AstroAshuPandit Channel में आप सब का भारतीय वैदिक भारतीय ज्योतिष मन्त्र विद्या ज्ञान चैनल में स्वागत करता हूँ। यह एक ज्योतिष और आध्यात्मिक चैनल है जो आपको भारतीय ज्योतिष, वैदिक ज्योतिष, प्राचीन ग्रंथों का ज्ञान और आध्यात्मिकता पर शिक्षा प्रदान करेगा। मैंने ये सारे वीडियो,उन लोगो के लिए बनाये है। जो लोग भारतीय ज्योतिष और मन्त्र में रूचि रखते है।
"भारतीय ज्योतिष एवं वैदिक ज्ञान को एक स्थान पर एकत्रित करें।"
"प्रभावी कुंडली विश्लेषण और ग्रहों की जानकारी प्राप्त करें।"
"मन, शरीर और आत्मा का संतुलन बढ़ाने के लिए आध्यात्मिक अभ्यासों का अध्ययन करें।"
"प्राचीन ग्रंथों और पौराणिक कथाओं के माध्यम से हमारी धार्मिक और आध्यात्मिक विरासत का अन्वेषण करें।"
"अपने जीवन में खुद को ऊपर उठाने और खुश करने के लिए आध्यात्मिक मंत्रों और तंत्रों का उपयोग करने का ज्ञान प्राप्त करें।"
यहां आपको अध्यात्म से जुड़े उपयोगी टिप्स और ट्रिक्स मिलेंगे।
हम इस चैनल पर साझा करेंगे
youtube.com/watch?v=ptnNq7JOJxo&t=17s


AstroAshuPandit

श्रीमहालक्ष्मी अष्टकम्।।
इन्द्र उवाच -
नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते ।
शङ्ख चक्र गदाहस्ते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ १ ॥
नमस्ते गरुडा रूढे कोलासुर भयङ्करि ।
सर्वपाप हरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ २ ॥
सर्वज्ञे सर्व वरदे सर्वदुष्ट भयङ्करि ।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ३ ॥
सिद्धि बुद्धि प्रदे देवि भुक्ति मुक्ति प्रदायिनि ।
मन्त्र मूर्ते सदा देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ४ ॥
आद्यन्तर हिते देवि आद्य शक्ति महेश्वरि ।
योगजे योग सम्भूते महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ५ ॥
स्थूल सूक्ष्म महारौद्रे महाशक्ति महोदरे ।
महापाप हरे देवि महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ६ ॥
पद्मासन स्थिते देवि परब्रह्म स्वरूपिणि ।
परमेशि जगन्मातः महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ७ ॥
श्वेताम्बर धरे देवि नानालङ्कार भूषिते ।
जगत्स्थिते जगन्मातः महालक्ष्मि नमोऽस्तुते ॥ ८ ॥
महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रम् यः पठेद्भक्ति मान्नरः ।
सर्वसिद्धि मवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा ॥ ९ ॥
एककाले पठेन्नित्यं महापाप विनाशनम् ।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्य समन्वितः ॥ १० ॥
त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रु विनाशनम् ।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा ॥ ११ ॥
।।श्री इंद्रकृत श्री महालक्ष्मी अष्टक संपूर्णः ॥

1 month ago | [YT] | 8

AstroAshuPandit

।।श्रीनवग्रहपीडाहर हनुमान दशश्लोकी ।।
​ ​॥ विनियोगः ॥अस्य श्री हनुमान् नवग्रह पीडाहर स्तोत्र मन्त्रस्य, भगवान् कालभैरव ऋषिः, अनुष्टुप् छन्दः, श्री पंचमुखी हनुमान देवता, ह्रां बीजं, ह्रीं शक्तिः, ह्रूं कीलकम्, मम (या साधकस्य) नवग्रह जनित पीडा शान्त्यर्थे जपे विनियोगः।
​🌹 १. सूर्य
बालार्क-मण्डलाकारं, देदीप्यमानं महाबलम्।
सूर्य-पीडां हरन्त्वेते, हनुमान् पवनात्मजः॥
​🌹२. चन्द्र
अञ्जनी-गर्भा-सम्भूतं, कपिराजं जगत्प्रभुम्।
चन्द्र-पीडां हरन्त्वेते, हनुमन्-लक्ष्मण-प्रियः॥
🌹३. मङ्गल
महावीरं महाकायं, तप्तकाञ्चन-विग्रहम्।
भौम-पीडां हरन्त्वेते, वज्रदेहो महाबलः॥
​🌹४. बुध
बुद्धि-विद्या-प्रदातारं, दूतमय-विशारदम्।
बुध-पीडां हरन्त्वेते, सुग्रीव-सख्य-कारकः॥
​🌹 ५. गुरु
काञ्चनाभं कपीन्द्रं च, ज्ञानिनां च पुरःसरम्।
गुरु-पीडां हरन्त्वेते, राम-दूतः प्रतापवान्॥
​🌹 ६. शुक्र
सीता-शोक-विनाशाय, राम-हृदय-वासिने।
भार्गव-पीडां हरन्त्वेते, अशोक-वन-भञ्जनः॥
​🌹 ७. शनि
अर्क-पुत्र-प्रसन्नं च, शनिमय-निवारकम्।
शनि-पीडां हरन्त्वेते, लङ्का-दाहक-पण्डितः॥
​🌹 ८. राहु
राहु-दर्प-हरं धीरं, सर्प-कुण्डल-मण्डितम्।
राहु-पीडां हरन्त्वेते, पिङ्गाक्षो भीषणाननः॥
​🌹९. केतु
केतु-पीडा-विनाशाय, पुच्छ-ज्वाला-भयङ्करम्।
केतु-पीडां हरन्त्वेते, सर्व-विघ्न-निवारकः॥
​🌹 १०.
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रूं ह्रैं ह्रौं ह्रः, हुं फट् कार-रूपिणे।
सर्व-ग्रह-दोष-नाशाय, हनुमन्तं नमाम्यहम्॥
​॥ फलश्रुति ॥
​इति ते कथितं दिव्यं, नवग्रहपीडा-विनाशनम्।
यः पठेत् प्रयतो नित्यं, स सर्वजयमाप्नुयात्॥
​द्वादशैतानि नामानि, यः पठेच्छृणुयादपि।
न तस्य ग्रह-पीडा च, संसाराद् भयमस्ति वै॥
🍁​(​उपयोग:-- ग्रहों की महादशा, अंतर्दशा या गोचर जनित कष्टों के समय इसका पाठ "अचूक" है।)

