गोरखपुर जिले में चल रहे सघन पल्स पोलियो अभियान घर-घर भ्रमण कार्यक्रम की प्रगति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बुधवार को क्षेत्र भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम के साथ बेलघाट क्षेत्र की ढेकू नाथ एवं चउतरा ग्राम सभाओं में अभियान का निरीक्षण किया। सीएमओ ने घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने वाली टीमों के कार्यों का अवलोकन किया तथा अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
सीएमओ डॉ ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान बच्चों को आजीवन दिव्यांगता से बचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने टीमों को निर्देशित किया कि क्षेत्र का शत-प्रतिशत भ्रमण सुनिश्चित करें तथा कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
डॉ. झा ने बताया कि सघन पल्स पोलियो कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनपद, प्रदेश एवं देश के पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना है। भारत, वर्ष 2011 से पोलियो मुक्त है और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर जनपद में अभियान के सफल संचालन के लिए कुल 1848 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें, ट्रांजिट टीमें तथा मोबाइल टीमें शामिल हैं। जनपद में पांच वर्ष तक के 6,38,065 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1 जुलाई तक 4,52,474 बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाई जा चुकी है।
डॉ झा ने बताया कि घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें 3 जुलाई तक अभियान संचालित करेंगी तथा इस दौरान छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोलियो की खुराक दी जाएगी। इसके अतिरिक्त शेष छूटे बच्चों को कवर करने के लिए 6 जुलाई को बी-टीम गतिविधि संचालित की जाएगी, जिससे कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रह सके।
निरीक्षण के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनय शंकर एवं उनकी टीम भी उपस्थित रही।
गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने सोमवार को स्वास्थ्य क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन कर उन्हें जनता को समर्पित किया। सांसद निधि से गोरखपुर रेलवे अस्पताल में निर्मित 13 बेड के अत्याधुनिक आईसीयू वार्ड तथा एम्स गोरखपुर में बनाए गए 15 बेड के आधुनिक निजी वार्ड का शुभारंभ किया गया।
रेलवे अस्पताल में स्थापित नए आईसीयू वार्ड से गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर उन्नत जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध हो सकेगा, जिससे अन्य शहरों में रेफर होने की आवश्यकता कम होगी। वहीं एम्स गोरखपुर के निजी वार्ड में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और बेहतर सुविधाओं से युक्त मरीज कक्ष उपलब्ध कराए गए हैं।
एम्स प्रशासन के अनुसार निजी वार्ड का संचालन चरणबद्ध ढंग से शुरू किया जाएगा और बाद में इसकी पूरी 15 बेड क्षमता का उपयोग किया जाएगा। वार्ड का शुल्क एम्स नई दिल्ली की स्वीकृत दरों के अनुरूप रखा गया है।
इस अवसर पर सांसद रवि किशन ने कहा कि पूर्वांचल के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि रेलवे अस्पताल का नया आईसीयू और एम्स का निजी वार्ड क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।
गोरखपुर जिले में कैंसर की रोकथाम, समय से पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा एवं एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ शिखा सेठ ने जिले के पांच ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का अभिमुखीकरण किया। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में सहजनवां, कैम्पियरगंज, बांसगांव, पिपराइच और सरदारनगर ब्लॉकों के सीएचओ को कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान तथा मरीजों को समय पर उपचार व्यवस्था से जोड़ने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
अभिमुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ शिखा सेठ ने महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन दोनों प्रकार के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान हो जाने पर उपचार अधिक प्रभावी होता है और मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। उन्होंने सीएचओ को सर्वाइकल कैंसर एवं स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों, जोखिम कारकों तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने सीएचओ को ओरल कैंसर की पहचान और उसके प्रमुख लक्षणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर और ओरल कैंसर के मामलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग और पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मरीजों को समय रहते चिकित्सकों के पास संदर्भित किया जाना चाहिए, ताकि उनका शीघ्र उपचार शुरू हो सके।
