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नमस्कार,बागवान भाईयो
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इस चैनल का निर्माण मैंने 10 जून 2018 को किया।
इस चैनल को बनानेे के पीछे मेरा मकसद है।
बागवानी सेब से सम्बंधित जानकारी सभी बागवान भाईयो और लोगो के बीच साँझा करना है।
मैं चाहता हुं कि हर एक वो व्यक्ति जो बागवानी में रूचि रखता है।
अच्छी जानकारी लेकर एक प्रगतिशील बागवान बने
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What is treatment?

4 weeks ago | [YT] | 2

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Spry schedule 2026

1 month ago | [YT] | 11

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प्रिय बागवान साथियों,

नमस्कार

आग नहीं, अमृत चुनें: बागवानी और पर्यावरण संरक्षण का नया रास्ता

हिमाचल के जंगलों में धधकती आग आज एक भयावह रूप ले चुकी है। परसों की ही घटना इसका प्रमाण है कि एक छोटी सी चिंगारी कैसे हमारे फेफड़ों (जंगलों) को राख कर रही है। अक्सर हम यह सोचकर निश्चिंत हो जाते हैं कि "मेरा बगीचा तो सुरक्षित है," लेकिन प्रकृति की सीमाएं नहीं होतीं। सूखा मौसम और तेज हवाएं इस विनाश को किसी भी घर तक पहुँचा सकती हैं।
समस्या: आग और कचरा प्रबंधन की चुनौती
अक्सर बागवान भाई सफाई के नाम पर सूखी झाड़ियों और टहनियों को जला देते हैं, जिससे दावानल (Forest Fire) का खतरा बढ़ जाता है। कुछ लोग इन्हें नदी-नालों में फेंक देते हैं, जिससे बरसात में भयानक बाढ़ और भूस्खलन का खतरा पैदा होता है। वहीं, बगीचे में ढेर लगाने से घास खराब होने का डर रहता है।
समाधान: कचरे से कंचन (Waste to Wealth)
हमें अपनी सोच बदलनी होगी। जिसे हम 'कचरा' समझकर जला रहे हैं, वह दरअसल मुफ्त की खाद है।
1. गड्ढा विधि और ट्राइकोडर्मा (Trichoderma):
अपने बगीचे के एक कोने में गड्ढा बनाएं और उसमें कटी हुई झाड़ियां व अवशेष डालें। इसमें ट्राइकोडर्मा का छिड़काव करें।
* फायदा: यह न केवल अवशेषों को सड़ाएगा, बल्कि आपके सेब के पेड़ों को 'जड़ सड़न' (Root Rot) जैसी घातक बीमारियों से भी बचाएगा।
2. पूसा डी-कंपोजर (Pusa Decomposer): एक जादुई समाधान
भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा द्वारा विकसित 'डी-कंपोजर' पराली और कठोर झाड़ियों को सड़ाने में बेहद कारगर है।
पूसा डी-कंपोजर के लाभ:
* यह मात्र 20-25 दिनों में कठोर से कठोर अवशेषों को खाद में बदल देता है।
* मिट्टी की उर्वरता और कार्बनिक शक्ति बढ़ाता है।
* मिट्टी के मित्र कीटों को सुरक्षित रखता है।
कैसे तैयार करें और उपयोग करें?
* घोल बनाना: 150-200 ग्राम गुड़ को पानी में उबालकर ठंडा करें। इसमें 4-5 कैप्सूल (या पाउच) पूसा डी-कंपोजर मिलाएं और अच्छी तरह फेंटें। इसे 3-4 दिनों के लिए छायादार जगह पर रखें।
* छिड़काव: जब घोल तैयार हो जाए, तो इसमें और पानी मिलाकर झाड़ियों और अवशेषों के ढेर पर छिड़क दें और उसे ढक दें।
कैसे मंगवाएं?
आप इसे सीधे ICAR-IARI, नई दिल्ली से मंगवा सकते हैं। आजकल यह कई कृषि विज्ञान केंद्रों (KVK) और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से भी उपलब्ध है। आप पूसा संस्थान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर या उनके हेल्पलाइन नंबरों पर संपर्क करके इसे कोरियर द्वारा प्राप्त कर सकते हैं।