1 month ago | [YT] | 7

AstroAshuPandit

!! जय माता दी !!
“न मन्त्रं नो यन्त्रं तदपि च न जाने स्तुतिमहो
न चाह्वानं ध्यानं तदपि च न जाने स्तुतिकथा:|
न जाने मुद्रास्ते तदपि च न जाने विलपनं
परं जाने मातस्त्वदनुसरणं क्लेशहरणम् ||”
अर्थात:-
(हे मात:•••••••••••••! मैं तुम्हारा मन्त्र, यन्त्र, स्तुति, आवाहन, ध्यान, स्तुतिकथा, मुद्रा तथा विलाप कुछ भी नहीं जानता; परन्तु सब प्रकार के क्लेशों को दूर करने वाला आपका अनुसरण करना (पीछे चलना) ही जानता हूँ !!

1 month ago | [YT] | 5

AstroAshuPandit

ॐ भक्तशत्रुभक्षिण्यै नमः
मां प्रत्यंगिरा वह दिव्य आदिशक्ति हैं जिनका स्मरण होते ही नकारात्मक शक्तियाँ कांप उठती हैं। वे उग्र हैं, अपितु अपने भक्तों के लिए करुणामयी मातृरूपा हैं। उनका सिंहमुख स्वरूप यह दर्शाता है कि वे भय का भक्षण करती हैं और साधक के चारों ओर अदृश्य कवच निर्मित करती हैं। तंत्र और आगम परंपरा में उन्हें महाभैरवी, अथर्वणा भद्रकाली और नरसिंही शक्ति के रूप में भी जाना जाता है।
कथाओं में वर्णित है कि जब दैत्यबल अत्यधिक प्रबल हो गया और देवताओं की शक्तियाँ क्षीण पड़ने लगीं, तब आदि पराशक्ति ने प्रत्यंगिरा रूप धारण किया। यह वही अग्निमयी शक्ति है जो दुष्ट संकल्पों, अभिचार, काला जादू और शत्रु बाधा का शमन करती है। साधक जब निष्कपट भाव से उनका आह्वान करता है, तब वे उसके जीवन से अदृश्य भय, मानसिक अशांति और अवरोधों का नाश करती हैं।
उनका ध्यान करते समय यह अनुभूति होती है कि भीतर की जड़ता जल रही है और आत्मबल जागृत हो रहा है। मां प्रत्यंगिरा केवल शत्रु-विनाशिनी नहीं, अपितु आत्मशक्ति को प्रज्वलित करने वाली दिव्य ज्वाला हैं।
या देवी सिंहमुखी चण्डरूपा महाबला।
भक्तानां रक्षिणी नित्यं प्रत्यंगिरा नमोऽस्तु ते॥
मूल मंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं प्रत्यंगिरायै नमः॥
जो साधक श्रद्धा, संयम और गुरु-मार्गदर्शन में रहकर इनका जप करता है, उसके जीवन में अद्भुत परिवर्तन अनुभव होने लगता है। भय साहस में परिवर्तित होता है, बाधाएँ मार्ग बन जाती हैं और अंतर्मन में एक दिव्य स्थिरता स्थापित होती है।
जय मां प्रत्यंगिरा
गुरु ही शक्ति, गुरु ही साधना, गुरु ही सिद्धि — वंदन गुरु जी

