रजत की सोच आम नहीं, खास है।
वह शब्दों में भावनाएँ भर देता है,
खामोशी को भी आवाज़ दे देता है।
उसकी रचनात्मकता सिर्फ लिखने में नहीं,
बल्कि हर छोटे काम को अलग अंदाज़ में करने में है।
वह सपनों को कल्पना से जोड़ता है
और कल्पना को हकीकत बनाने की कोशिश करता है।
रजत के लिए रचना केवल कला नहीं,
बल्कि उसके दिल की आवाज़ है।
RAJAT SRIVASTAVA
टूटते रिश्तों की ख़ामोशी
सबने इल्ज़ामों के पत्थर फेंके,
बिना सच जाने फैसले कर डाले।
किसी ने शब्दों से चोट पहुँचाई,
किसी ने रिश्तों के दीप बुझा डाले।
अनफ़ॉलो करके मानो जीत गए,
पर क्या दिल का हाल भी समझ पाए?
परिवार तक को बुरा-भला कहकर,
क्या इंसानियत के फ़र्ज़ निभा पाए?
सबने कोसा Raghav Chadha को,
पर किसी ने ये सवाल न पूछा—
आख़िर क्यों छोड़ी वो राह पुरानी,
क्यों टूटा साथ जो था कभी सच्चा।
क्या मजबूरी थी, क्या दर्द छुपा था,
जो दोस्ती का धागा टूट गया।
क्यों Arvind Kejriwal से दूरी बनाकर,
एक अपना ही रास्ता छूट गया।
हर कहानी के दो पहलू होते,
सच अक्सर ख़ामोशी में रोता है।
भीड़ तो बस शोर मचाती रहती,
पर दिल अकेले में सब कुछ खोता है।
इसलिए पहले समझो, फिर कहना,
हर चेहरा भीतर से टूटा होता है।
राजनीति के इस शोर में अक्सर,
एक इंसान भी छुपा होता है।
— राजत श्रीवास्तव की कलम से
2 weeks ago | [YT] | 7
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