अपनी जमीन और अपने जंगलों को आग से बचाना हम सबकी सामूहिक जिम्मेदारी है। याद रखें, जब हम झाड़ियां जलाते हैं, तो हम केवल कचरा नहीं जलाते, बल्कि अपनी आने वाली पीढ़ियों का स्वास्थ्य और अपनी मिट्टी की जान जलाते हैं।

राजेश रढाईक
(NGO)

5 months ago | [YT] | 3

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हैपी न्यू ईयर Apple Grover's

5 months ago | [YT] | 1

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सेब के तनों पर चूना (लाइम) लगाने से पेड़ को कैंकर और फंगल बीमारियों से बचाने, तने की छाल फटने से रोकने और मिट्टी का pH संतुलित करने में मदद मिलती है, जिससे सेब की गुणवत्ता और पैदावार बढ़ती है; इसके लिए चूने को नीले थोथे और तेल के साथ मिलाकर लेप बनाकर पतझड़ में लगाना चाहिए, क्योंकि यह कैल्शियम का अच्छा स्रोत है और जड़ों को मजबूत बनाता है।
कैसे लगाएं (लेप बनाने का तरीका)
सामग्री: 9 किलो चूना, 1 किलो नीला थोथा (कॉपर सल्फेट), 1 लीटर अलसी का तेल (या 750 मिलीलीटर एचएमओ ऑयल)।
बनाने की विधि:
अलसी के तेल को हल्का गर्म करें।
चूने और नीले थोथे को मिलाकर इस गर्म तेल में अच्छी तरह मिलाएं।
इस लेप को सेब के तनों पर लगाएं।
कब लगाएं: पतझड़ (शरद ऋतु) के अंत में लगाना सबसे अच्छा है, जब पेड़ सुप्त अवस्था में हो और प्रूनिंग (छंटाई) का समय फरवरी के आसपास होता है।
Watch on practical 👇
https://youtu.be/KnAThq51W5g

5 months ago | [YT] | 12

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Prunning tacnique

5 months ago | [YT] | 13

Hímãčhãľ Ãppĺë

## रूटस्टॉक की नई वेरिएंट Cross Breeding से कैसे तैयार होती है?

### (M116 रूटस्टॉक का उदाहरण)

अक्सर यह गलतफहमी होती है कि नया रूटस्टॉक **दो लकड़ियाँ जोड़कर (grafting)** बनाया जाता है।
❌ **यह गलत है।**
✅ नया रूटस्टॉक हमेशा **फूल → परागण → बीज → चयन** की प्रक्रिया से बनता है।

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## जब कहा जाता है कि M116 = MM106 × M27

इसका मतलब यह है कि **MM106 और M27 को माता-पिता बनाकर नई नस्ल तैयार की गई**, ठीक वैसे जैसे बच्चों में माँ-बाप दोनों के गुण आते हैं।

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# 1️⃣ Breeding (नया पौधा बनाना)

### 🎯 उद्देश्य

वैज्ञानिक चाहते थे:

* **MM106 जैसी ताकत**
* लेकिन **Collar Rot जैसी बीमारियों से ज्यादा सुरक्षा**

### प्रक्रिया:

1. **चयन (Selection)**

* MM106 और M27 के पेड़ों को चुना गया
* ध्यान रखें: रूटस्टॉक भी सेब का ही पेड़ होता है

2. **परागण (Pollination)**

* एक पेड़ के फूलों का पराग (pollen)
* दूसरे पेड़ के फूलों पर लगाया गया

3. **बीज बनना (Seeds Formation)**

* फल बने
* बीजों में दोनों माता-पिता के गुण मिक्स हो गए

4. **बीज बोना (Planting)**

* हजारों बीज बोए गए
* हर पौधा अलग निकला:

* कोई बौना
* कोई ताकतवर
* कोई बीमार
* कोई स्वस्थ

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# 2️⃣ Selection (सबसे बेहतर पौधे का चुनाव)