डॉ झा ने कहा कि कैंसर की समय पर पहचान, समय से संदर्भन और सही समय पर उपचार उपलब्ध कराने से कैंसर से होने वाली मृत्यु के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी सीएचओ से अपेक्षा की कि वे अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करें तथा संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश कुमार, डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय, सहयोगी संस्था जपाइगो तथा यूपीटीएसयू के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कैंसर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना के महत्व पर बल दिया।
गोरखपुर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने मंगलवार को पिपराइच स्थित सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने वेयर हाउस में दवाओं के गुणवत्तापूर्ण रखरखाव और ट्रांसपोर्टेशन को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया ।
सीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग के अभियंता को निर्देश दिया कि वेयर हाउस में बिजली पानी की मुकम्मल व्यवस्था रखी जाए। उन्होंने वेयरहाउस को जोड़ने वाली सड़क बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की भी पहल की। सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर के सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस में 319 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। वेयर हाउस से जिला स्तरीय अस्पताल माह में दो बार, सीएचसी-पीएचसी माह में एक बार और उपकेंद्र स्तरीय अस्पताल तीन माह में एक बार दवा ले जाते हैं। निरीक्षण के दौरान सीएमओ को बताया गया कि फरवरी माह में वेयर हाउस से बावन बार दवा मंगायी गयी है।
गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डेटा बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं की नीव हैं। इनके जरिये गैप एनालिसिस कर उच्च स्तरीय सेवाएं दे पाना संभव होता है। यह बातें उन्होंने जिले के स्वास्थ्य महकमे के डेटा वेलीडेशन कमेटी की मासिक बैठक के दौरान कहीं। बैठक का आयोजन सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में शनिवार को हुआ। मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डॉ झा ने ई-कवच पर रिपोर्टिंग और आभा आईडी पर विशेष जोर दिया।
सीएमओ ने कहा कि डेटा सम्बन्धी कार्यों में सुधार के कारण यूपी हेल्थ डैशबोर्ड रैंकिंग में जिले की स्थिति बेहतर बनी हुई है। गोरखपुर जिला टॉप फाइव में बना हुआ है। इसे स्थिर रखने के लिए डेटा की सटीकता पर जोर देना होगा। जहां कहीं भी डेटा सम्बन्धी गैप दिखे उसे दूर करना होगा। प्रत्येक ब्लॉक पर इसकी सघन निगरानी की जानी चाहिए और इस सम्बन्ध में बैठकें भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आभा आईडी का सृजन और उसकी रिपोर्टिंग शासन की प्राथमिकता में है। यह प्रत्येक ब्लॉक की भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
डॉ झा ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में ई-कवच पर रिपोर्टिंग की अहम भूमिका रही है। सही रिपोर्टिंग के जरिये हम छूटे हुए क्षेत्रों और वंचित लाभार्थी समूहो पर फोकस कर पाते हैं। यह रिपोर्टिंग सही से हो इसके लिए आशा स्तर से लेकर जिला स्तर तक सतर्कता बरतनी होगी। डेटा एक टीम भावना का काम है और इसके लिए सभी को समन्वय बना कर काम करना होगा।
इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश, डॉ अश्विनी चौरसिया, डीपीएम पंकज आनंद, डीडीएम पवन कुमार और एचएमआईएस सहयोगी मनीष त्रिपाठी सहित सभी ब्लॉकों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने स्वास्थ्य महकमे के जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि बदलते मौसम के साथ हीट रिलेटेड बीमारियों से बचाव और उपचार के इंतजाम कर लिए जाएं। उन्होंने कहा है कि इन बीमारियों के बारे में समुदाय में व्यापक प्रचार प्रसार करवाने की आवश्यकता है। साथ ही शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार हीट रिलेटेड बीमारियों की सर्विलांस और आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जानी है।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि मौसम विभाग की ओर से तापमान बढ़ने के संकेत मिले हैं। बदलते मौसम के साथ ही हीट रिलेटेड बीमारियों के मामले सामने आने लगते हैं। इसे देखते हुए सभी अधिकारियों से अग्रिम तैयारी करने को कहा गया है। निर्देश दिया गया है कि जनसामान्य में हीट रिलेडेट दिक्कतों पर अपनाएं जाने वाले सामान्य प्रोटोकॉल का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। लोगों को बताया जाए कि अधिक दिक्कत होने पर मरीज को 108 नंबर एम्बुलेंस की सहायता से ही नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना है। प्रशिक्षित चिकित्सक के पास ही उपचार के लिए जाना है। किसी भी अप्रशिक्षित व्यक्ति या झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें।
सीएमओ ने बताया कि जिले के सभी इमर्जेंसी वार्ड में हीट स्ट्रोक व अन्य मौसमी बीमारियों के उपचार की सभी आवश्यक दवाएं रखने का निर्देश दिया गया है। विभागीय उच्चाधिकारी समय-समय पर इमर्जेंसी वार्ड का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी आवश्यक दवाएं और उपकरण क्रियाशील रहें। साथ ही अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता लोगों को समझाएंगे कि बदलते मौसम में किस प्रकार का खानपान और दिनचर्या अपनाना है ताकि इस बीमारियों से बचाव हो सके। लोगों को घर से बाहर निकलने के समय में बदलाव करना होगा, खानपान संतुलित रखना होगा, अधिकाधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना होगा और ताजे फलों आदि के सेवन पर विशेष जोर देना होगा। इसके साथ ही सभी आवश्यक परामर्श और प्रोटोकॉल की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में शामिल है।