1 month ago | [YT] | 1

AstroAshuPandit

जय महाकाल
“ॐ मृत्यूंजाय, रूद्राय, नीलकंठाय, संभवे।
अमृतेशाय सर्वाय महादेवाय ते नम:॥
हे रूद्र! आप मृत्यू को जितने वाले हैं। हे नीलकण्ठ आप अमृत सदृश्य सभी को सुख प्रदान करने वाले हैं। हे महादेव आपको नमस्कार।”।।

1 month ago | [YT] | 2

AstroAshuPandit

ॐ ह्रीं भं भैरवाय नमः ।
कालभैरवाय स्वाहा । रुद्राय ताण्डवेश्वराय नमः ।
भूत-प्रेत-पिशाच-सिद्ध-योगिनि-संवृताय नमः ।
अत्युग्र रूप धारिणे, भस्माङ्ग लिप्ताय नमः ।
त्रिशूल-कपाल-धारिणे, नमो रौद्राय रौद्ररूपाय ।
जाग्रतं कुरु कुरु श्मशाने, भयङ्कर रूपे ह्रीं फट् स्वाहा ॥
रुद्राष्टकम
ॐ भैरव रुद्राय, महा रुद्राय काल रुद्राय, कल्पंत्र रुद्राय वीर रुद्राय, रुद्र रुद्राय घोरा रुद्राय, अघोरा रुद्राय
मारतंड रुद्राय, अंद रुद्राय ब्रह्मांड रुद्राय, चंड रुद्राय प्रचंड रुद्राय, दंड रुद्राय शूर रुद्राय, वीर रुद्राय
भाव रुद्राय, भीम रुद्राय अतल रुद्राय, वितल रुद्राय सूतल रुद्राय, महाबल रुद्राय रसातल रुद्राय, तलातला रुद्राय पाताल रुद्राय, नमो नमः ॐ

4 months ago | [YT] | 4

AstroAshuPandit

ॐ क्लीं ह्रीं अघोररूपाय कपालधारिणे भैरवाय छुपे तंत्र-प्रयोग शमनाय अभिचार-दोष निवारणाय दुष्ट ऊर्जा शुद्धिकरणाय भक्तचित्त स्थिरकरणाय ॐअघोर भैरवाय नमः
अघोर भैरव का प्रचंड आह्वान| डर,गुप्त शत्रु,षड्यंत्र और नकारात्मकता का संपूर्ण संहार | ॐ श्री अघोर भैरवाय नमः मैं आपके शरण में हू मेरी रक्षा करे बंधन तोडो सब बंधनोसे मुक्त करे प्रभु जय अघोर भैरवाय नमः
मेरा सादर रक्षा करो बाबा सभी परिवार को सुख शांति दे मेरा रक्षा करना बाबा मेरा दुश्मन को खत्म करना बाबा अघोर देवमहराज कोचरनो में। मेरा सादर प्रणाम करता हूं

4 months ago | [YT] | 7

AstroAshuPandit

ॐ कालभैरवाय नमः ।
हे भैरव, काल के भी स्वामी,
मेरे मार्ग के रक्षक बनें।
अज्ञान का अन्धकार दूर करें।
और मेरी बुद्धि को प्रकाश दें।
जहाँ भय हो, वहाँ साहस दें।
जहाँ बाधा हो, वहाँ समाधान दें।
जहाँ अशांति हो, वहाँ शांति दें।
जहाँ दुर्बलता हो, वहाँ शक्ति दें।
हे भैरव,
मेरे भीतर की नकारात्मकता को नष्ट करें।
और सत्य, धैर्य और स्थिरता प्रदान करें।
मेरे कर्मों को शुभ दिशा दें।
और जीवन में सदबुद्धि , सुरक्षा और सामर्थ्य भरें।
ॐ भैरवाय नमः ।
ॐ ह्रीं वटुकभैरवाय नमः ।

4 months ago | [YT] | 3

AstroAshuPandit

।। ओम् श्री हनुमते नम: ।।
अंजनीगर्भ संभूतं कपींद्र सचिवोत्तम् ।
रामप्रियं नमस्तुभ्यं हनुमन् रक्ष सर्वदा ।।
जय श्रीराम
यत्र यत्र रघुनाथ-कीर्तनं तत्र तत्र कृत-मस्तकाञ्जलिम् ।
बाष्प-वारि-परिपूर्ण-लोचनं मारुतिर्नमत राक्षसान्तकम् ॥
ॐ हं हनुमते नम:

4 months ago | [YT] | 3

AstroAshuPandit

हे कृष्ण, हे गोविन्द, हे राम, हे नारायण, हे रमानाथ, हे वासुदेव, हे अजेय, हे शोभाधाम, हे अच्युत, हे अनन्त, हे माधव, हे अधोक्षज ( इंद्रियातीत), हे द्वारकानाथ, हे द्रौपदीरक्षक मुझ पर कृपा कीजिये।
राधे राधे

4 months ago | [YT] | 3