### यही सबसे लंबा और कठिन चरण है ⏳

✔ वैज्ञानिकों ने जानबूझकर खेत में **Collar Rot बीमारी** डाली
✔ जो पौधे मर गए → हटा दिए
✔ जो बचे:

* बीमारी सहन करते थे
* आकार नियंत्रित था
* जड़ें मजबूत थीं

👉 **कई सालों की टेस्टिंग** के बाद
👉 **एक ही पौधा** सबसे बेहतर निकला

📌 उसी को नाम दिया गया **M116**

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# 3️⃣ Cloning (एक जैसे हजारों पौधे बनाना)

⚠️ अब बीज का उपयोग नहीं किया जाता
क्योंकि बीज से गुण बदल सकते हैं।

इसलिए किया जाता है **Vegetative Propagation**

### 🌱 Stooling Method

1. **कटाई**

* M116 को जमीन के पास से काटा जाता है

2. **नई फूटान (Shoots)**

* तने से कई नई शाखाएँ निकलती हैं

3. **मिट्टी चढ़ाना (Earthing Up)**

* शाखाओं के आधार पर मिट्टी डाली जाती है

4. **जड़ बनना (Rooting)**

* मिट्टी के अंदर शाखाओं में जड़ें निकल आती हैं

5. **कटाई (Harvesting)**

* सर्दियों में इन जड़ वाली शाखाओं को काट लिया जाता है

✅ अब ये **100% शुद्ध M116 रूटस्टॉक** होते हैं
✅ इन्हीं पर आगे **ग्राफ्टिंग** की जाती है

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## 🔑 सार (Conclusion)

* ❌ रूटस्टॉक grafting से नहीं बनता
* ✅ नया रूटस्टॉक **Cross Breeding + Selection** से बनता है
* 🌱 बाद में उसे **Cloning (Stooling)** से बढ़ाया जाता है
* 🍎 M116 एक **चुना हुआ, टेस्टेड और बीमारी-रोधी** रूटस्टॉक है

#Himachalapple0001
#Rootstockpropogation

5 months ago | [YT] | 6

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सेब (सेव) में कॉलर रॉट (तने का सड़ना) ठीक करने के लिए, प्रभावित हिस्से से मिट्टी हटाकर उसे सुखाएं, फिर बोर्डो पेंट या कॉपर पेंट लगाएं; साथ ही, मैंकोजेब या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड जैसे फफूंदनाशक (fungicide) का छिड़काव करें और भविष्य के लिए अच्छी जल निकासी व तने को चोट से बचाएं, क्योंकि यह कवक (fungus) से होने वाली बीमारी है।
सेब में कॉलर रॉट ठीक करने के तरीके:
संक्रमित हिस्से को साफ करें:
पेड़ के तने के आधार से 3-4 इंच मिट्टी हटा दें।
सड़े हुए या संक्रमित हिस्से को धीरे से खुरच कर निकाल दें और हवा लगने दें ताकि वह सूख जाए।
फफूंदनाशक (Fungicide) का प्रयोग करें:
साफ किए गए घाव पर बोर्डो पेंट (Bordeaux Paint) या कॉपर पेंट (Copper Paint) लगाएं।
मैंकोजेब (Mancozeb) या कॉपर ऑक्सीक्लोराइड (Copper Oxychloride) को पानी में मिलाकर (जैसे 200 लीटर पानी में 600 ग्राम मैंकोजेब) तने के चारों ओर स्प्रे करें।
रोकथाम के उपाय (Prevention):
मिट्टी और जल निकासी: पेड़ हमेशा अच्छी जल निकासी वाली जगह पर लगाएं और तने के चारों ओर 10 सेमी गहराई तक रेत डालें ताकि पानी जमा न हो।
तने को बचाएं: बाग में काम करते समय पेड़ के तने को चोट लगने से बचाएं, क्योंकि घाव से संक्रमण फैल सकता है।

#follower

5 months ago | [YT] | 6