गोरखपुर जिले में 15 अतिरिक्त नये ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) खोले बनाए जाएंगे। इन बीपीएचयू से समुदाय को गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलेगी। सीएमओ डॉ राजेश झा ने बृहस्पतिवार को सहजनवां सीएचसी का दौरा कर वहां बीपीएचयू के लिए संभावित स्थान का मुआयना किया। उन्होंने पहले से क्रियाशील पाली बीपीएचयू का निरीक्षण भी किया। इस दौरान वहां के चेयरमैन प्रभाकर दूबे ने भी मौके पर पहुंच कर सीएमओ के साथ स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। जिले में पहले से चार बीपीएचयू स्थापित और क्रियाशील हैं।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि जिले में प्रत्येक बीपीएचयू 2500 वर्गमीटर का बनेगा। यह तीन भागों में होगा-बीपीएमयू, एचएमआईएस और पैथालॉजी पार्ट। बीपीएमयू में एनएचएम के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एक साथ बैठेंगे, वहीं एचएमआईएस विंग के जरिये बीमारियों की निगरानी व रिपोर्टिंग होगी। बीपीएचयू के पैथालॉजिकल पार्ट में 73 से अधिक जांचों, सैम्पल ट्रांसपोर्ट और ब्लॉक क्षेत्र में हो रही जांचों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम होगा। डॉ झा ने बताया कि पाली, शिवपुर, उसवा बाबू और चौरीचौरा सीएचसी पर बीपीएचयू क्रियाशील है। शेष ब्लॉक स्तरीय पंद्रह इकाइयों में इसकी स्थापना के लिए स्थान चिन्हित किया जा रहा है। बीपीएचयू के जरिये गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने की राह और भी आसान होगी।
सीएमओ ने पाली सीएचसी पर उपस्थिति पंजिका भी चेक की। इस दौरान उन्होंने एक अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारी सहित कुछ अन्य अनुपस्थित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। सीएचसी पर पाली के चेयरमैन से चर्चा के दौरान सीएमओ ने बीपीएचयू जाने का रास्ता ठीक करवाने का अनुरोध किया।
गोरखपुर महानगर के पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भी सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन होगा। इसे शुरू करने की तैयारियों को देखने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने रविवार को केन्द्र का दौरा किया। उन्होंने प्रत्येक कक्ष और तैयारियों को देखा तथा आईईसी आदि की विस्तृत समीक्षा की। इस पॉलीक्लिनिक पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रतिदिन सेवाएं दी जाएंगी।
सीएमओ ने बताया कि सिटी पॉलीक्लिनिक के संचालन के उद्देश्य से ही पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बड़े भवन में शिफ्ट कर दिया है। वहां पर एक सप्ताह के भीतर पॉलीक्लिनिक की तैयारियां पूरी करने का प्रयास है। यह नया क्लिनिक शुरू होने के बाद हमारे पास विशेषज्ञ सेवाओं वाले दो अस्पताल नगरीय क्षेत्र में क्रियाशील हो जाएंगे।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि गोरखपुर शहर में तीन सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से किया जाना है। इनमें से पहली पॉलीक्लिनिक बसंतपुर में संचालित हो रही है। होली के बाद पुर्दिलपुर में भी क्लिनिक शुरू करने की तैयारी है। इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का इम्पैनलमेंट भी हो रहा है। इस केन्द्र पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ, ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ आदि सेवाएं देंगे।
सिटी पॉलीक्लिनिक पर जो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे उन्हें पांच हजार रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जाएगा। इन चिकित्सकों को टेलीकंसल्टेशन के जरिए भी परामर्श देना होगा। किसी भी चिकित्सक की इंगेजमेंट उसकी आवश्यकतानुसार किया जाएगा। ये विशेषज्ञ सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक सेवाएं देंगे। इनकी सेवाओं से लोगों को विशेष लाभ होगा और वह जिला अस्पताल तथा बीआरडी मेडिकल कॉलेज की भीड़भाड़ में इलाज करवाने से बच सकेंगे। इन क्लिनिक के लिए भी डिजिटल पर्चे की व्यवस्था होगी और यहां से रेफरल भी ऑनलाइन पर्चों के जरिए किए जाएंगे। पुर्दिलपुर में भी ब्लड सैम्पल ट्रांसपोर्ट की सुविधा को सुदृढ़ किया जाएगा।
