ की आस थी... मिला दर्द ही दर्द ... मैं बेखुद सा हो गया...,
रहा कुछ भी नहीं मेरे पास मेरा सब कुछ खो गया...,
...और जब न रही कहीं कोई आस...
आखिकार ..., खुदी को खुद मिल गया...।
| Mr. X | The Arun Bhatt
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#images #concept #discovery #imagination #life #vision #frame #emotion #poet #struggle #art #poeter
1 year ago | [YT] | 2
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