शंकराचार्य जैसा प्रतिष्ठित पद संभालने के लिए गुरु गोलवलकर के पास प्रस्ताव आया था. पीएम मोदी अपनी किताब ‘ज्योतिपुंज’ में लिखते हैं, "द्वारका पीठ के शंकराचार्य श्री अभिनव सच्चिदानंदजी ने परम पूज्य गुरुजी को संदेश भेजा: 'गुरुजी, शंकराचार्य का पद रिक्त है और इसके लिए आपसे अधिक उपयुक्त कोई नहीं है." लेकिन गोलवलकर का संकल्प तो कुछ और था. आज पेश है उसी घटना का वर्णन.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर ने जैसे चारों शंकराचार्यों को सनातन और भारत की सेवा से जोड़ा था, उतना शायद कोई दूसरा नहीं कर पाया. लेकिन कम लोगों को पता है कि गुरु गोलवलकर के जीवन में ऐसा भी अवसर आया, जब वो खुद भी शंकराचार्य बन सकते थे, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया. ये घटना पुरी की गोवर्धन पीठ से जुड़ी है. गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य गोलोक जाने से पहले अपने संभावित उत्तराधिकारी के लिए कुछ नाम लिख गए थे, जिनमें गुरु गोलवलकर का नाम था. लेकिन गुरु गोलवलकर ने इस प्रस्ताव को ये कहकर अस्वीकार कर दिया था कि इस पवित्र पद के योग्य मैं नहीं. शाखा के जरिए मैं समाज की अच्छी सेवा कर सकता हूं. @highlight
Prem Kumar Gupta
kya hum apne ghron main pryavaran ko bachane ke liye kuchh upaye kar sakte hain ?
6 months ago | [YT] | 0
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Prem Kumar Gupta
6 months ago | [YT] | 0
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Prem Kumar Gupta
h
6 months ago | [YT] | 1
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Prem Kumar Gupta
6 months ago | [YT] | 0
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Prem Kumar Gupta
शंकराचार्य जैसा प्रतिष्ठित पद संभालने के लिए गुरु गोलवलकर के पास प्रस्ताव आया था. पीएम मोदी अपनी किताब ‘ज्योतिपुंज’ में लिखते हैं, "द्वारका पीठ के शंकराचार्य श्री अभिनव सच्चिदानंदजी ने परम पूज्य गुरुजी को संदेश भेजा: 'गुरुजी, शंकराचार्य का पद रिक्त है और इसके लिए आपसे अधिक उपयुक्त कोई नहीं है." लेकिन गोलवलकर का संकल्प तो कुछ और था. आज पेश है उसी घटना का वर्णन.
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दूसरे सरसंघचालक गुरु गोलवलकर ने जैसे चारों शंकराचार्यों को सनातन और भारत की सेवा से जोड़ा था, उतना शायद कोई दूसरा नहीं कर पाया. लेकिन कम लोगों को पता है कि गुरु गोलवलकर के जीवन में ऐसा भी अवसर आया, जब वो खुद भी शंकराचार्य बन सकते थे, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया. ये घटना पुरी की गोवर्धन पीठ से जुड़ी है. गोवर्धन पीठ के शंकराचार्य गोलोक जाने से पहले अपने संभावित उत्तराधिकारी के लिए कुछ नाम लिख गए थे, जिनमें गुरु गोलवलकर का नाम था. लेकिन गुरु गोलवलकर ने इस प्रस्ताव को ये कहकर अस्वीकार कर दिया था कि इस पवित्र पद के योग्य मैं नहीं. शाखा के जरिए मैं समाज की अच्छी सेवा कर सकता हूं.
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7 months ago | [YT] | 1
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Prem Kumar Gupta
WILL RSS BE ABLE TO PERSUADE THE PEOPLE TO FOLLOW THE 5 POINTS, i.e., PANCHPARIVARTAN IN THEIR LIFE
7 months ago | [YT] | 1
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Prem Kumar Gupta
इसको जरूर पूरा देखें
2 years ago | [YT] | 1
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Prem Kumar Gupta
आपकी पैतृक संपत्ति 55% सरकारी खजाने में जायेगी "कांग्रेस"
2 years ago | [YT] | 1
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