गोरखपुर जिले के पिपराइच सीएचसी स्थित फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर स्टेमी केयर नेटवर्क सोमवार से सक्रिय हो गया। वहां सीने में दर्द की शिकायत के साथ पहुंचीं 90 वर्षीय बुजुर्ग का तय प्रोटोकॉल के साथ उपचार किया गया। डायग्नोसिस के दौरान मामला स्टेमी का न निकलने के बाद उन्हें इलाज कर वापस घर भेज दिया गया। इससे पहले सीएमओ डॉ राजेश झा ने पिपराइच एफआरयू का दौरा कर स्टेमी कार्नर का निरीक्षण किया और सभी को निर्धारित प्रोटोकॉल के बारे में पुनः ब्रीफ किया।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने निर्देश दिया कि स्टेमी कार्नर पर सभी जीवनरक्षक दवाएं, इंजेक्शन, इसीजी और स्टॉफ उपलब्ध होने चाहिए। अगर कोई भी मरीज सीने में दर्द या घबराहट अथवा हर्ट अटैक के अन्य लक्षणों के साथ आता है तो दस मिनट के भीतर उसकी इसीजी कर लें। इसीजी रिपोर्ट को स्टेमी केयर नेटवर्क के वाट्स एप ग्रुप में डाल दें। इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब के विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशन में आवश्यक उपचार करें। वहां के ह्रदय रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्टेमी का मामला होने पर उनके निर्देश पर ही इंजेक्शन लगा कर मरीज को एम्बुलेंस से हब पर रेफर कर दें। हब को ग्रुप के जरिये ही मरीज की सभी जानकारियां पहले से भेज दें। अगर हब के विशेषज्ञों के अनुसार मामला स्टेमी का न हो तब भी आवश्यक उपचार देना सुनिश्चित करें।
डॉ झा ने बताया कि एक घंटे के भीतर मरीज को दो बार इजीसी होनी है और सभी प्रकार का उपचार हब पर बैठे ह्रदय रोग विशेषज्ञ की निगरानी में ही होगा। उन्होंने बताया कि जिले की सभी एफआरयू पर यह सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। इससे हर्ट अटैक के मरीजों का घर के पास ही त्वरित प्राथमिक उपचार हो सकेगा और उनकी जान बचाई जा सकेगी। त्वरित प्राथमिक उपचार की कार्रवाई से ज्यादातर मामलों में एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता भी नहीं रहेगी।
सीएमओ ने बताया कि उनके निरीक्षण के थोड़ी देर बाद ही पिपराइच की मोहम्मदाबाद गांव की 90 वर्षीय बुजुर्ग पार्वती को स्टेमी कार्नर पर एडमिट किया गया। उनका निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार हब की निगरानी में डायग्नोसिस एवं उपचार किया गया। इस अवसर पर अधीक्षक डॉ मणि शेखर, चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट जयविजय पांडेय, एचईओ संजय सिंह सहित सीएचसी स्टॉफ प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
सीएमओ डॉ झा ने पिपराइच सीएचसी की ओटी और स्टर्लाइजेशन की व्यवस्था को देखा। उन्होंने निर्देश दिया कि ओटी को संक्रमण मुक्त रखने के सभी उपाय किए जाएं। साथ ही मरीजों को उच्च गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाए।
गोरखपुर और बस्ती मंडल में हर्ट अटैक के मरीजों के जीवन के बचाने की राह अब आसान हो जाएगी। इसके लिए स्टेमी नेटवर्क काम करेगा, जिसके तहत नजदीकी अस्पतालों पर प्राथमिक चिकित्सा देकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब में मरीज को एम्बुलेंस की सहायता से समय से पहुंचाया जाएगा। इन मरीजों का प्राथमिकता के साथ इलाज होगा। इसके लिए ह्रदय सेतु कार्यक्रम के तहत दोनों मंडलों के चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को शनिवार को प्रशिक्षित किया गया। ये प्रशिक्षित ट्रेनर्स अपने एफआरयू के सभी स्टॉफ को प्रशिक्षित करेंगे और संबंधित अस्पताल हर्ट अटैक के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।
महानिदेशक प्रशिक्षक डॉ रंजना खरे, एडी हेल्थ डॉ जयंत कुमार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ राम कुमार जायसवाल, सीएमओ डॉ राजेश झा, जेडी ट्रेनिंग डॉ कमलेश यादव और कॉलेज के ह्रदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ अजहर की मौजूदगी में प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। दोनों मंडलों के एफआरयू के चिकित्सा अधिकारी, स्टॉफ नर्स और फार्मासिस्ट प्रशिक्षित किये गये हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य हर्ट अटैक के मामलों की शीघ्र पहचान, प्रबंधन और उचित उपचार देना है।
प्रशिक्षण के जरिये बताया गया कि हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर में ही प्राथमिक हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। मरीज को यथाशीघ्र अस्पताल पहुंचाना है। वहां पर इसीजी करने के बाद स्टेमी नेटवर्क वाट्स एप ग्रुप में मरीज की रिपोर्ट डाल दी जाएगी। हब से मिले निर्देशों के अनुसार थम्ब्रोलिसिस की प्रक्रिया पूरी कर मरीज सरकारी एम्बुलेंस की सहायता से हब पर भेजे जाएंगे। मरीज की पूरी डिटेल वाट्स एप ग्रुप के जरिये हब पर पहले से पहुंच जाएगी। इस तरह प्राथमिकता के साथ इलाज मिलने से मरीज की जान बचाना आसान होगा।
कार्यक्रम के आयोजन में डिप्टी सीएमओ डॉ अश्वनी चौरसिया और डॉ एसके मिश्रा ने विशेष सहयोग दिया। इस दौरान सीपीआर के बारे में भी सभी को प्रशिक्षित किया गया और बताया गया कि लोगों को हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर के बारे में विशेष तौर पर जागरूक करना है।
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गोरखपुर जिले में चल रहे सघन पल्स पोलियो अभियान घर-घर भ्रमण कार्यक्रम की प्रगति का जायजा लेने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. राजेश झा ने बुधवार को क्षेत्र भ्रमण किया। इस दौरान उन्होंने विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की टीम के साथ बेलघाट क्षेत्र की ढेकू नाथ एवं चउतरा ग्राम सभाओं में अभियान का निरीक्षण किया। सीएमओ ने घर-घर जाकर बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने वाली टीमों के कार्यों का अवलोकन किया तथा अभियान को सफल बनाने के लिए आवश्यक निर्देश दिए।
सीएमओ डॉ ने बताया कि पल्स पोलियो अभियान बच्चों को आजीवन दिव्यांगता से बचाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही की गुंजाइश नहीं है। उन्होंने टीमों को निर्देशित किया कि क्षेत्र का शत-प्रतिशत भ्रमण सुनिश्चित करें तथा कोई भी पात्र बच्चा पोलियो की खुराक से वंचित न रहे।
डॉ. झा ने बताया कि सघन पल्स पोलियो कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनपद, प्रदेश एवं देश के पांच वर्ष तक के सभी बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाकर उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाए रखना है। भारत, वर्ष 2011 से पोलियो मुक्त है और इस उपलब्धि को बनाए रखने के लिए प्रत्येक बच्चे तक पोलियो की खुराक पहुंचाना अत्यंत आवश्यक है।
सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर जनपद में अभियान के सफल संचालन के लिए कुल 1848 टीमें तैनात की गई हैं, जिनमें घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें, ट्रांजिट टीमें तथा मोबाइल टीमें शामिल हैं। जनपद में पांच वर्ष तक के 6,38,065 बच्चों को पोलियो की खुराक पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इसके सापेक्ष 1 जुलाई तक 4,52,474 बच्चों को पोलियो की दो बूंद पिलाई जा चुकी है।
डॉ झा ने बताया कि घर-घर भ्रमण करने वाली टीमें 3 जुलाई तक अभियान संचालित करेंगी तथा इस दौरान छूटे हुए बच्चों को चिन्हित कर उन्हें पोलियो की खुराक दी जाएगी। इसके अतिरिक्त शेष छूटे बच्चों को कवर करने के लिए 6 जुलाई को बी-टीम गतिविधि संचालित की जाएगी, जिससे कोई भी बच्चा पोलियो की दवा से वंचित न रह सके।
निरीक्षण के दौरान विश्व स्वास्थ्य संगठन के सर्विलांस मेडिकल ऑफिसर डॉ. विनय शंकर एवं उनकी टीम भी उपस्थित रही।
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1 day ago | [YT] | 1
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गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने सोमवार को स्वास्थ्य क्षेत्र की दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं का उद्घाटन कर उन्हें जनता को समर्पित किया। सांसद निधि से गोरखपुर रेलवे अस्पताल में निर्मित 13 बेड के अत्याधुनिक आईसीयू वार्ड तथा एम्स गोरखपुर में बनाए गए 15 बेड के आधुनिक निजी वार्ड का शुभारंभ किया गया।
रेलवे अस्पताल में स्थापित नए आईसीयू वार्ड से गंभीर मरीजों को स्थानीय स्तर पर उन्नत जीवनरक्षक उपचार उपलब्ध हो सकेगा, जिससे अन्य शहरों में रेफर होने की आवश्यकता कम होगी। वहीं एम्स गोरखपुर के निजी वार्ड में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों और बेहतर सुविधाओं से युक्त मरीज कक्ष उपलब्ध कराए गए हैं।
एम्स प्रशासन के अनुसार निजी वार्ड का संचालन चरणबद्ध ढंग से शुरू किया जाएगा और बाद में इसकी पूरी 15 बेड क्षमता का उपयोग किया जाएगा। वार्ड का शुल्क एम्स नई दिल्ली की स्वीकृत दरों के अनुरूप रखा गया है।
इस अवसर पर सांसद रवि किशन ने कहा कि पूर्वांचल के लोगों को विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है। उन्होंने विश्वास जताया कि रेलवे अस्पताल का नया आईसीयू और एम्स का निजी वार्ड क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत बनाएगा।
#SystemStrengthening #HealthSystemStrengthening#ServiceDeliveryStrengthening
4 days ago | [YT] | 0
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गोरखपुर जिले में कैंसर की रोकथाम, समय से पहचान और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने के उद्देश्य से गोरखपुर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा एवं एम्स गोरखपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ शिखा सेठ ने जिले के पांच ब्लॉकों के सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) का अभिमुखीकरण किया। वर्चुअल माध्यम से आयोजित इस कार्यक्रम में सहजनवां, कैम्पियरगंज, बांसगांव, पिपराइच और सरदारनगर ब्लॉकों के सीएचओ को कैंसर के प्रारंभिक लक्षणों की पहचान तथा मरीजों को समय पर उपचार व्यवस्था से जोड़ने के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई।
अभिमुखीकरण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ शिखा सेठ ने महिलाओं में होने वाले सर्वाइकल कैंसर और स्तन कैंसर के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इन दोनों प्रकार के कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान हो जाने पर उपचार अधिक प्रभावी होता है और मरीज को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है। उन्होंने सीएचओ को सर्वाइकल कैंसर एवं स्तन कैंसर के शुरुआती लक्षणों, जोखिम कारकों तथा समुदाय स्तर पर जागरूकता बढ़ाने के उपायों के बारे में भी जानकारी दी।
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने सीएचओ को ओरल कैंसर की पहचान और उसके प्रमुख लक्षणों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि सर्वाइकल कैंसर, स्तन कैंसर और ओरल कैंसर के मामलों में आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्तर पर प्रारंभिक स्क्रीनिंग और पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है। ऐसे मरीजों को समय रहते चिकित्सकों के पास संदर्भित किया जाना चाहिए, ताकि उनका शीघ्र उपचार शुरू हो सके।
डॉ झा ने कहा कि कैंसर की समय पर पहचान, समय से संदर्भन और सही समय पर उपचार उपलब्ध कराने से कैंसर से होने वाली मृत्यु के मामलों में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है। उन्होंने सभी सीएचओ से अपेक्षा की कि वे अपने कार्यक्षेत्र में लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करें तथा संदिग्ध लक्षण मिलने पर मरीजों को तत्काल स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ें।
कार्यक्रम में डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश कुमार, डीसीपीएम रिपुंजय पांडेय, सहयोगी संस्था जपाइगो तथा यूपीटीएसयू के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे। सभी प्रतिभागियों ने कैंसर नियंत्रण एवं रोकथाम के लिए सामुदायिक स्तर पर प्रभावी कार्ययोजना के महत्व पर बल दिया।
#CancerPrevention #EarlyDetectionSavesLives #ScreeningAwareness #RegularHealthChecku #BreastCancerAwareness #CervicalCancerPreventio #OralCancerAwareness
4 days ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने मंगलवार को पिपराइच स्थित सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस का निरीक्षण किया। उन्होंने वेयर हाउस में दवाओं के गुणवत्तापूर्ण रखरखाव और ट्रांसपोर्टेशन को लेकर सभी आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया ।
सीएमओ ने स्वास्थ्य विभाग के अभियंता को निर्देश दिया कि वेयर हाउस में बिजली पानी की मुकम्मल व्यवस्था रखी जाए। उन्होंने वेयरहाउस को जोड़ने वाली सड़क बनाने के लिए आवश्यक कार्रवाई करने की भी पहल की। सीएमओ ने बताया कि गोरखपुर के सेंट्रल ड्रग वेयर हाउस में 319 प्रकार की दवाएं उपलब्ध हैं। वेयर हाउस से जिला स्तरीय अस्पताल माह में दो बार, सीएचसी-पीएचसी माह में एक बार और उपकेंद्र स्तरीय अस्पताल तीन माह में एक बार दवा ले जाते हैं। निरीक्षण के दौरान सीएमओ को बताया गया कि फरवरी माह में वेयर हाउस से बावन बार दवा मंगायी गयी है।
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3 months ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण डेटा बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाओं की नीव हैं। इनके जरिये गैप एनालिसिस कर उच्च स्तरीय सेवाएं दे पाना संभव होता है। यह बातें उन्होंने जिले के स्वास्थ्य महकमे के डेटा वेलीडेशन कमेटी की मासिक बैठक के दौरान कहीं। बैठक का आयोजन सीएमओ कार्यालय के प्रेरणा श्री सभागार में शनिवार को हुआ। मासिक बैठक की अध्यक्षता करते हुए सीएमओ डॉ झा ने ई-कवच पर रिपोर्टिंग और आभा आईडी पर विशेष जोर दिया।
सीएमओ ने कहा कि डेटा सम्बन्धी कार्यों में सुधार के कारण यूपी हेल्थ डैशबोर्ड रैंकिंग में जिले की स्थिति बेहतर बनी हुई है। गोरखपुर जिला टॉप फाइव में बना हुआ है। इसे स्थिर रखने के लिए डेटा की सटीकता पर जोर देना होगा। जहां कहीं भी डेटा सम्बन्धी गैप दिखे उसे दूर करना होगा। प्रत्येक ब्लॉक पर इसकी सघन निगरानी की जानी चाहिए और इस सम्बन्ध में बैठकें भी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आभा आईडी का सृजन और उसकी रिपोर्टिंग शासन की प्राथमिकता में है। यह प्रत्येक ब्लॉक की भी प्राथमिकता होनी चाहिए।
डॉ झा ने कहा कि स्वास्थ्य कार्यक्रमों के संचालन में ई-कवच पर रिपोर्टिंग की अहम भूमिका रही है। सही रिपोर्टिंग के जरिये हम छूटे हुए क्षेत्रों और वंचित लाभार्थी समूहो पर फोकस कर पाते हैं। यह रिपोर्टिंग सही से हो इसके लिए आशा स्तर से लेकर जिला स्तर तक सतर्कता बरतनी होगी। डेटा एक टीम भावना का काम है और इसके लिए सभी को समन्वय बना कर काम करना होगा।
इस अवसर पर एसीएमओ आरसीएच डॉ एके चौधरी, डिप्टी सीएमओ डॉ राजेश, डॉ अश्विनी चौरसिया, डीपीएम पंकज आनंद, डीडीएम पवन कुमार और एचएमआईएस सहयोगी मनीष त्रिपाठी सहित सभी ब्लॉकों के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी भी मौजूद रहे।
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3 months ago | [YT] | 5
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गोरखपुर जिले के सीएमओ डॉ राजेश झा ने स्वास्थ्य महकमे के जिला स्तरीय और ब्लॉक स्तरीय अधिकारियों को निर्देश दिये हैं कि बदलते मौसम के साथ हीट रिलेटेड बीमारियों से बचाव और उपचार के इंतजाम कर लिए जाएं। उन्होंने कहा है कि इन बीमारियों के बारे में समुदाय में व्यापक प्रचार प्रसार करवाने की आवश्यकता है। साथ ही शासन से प्राप्त दिशा-निर्देशों के अनुसार हीट रिलेटेड बीमारियों की सर्विलांस और आवश्यकतानुसार कार्रवाई भी की जानी है।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि मौसम विभाग की ओर से तापमान बढ़ने के संकेत मिले हैं। बदलते मौसम के साथ ही हीट रिलेटेड बीमारियों के मामले सामने आने लगते हैं। इसे देखते हुए सभी अधिकारियों से अग्रिम तैयारी करने को कहा गया है। निर्देश दिया गया है कि जनसामान्य में हीट रिलेडेट दिक्कतों पर अपनाएं जाने वाले सामान्य प्रोटोकॉल का व्यापक प्रचार प्रसार किया जाए। लोगों को बताया जाए कि अधिक दिक्कत होने पर मरीज को 108 नंबर एम्बुलेंस की सहायता से ही नजदीकी सरकारी अस्पताल ले जाना है। प्रशिक्षित चिकित्सक के पास ही उपचार के लिए जाना है। किसी भी अप्रशिक्षित व्यक्ति या झोलाछाप के चक्कर में न पड़ें।
सीएमओ ने बताया कि जिले के सभी इमर्जेंसी वार्ड में हीट स्ट्रोक व अन्य मौसमी बीमारियों के उपचार की सभी आवश्यक दवाएं रखने का निर्देश दिया गया है। विभागीय उच्चाधिकारी समय-समय पर इमर्जेंसी वार्ड का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करेंगे कि सभी आवश्यक दवाएं और उपकरण क्रियाशील रहें। साथ ही अग्रिम पंक्ति कार्यकर्ता लोगों को समझाएंगे कि बदलते मौसम में किस प्रकार का खानपान और दिनचर्या अपनाना है ताकि इस बीमारियों से बचाव हो सके। लोगों को घर से बाहर निकलने के समय में बदलाव करना होगा, खानपान संतुलित रखना होगा, अधिकाधिक पानी और तरल पदार्थों का सेवन करना होगा और ताजे फलों आदि के सेवन पर विशेष जोर देना होगा। इसके साथ ही सभी आवश्यक परामर्श और प्रोटोकॉल की जानकारी जन-जन तक पहुंचाना स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता में शामिल है।
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3 months ago | [YT] | 1
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गोरखपुर जिले में 15 अतिरिक्त नये ब्लॉक पब्लिक हेल्थ यूनिट (बीपीएचयू) खोले बनाए जाएंगे। इन बीपीएचयू से समुदाय को गुणवत्तापूर्ण सेवा मिलेगी। सीएमओ डॉ राजेश झा ने बृहस्पतिवार को सहजनवां सीएचसी का दौरा कर वहां बीपीएचयू के लिए संभावित स्थान का मुआयना किया। उन्होंने पहले से क्रियाशील पाली बीपीएचयू का निरीक्षण भी किया। इस दौरान वहां के चेयरमैन प्रभाकर दूबे ने भी मौके पर पहुंच कर सीएमओ के साथ स्थानीय मुद्दों पर चर्चा की। जिले में पहले से चार बीपीएचयू स्थापित और क्रियाशील हैं।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि जिले में प्रत्येक बीपीएचयू 2500 वर्गमीटर का बनेगा। यह तीन भागों में होगा-बीपीएमयू, एचएमआईएस और पैथालॉजी पार्ट। बीपीएमयू में एनएचएम के ब्लॉक स्तरीय अधिकारी एक साथ बैठेंगे, वहीं एचएमआईएस विंग के जरिये बीमारियों की निगरानी व रिपोर्टिंग होगी। बीपीएचयू के पैथालॉजिकल पार्ट में 73 से अधिक जांचों, सैम्पल ट्रांसपोर्ट और ब्लॉक क्षेत्र में हो रही जांचों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने का काम होगा। डॉ झा ने बताया कि पाली, शिवपुर, उसवा बाबू और चौरीचौरा सीएचसी पर बीपीएचयू क्रियाशील है। शेष ब्लॉक स्तरीय पंद्रह इकाइयों में इसकी स्थापना के लिए स्थान चिन्हित किया जा रहा है। बीपीएचयू के जरिये गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा देने की राह और भी आसान होगी।
सीएमओ ने पाली सीएचसी पर उपस्थिति पंजिका भी चेक की। इस दौरान उन्होंने एक अनुपस्थित चिकित्सा अधिकारी सहित कुछ अन्य अनुपस्थित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। सीएचसी पर पाली के चेयरमैन से चर्चा के दौरान सीएमओ ने बीपीएचयू जाने का रास्ता ठीक करवाने का अनुरोध किया।
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3 months ago | [YT] | 2
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गोरखपुर महानगर के पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर भी सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन होगा। इसे शुरू करने की तैयारियों को देखने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ राजेश झा ने रविवार को केन्द्र का दौरा किया। उन्होंने प्रत्येक कक्ष और तैयारियों को देखा तथा आईईसी आदि की विस्तृत समीक्षा की। इस पॉलीक्लिनिक पर निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा प्रतिदिन सेवाएं दी जाएंगी।
सीएमओ ने बताया कि सिटी पॉलीक्लिनिक के संचालन के उद्देश्य से ही पुर्दिलपुर नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को बड़े भवन में शिफ्ट कर दिया है। वहां पर एक सप्ताह के भीतर पॉलीक्लिनिक की तैयारियां पूरी करने का प्रयास है। यह नया क्लिनिक शुरू होने के बाद हमारे पास विशेषज्ञ सेवाओं वाले दो अस्पताल नगरीय क्षेत्र में क्रियाशील हो जाएंगे।
सीएमओ डॉ झा ने बताया कि गोरखपुर शहर में तीन सिटी पॉलीक्लिनिक का संचालन निजी क्षेत्र के विशेषज्ञ चिकित्सकों की मदद से किया जाना है। इनमें से पहली पॉलीक्लिनिक बसंतपुर में संचालित हो रही है। होली के बाद पुर्दिलपुर में भी क्लिनिक शुरू करने की तैयारी है। इसके संचालन के लिए विशेषज्ञ चिकित्सकों का इम्पैनलमेंट भी हो रहा है। इस केन्द्र पर स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिसिन विशेषज्ञ, ईएनटी और नेत्र रोग विशेषज्ञ आदि सेवाएं देंगे।
सिटी पॉलीक्लिनिक पर जो विशेषज्ञ चिकित्सक सेवाएं देंगे उन्हें पांच हजार रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान किया जाएगा। इन चिकित्सकों को टेलीकंसल्टेशन के जरिए भी परामर्श देना होगा। किसी भी चिकित्सक की इंगेजमेंट उसकी आवश्यकतानुसार किया जाएगा। ये विशेषज्ञ सुबह नौ बजे से शाम चार बजे तक सेवाएं देंगे। इनकी सेवाओं से लोगों को विशेष लाभ होगा और वह जिला अस्पताल तथा बीआरडी मेडिकल कॉलेज की भीड़भाड़ में इलाज करवाने से बच सकेंगे। इन क्लिनिक के लिए भी डिजिटल पर्चे की व्यवस्था होगी और यहां से रेफरल भी ऑनलाइन पर्चों के जरिए किए जाएंगे। पुर्दिलपुर में भी ब्लड सैम्पल ट्रांसपोर्ट की सुविधा को सुदृढ़ किया जाएगा।
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4 months ago | [YT] | 2
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गोरखपुर जिले के पिपराइच सीएचसी स्थित फर्स्ट रेफरल यूनिट (एफआरयू) पर स्टेमी केयर नेटवर्क सोमवार से सक्रिय हो गया। वहां सीने में दर्द की शिकायत के साथ पहुंचीं 90 वर्षीय बुजुर्ग का तय प्रोटोकॉल के साथ उपचार किया गया। डायग्नोसिस के दौरान मामला स्टेमी का न निकलने के बाद उन्हें इलाज कर वापस घर भेज दिया गया। इससे पहले सीएमओ डॉ राजेश झा ने पिपराइच एफआरयू का दौरा कर स्टेमी कार्नर का निरीक्षण किया और सभी को निर्धारित प्रोटोकॉल के बारे में पुनः ब्रीफ किया।
सीएमओ डॉ राजेश झा ने निर्देश दिया कि स्टेमी कार्नर पर सभी जीवनरक्षक दवाएं, इंजेक्शन, इसीजी और स्टॉफ उपलब्ध होने चाहिए। अगर कोई भी मरीज सीने में दर्द या घबराहट अथवा हर्ट अटैक के अन्य लक्षणों के साथ आता है तो दस मिनट के भीतर उसकी इसीजी कर लें। इसीजी रिपोर्ट को स्टेमी केयर नेटवर्क के वाट्स एप ग्रुप में डाल दें। इसके बाद बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब के विशेषज्ञों के दिशा-निर्देशन में आवश्यक उपचार करें। वहां के ह्रदय रोग विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार स्टेमी का मामला होने पर उनके निर्देश पर ही इंजेक्शन लगा कर मरीज को एम्बुलेंस से हब पर रेफर कर दें। हब को ग्रुप के जरिये ही मरीज की सभी जानकारियां पहले से भेज दें। अगर हब के विशेषज्ञों के अनुसार मामला स्टेमी का न हो तब भी आवश्यक उपचार देना सुनिश्चित करें।
डॉ झा ने बताया कि एक घंटे के भीतर मरीज को दो बार इजीसी होनी है और सभी प्रकार का उपचार हब पर बैठे ह्रदय रोग विशेषज्ञ की निगरानी में ही होगा। उन्होंने बताया कि जिले की सभी एफआरयू पर यह सुविधा उपलब्ध होने जा रही है। इससे हर्ट अटैक के मरीजों का घर के पास ही त्वरित प्राथमिक उपचार हो सकेगा और उनकी जान बचाई जा सकेगी। त्वरित प्राथमिक उपचार की कार्रवाई से ज्यादातर मामलों में एंजियोप्लास्टी की आवश्यकता भी नहीं रहेगी।
सीएमओ ने बताया कि उनके निरीक्षण के थोड़ी देर बाद ही पिपराइच की मोहम्मदाबाद गांव की 90 वर्षीय बुजुर्ग पार्वती को स्टेमी कार्नर पर एडमिट किया गया। उनका निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार हब की निगरानी में डायग्नोसिस एवं उपचार किया गया। इस अवसर पर अधीक्षक डॉ मणि शेखर, चिकित्सा अधिकारी डॉ प्रशांत श्रीवास्तव, फार्मासिस्ट जयविजय पांडेय, एचईओ संजय सिंह सहित सीएचसी स्टॉफ प्रमुख तौर पर मौजूद रहे।
सीएमओ डॉ झा ने पिपराइच सीएचसी की ओटी और स्टर्लाइजेशन की व्यवस्था को देखा। उन्होंने निर्देश दिया कि ओटी को संक्रमण मुक्त रखने के सभी उपाय किए जाएं। साथ ही मरीजों को उच्च गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवा प्रदान किया जाए।
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4 months ago | [YT] | 1
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गोरखपुर और बस्ती मंडल में हर्ट अटैक के मरीजों के जीवन के बचाने की राह अब आसान हो जाएगी। इसके लिए स्टेमी नेटवर्क काम करेगा, जिसके तहत नजदीकी अस्पतालों पर प्राथमिक चिकित्सा देकर बीआरडी मेडिकल कॉलेज में बने हब में मरीज को एम्बुलेंस की सहायता से समय से पहुंचाया जाएगा। इन मरीजों का प्राथमिकता के साथ इलाज होगा। इसके लिए ह्रदय सेतु कार्यक्रम के तहत दोनों मंडलों के चिकित्सा अधिकारियों और स्वास्थ्यकर्मियों को शनिवार को प्रशिक्षित किया गया। ये प्रशिक्षित ट्रेनर्स अपने एफआरयू के सभी स्टॉफ को प्रशिक्षित करेंगे और संबंधित अस्पताल हर्ट अटैक के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा।
महानिदेशक प्रशिक्षक डॉ रंजना खरे, एडी हेल्थ डॉ जयंत कुमार, बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ राम कुमार जायसवाल, सीएमओ डॉ राजेश झा, जेडी ट्रेनिंग डॉ कमलेश यादव और कॉलेज के ह्रदय रोग विभाग के अध्यक्ष डॉ अजहर की मौजूदगी में प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन हुआ। दोनों मंडलों के एफआरयू के चिकित्सा अधिकारी, स्टॉफ नर्स और फार्मासिस्ट प्रशिक्षित किये गये हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्देश्य हर्ट अटैक के मामलों की शीघ्र पहचान, प्रबंधन और उचित उपचार देना है।
प्रशिक्षण के जरिये बताया गया कि हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर में ही प्राथमिक हस्तक्षेप किया जाना चाहिए। मरीज को यथाशीघ्र अस्पताल पहुंचाना है। वहां पर इसीजी करने के बाद स्टेमी नेटवर्क वाट्स एप ग्रुप में मरीज की रिपोर्ट डाल दी जाएगी। हब से मिले निर्देशों के अनुसार थम्ब्रोलिसिस की प्रक्रिया पूरी कर मरीज सरकारी एम्बुलेंस की सहायता से हब पर भेजे जाएंगे। मरीज की पूरी डिटेल वाट्स एप ग्रुप के जरिये हब पर पहले से पहुंच जाएगी। इस तरह प्राथमिकता के साथ इलाज मिलने से मरीज की जान बचाना आसान होगा।
कार्यक्रम के आयोजन में डिप्टी सीएमओ डॉ अश्वनी चौरसिया और डॉ एसके मिश्रा ने विशेष सहयोग दिया। इस दौरान सीपीआर के बारे में भी सभी को प्रशिक्षित किया गया और बताया गया कि लोगों को हर्ट अटैक के मामलों में गोल्डेन ऑवर के बारे में विशेष तौर पर जागरूक करना है।
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4 months ago | [YT] | 4
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